पतंजलि विडंगासव के फायदे, नुकसान, उपयोग विधि और प्राइस

दिव्य विडंगासव, एक क्लासिकल आयुर्वेदिक दवा है जिसे आयुर्वेद सार संग्रह से लिया गया है। इसे आँतों के कीड़े नष्ट करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह दवा आंत के कीड़े नष्ट करके, सम्बंधित पेट समस्याओं में राहत देती है। यह कीड़ों के कारण पेट दर्द, भूख नहीं लगना, उलटी, जी मिचलाना आदि में दी जाती है। कीड़ों के कारण हो रहे त्वचा विकारों में भी यह लाभप्रद है ।

दवा के बारे में इस पेज पर जो जानकारी दी गई है वह इसमें प्रयुक्त जड़ी-बूटियों के आधार पर है। हम इस प्रोडक्ट को एंडोर्स नहीं कर रहे। यह दवा का प्रचार नहीं है। हमारा यह भी दावा नहीं है कि यह आपके रोग को एकदम ठीक कर देगी। यह आपके लिए फायदेमंद हो भी सकती हैं और नहीं भी। दवा के फोर्मुलेशन के आधार और यह मानते हुए की इसमें यह सभी द्रव्य उत्तम क्वालिटी के हैं, इसके लाभ बताये गए हैं। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें। हमारा उद्देश्य दवा के लेबल के अनुसार आपको जानकारी देना है।

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Divya Vidangasavais Herbal Ayurvedic medicine. It is indicated to expel worms. It helps to expel intestinal worms and relieves problems. Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

  • दवा का नाम: विडंगासव Vidangasava
  • निर्माता: पतंजलि
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: हर्बल क्लासिकल दवाई
  • मुख्य उपयोग: आंतों की कीड़ों को नष्ट करना और सम्बंधित समस्याओं में आराम देना
  • मुख्य गुण: कृमिघ्न
  • दोष इफ़ेक्ट: वात, कफ कम करना, पित्त वर्धक
  • गर्भावस्था में प्रयोग: नहीं करें
  • मूल्य MRP: दिव्य विडंगासव 450 ml की कीमत 75 रुपये है।

विडंगासव के घटक | Ingredients of Vidangasava in Hindi

प्रत्येक 10 मिलीलीटर में शामिल हैं:

  • विडंग, पिप्पली, रसना, कुटज-त्वक, कुटज- फला पाठा, एलुवा अमलाकी – 78।181 मिलीग्राम प्रत्येक,
  • मधु – 4।6 9 0
  • धातिकी- 312।727 मिलीग्राम,
  • दालचीनी, इला, तेजपात्र – प्रत्येक 10।424 मिलीग्राम,
  • प्रियंग, कंचनारा, लोध्र- प्रत्येक 15।636 मिलीग्राम,
  • सोंठ, मारीचा, पिप्पली – प्रत्येक 124 मिलीग्राम;
  • आसव बेस – क्यू।एस।
  • पैकेजिंग आकार: 450 मिलीलीटर

विडंग (एम्बेलिका राइब्स)  का औषधीय प्रयोग प्राचीन शास्त्रीय ग्रंथों में वर्णित है। इसका प्रयोग चरक, सुश्रुत, वाग्भट्ट ने इसे कई रोगों में चिकित्सीय रूप से प्रयोग किया। लेकिन मुख्य रूप से यह एक कृमिघ्न है। यह पाचन, कृमिघ्न, रेचक है।

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Vidang / Embelia एस्केसीडल (राउंड वर्म को मारता है), कार्मिनेटिव, एंटीबायोटिक, हाइपोग्लाइसेमिक गुण भी हैं। यह आंत्र परजीवी के उपचार के लिए आयुर्वेद में प्रयुक्त मुख्य जड़ीबूटी है। यह पेट विकार, कब्ज, गैस, अपच, बवासीर आदि में उपयोगी है। विरेचन गुण होने से है यह कब्ज़, पाइल्स, भगंदर एन उपयोगी है।

वायविडंग Embelia Ribes कृमि रोग, मेदवृद्धि तथा कफ रोगों में विशेष रूप से उपयोगी है। यह अनुलोमन, एंटीबैक्टीरियल, कृमिनाशक, और एंटीबायोटिक है। यह आयुर्वेद में पेट के कीड़ों के लिए प्रयोग की जाने वाली प्रमुख वनस्पति है। यह पेट के सभी रोगों, कब्ज़, अफारा, अपच, पाइल्स आदि में उपयोगी है।

त्रिकटु, सौंठ, काली मिर्च और पिप्पली का संयोजन है। यह आम दोष (चयापचय अपशिष्ट और विषाक्त पदार्थों), जो सभी रोग का मुख्य कारण है उसको दूर करता है। यह बेहतर पाचन में सहायता करता है और यकृत को उत्तेजित करता है। यह तासीर में गर्म है और कफ दोष के संतुलन में मदद करता है। यह पाचन और कफ रोगों, दोनों में ही लाभकारी है। इसे जुखाम colds, छीकें आना rhinitis, कफ cough, सांस लेने में दिक्कत breathlessness, अस्थमा asthma, पाचन विकृति dyspepsia, obesity और मोटापे में लिया जा सकता है।

