नारी सुधा सिरप Nari Sudha Syrup Detail and Uses in Hindi

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नारी सुधा सिरप, एक आयुर्वेदिक दवाई है जो महिलाओं को पूरे महीने स्वस्थ्य और सक्रिय बनाए रखने में मदद करती है। यह गर्भाशय टॉनिक है और महिलाओं में होने वाले दिक्कतों में लाभप्रद है। यह दवा स्त्रियों में पीठ दर्द, भूख नहीं लगना, अनीमिया, थकान, चक्कर आना आदि को ठीक करने में मदद करती है। महिलाओं के स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए काम करने वाली दवाई है।

इस दवा को भोजन करने के बाद, दिन में दो बार एक से दो चम्मच की मात्रा में लेना चाहिए। इसे ठन्डे, अंधेरे और सूखी जगह पर स्टोर करें। इसे गर्मी, प्रकाश और नमी से सुरक्षित रखें।

दवा के बारे में इस पेज पर जो जानकारी दी गई है वह इसमें प्रयुक्त जड़ी-बूटियों के आधार पर है। हम इस प्रोडक्ट को एंडोर्स नहीं कर रहे। यह दवा का प्रचार नहीं है। हमारा यह भी दावा नहीं है कि यह आपके रोग को एकदम ठीक कर देगी। यह आपके लिए फायदेमंद हो भी सकती हैं और नहीं भी। दवा के फोर्मुलेशन के आधार और यह मानते हुए की इसमें यह सभी द्रव्य उत्तम क्वालिटी के हैं, इसके लाभ बताये गए हैं। इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें। हमारा उद्देश्य दवा के लेबल के अनुसार आपको जानकारी देना है।

Nari Sudha Syrup is Herbal Ayurvedic medicine. It is indicated in treatment of gynecological disorders. Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

  • दवा का नाम: पतंजलि नारी सुधा सिरप Nari Sudha Syrup, दिव्य नारी सुधा
  • निर्माता: पतंजलि दिव्य फार्मेसी Patanjali Ayurvedic Pvt. Ltd.
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: हर्बल आयुर्वेदिक दवाई
  • मुख्य उपयोग: स्त्री रोग
  • मुख्य गुण: पित्त तथा कफ दोष को संतुलित करना
  • गर्भावस्था में प्रयोग: नहीं करें

मूल्य MRP:

PATANJALI NARI SUDHA SYRUP – 200 ml @ Rs 75.

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नारी सुधा सिरप के घटक Ingredients of Nari Sudha Syrup

In each 5 ml of Patanjali Nari Sudha

  • रक्त चन्दन Rakt Chandan 75 mg
  • अशोक Ashoka 125 mg
  • लोध्र Lodhra 100 mg
  • मोचरस Mochras Resin 25 mg
  • धातकी Dhataki 50 mg
  • अश्वगंधा Ashwagandha 40 mg
  • शतावर Shatavar 40 mg
  • नागाकेशर Nagkeshar 50 mg
  • नागरमोथा Nagarmotha 50 mg
  • लाल सुपारी Lal Supari Areca Catechu 15 mg
  • सोंठ Sonth 25 mg
  • जटामांसी Jatamansi 60 mg
  • आमला Amla 50 mg
  • दारू हल्दी Daru Haldi 40 mg
  • पत्रांग Patrang 100 mg
  • शुगर Sugar q.s.

Preservative

  • सोडियम मिथाइल पैराबेन Sodium methyl Paraben
  • सोडियम प्रोपाइल पैराबेन Sodium Propyl Paraben
  • सोडियम बेन्जोएट Sodium Benzoate
  • सिट्रिक एसिड Citric acid
  • फ्लेवर Flavour q.s.

