दिव्य कांति लेप Patanjali Kanti Lep Detail and Uses in Hindi

दिव्य कान्ति लेप, स्वामी रामदेव की पतंजलि दिव्य फार्मेसी में निर्मित आयुर्वेदिक दवा है। यह दवा जड़ी-बूटियों, मोती पिष्टी, और स्फटिका से बनी है। यह एक फेस पैक है जिसे चेहरे पर नियमित देखभाल के लिए लगा सकते हैं। इसे शरीर के अन्य हिस्सों की त्वचा पर भी, एक्जिमा, शीत पित्त, जलने, सनबर्न पर लगा सकते हैं। चेहरे पर लगाने से त्वचा के अतिरिक्त आयल को सोख लेती है जिससे मुहांसे की समस्या कम होती है। त्वचा की जलन में इसे लगाने से ठंडक मिलती है।

इस फेस पैक को रोज एक बार चेहरे पर पन्द्रह मिनट तक लगा कर रखते हैं और फिर ताज़े पानी से धो लेते हैं। इसमें मेहँदी के बीज और मंजीठ है जिससे इसे लगाने के बाद चेहरा कुछ पीला सा दिखता है। इसलिए बेहतर होगा इसे जब बाहर नहीं जाना हो, शाम को लगाएं और 15 मिनट में धो लें। अगली सुबह चेहरे को अच्छे से साफ़ कर लें। इस लेप की गंध के कारण भी इसे तब लगाना चाहिए जब बाहर नहीं जाना है।

यह हर्बल है इसका कोई नुकसान नहीं है। जिन लोगों को एलो वेरा से एलर्जी है, उनको इसे लगाने पर खुजली हो सकती है। यह फेस पैक त्वचा को थोड़ा ड्राई कर देता है इसलिए ऑयली त्वचा वालों के लिए कोई दिक्कत नहीं है लेकिन ड्राई स्किन टाइप में इसे दूध-शहद मिलाकर इस्तेमाल करें तो ज्यादा बेहतर है।  यह फेस पैक लम्बे समय तक लगाने के लिए सेफ है।

दवा के बारे में इस पेज पर जो जानकारी दी गई है वह इसमें प्रयुक्त जड़ी-बूटियों के आधार पर है। हम इस प्रोडक्ट को एंडोर्स नहीं कर रहे। यह दवा का प्रचार नहीं है। हमारा यह भी दावा नहीं है कि यह आपके रोग को एकदम ठीक कर देगी। यह आपके लिए फायदेमंद हो भी सकती हैं और नहीं भी। दवा के फोर्मुलेशन के आधार और यह मानते हुए की इसमें यह सभी द्रव्य उत्तम क्वालिटी के हैं, इसके लाभ बताये गए हैं। मार्किट में इसी तरह के फोर्मुले की अन्य फार्मसियों द्वारा निर्मित दवाएं उपलब्ध हैं। इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें। हमारा उद्देश्य दवा के लेबल के अनुसार आपको जानकारी देना है।

Patanjali Divya Kanti Lep is an herbal face pack. It is applied on skin for improving skin condition. It helps in pimples, acne, blemishes, burning sensation etc. You may use it for regular skin care.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

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  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: हर्बल फेस पैक
  • मुख्य उपयोग: त्वचा की देखभाल
  • मुख्य गुण: त्वचा से तेल हटाना, ठंडक देना, एंटीसेप्टिक आदि।
  • मूल्य MRP: 1 bottle of 50 grams @ Rupees 70.00

दिव्य कान्ति लेप के घटक Ingredients of Divya Kanti Lep

प्रत्येक 5 ग्राम में:

  • एलो वेरा Kumari (Aloe vera juice) 900 mg
  • चन्दन Chandan Safed (Santalum Album) 714 mg
  • अम्बा हल्दी Amba Haldi (Curcuma Amada) 470 mg
  • कत्था Katha (Acacia Catechu) 470 mg
  • मंजीठ Manjistha (Rubia Cordifolia) 470 mg
  • बड़ी इलाइची Sthool Ela (Amomum Subulatum) 356 mg
  • जावित्री Javitri (Myristica Fragrans) 356 mg
  • मेहँदी के बीज Mehndi Beej (Lawsonia Inermis) 238 mg
  • जायफल Jaiphal (Myristica Fragrans) 238 mg
  • सुगंध बला Sugandha Bala (Valeriana Wallichii) 238 mg
  • फिटकरी Sphatik Bhasma 238 mg
  • कपूर Kapoor (Cinnamomum Camphora) 238 mg
  • मोती पिष्टी Moti Pishti (Pearl Calcium) 118 mg

