शिलाप्रवंग Shilapravang Detail and Uses in Hindi

शिलाप्रवंग मौक्तिक युक्त तथा शिलाप्रवंग स्पेशल, श्री धूतपापेश्वर लिमिटेड द्वारा निर्मित आयुर्वेदिक दवाइयाँ हैं। दोनों ही दवाओं के मुख्य घटकों में शामिल हैं, शुद्ध शिलाजीत, प्रवाल पिष्टी और वंग भस्म और इसलिए इस दवा को नाम दिया गया है, शिलाप्रवंग। इसके अतिरिक्त इसमें मोती पिष्टी, स्वर्णमाक्षिक भस्म, भीमसेनी कपूर, वंशलोचन, इला, गिलोय, और गोखरू भी है।

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शिलाजीत, हिमालय की चट्टानों से निकलने वाला पदार्थ है। आयुर्वेद में औषधीय प्रयोजन के लिए शिलाजीत को शुद्ध करके प्रयोग किया जाता है। यह एक adaptogen है और एक प्रमुख आयुर्वेदिक कायाकल्प टॉनिक है। यह पाचन और आत्मसात में सुधार करता है। आयुर्वेद में, इसे हर रोग के इलाज में सक्षम माना जाता है। इसमें अत्यधिक सघन खनिज और अमीनो एसिड है।

shilapravang for male health

शिलाजीत प्रजनन अंगों पर काम करता है। यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है और प्रतिरक्षा में सुधार करता है। यह पुरानी बीमारियों, शरीर में दर्द और मधुमेह में राहत देता है। इसके सेवन शारीरिक, मानसिक और यौन शक्ति देता है।

प्रवाल पिष्टी, कोरल या मूंगे की पिष्टी है। पिष्टी का शाब्दिक अर्थ पीस कर बनाया चूर्ण। पिष्टी के निर्माण के लिए जिस पदार्थ की पिष्टी बनानी होती है उसे सर्वप्रथम शोधित या साफ़ किया जाता है। फिर इसे गुलाब जल की भावना देकर सूर्य अथवा चाँद की रौशनी में सुखाया जाता है। भावना दे कर सुखाने का क्रम सात दिन या उससे ज्यादा दिन तक किया जाता है जब तक की उसे पीसने से एकदम बारीक चूर्ण या पाउडर न बन जाए। क्योंकि इसके निर्माण में अग्नि का प्रयोग बिलकुल ही नहीं किया जाता इस कारण से पिष्टी को अनअग्नितप्त भस्म भी कहा जाता है।

प्रवाल पिष्टी का प्रयोग शुक्रस्थान की कमजोरी को दूर करता है। इसे कैल्शियम की कमी, शरीर में अधिक गर्मी, रक्त बहने के विकारों, बिना बलगम की खांसी, सामान्य दुर्बलता, अल्सर, अल्सरेटिव कोलाइटिस, हेपेटाइटिस, पीलिया, मूत्र में जलन, कमजोरी आदि में आंतरिक रूप से दिया जाता है।

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वंग या बंग भस्म, स्टेनम या टिन की भस्म है। इसे आयुर्वेद में हल्का, दस्तावर, रूखा, गर्म, पित्तकारक माना गया है। इसे मुख्य रूप से प्रमेह, कफ, कृमि, पांडू, श्वास रोगों में प्रयोग कियाजाता है। शुद्ध वांग को सम्पूर्ण प्राकर के प्रमेहों को नष्ट करने वाला कहा गया है। बंग भस्म का सेवन शरीर को बल देता है, इन्द्रियों को शक्ति देता है और पुरुषों के सभी अंगों को ताकत से भरता है तथा पुरुष होर्मोन का भी अधिक स्राव कराता है। यह मुख्य रूप से प्रजनन अंगों के लिए ही उपयोगी है। बंग भस्म वाजीकारक भी है।

शिलाप्रवंग प्रमेह रोगों की दवा है। इसे मधुमेह, बहुमूत्रता, पेशाब की जलन, मूत्राघात, स्वप्नदोष, तथा इरेक्टाइल डिसफंक्शन, में दिया जाता है। इसके सेवन से शरीर में वात और कफ संतुलित होते हैं। शिलाप्रवंग स्पेशल, में औषधीय द्रव्यों की संख्या और मात्रा अधिक है इसलिए यह गुणों और पोटेंसी में शिलाप्रवंग मौक्तिक युक्त से अधिक है। शिलाप्रवंग स्पेशल, मे मकरध्वज, अश्वगंधा, शतावरी, केवांच, अकरकरा जैसे कई वाजीकारक द्रव्य है जो इसे और गुणकारी बना देते हैं। रोगों के अनुसार दोनों में से कोई एक दवा ली जा सकती है।

यह हमेशा ध्यान रखें की जिन दवाओं में पारद, गंधक (मकरध्वज पारद और गंधक से बना हुआ होता है), खनिज आदि होते हैं, उन दवाओं का सेवन लम्बे समय तक नहीं किया जाता। इसके अतिरिक्त इन्हें डॉक्टर के देख-रेख में बताई गई मात्रा और उपचार की अवधि तक ही लेना चाहिए। इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें।

Shilapravang (Mouktikyukta) is a Rasayan or tonic medicine which gives energy. It mainly works on Shukravaha Srotas and gives relief in burning sensation due to its cooling action. This medicine is useful in Prameha, Madhumeha, Shukrakshaya, Ojakshaya & Dhatushaithilya and benign type of Prostatitis.

