दिव्य मधुकल्प वटी Divya Madhukalp Vati Detail and Uses in Hindi

मधुकल्प वटी (Divya Madhukalp), दिव्य फार्मेसी द्वारा निर्मित आयुर्वेदिक दवा है। यह दवा शरीर में रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करती है। इसमें आयुर्वेद के जाने माने मधुमेह नियंत्रित करने वाले द्रव्य, जैसे की करेला, चिरायता, कुटकी, नीम, जामुन आदि हैं जो की एंटीऑक्सीडेंट और एंटीडायबिटिक है। इन सभी द्रव्यों को घरेलू उपचार की तरह भी मधुमेह के उपचार में प्रयोग किया जाता है। इस औषध के सभी घटक हर्बल होने से यह लम्बे समय तक लेने के लिए सुरक्षित है।

यह मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए एक अच्छी आयुर्वेदिक दवा है। यह अग्न्याशय से इंसुलिन का सही मात्रा में स्राव करा, रक्त में शर्करा की मात्रा पर बेहतर नियंत्रण प्राप्त करने में मदद करती है। मधुमेह (डायबिटीज) पूरे शरीर और विशेष प्रभाव नसों और रक्त वाहिकाओं की जीवन शक्ति को कम कर देता है। इस दवा के नियमित सेवन से पूरे स्वास्थ्य में सुधार होता है और तंत्रिकाओं, हृदय, रक्त वाहिकाओं, आँखें और गुर्दे की सुरक्षा होती है।

इस दवा के सेवन के दौरान ब्लड शुगर लेवल की बराबर जांच करते रहें। इसे आप एलोपैथी की दवा के सेवन के दौरान भी ले सकते हैं। जब शर्करा स्तर नियंत्रित हो जाए अलोपथिक दवा की मात्रा कम कर दें। दवा का काम ब्लड शुगर को कम करना है, इसलिए इसका सेवन केवल निर्धारित मात्रा में ही करें।

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दवा के बारे में इस पेज पर जो जानकारी दी गई है वह इसमें प्रयुक्त जड़ी-बूटियों के आधार पर है। हम इस प्रोडक्ट को एंडोर्स नहीं कर रहे। यह दवा का प्रचार नहीं है। हमारा यह भी दावा नहीं है कि यह आपके रोग को एकदम ठीक कर देगी। यह आपके लिए फायदेमंद हो भी सकती हैं और नहीं भी। दवा के फोर्मुलेशन के आधार और यह मानते हुए की इसमें यह सभी द्रव्य उत्तम क्वालिटी के हैं, इसके लाभ बताये गए हैं। मार्किट में इसी तरह के फोर्मुले की अन्य फार्मसियों द्वारा निर्मित दवाएं उपलब्ध हैं। इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें। हमारा उद्देश्य दवा के लेबल के अनुसार आपको जानकारी देना है।

Divya Madhukalp Vati is an herbal ayurvedic medicine used in management of diabetes. It helps to control blood sugar level.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

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  • निर्माता: पतंजलि दिव्य फार्मेसी
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: हर्बल आयुर्वेदिक
  • मुख्य उपयोग: मधुमेह को नियंत्रित करना
  • मुख्य गुण: एंटीडायबिटिक
  • मूल्य MRP: Divya Madhukalp Vati 40gram @ Rs. 60.00
  • दवा का अनुपान: गुनगुना जल
  • दवा को लेने का उचित समय: सुबह खाली पेट और शाम को भोजन से एक घंटे पहले

Patanjali Yogpeeth Medicines Madhukalp Vati and Madhunashini Vati for Diabetes

दिव्य मधुकल्प वटी Divya Madhukalp Vati, दिव्य फार्मेसी द्वारा निर्मित, एक और एंटीडायबिटिक दवा दिव्य मधुनाशिनी वटी Divya Madhunashini Vati से अलग है। Madhukalp Vati के 40 ग्राम की कीमत 60.00 रुपये है जबकि मधुनाशिनी वटी जिसमें अधिक घटक हैं, के 60 ग्राम की कीमत 200.00 रुपये है।