कुमारी, घृत कुमारी, ग्वारपाठा, मुसब्बर वेरा आदि एलो वेरा का नाम है। यह त्रिदोषहर, शोथहर, वृष्य, और व्रण रोपण है। त्वचा के रोगों के लिए बहुत अच्छी हर्ब है। इसके पत्तों से निकले जेल को जलने, धूप से जलने, निशान, घाव और खिंचाव के निशान, सूजन, एक्जिमा, अल्सर, मुँहासे आदि पर लगाया जाता है।

चंदन (संटलम एल्बम) त्वचा को ठंडक देता है और यह त्वचा की चकत्ते और जलने में बहुत प्रभावी है।

मेहँदी के बीज (लॉसनिया इनर्मिस) से त्वचा को ठंडक मिलती है। यह सनबर्न, जलन, दर्द आदि को कम करने में सहायक है। यह प्रभावी सन ब्लॉक की तरह काम करते हैं।

अम्बा हल्दी से सूजन कम हो जाती है। यह एंटीसेप्टिक भी है। इसे त्वचाशोथ, एक्जिमा, शीत पित्त, संधिशोथ गठिया, पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस में बाहरी रूप से इस्तेमाल होती है।

मंजीठ या रूबिया कॉर्डिफ़ोलिया अतिरिक्त पित्त, गर्मी और साफ़ करने के लिए उपयोग किया जाता है। इसे एक्जिमा में खुजली, सूजन, विटिलिगो, मुँहासे, और दाद में सितेमाल करते हैं।

जायफल – मिरिस्टिका फ्रैगरन्स का उपयोग प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए किया जाता है।

सुगंध बाला (वेलेरियाना वालिची) एक कूलिंग जड़ी बूटी है जिसका इस्तेमाल सिरदर्द और नींद विकार जैसे अनिद्रा, के लिए किया जाता है।

फिटकरी को संस्कृत में स्फटिका, हिंदी में फिटकरी, इंग्लिश में पोटाश एलम कहते है।  कांक्षी, तुवरी, स्फटिका, सौराष्ट्री, शुभ्रा, स्फुटिका आदि नामों से जाना जाता है।  फिटकरी सफेद, पीले, लाल और कृष्ण की हो सकती है। स्फटिक भस्म, फिटकरी की भस्म को कहते हैं। इसे शुभ्रा भस्म के नाम से भी जानते हैं। आयुर्वेद में इसे आंतरिक और बाह्य दोनों ही तरीकों से प्रयोग करते हैं। इससे खून का बहना रुकता है और त्वचा के छिद्र सिकुड़ते हैं।

दिव्य कांति लेप के फायदे Benefits of Divya Kanti Lep

  • यह आयुर्वेदिक फेस पैक है।
  • इसे लगाने का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है।
  • यह ऑयली त्वचा से अतिरिक्त तेल को हटाता है।
  • इसमें ठंडक देने वाले द्रव्य है।
  • इसे सनबर्न में लगाने से ठंडक मिलती और त्वचा की हीलिंग होती है।
  • यह त्वचा की समस्याओं में लाभप्रद है।
  • चेहरे पर दाग-धब्बे, मुँहासे, हेर्पिज़ के दाने, धूप से निकलने वाले रैश आदि में लाभ होता है।
  • इसे लगाने से त्वचा साफ़ होती है। साफ़ त्वचा देखने में स्वस्थ्य और आकर्षक लगती है।
  • इसे लगाने से डेड स्किन, बैक्टीरिया आदि दूर होते हैं।
  • यह कीट के काटने के उपचार में सहायक भी है।
  • यह हर्पीस में उपयोगी है।
  • यह फंगस या कवक को ठीक करने में सहायक है।
  • यह मुँहासे को कम करने में मदद करता है।

दिव्य कान्ति लेप के चिकित्सीय उपयोग Uses of Divya Kanti Lep

दिव्य कान्ति लेप त्वचा की देखभाल के लिए आयुर्वेदिक फेस पैक है। यह तचा के लिए सेफ है और लम्बे समय तक इसे सितेमाल करने से त्वचा साफ़-सुथरी होती है।

  • आँखों के नीचे काले घेरे
  • कीड़ा काटना
  • चहरे पर दाग-धब्बे
  • जलने पर
  • त्वचा संक्रमण
  • धूप से चमड़ी जल जाना, सनबर्न
  • मुहांसे
  • रैश

दिव्य कान्ति लेप कैसे लगाएं?  पतंजलि कान्ति लेप की प्रयोग विधि क्या है?

