धातु रोग शुक्रमेह धातु गिरना का आयुर्वेदिक उपचार

जानिये शुक्रमेह Spermatorrhoea धातु गिरना क्या होता है और इसके लक्षण क्या क्या होते हैं। जानिये धातु रोज की आयुर्वेदिक हर्बल दवाइयां कौन कौन सी हैं और धात गिरने के घरेलु उपचार कैसे करते हैं।

शुक्रमेह को इंग्लिश में स्पर्मेटोरिया कहते हैं। इसे धात गिरना, धात की समस्या, आदमियों का प्रमेह, गुप्त रोग, या धातु रोग के नाम से भी जानते हैं। आयुर्वेद में बताए गए 20 तरह के प्रमेहों में यह एक है। प्रमेह मूत्र रोगों को कहते हैं। शुक्रमेह शब्द दो शब्दों के मेल से बना है, शुक्र और मेह (पेशाब) तो मूत्र के साथ वीर्य जाना, शुक्रमेह है।

यह केवल पुरुषों पाए जानेवाला डिसऑर्डर है। शुक्रमेह वीर्य सम्बंधित रोग है। इसमें वीर्य पेनिस से बिना इच्छा के स्रावित हो जाता है जैसे सोते समय, पेशाब करते समय या शौच के दौरान। बार-बार इस तरह से धातु गिरने से व्यक्ति में कमजोरी के लक्षण दिखाई देते हैं। यह व्यक्ति में मानसिक तनाव का कारण भी हो जाता है।

यह रोग भोजन के अनियमित सेवाएँ, बहुत हस्तमैथुन करने, तनाव, और पाचन की विकृति के कारण हो सकता है। इसके अन्य कई कारण भी हो सकते हैं जैसे प्रजनन अंगों की दुर्बलता, शारीरिक दुर्बलता आदि।

इसके उपचार हेतु पूरे स्वास्थ्य को सही करना ज़रूरी है।शारीरिक कमजोरी को दूर करने से बहुत लाभ होता है।

Spermatorrhoea is a male disorder characterized by involuntary loss of semen takes place such as during sleep, urination or motion.  It is often associated with irritability and debility of the reproductive organs. There is excessive and spontaneous ejaculation.

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धात गिरना के लक्षण | Spermatorrhoea Symptoms in Hindi

यह एक वीर्य दोष है और इसके कारण कुछ शारीरिक और कुछ मानसिक लक्षण दिखाई देते हैं।

  1. कमजोरी
  2. बेचैनी
  3. भूख न लगना
  4. यौन कमजोरी
  5. भूलने की बिमारी
  6. एंग्जायटी
  7. तनाव
  8. प्रेषण रहना
  9. कुछ काम करने का मन न करना
  10. स्वप्न दोष, रात में सोये हुए वीर्य निकल जाना आदि।

शुक्रमेह में लाभप्रद जड़ी-बूटियाँ

शुक्रमेह के लिए आयुर्वेद में शक्तिवर्धक, ओजवर्धक और वीर्य वर्धक जड़ी बूटियों का प्रयोग किया जाता है। यह जड़ीबूटियाँ प्रजनन अंगों को ताकत देती है और यौन ताकत को बढ़ाती हैं।

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  1. अश्वगंधा
  2. बला, अतिबला
  3. चन्दन
  4. गोखरू
  5. कदम्ब
  6. केवांच
  7. मखाना
  8. जायफल और जावित्री
  9. मूसली
  10. सालम पंजा
  11. विदारी कन्द
  12. विधारा आदि।

धात गिरना के लिए आयुर्वेदिक दवाएं

धात गिरना एक वीर्य रोग है इसलिए इसमें प्रजनन अंगों को बल देने वाली, पुष्टिवर्धक, वीर्यवर्धक, वाजीकारक, शुक्रल और रसायन दवाएं दी जाती है। यह दवाएं कामोद्दीपक, वजन बढ़ाने वाली और शरीर की प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए increases weight and improves immunity  में भी सहयोग देती हैं। यह दवाएं शरीर में धातुओं की वृद्धि करती है, तंत्रिका तंत्र सबंधी कमजोरी को दूर करती है, वीर्य गाढ़ा करती हैं और नींद न आना, तनाव, सिरदर्द, मानसिक परेशानियों, आदि में लाभप्रद है।