दिव्य मधुनाशिनी वटी और दिव्य मधुकल्प वटी दोनों ही मधुमेह अथवा डायबिटीज के लिए पतंजलि के द्वारा निर्मित दवाएं हैं। दिव्य मधुकल्प वटी में 9 द्रव्य (करेला, चिरायता, कटुकी, नीम (निम्ब), मेथी, जामुन (जम्बू), अश्वगंधा, अतीस, शुद्ध) है जबकि दिव्य मधुनाशिनी वटी में 23 द्रव्य हैं तथा इसमें शिलाजीत की मात्रा भी अधिक है। दिव्य मधुनाशिनी वटी में शुद्ध कुचला Strychnos nux-vomica भी है।

दिव्य मधुनाशिनी वटी, दिव्य मधुकल्प वटी की तुलना में शक्ति में अधिक है तथा इसे रक्त में अधिक शुगर, अनियंत्रित शुगर में इस्तेमाल कर सकते हैं। मधुनाशिनी वटी और मधुकल्प वटी, दोनों के संयोजन को अनियंत्रित शुगर में डॉक्टर की सलाह पर ले सकते हैं।

दिव्य मधुनाशिनी वटी को आपको डॉक्टर की सलाह पर इस्तेमाल करना चाहिए जबकि दिव्य मधुकल्प वटी को OTC दवा की तरह से ले सकते हैं। दिव्य मधुकल्प वटी में कोई भी ऐसा द्रव्य नहीं है जिसे लेने के लिए किसी विशेष सावधानी की ज़रूरत हो।

दिव्य मधुकल्प वटी के घटक Ingredients of Divya Madhukalp Vati

  • करेला 70.3 mg Potency Heating
  • चिरायता 70.3 mg Potency Cooling
  • कटुकी 70.3 mg Potency Cooling
  • नीम 70.3 mg Potency Cooling
  • मेथी 70.3 mg Potency Heating
  • जामुन 70.3 mg Potency Cooling
  • अश्वगंधा 35.2 mg Potency Heating
  • अतीस 35.2 mg Potency Heating
  • शिलाजीत 7.8 mg
  • Excipients: Gumacacia, Talcum, Magnesium Sterate QS

Karela Momordica charantia

करेला बहुत ही जाना माना मधुमेह नाशक है। करेले के पौधे का फल है जिसे हम सब्जी की तरह खाते हैं और पत्ते सभी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। यह स्वाद में अत्यंत कड़वा लेकिन गुणों में अत्यंत हितकारी है। करेले में पाए जाने वाले पदार्थ हाइपोग्लाईसिमिक और रक्त में शुगर लेवल को कम करने वाले होते हैं।

  • करेला आसानी से पचने वाला और रूक्ष है।
  • करेला रस में कटु, तिक्त है। गुण में लघु और रूक्ष है। तासीर में यह गर्म और कटु विपाक है। कर्म में यह भेदी, दीपन, हृदय, कफाहर, वातदोषहर और रक्तदोषहर है।
  • करेले को ज्यादा मात्रा में खाने से कई नुकसान भी हैं। जैसे की यह पेट में दर्द Enteralgia और लूज़ मोशन कर सकता है। यह हाइपोग्लाईसिमिक दवाओं के असर को और बढ़ा देता है।

Swertia chirata (Kirata, Kirataka, Bhunimba, Kiratatiktaka)

चिरायता Chiretta भी एक कड़वी हर्ब है। यह खून को साफ़ करता है और ग्लूकोस के लेवल को संतुलित करता है। यह लीवर से विजातीय पदार्थों को दूर करता है। चिरायता पेट से गैस्ट्रिक जूस gatric juicesके स्राव को उत्तेजित करता है, जिससे पाचन अच्छा होता है। यह हाइपोग्लाईसिमिक है डायबिटीज में दिया जाता है। इसके अतिरिक्त यह अपच, भूख न लगना, और पाचन सम्बन्धी अन्य समस्याओं में` भी अच्छे परिणाम देता है।

