विटामिन डी Vitamin D in Hindi

विटामिन डी (calciferol कैलसीफेरोल) एक विटामिन है जो हमारे शरीर में सूरज की रोशनी या धूप में उत्पादित होता है। यह वसा में घुलनशील विटामिन है और शरीर के वसा या फैट में संग्रहीत किया जाता है। यह कुछ ही खाद्य पदार्थों में स्वाभाविक रूप से पाया जाता है जैसे की मछली के जिगर का तेल, कॉड लिवर ऑइल, फैटी मछली, मशरूम, अंडे की जर्दी आदि। यह फोर्टीफाईड खाद्य पदार्थ जैसे की फोर्टीफाईड दूध उत्पादों, सीरियल/अनाज आदि में भी डाला जाता है। यह विटामिन मजबूत और स्वस्थ हड्डियों तथा पूरे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।

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जब हमारी त्वचा, सूर्य की रौशनी के साथ सीधे संपर्क में आती है, तो सूरज की पराबैंगनी बी (UVB) ultraviolet B (UVB) किरणों से शरीर में विटामिन डी बनता है। यह यकृत को भेजा जाता है, जहां यह 25(OH) D या, 25-हाइड्रोक्सी-डी, 25-hydroxy vitamin D में बदल दिया जाता है यहाँ से, यह केमिकल सारे शरीर में भेजा जाता है और सक्रिय विटामिन डी में बदल जाता है। 25-हाइड्रोक्सी-डी, जो रक्त में होता है उसे ही विटामिन डी के स्तर को पता करने के लिए ब्लड-टेस्ट द्वारा मापा जाता है। निम्न स्तर विटामिन की कमी को दिखाता है इसका मतलब है की इंजेक्शन या सप्लीमेंट का सेवन कर इस कमी को दूर किया जाए क्योंकि विटामिन डी की शरीर में कमी बहुत से रोगों का कारण बन सकती है।

विटामिन डी, भोजन से प्राप्त कैल्शियम के अवशोषण के लिए ज़रूरी है। इसकी कमी से कमजोर, नाज़ुक, और हड्डियों नरम हो जाती है। विटामिन डी का प्रयोग रिकेट्स, कमजोर हड्डियों (ऑस्टियोपोरोसिस) और हड्डी में दर्द (osteomalacia) के इलाज के लिए भी किया जाता है। विटामिन डी मांसपेशियों, हृदय, फेफड़े, मस्तिष्क और प्रतिरक्षा प्रणाली के समुचित कार्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।

Vitamin D is only vitamin that is produced by our body in presence of Sun. It is essential for proper functioning of whole body especially for bones. Its deficiency causes brittle, soft and deformed bones. Rickets, curved legs, pain in bones, pain in muscles, headaches, and osteoporosis are caused by its deficiency. It is important to know about this Vitamin for good health. On this page information is given about Vitamin D (functions, sources, deficiency, risk groups, symptoms, daily requirement, toxicity) in Hindi language.

शरीर में विटामिन डी का कार्य Functions of Vitamin D in body in Hindi

शरीर में विटामिन डी का प्रमुख कार्य सीरम कैल्शियम और फास्फोरस के सही स्तर को बनाए रखने का होता है। विटामिन डी, यह कार्य छोटी आंत से इन खनिजों के अवशोषण को बढ़ा कर करता है।

  • यह हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
  • यह संक्रमण के खिलाफ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
  • यह मांसपेशियों, नसों के समुचित कार्य के लिए आवश्यक है।
  • यह शरीर में फॉस्फोरस और कैल्शियम के स्तर को विनियमित करने में मदद करता है।
  • यह स्वस्थ दिल और रक्त परिसंचरण के लिए आवश्यक है।
  • यह मस्तिष्क कार्यों को प्रभावित करता है।

