Arand – रिसिनस कम्युनिस Castor in Hindi

अरंड को आयुर्वेद में मुख्य रूप से वात रोगों जैसे की जोड़ों में दर्द, गाउट, रूमेटिज्म, साइटिका, पीठ में दर्द, आदि में प्रयोग किया जाता है। इसकी जड़ वात-कफ शामक है तथा पित्तवर्धक है। परन्तु इसका तेल पित्त शामक है।

विधारा Vidhara (Argyreia nervosa) in Hindi

Vidhara medicinal uses

विधारा एक औषधीय वनस्पति है। आयुर्वेद में इसका एक रसायन औषधि की तरह बहुत प्रयोग किया जाता है। विधारा की जड़ों को तंत्रिका तंत्र के लिए टॉनिक nervine tonic, वाजीकारक aphrodisiac और बलवर्धक दवाओं में बहुतायात से इस्तेमाल किया जाता है।

तुलसी – ऑसीमम सैक्टम Tulsi Benefits, Medicinal Uses and Caution in Hindi

Tulasi

तुलसी का भारतीय संस्कृति में पवित्र स्थान है। यह पूजनीय तथा शुभ है। तुलसी हर हिन्दू घर में विद्यमान होती है। हिन्दू धर्म की परम्परा अनुसार, तुलसी को घर में लगाने से शोभा, समृद्धि एवं स्वास्थ्य की वृद्धि होती है।

चव्य – जावा पिप्पली Piper retrofractum in Hindi

piper retrofractum benefits

चव्य, चविका, चाब, चब, चई, चवक, आदि पाइपर चाबा अथवा पाइपर रेट्रोफ्रैकटम के नाम है। यह पिप्पली कुल का तथा मलाया द्वीपसमूह का आदिवासी पौधा है। इसे जावा पिप्पली के नाम से भी जाना जाता है। भारतवर्ष में चव्य की

जायफल के औषधीय प्रयोग और दुष्प्रभाव Nutmeg in Hindi

nutmeg benefits

जायफल को बाजिकारक aphrodisiac दवाओं और तेल को तिलाओं में डाला जाता है। यह पुरुषों की इनफर्टिलिटी, नपुंसकता, शीघ्रपतन premature ejaculationकी दवाओं में भी डाला जाता है। यह इरेक्शन को बढ़ाता है लेकिन स्खलन को रोकता है। यह शुक्र धातु को बढ़ाता है। यह बार-बार मूत्र आने की शिकायत को दूर करता है तथा वात-कफ को कम करता है।

जानिए लोध के बारे में Lodhra Medicinal Tree in Hindi

lodhara medicinal uses

आयुर्वेद में लोध को ग्राही, हल्का, शित्रल, नेत्रों के लिए हितकार, कसैला, कफ तथा पित्तहर बताया गया है। यह रक्तपित्त, रुधिरविकार, ज्वर, ज्वारातिसार, और शोथ को हरने वाली प्रभावी औषध है।

बोल – मुरमकी Commiphora myrrha in Hindi

myrrh gum

बोल को आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी में एक दवा की तरह से से प्रयोग करते हैं। इसमें एंटीसेप्टिक, दर्द शामक, एंटीफंगल, एंटीट्यूमर, कृमिनाशक, और घाव को ठीक करने के गुण होते हैं। बाहरी रूप से इसे मुख में सूजन, मसूड़ों की सूजन, दांतों के आस-पास सूजन, घाव, बेडसोर्स, आदि में प्रयोग करते हैं।

पाटला – पाढर Patala Stereospermum suaveolens in Hindi

patala

यह एक औषधीय वनस्पति है तथा दशमूल की बृहत्पंचमूल में से एक है। पाढ़ल की छाल, अरणी, श्योनाक, बेल और गंभारी को ‘बृहत्पंचमूल’ कहते हैं एवं दवा की तरह इनकी जड़ अथवा छाल का प्रयोग करते हैं।

गंभारी Gambhari Gmelina arborea in Hindi

gambhari medicinal uses

यह दशमूल की बृहत्पंचमूल में से एक है। अरणी, श्योनाक, पाढ़ की छाल, बेल और गंभारी को ‘बृहत्पंचमूल’ कहते हैं एवं दवा की तरह इनकी जड़ अथवा छाल का प्रयोग करते हैं । दशमूल का एक घटक होने से, गंभारी आयुर्वेद की अनेकों दवाओं में डाला जाता है। इसका मुख्य गुण शरीर में वात-पित्त और कफ का संतुलन करना है।

सिंघाड़ा Singhara in Hindi

singhara medicinal uses

सिंघाड़े के फल पौष्टिक भोजन होने के साथ-साथ एक औषधि भी है। इसका आयुर्वेद के पुराने ग्रंथों में भी वर्णन मिलता है। इसे पुष्टिकारक, बलवर्धक, वाजीकारक फल माना गया है जिसका सेवन शरीर को ताकत देता है और धातुओं की वृद्धि करता है। इसका सेवन शरीर में कमजोरी को दूर करता है। स्त्रियों के लिए तो बहुत ही उत्तम कहा गया है। इसके सेवन से स्त्रियों में आयरन, विटामिन्स, मिनरल्स की कमी दूर होती है, साथ ही गर्भाशय मजबूत होता है।