किसे चिरायता का सेवन नहीं करना चाहिए: चिरायता का सेवन गैस्ट्रिक और ड्यूडेनल अल्सर में नहीं करना चाहिए।

चिरायता रस में तिक्त है। गुण में लघु और रूक्ष है। तासीर में यह शीतल और कटु विपाक है। कर्म में यह ज्वरघ्न, व्रणशोधन, सारक, कफहर, पित्तहर और रक्तदोषहर है।

Katuki (Picrorhiza kurroa)

कटुकी एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल, और एंटीडायबिटिक है। यह स्वाद में कड़वी किन्तु सूजन को दूर करने वाली औषध है। इसे मुख्य रूप से गैस्ट्रिक जूस के कम स्राव, अपच, पीलिया, हेपेटाईटिस, सूजन दूर करने में, सिरोसिस, कब्ज़, मलेरिया, पेट के कीड़ों और डायबिटीज में प्रयोग किया जाता है।

  • कटुकी रस में कटु-तिक्त है। गुण में लघु है। तासीर में यह शीतल और कटु विपाक है। कर्म में यह ज्वरघ्न, पित्तहर, भेदी, दीपन और रक्तदोषहर है।
  • कटुकी का सेवन गर्भावस्था में नहीं करना चाहिए। यह लम्बे समय तक ली जा सकने वाली हर्ब है।

Neem Azadirachta indica

  • नीम, आयुर्वेद में सर्वरोगनिवारिण औषधि है। कड़वे स्वाद के कारण यह रक्त दोषों और मधुमेह में विशेष रूप से लाभप्रद है।
  • नीम, रस में तिक्त है। गुण में लघु-रूक्ष है। तासीर में यह शीतल और कटु विपाक है। कर्म में यह ज्वरघ्न, पित्तहर, ग्राही और रक्तदोषहर है।
  • यह सूजन को दूर करने वाली और बुखार की अत्यंत अच्छी दवाई है।

Methi Trigonella foenum

  • मेथी के दाने का मधुमेह में प्रयोग सर्विदित है। मेथी के दानों को कफ रोगों, दूध क स्राव को बढ़ाने के लिए, और कोलाइटिस, हर्निया, बुखार, उल्टी, और ब्रोंकाइटिस के उपचार में प्रयोग किया जाता है।
  • मेथी रस में तिक्त है। गुण में स्निग्ध है। तासीर में यह उष्ण और कटु विपाक है। कर्म में यह वातहर, कफहर, दीपन और रुच्य है।

Jambolan Syzygium cumini

  • जामुन गुठली, मधुमेह में अत्यंत प्रभावशाली है। यह सूजन दूर करने वाली और हाइपोग्लाईसिमिक दवा है। इसमें टैनिन होने से यह संकोचक है। यह मूत्रल है और मूत्र के स्राव को बढ़ाता है।
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  • जामुन वातल, पित्तहर, कफहर, विषतम्भी और ग्राही है।

Ashvagandha Withania somnifera Dunal

अश्वगंधा आयुर्वेद की टॉनिक दवा है। यह शरीर को बल देती है। असगंध तिक्त-कषाय, गुण में लघु, और मधुर विपाक है। यह एक उष्ण वीर्य औषधि है। यह वात-कफ शामक, अवसादक, मूत्रल, और रसायन है जो की स्पर्म काउंट को बढ़ाती है।

Atis Root / Ativisha / Aconitum heterophyllum

  • अतीस पित्त वर्धक है और पाचन को सही करने वाली औषध है।
  • अतीस रस में कटु, तिक्त है। गुण में लघु और रूक्ष है। तासीर में यह गर्म और कटु विपाक है। कर्म में यह भेदी, दीपन, पाचन, कफहर, वातदोषहर है।