विटामिन डी के स्रोत Sources of Vitamin D in Hindi

  • सूरज की रोशनी
  • सूरज की रोशनी विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत है। हमारा शरीर विटामिन डी तब बनाता है जब सूरज की किरणें सीधे त्वचा पर पड़ती है। पराबैंगनी बी, किरणें विटामिन डी के संश्लेषण के लिए आवश्यक हैं।
  • सूर्य के प्रकाश का प्रत्यक्ष संपर्क होना आवश्यक है। कांच, खिड़की आदि के माध्यम से आ रही धूप से विटामिन डी का उत्पादन नहीं होता।
  • फूड आइटम्स
  • कुछ खाद्य पदार्थों जैसे कि मछली के जिगर के तेल, कॉड लिवर तेल, फैटी-फिश, मशरूम, अंडे की अर्दी , जिगर, और फोर्टिफायड फूड आइटम्स में विटामिन डी होता है।
  • सप्लीमेंट्स
  • बाजार में विटामिन डी के विभिन्न सप्लीमेंट्स उपलब्ध हैं; D2 (ergocalciferol) और डी 3 (cholecalciferol)

विटामिन डी की कमी Vitamin D deficiency

आजकल विटामिन डी की कमी होना बहुत ही आम है। अधिकांश समय लोग खुद को धूप से कपड़े, छतरी, सनस्क्रीन का उपयोग कर बचाते हैं। काम के समय के कारण, कई लोगों के लिए धूप में जाना मुश्किल होता है। प्रदूषण, घर का डिज़ाइन, घरों में धूप न आना आदि के कारण भी शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है।

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  • शरीर में विटामिन डी के स्तर को मापने के लिए 25-hydroxy विटामिन डी रक्त परीक्षण किया जाता है।
  • 30 nmol/L (12 ng/mL) से कम स्तर नीचे शरीर में विटामिन डी की कमी दर्शाता है।
  • 125 nmol/L (50 ng/mL) का स्तर शरीर में इसकी अधिकता दर्शाता है।
  • 50 nmol/L or above (20 ng/mL or above) ज्यादातर लोगों के लिए पर्याप्त हैं।

Levels below 30 nmol/L (12 ng/mL) are too low and levels above 125 nmol/L (50 ng/mL) are too high। Levels of 50 nmol/L or above (20 ng/mL or above) are sufficient for most people।

विटामिन डी की कमी समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यह कमजोर हड्डियों का कारण बनता है। विटामिन डी की कमी शरीर को कुछ विकारों के लिए अतिसंवेदनशील बनाता है। यह मधुमेह, हड्डी विकारों, ऑस्टियोपोरोसिस, फ्रैक्चर, उच्च रक्तचाप, अल्जाइमर और बहुत से ऑटोइम्यून autoimmune रोगों का कारण भी बनता है।

विटामिन डी की कमी के कारण Reasons for Deficiency

  • धूप में न जाना
  • धूप से बचाव करना
  • आहार में पर्याप्त विटामिन डी की कमी
  • जिगर और गुर्दे की रोगों
  • भोजन हा सही अवशोषण न होना
  • कुछ दवाओं, phenytoin, phenobarbital और rifampin का उपयोग

इन लोगों में विटामिन डी की कमी की संभावना ज्यादा होती है Risk Groups

  • जो लोग अधिकांश समय इनडोर काम करते हैं।
  • कपड़ों, दुपट्टा, सनस्क्रीन आदि का प्रयोग कर धूप से परहेज।
  • बुज़ुर्ग लोगों में
  • माँ का दूध पीते Breastfed शिशुओं में
  • डार्क स्किन
  • कुछ रोग
  • मोटापा

विटामिन डी की कमी के लक्षण Symptoms of deficiency

विटामिन डी की कमी के कोई विशेष लक्षण नहीं होते है। कई लोगों में कोई लक्षण नहीं है। लेकिन गंभीर और क्रोनिक मामलों में फ्रैक्चर और हड्डियों की विकृति हो जाते हैं।

विटामिन डी की कमी के कुछ लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं

बच्चों में

  • मांसपेशियों में ऐंठन, चिड़चिड़ापन
  • नरम खोपड़ी या कमजोर घुमावदार पैर bow-legged धनुष की तरह मुड़े पैर
  • रिकेट्स, विकास और ऊंचाई में कमी
  • देर से खड़ा होना और चलना
  • सांस लेने कठिनाइयों
  • बार-बार संक्रमण