Shilapravang Special is special Saptadhatu poshak, strength promoter and aphrodisiac. It supports formation of Sapta dhatu including Shukradhatu (Semen), in quality as well as quantity. It also increases the sustaining capacity. Shilapravang Special boosts Stamina, Vigour & vitality & relieves mental stress, anxiety, fatigue.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: मिनरल्स और हर्ब युक्त आयुर्वेदिक दवा
  • मुख्य उपयोग: प्रमेह रोग
  • मुख्य गुण: शक्तिवर्धक, पोषक, ओजवर्धक
  • मूल्य Price: Dhootpapeshwar Shilapravang Special tablet 30 @ Rs. 570.00

शिलाप्रवंग के घटक Ingredients of Shilapravang

शिलाप्रवंग (मौक्तिक युक्त)

प्रत्येक गोली में:

  1. शिलाजीत Shuddha Shilajit 30 mg
  2. प्रवाल पिष्टी Pravala Pishti 30 mg
  3. वंग भस्म Vanga Bhasma 30 mg
  4. मोती पिष्टी Mouktik Pishti 1 mg
  5. स्वर्णमाक्षिक भस्म Suvarnamakshik Bhasma 20 mg
  6. भीमसेनी कपूर Bhimseni Karpoor 20 mg
  7. वंशलोचन Vanshalochan 20 mg
  8. इलाइची Elaichi 10 mg
  9. गिलोय Guduchi Satva 50 mg
  10. गोखरू Gokshur 50 mg

शिलाप्रवंग स्पेशल

Each tablet contains –

  1. शिलाजीत Shuddha Shilajit 40 mg
  2. प्रवाल पिष्टी Pravala Bhasma 20 mg
  3. वंग भस्म Vanga Bhasma 20 mg
  4. स्वर्णमाक्षिक भस्म Suvarnamakshik Bhasma 20 mg
  5. गिलोय Guduchi Satva 20 mg,
  6. अश्वगंधा Ashwagandha 60 mg
  7. शतावरी Shatavari 15 mg
  8. गोखरू Gokshur 15 mg
  9. बला मूल Balamoola 15 mg
  10. आंवला Amalaki 10 mg
  11. अकरकरा Akarkarabh 10 mg
  12. जायफल Jatiphal 5 mg
  13. कपूर Karpoor 5 mg
  14. लताकस्तूरी Latakasturi beej 20 mg
  15. केवांच Kaunchbeej 90 mg
  16. मकध्वज Makardhwaj 10 mg
  17. स्वर्ण भस्म Suvarna Bhasma 1 mg
  18. मोती पिष्टी Mouktik Pishti 1 mg

शिलाप्रवंग के लाभ/फ़ायदे Benefits of Shilapravang

  1. यह दवा शक्तिवर्धक, ओज वर्धक और वाजीकारक है।
  2. यह पुरुषों के लिए सेक्सुअल टॉनिक है।
  3. शिलाप्रवंग (मौक्तिक युक्त) पेशाब सम्बन्धी रोगों में लाभकारी है। यह शुक्रवाहिनी स्रोतों पर काम करती है और शरीर को ठंडक देती है।
  4. शिलाप्रवंग स्पेशल में मकरध्वज, केवांच, अश्वगंधा आदि के होने से हर्बल वियाग्रा जैसे गुण हैं।
  5. शिलाप्रवंग स्पेशल वीर्यवर्धक है। यह इन्द्रिय की कमजोरी को दूर करने में सहयोगी है और नामर्दी को दूर करती है। यह प्रमेह की समस्या को दूर करती है। यह मानसिक तनाव, थकावट, आदि को दूर कर शरीर को ताकत देती है और सेक्स प्रदर्शन में सुधार लाती है।
  6. यह शीघ्रपतन, स्तंभन दोष, अनैच्छिक शुक्रपात, स्वप्नदोष में लाभप्रद है।

शिलाप्रवंग के चिकित्सीय उपयोग Uses of Shilapravang

शिलाप्रवंग (मौक्तिक युक्त) Shilapravang (Mouktikyukta)

  1. प्रमेह Prameha
  2. पेशाब में जलन Mootradaha
  3. मूत्रकृच्छ Mootrakrucchra
  4. शीघ्रपतन Premature ejaculation
  5. अष्ठीला Ashthila or enlargement of prostrate
  6. क्लैब्य, इसका अर्थ है शिश्न में हुई किसी व्याधि के कारण नपुंसकता Klaibya or Vandhyatva (Infertility / Impotency)
  7. दुर्बलता Dourbalya
  8. ओजक्षय Ojakshaya
  9. प्रमेह के कारण दिक्कतें complications of Prameha like burning sensation of hands & feet
  10. पौरष ग्रंथि का बढ़ जाना benign prostatitis

शिलाप्रवंग स्पेशल Shilapravang Special

  1. शुक्रक्षय Shukrakshaya (Decrease in Semen Quantity)
  2. शीघ्रपतन Premature ejaculation
  3. स्वप्नदोष Nocturnal emission
  4. इंद्री की शिथिलता Indriya Shaithilya (erectile dysfunction)
  5. दुर्बलता Dourbalya (Weakness) Manodourbalya / Dhatudourbalya
  6. क्लैब्य, Klaibya
  7. नामर्दी Purusha Vandhyatva

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Shilapravang

  • 1-2 गोली, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  • इसे दूध, पानी के साथ लें।
  • इसे भोजन करने के बाद लें।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

उपलब्धता

इस दवा को ऑनलाइन या आयुर्वेदिक स्टोर से ख़रीदा जा सकता है।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications

  1. इस दवा को डॉक्टर की देख-रेख में ही लें।
  2. इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  3. इसे ज्यादा मात्रा में न लें।
  4. यह दवा लम्बे समय तक नहीं ली जानी चाहिए।
  5. दवा को समान गुणों वाली हर्बल दवाओं के साथ संयोग में न लें।
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