शिलाजीत

शिलाजीत, हिमालय की चट्टानों से निकलने वाला पदार्थ है। आयुर्वेद में औषधीय प्रयोजन के लिए शिलाजीत को शुद्ध करके प्रयोग किया जाता है। यह एक adaptogen है और एक प्रमुख आयुर्वेदिक कायाकल्प टॉनिक है। यह पाचन और आत्मसात में सुधार करता है। आयुर्वेद में, इसे हर रोग के इलाज में सक्षम माना जाता है। इसमें अत्यधिक सघन खनिज और अमीनो एसिड है।

शिलाजीत प्रजनन अंगों पर काम करता है। यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है और प्रतिरक्षा में सुधार करता है। यह पुरानी बीमारियों, शरीर में दर्द और मधुमेह में राहत देता है। इसके सेवन शारीरिक, मानसिक और यौन शक्ति देता है। शिलाजीत को हजारों साल से लगभग हर बीमारी के उपचार में प्रयोग किया जाता रहा है। आयुर्वेद में यह कहा गया है की कोई भी ऐसा साध्य रोग नहीं है जो की शिलाजतु के प्रयोग से नियंत्रित या ठीक नहीं किया जा सकता। शिलाजीत प्रमेह रोगों की उत्तम दवा है।

दिव्य मधुकल्प वटी के लाभ / फ़ायदे Benefits of Divya Madhukalp Vati

  • यह पेनक्रियास को उत्तेजित करती है।
  • यह पेन्क्रियास से संतुलित मात्रा में इन्सुइन का स्राव कराती है।
  • यह अतिरिक्त ग्लूकोस को ग्लाईकोजन में सहयोग करती है।
  • यह हाथ-पैर की जलन, बहुत पेशाब आना, बहुत प्यास लगना, नसों की दुर्बलता आदि में अच्छे परिणाम देती है।
  • यह शरीर को ताकत देती है।
  • इसमें अश्वगंधा और शिलाजीत हैं जो की शरीरिक शक्ति को बढ़ाते हैं।
  • यह मधुमेह में लम्बे समय तक बिना किसी नुकसान के प्रयोग की जा सकती है।

दिव्य मधुकल्प वटी के चिकित्सीय उपयोग Uses of Divya Madhukalp Vati

  • मधुमेह
  • कोलेस्ट्रॉल और लिपिड्स का बढ़ा स्तर
  • मधुमेह से सम्बंधित परेशानियाँ

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Divya Madhukalp Vati

  • 2 गोली, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  • इसे गुनगुने पानी के साथ लें।
  • इसे सुबह खाली पेट लें, और शाम को भोजन करने के एक घंटे पहले लें।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications

  • इस दवा में सभी हर्बल द्रव्य है इसलिए इसे लेने से कोई ज्ञात साइड इफ़ेक्ट नहीं है।
  • गर्भावस्था में किसी भी दवा का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के न करें।
  • इसे लम्बे समय तक लिया जा सकता है।
  • इसे एलोपैथिक दवाओं के साथ भी ले सकते हैं।
  • यदि कोई भी हर्बल दवा डायबिटीज के लिए लेते हैं तो शुगर चेक करना बहुत ज़रूरी है।
  • अगर शुगर नियंत्रण में है तो ठीक है नहीं तो दवा बदलने की ज़रूरत है।
  • यदि इसे एलोपैथिक दवा से इलाज़ के दौरान लिया जाता है तो आपको नियमित रूप से रक्त शर्करा का स्तर चेक कराएं। यदि दोनों दवाओं के असर से शुगर अधिक कम हो गई है ती हाइपोग्लाइसीमिया को रोकने के लिए एलोपैथिक एलोपैथिक दवाओं की खुराक कम करने की आवश्यकता हो सकती है।
  • कुछ लोगों में इसके सेवन से एसिडिटी हो सकती है। आंवले का रस एसिडिटी को कम करता है।
  • दवा के साथ साथ खान-पान और जीवनशैली में भी ज़रूरी बदलाव लायें।
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