वयस्कों में

  • हड्डियों में दर्द, आमतौर पर पसलियों, कूल्हों, श्रोणि, जांघों और पैरों में
  • मांसपेशियों में दर्द
  • मांसपेशियों की कमजोरी
  • थकान, सामान्य दर्द और दर्द
  • बहुत ज्यादा पसीना आना, सिर का पसीने में भीग जाना, बेचैनी
  • मांसपेशियों का फड़फड़ाना twitching/स्थानीय, अनैच्छिक मांसपेशी का संकुचन और विश्राम जो त्वचा के नीचे दिखाई दे सकता है)
  • कठिनाई में चलने, सीढ़ियाँ चढ़ने में दिक्कत
  • सिर दर्द, माइग्रेन, मस्तिष्क संबंधी विकार, मूड विकार, अवसाद
  • एकाग्रता का अभाव, मनोभ्रंश, स्मृति विकार
  • चिंता, मनोबल कम होना
  • बालों का झड़ना, पैच में गंज
  • कमजोर दांत, कैविटी होना, दर्द
  • चक्कर आना
  • कलाई, एड़ियों, का फूला दिखना
  • सोरायसिस, मधुमेह
  • उच्च रक्तचाप, हृदय रोग
  • बार-बार श्वसन संक्रमण
  • कब्ज या दस्त

विटामिन डी की कमी के लिए उपचार Treatment

विटामिन डी की कमी को ergocalciferol या calciferol के इंजेक्शन या सप्लीमेंट्स के सेवन द्वारा इलाज किया जाता है। अलग अलग शक्तियों की खुराक उपलब्ध हैं जो की दैनिक, साप्ताहिक या मासिक रूप से ली जाती हैं।

वयस्कों में विटामिन डी की कमी 10,000 IU calciferol दैनिक या 60, 000 IU साप्ताहिक, 8-12 हफ्तों तक देकर की जाती है।

बच्चों में विटामिन डी की कमी के उपचार बच्चे की उम्र पर निर्भर करता है।

कमी के इलाज के बाद, 1000-2000 आइयू calciferol दैनिक या 10 000 IU साप्ताहिक, वयस्कों को दी जाती है जिससे विटामिन डी का सही स्तर बना रहे।

For Maintenance therapy after deficiency has been treated, adults need 1000-2000 IU calciferol daily or 10 000 IU weekly, Children under six months need 200-400 IU per day and over six months need 400-800 IU per day।

विटामिन डी की दैनिक आवश्यकता Daily requirements of Vitamin D

विटामिन डी की दैनिक आवश्यकता उम्र पर निर्भर है।

  • जन्म से 12 महीने: 400 आइयू (इंटरनेशनल यूनिट)
  • बच्चे 1 – 13 साल: 600 आइयू
  • किशोर 14-18 वर्ष: 600 आइयू
  • वयस्क 19 – 70 साल: 600 आइयू
  • वयस्क 71 साल और उससे बढ़े: 800 IU
  • गर्भवती और स्तनपान करने वाली महिला: 600 आइयू

विटामिन डी की ऊपरी सीमा

अधिक मात्रा में रक्त में विटामिन डी विषैले प्रभाव पैदा करता है। धूप में जाने या प्राकृतिक भोजन के सेवन से शरीर में विटामिन डी का स्तर बहुत अधिक नहीं बढ़ता। रक्त में विटामिन की अधिकता सप्लीमेंट के अधिक मात्रा में सेवन से हो जाती है। इससे मिचली, उल्टी, भूख न लगना, कब्ज, कमजोरी, वजन सम्बन्धी परेशानियां, धमनियों का सख्त होना और गुर्दे को नुकसान हो सकता है।

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8 thoughts on “विटामिन डी Vitamin D in Hindi

  1. Mujhe vitamin d3 ki kami hai pichle 1 year se may ab bhi medicine le raha hnu kya mujhe ab band kar dena chahiye lekin abhi bhi may ghutne mod kar nahi bath sakta

  2. मुझेमे विटामिन डी कमी है. और मै uprise-D3 ( cholecalciferol capsules ) ले रहा हुं मुझे यह पता करना है की क्या इसमे मछली के तेल का उपयोग कीया गया है ? क्युकी मै शाकाहारी हु
    Cholecalciferol का मतलब क्या है ?

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