पित्तशामक वटी के फायदे, नुकसान, उपयोग विधि और प्राइस

सूतशेखर रस आयुर्वेद की बहुत जानी मानी दवा है जिसे पित्त विकारों में प्रयोग किया जाता है। गैरिक या लाल गेरू, लोहे का एक ऑक्साइड (Fe2O3) है।

सूतशेखर रस के फायदे, नुकसान, उपयोग विधि और प्राइस

सूतशेखर रस शरीर में अधिक पित्त के कारण होने वाले रोग/पित्त विकार, अम्लपित्त, मन्दाग्नि, पेट दर्द, चक्कर आना, उल्टी, अतिसार, पेट फूलना, हिचकी आदि रोगों में लाभप्रद है।

जन्तुघ्न वटी के फायदे, नुकसान, उपयोग विधि और प्राइस

इसका प्रयोग से बहुत से कॉमन इन्फेक्शन के प्रति शरीर की इम्युनिटी बढ़ाती है और उनके उपचार में मदद मिलती है। इसमें एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-बैक्टीरियल गुण हैं।

कुटज के फायदे, नुकसान, उपयोग विधि

Kutaja

कुटज पेड़ की छाल और बीजों का आयुर्वेद में बहुत पुराने समय से दस्त, पेचिश, आंव आना, तथा खून बहने के विकारों में प्रयोग होता है।

कुटजावलेह के फायदे, नुकसान, उपयोग विधि और प्राइस

कुटजावलेह, वात और कफ डायरिया, दस्त और पेचिश रोगों की अच्छी हर्बल दवा है। यह दवा प्रभावी रूप से आंतों के अमीबी संक्रमण को कम कर देता है। यह ब्लीडिंग डिसऑर्डर, की भी अच्छी दवा है।

आमलकी रसायन के फायदे, नुकसान, उपयोग विधि और प्राइस

आमलकी रसायन पित्त को कम करने वाला है। यह एसिडिटी को ठीक करता है। इसके सेवन से बल, मेधा, शक्ति और रक्त की वृद्धि होती है। यह शरीर को शक्ति देता और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देता है।

बैद्यनाथ पंचासव के फायदे, नुकसान, उपयोग विधि और प्राइस

पंचासव गैस, कब्ज, अम्लता, उदर शूल, पेट दर्द, अपच आदि जैसे सभी पाचन विकार के उपचार में उपयोगी है।

विटामिन डी की कमी का लक्षण, दवाएं और स्रोत

विटामिन डी, भोजन से प्राप्त कैल्शियम के अवशोषण के लिए ज़रूरी है। इसकी कमी से कमजोर, नाज़ुक, और हड्डियों नरम हो जाती है। विटामिन डी का प्रयोग रिकेट्स, कमजोर हड्डियों (ऑस्टियोपोरोसिस) और हड्डी में दर्द (osteomalacia) के इलाज के लिए भी किया जाता है।

झंडु झंडोपा के फायदे, नुकसान, उपयोग विधि और प्राइस

झंडोपा, को केवांच के प्रसंस्कृत बीज पाउडर से बनाया गया हैं। यह पार्किंसंस के इलाज के लिए प्रयोग की जानी वाली एक हर्बल दवा है। इसके दुष्प्रभाव अपेक्षाकृत कम है और ज्यादातर जठरांत्र पर होते हैं।