जाने नारी सुधा सिरप दवा में प्रयुक्त जड़ी-बूटियों को

अशोक

अशोक की छाल को आयुर्वेद में प्रमुखता से स्त्री रोगों के उपचार में प्रयोग किया जाता है। यह स्वभाव से शीत होती और प्रजनन तथा मूत्र अंगों पर विशेष रूप से काम करती है। यह गर्भाशय की कमजोरी और योनी की शिथिलता को दूर करती है। यह संकोचक, कडवा, ग्राही, रंग को सुधारने वाला, सूजन डोर करने वाला और रक्त विकारों को नष्ट करने वाला है।

  • रस (taste on tongue): मधुर, तिक्त, कषाय
  • गुण (Pharmacological Action): लघु, रुक्ष
  • वीर्य (Potency): शीत
  • विपाक (transformed state after digestion): कटु
  • कर्म: ग्राही, गर्भाशय रसायन, हृदय, प्रजास्थापना, स्त्री रोग्जित, वेदना स्थापना, विषघ्न, वर्ण्य

अशोक रक्त रोधक प्रयोगों में बहुत ही हितकर है। अशोक स्त्री रोगों में बहुत ही फायदा करता है। इसके सेवन से बाँझपन नष्ट होता है और राजोविकर दूर होते है।  यह दर्द, सूजन, रक्त प्रदर, श्वेत प्रदर, दर्द, अतिसार, पथरी, पेशाब में दर्द, आदि में लाभप्रद है।

शतावर

शतावर को माहवारी पूर्व सिंड्रोम (PMS), गर्भाशय से रक्तस्राव और नई मां में दूध उत्पादन शुरू करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त शतावर को अपच, कब्ज, पेट में ऐंठन, और पेट के अल्सर, दर्द, चिंता, कैंसर, दस्त, ब्रोंकाइटिस, क्षय रोग, मनोविकार, और मधुमेह के लिए भी प्रयोग किया जाता है। यह एक aphrodisiac के रूप में यौन इच्छा को बढ़ाने के लिए भी प्रयोग की जाती है।

इसमें एक सक्रिय antioxytocic saponins भी है जो की विशेष रूप से गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय की मांसपेशियों को बहुत ही अच्छा आराम देता है और संकुचन को रोकता है। इससे गर्भपात को रोकने और समय पूर्व प्रसव को रोकने में मदद होती है।

लोध्र

लोध्र को  संस्कृत में लोध्र, तिल, तिरीटक शाबर, मालव, गाल्व, हस्ती, हेमपुष्पक आदि नामों से जाना जाता है। हिंदी में इसे लोध, बंगाली में लोधकाष्ठ, मराठी में लोध, गुजरती में लोदर, पठानीलोध, और लैटिन में सिम्प्लेकोस रेसीमोसा कहते हैं। यह अतिसार, आम अथवा रक्तअतिसार, रक्त प्रदर तथा श्वेतप्रदर के उपचार में बहुत लाभप्रद है। यह स्त्रियों के प्रदर की समस्या की प्रमुख औषधि है.

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  • रस (taste on tongue): कषाय astringent
  • गुण (Pharmacological Action): लघु, रुक्ष light and drying
  • वीर्य (Potency): शीत Cooling
  • विपाक (transformed state after digestion): कटु Pungent

लोध्र वृक्ष की छाल को औषधीय प्रयाजनों के लिए मुख्य रूप से प्रयोग किया जाता है। छाल को आयुर्वेद में कषाय रस और बल्य माना गया है। यह अकेले ही या अन्य द्रव्यों के साथ दवाई के रूप में प्रयोग की जानेवाली औषध है। इसे आंतरिक और बाह्य दोनों की तरह से प्रयोग करते हैं। बाह्य प्रयोग में यह संकोचक, रक्तस्तंभक, वर्णरोपण, शोथहर है। आंतरिक प्रयोग में यह स्तंभक, रक्तस्तंभक, शोथहर, गर्भाशयस्राव और गर्भाशयशोथनाशक है। यह अतिसारनाशक और कुष्ठघ्न भी है।