  • एक टी स्पून या दो टी स्पून, पाउडर को डिब्बे से निकालें।
  • इसमें रोज़ वाटर या दूध को थोड़ी थोड़ी मात्रा कर के मिलाएं। एक बार में ज्यादा तरल नहीं डालें इसे यह एक दम पानी जैसा हो जाएगा। इसे लेप या पेस्ट जैसा रखना है जो की त्वचा पर टिके।
  • पेस्ट को अच्छे से मिलाएं।
  • लेप को उँगलियों की सहायता से त्वचा पर लगायें।
  • इसे यदि चेहरे पर लगा रहें हैं तो 15 मिनट तक लगाएं। शरीर के किसी दूसरे हिस्से पर लगा रहें है तो देर तक लगाकर रख सकते हैं।
  • तय समय लगाने के बाद इसे पानी से धो लें। साबुन या किसी फेस वश का इस्तेमाल नहीं करें।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications

  • यह तेल केवल बाह्य प्रयोग के लिए है।
  • इसे प्रभावित स्थान पर लगायें।
  • इसे नियमित लगाएं।
  • यदि लगाने पर रैश, खुजली, आदि हो तो इसे न लगाएं।
  • कटे हुए घाव पर इसे नहीं लगाएं।
  • इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  • इसमें एलो वेरा है जिससे कुछ लोगों को एलर्जी होती है।
  • इसे लगाने के बाद चेहरा कुछ पीला सा दिख सकता है। ऐसा इसमें मेहँदी के बीज, मंजीठ और अन्य जड़ी बूटियों के कारण है। इसका कोई नुकसान नहीं है।
  • कुछ लोगों को इसकी गंध तेज लगती है।
  • इससे त्वचा ड्राई हो सकती है।

अन्य सुझाव

  • चेहरे को 3-4 बार साफ पानी से रिंज करें। साबुन नहीं लगाएं। चेहरे को या तो अपने आप सूखने दें या साफ़ तौलिये या रुमाल से पैट ड्राई करें।
  • बालों में रूसी है तो उसका इलाज़ करें।
  • कब्ज़ को दूर करें। रात को सोते समय त्रिफला पाउडर का सेवन करें। मुनक्का और किशमिश खाने से भी पेट साफ़ होता है।
  • पिम्पल्स को किशोरावस्था में आप पूरी तरह से अवॉयड नहीं कर सकते। समय के साथ इनका निकलना भी बंद हो जाएगा।
  • अगर किशोरावस्था के बाद भी, पिम्पल निकलने जारी रहते हैं तो डॉक्टर से मिलें। कई बार यह शरीर में हार्मोनल असंतुलन को दिखाते हैं, जैसे की PCOD की समस्या। पीसीओडी, पोलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम हैं जिसमें ओवरी के अंदर सिस्ट बन जाते हैं और शरीर में होर्मोन का असंतुलन रहता है।
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  • खाने में भारी भोजन, तेल, खटाई, आदि का सेवन नहीं करें और सुपाच्य भोजन, ताज़े फल और सब्जियों का सेवन करें।
  • त्वचा पर आयल कम करें और पिम्पल को न छुएं।
  • ऑयली फ़ूड, डेयरी प्रोडक्ट्स, जंक फ़ूड, मिठाई, चाकलेट फिज़्जी ड्रिक्स और कैफीन का सेवन कम करें, इनका अधिक मात्रा में सेवन करने से मुँहासे और त्वचा संबंधी अन्य समस्याएँ हो जाती हैं।
  • पिम्पल को दबाएँ या फोड़े नहीं। इससे सूजन और ज्यादा होगी, तेल अधिक बनेगा और बैक्टीरियल इन्फेक्शन होगा। इन्फेक्टेड पिम्पल से चेहरे पर घाव और गड्डे हो जायेंगे और चेहरे की त्वचा चिकनी नहीं रहेगी।
  • पानी दिन में ज्यादा पियें और कुछ एक्सरसाइज़ करें।
  • तनाव कम करने की कोशिश करें और प्राणायाम करें।
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