विडंगासव के लाभ / फायदे | Benefits of Vidangasava in Hindi

  • इसके सेवन से भूख ठीक से लगती है।
  • चूंकि यह त्वचा से कफ को साफ करता है, यह खुजली रोकता है।
  • यह अमा विषाक्त पदार्थों के रक्त और लसीका को साफ करता है।
  • यह आंतों से वात (वायु) को साफ करने में प्रभावी है।
  • यह किसन के कारण हो रहे पेट दर्द और पेट में बहुत प्रभावी है।
  • यह पाचन को ठीक करती है।
  • यह बच्चों के पेट में कीड़े में इस्तेमाल की जा सकती अहि।
  • यह विशेष रूप से कृमि उपद्रवों (राउंडवर्म, टेपवर्म) को नष्ट करने वाली दवा है।

विडंगासव का आयुर्वेदिक कर्म

  • अनुलोमन:  द्रव्य जो मल व् दोषों को पाक करके, मल के बंधाव को ढीला कर दोष मल बाहर निकाल दे।
  • अमानाशक: टॉसिन या अमा को नष्ट करता है
  • कफहर: द्रव्य जो कफ को कम करे।
  • दीपन: द्रव्य जो जठराग्नि तो बढ़ाये लेकिन आम को न पचाए।
  • पाचन: द्रव्य जो आम को पचाता हो लेकिन जठराग्नि को न बढ़ाये।
  • विरेचन: द्रव्य जो पक्व अथवा अपक्व मल को पतला बनाकर अधोमार्ग से बाहर निकाल दे।

विडंगासव के चिकित्सीय उपयोग | Uses of Vidangasava in Hindi

  • अश्मरी पथरी
  • आंत के कीड़े, उदर कृमि
  • उदरीय सूजन
  • उरूस्तम्भ ( excessive and accumulated ama along with kapha, fat and vata produces rigidity of thighs and this condition is known as Urustambha)
  • गण्डमाला Galaganda (Goiter)
  • गुल्म
  • त्वचा की खुजली से संबंधित त्वचा विकार
  • पाचन रोग
  • पेट दर्द
  • भगंदर फिस्टुला (ऐनल कैनाल की त्वचा और आंत्र की पेशी के बीच संक्रमित सुरंग, जिस में से मवाद स्रावित होता है)
  • भूख में कमी
  • विद्रधि फोड़ा (ऊतक में पस का कलेक्शन जिसमें सूजन,दर्द होता है)
  • हनुस्तम्भ Hanustambha (Lock jaw)

सेवन विधि और मात्रा | Dosage of Vidangasava in Hindi

  • यह आयुर्वेद का अरिष्ट है और इसे लेने की मात्रा 12-24 मिलीलीटर है।
  • बच्चों को बड़ों को दी जाने वाली मात्रा की आधी मात्रा दे सकते हैं।
  • दवा को पानी की बराबर मात्रा के साथ-साथ मिलाकर लेना चाहिए।
  • इसे सुबह नाश्ते के बाद और रात्रि के भोजन करने के बाद लें।
  • इसे भोजन के 30 मिनट में बाद, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  • इस दवा को 1-2 महीने तक लें।

विडंगासव के इस्तेमाल में सावधनियाँ | Cautions in Hindi

  • इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  • इसे ज्यादा मात्रा में न लें।
  • यह पित्त को बढ़ाता है। इसलिए पित्त प्रकृति के लोग इसका सेवन सावधानी से करें।
  • इसका एंटीफर्टिलिटी इफ़ेक्ट है।
  • विडंग का स्त्रियों में गर्भनिरोधक असर होता है। ऐसा इसकी एंटीएस्ट्रोजनिक एक्टिविटी antiestrogenic activity से होता है।

विडंगासव के साइड-इफेक्ट्स | Side effects in Hindi

  • निर्धारित खुराक में लेने से दवा का कोई दुष्प्रभाव नहीं है।
  • इससे कुछ लोगों में पेट में जलन हो सकती है।

विडंगासव को कब प्रयोग न करें | Contraindications in Hindi

  • इसे गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान न लें।
  • आयुर्वेद में उष्ण चीजों का सेवन गर्भावस्था में निषेध है। इसका सेवन गर्भावस्था में न करें।
  • इसे बताई मात्रा से अधिकता में न लें।
  • यदि दवा से किसी भी तरह का एलर्जिक रिएक्शन हों तो इसका इस्तेमाल नहीं करें।
  • अधिक मात्रा में सेवन पेट में जलन, एसिडिटी, आदि समस्या कर सकता है।
  • यदि पित्त बहुत बढ़ा हुआ है तो इसका प्रयोग नहीं करें।
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