पित्तशामक वटी के फायदे, नुकसान, उपयोग विधि और प्राइस

सूतशेखर रस आयुर्वेद की बहुत जानी मानी दवा है जिसे पित्त विकारों में प्रयोग किया जाता है। गैरिक या लाल गेरू, लोहे का एक ऑक्साइड (Fe2O3) है।

पित्तशामक वटी आयुर्वेद रसशाळा द्वारा निर्मित आयुर्वेदिक दवा है। इसमें सूतशेखर रस साधा, गैरिक, और शंख भस्म हैं जिन्हें कंटकारी, वासा और गिलोय के रस की भावना दी गई है।

सूतशेखर रस आयुर्वेद की बहुत जानी मानी दवा है जिसे पित्त विकारों में प्रयोग किया जाता है। गैरिक या लाल गेरू, लोहे का एक ऑक्साइड (Fe2O3) है।

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शंख भस्म, शंख के खोल से प्राप्त किया जाता है। यह मुख्य रूप से मैग्नीशिया है और इसमें और एंटासिड और एंटी-अल्सर गुण है। यह अल्सर और पित्त विकारों के इलाज में प्रयोग किया जाता है। भावना द्रव इस दवा के प्रभाव को और बढ़ाते हैं।

पित्तशामक वटी को पित्त विकार के कारण होने वाले रोगों के उपचार में प्रयोग किया जाता है।

Pittashamak Vati is herbomineral Ayurvedic medicine containing Sutshekhar sada, Gairik and Shakh Bhasma. It is proprietary medicine from Ayurveda Rasshala.

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As the name itself suggest, this medicine is given to pacify excess pitta. In Ayurveda, pitta pertains to fire and water elements and governs metabolism. It is hot (Ushna), light (Laghu), quickly penetrating

(Saram), liquid (Dravam), slightly viscid (Sneha), active (Teekshna), slightly foul smelling (Visrum). Pitta is the source of all internal heat including digestion, hunger, thirst, intelligence, imagination, understanding, memory etc. Its main function is to produce heat. The imbalance of pitta causes burning sensation in the body, hyperacidity, sleeplessness, erratic digestion, constipation or diarrhea, vomiting etc.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

पित्तशामक वटी के घटक | Ingredients of Pittashamak Vati in Hindi

Each Tablet 250 mg Contain Approx

  • सूतशेखर सादा 166.60 mg
  • शुद्धा गैरिक 41.66 mg
  • भावना रिंगणी (Solanum xanthocarpum)
  • अडूलसा (Adatoda Vasica)
  • गुलवेल (Tinospora cordifolia)
  • Excipients Q.S.

पित्तशामक वटी के चिकित्सीय उपयोग | Uses of Pittashamak Vati in Hindi

  • एसिडिटी के साथ उल्टी
  • आमाशय रस में अत्यधिक एसिड
  • Heartburns सीने में जलन
  • शरीर में जलन
  • खट्टी डकार, अपच, अतिसार
  • सिरदर्द, माइग्रेन के साथ उल्टी
  • अधिक उल्टी आना
  • पित्त-विकार

पित्तशामक वटी की सेवन विधि और मात्रा Dosage of Pittashamak Vati in Hindi

  • 1-2 गोली, दिन में दो तीन बार लें।
  • इसे दूध या नीबू के रस + चीनी के साथ लें।
  • इसे भोजन करने के बाद लें।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

इस दवा को ऑनलाइन या आयुर्वेदिक स्टोर से ख़रीदा जा सकता है।

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