अश्वगंधा

अश्वगंधा (Withania somnifera) की जड़ें आयुर्वेद में टॉनिक, कामोद्दीपक, वजन बढ़ाने के लिए और शरीर की प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए increases weight and improves immunity प्रयोग की जाती है। अश्वगंधा तंत्रिका कमजोरी, बेहोशी, चक्कर और अनिद्रा nervous weakness, fainting, giddiness and insomnia तथा अन्य मानसिक विकारों की भी अच्छी दवा है। स्त्रियों में अश्वगंधा का सेवन स्तनपान breastfeeding कराते समय दूध की मात्रा में वृद्धि galactagogue करता है और हॉर्मोन के संतुलन में मदद करता है। इसका सेवन हार्मोन पुन: बनाता है। प्रसव after delivery बाद इसका सेवन शरीर को बल देता है। इसका सेवन वात और कफ को कम करता है लेकिन बहुत अधिक मात्रा में सेवन शरीर में पित्त और आम को बढ़ा सकता है। यह मुख्य रूप से मांसपेशियों muscles, वसा, अस्थि, मज्जा/नसों, प्रजनन अंगों reproductive organ, लेकिन पूरे शरीर पर काम करता है। यह मेधावर्धक, धातुवर्धक, स्मृतिवर्धक, और कामोद्दीपक है। यह बुढ़ापे को दूर करने वाली औषधि है।

सोंठ

अदरक का सूखा रूप सोंठ या शुंठी कहलाता है। सोंठ को भोजन में मसले की तरह और दवा, दोनों की ही तरह प्रयोग किया जाता है। सोंठ का प्रयोग आयुर्वेद में प्राचीन समय से पाचन और सांस के रोगों में किया जाता रहा है। इसमें एंटी-एलर्जी, वमनरोधी, सूजन दूर करने के, एंटीऑक्सिडेंट, एन्टीप्लेटलेट, ज्वरनाशक, एंटीसेप्टिक, कासरोधक, हृदय, पाचन, और ब्लड शुगर को कम करने गुण हैं।

सौंठ, आम दोष (चयापचय अपशिष्ट और विषाक्त पदार्थों), जो सभी रोग का मुख्य कारण है उसको दूर करता है। यह बेहतर पाचन में सहायता करता है और कब्ज करता है। यह यकृत को उत्तेजित करता है। यह तासीर में गर्म है और कफ दोष के संतुलन में मदद करता है।

दारुहल्दी, को पाइल्स, हेमरेज, खुजली, चमड़ी के रोगों, पीलिया, और आंतरिक फोड़ों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। नीम और हल्दी की ही तरह यह भी शरीर से गंदगी दूर करती है।

नारी सुधा सिरप के लाभ / फ़ायदे Benefits of Nari Sudha Syrup

  • इसका एसट्रिनजेंट astringent गुण ब्लीडिंग डिसऑर्डर में लाभकारी है।
  • इसके सेवन से रोजोविकर/मासिक धर्म menstrual disorders के विकारों में लाभ होता है।
  • यह एक गर्भाशय का टॉनिक uterine tonic है और गर्भाशय को बल देता है।
  • यह दवा प्रदर में लाभकारी है।
  • इस दवा का असर यूटरस uterus पर विशेष होता है।

नारी सुधा सिरप के चिकित्सीय उपयोग Uses of Nari Sudha Syrup

  • स्त्री रोग
  • भूख नहीं लगना
  • पीठ दर्द
  • खून की कमी, थकान, चक्कर आना
  • स्त्री टॉनिक
  • स्त्रियों के प्रदर रोग (श्वेत प्रदर, रक्त प्रदर)
  • पीरियड की समस्याएं / मासिक धर्म रोग जैसे की बहुत अधिक स्राव, अनियमित स्राव, दर्द आदि
  • श्वेतप्रदर / सफ़ेद पानी की समस्या /योनि से सफ़ेद पानी जाना

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Nari Sudha Syrup

  • 1-2 टेबल स्पून दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  • इसे भोजन करने के बाद लें।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

नारी सुधा सिरप के इस्तेमाल में सावधनियाँ Cautions

इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।

नारी सुधा सिरप के साइड-इफेक्ट्स Side effects

निर्धारित खुराक में लेने से दवा का कोई दुष्प्रभाव नहीं है।

नारी सुधा सिरप को कब प्रयोग न करें Contraindications

  • इसे गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान डॉक्टर से बिना पूछे नहीं लें।
  • यदि दवा से किसी भी तरह का एलर्जिक रिएक्शन हों तो इसका इस्तेमाल नहीं करें।
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3 thoughts on “नारी सुधा सिरप Nari Sudha Syrup Detail and Uses in Hindi

  1. 30 year lady having 2 children 1 boy of 10 and girl 5 yrs. She is suffering from backache, leucorrhoea and weakness. Would you mind to give advice and ayurvedic treatment clinic
    Patient Sapna

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