धातु रोग का प्रभावी हर्बल उपचार:

  1. अश्वगंधा चूर्ण
  2. कौंच चूर्ण
  3. अश्वगंधा पाक
  4. सुपारी पाक
  5. चन्द्रप्रभा वटी
  6. धातुपौष्टिक चूर्ण
  7. कामदेव चूर्ण
  8. मन्मथ रस
  9. स्वर्ण भस्म
  10. त्रिवंग भस्म
  11. वंग भस्म
  12. वसंत कुसमाकर रस
  13. वानरी कल्प
  14. शिलाप्रवांग धूतपापेश्वर 
  15. हिमालया कोंफिडो
  16. सांडू विमफिक्स आदि।

इसमें से वे दवाएं जिनमें  केवल जड़ी-बूटियाँ है वे आप खुद भी ले सकते हैं लेकिन जिनमें भस्म हैं वे दवाएं कम समय के लिए ही ली जाती हैं इसलिए डॉक्टर से कंसल्ट करके लें।

धातु गिरने का घरेलू उपचार | Home remedies for Spermatorrhoea in Hindi

  1. 10 ग्राम, कबाब चिकनी + इलायची के बीज + वंशलोचन और पिप्पली का पाउडर मिलाकर तैयार करें। इसमें 40 ग्राम मिश्री पीस कर डालें। इसका आधा चम्मच दो बार दूध के साथ लें।
  2. अश्वगंधा + विदारी कन्द + सालम मिश्री + बडा गोखरू + सफ़ेद मुस्ली और अकरकरा / पेलेटरी, का पाउडर बराबर मात्रा में मिलाकरपाउडर तैयार करें। दूध के साथ एक चम्मच दो बार दैनिक लें।
  3. बरगद के पेड़ की लटकती जड़ें और मुलायम शूट्स को सुखा कर पीस ले। नियमित अंतरालों पर इस पाउडर का एक चुटकी लें।
  4. सफ़ेद मूसली + सालम मिश्री + काली मूसली + गोखरू + शतावर +अश्वगंधा + ताल मखाना + केवांच के बीज + छोटी हरड़ + सोंठ + मिश्री समभाग (सभी का पाउडर) मिलाकर पाउडर बना लें। इसे आधा टीस्पून की मात्रा में दिन में दो बार लें।
  5. केला, नाशपाती खाएं।

धातु रोग की चिकित्सा के लिए आवश्यक है विचारों को पवित्र रखना और इतना परिश्रम करना की गहरी नींद आ सके। जिन कारणों से यह हो रहा है उनको जान कर उन्हें दूर करने की चेष्टा करनी चाहिए। दैनिक कोई न कोई व्यायाम करना चाहिए। प्राणायाम करना चाहिए। रात का भोजन हल्का करना चाहिए। रात को सोने से पहले दूध-मलाई या गरिष्ठ भोजन का सेवन भी स्वप्नदोष को बढ़ा सकता है।

यदि कब्ज़ रहती हो तो पहले उसका उपचार अवश्य करना चाहिए। इसके लिए इसबगोल की भूसी को रात में सोने से पहले पर्याप्त मात्रा में पानी के साथ लेना चाहिए। अथवा नियमित रूप से त्रिफला चूर्ण का सेवन गर्म जल के साथ करना चाहिए।

आयुर्वेद में बहुत से लोग इसे प्रमेह का तो कुछ लोग निद्रा का दोष मानते हैं। जो लोग इसे प्रमेह का रोग मान भांग अथवा अफीम युक्त दवाओं के सेवन से इसे दूर करना चाहते हैं उन्हें यह भली भांति जानना चाहिए की इस प्रकार की दवाएं कुछ दिन तक तो शायद अच्छे परिणाम से दें लेकिन बाद में यह रोग को और अधिक जटिल बना देती है और साथ ही अफीम युक्त दवाएं मनुष्य के पूरे स्वास्थ्य को ही नष्ट कर देती हैं।

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2 thoughts on “धातु रोग शुक्रमेह धातु गिरना का आयुर्वेदिक उपचार

  1. Mujhe bahut time se dhaatu tog ki shikaayat hai jiski wajah se saaririk kamjori or durbalta ho gayi hai Mujhe bahut jald thakaan ho jaati hai please Mujhe koi medicine bataye jisse yeh jald se jald thik ho jaaye

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