चरक प्रोस्टीज़ Charak Prosteez Tablet Detail and Uses in Hindi

प्रोस्टीज़ चरक फार्मेसी द्वारा निर्मित एक हर्बल-मिनरल आयुर्वेदिक दवाई है जो की केवल पुरुषों के लिए है। इसे प्रोस्ट्रेट के बढ़ जाने व प्रोस्ट्रेट की सूजन में दिया जाता है। यह एंटीऑक्सीडेंट, सूजन को दूर करने वाली, एंटीसेप्टिक, और मूत्रल दवा है। इसमें कांचनार, सोयाबीन, गोखरू, वरुण, गिलोय आदि समेत शिलाजीत और यशद भस्म भी है।

पुरुषों में प्रोस्ट्रेट के बढ़ जाने के कारण पेशाब की रूकावट की दिक्कत हो जाती है जिससे पेशाब का संक्रमण, मूत्र करते समय दर्द, ब्लैडर का पूरा न खाली होना आदि परेशानियाँ होने लगती हैं। ऐसे में प्रोस्टीज़ का सेवन प्रोस्ट्रेट के टिश्यू के बढ़े आकार को कम करने में सहायता करता है, प्रोस्ट्रेट के सही काम करने में सहयोग करता है और मूत्रल गुणों में कारण शरीर में पेशाब के रुकने की समस्या में भी आराम देता है।

इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें।

Prosteez is herbomineral proprietary Ayurvedic medicine from Charak Pharma. It is indicated in BPH and Prostatitis. Open-label, non-comparative, multicentric study conducted on Prosteez, concluded that Prosteez tablet significantly reduced serum prostate specific antigen (PSA) levels (16%), residual urine volume (32%) and prostate volume (12.6%).

The symptoms scores as per AUA-SI (American Urological Association – Symptom Index) showed a reduction of 18.6%. There were no adverse events reported by any patients and all the laboratory indices remained unaffected by Prosteez tablet.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

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  1. निर्माता: चरक फार्मेसी
  2. उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  3. दवाई का प्रकार: हर्बल – मिनरल युक्त आयुर्वेदिक, प्रोप्राइटरी
  4. मुख्य उपयोग: पुरुषों में पौरुष ग्रंथि का बढ़ जाना
  5. मुख्य गुण: प्रोस्ट्रेट के सही काम करने में सहयोग करना, मूत्रल
  6. मूल्य MRP: 20 tablets @ ₹114.00

चरक प्रोस्टीज़ के घटक Ingredients of Charak Prosteez Tablet

हर टेबलेट में:

  1. सा पलमेटो Saw palmetto (Serenoa repens) 75 mg
  2. कंकोल Kankola (Piper cubeba) 50 mg
  3. गिलोय Guduchi (Tinospora cordifolia) 100 mg
  4. त्रिफला Triphala 100 mg
  5. वरुण Varun (Crataeva Nurvala) 200 mg
  6. गोखरू Gokshur (Tribulus terrestris) 200 mg
  7. सोयाबीन Soya (Glycine soja) 200 mg
  8. कांचनार Kanchanar (Bauhinia variegate) 250 mg
  9. यशद भस्म Yashad Bhasma 10 mg
  10. शुद्ध शिलाजीत Shilajit Shuddha 25 mg

वरुण आयुर्वेद में मूत्र रोगों के लिए प्रयोग किया जाता है। इसमें मूत्रल गुण है तथा यह गुर्दे की पथरी, पेशाब में जलन, मूत्रकृच्छ आदि में अत्यंत उपयोगी है। वरुण में दीपन, भेदी और वात-कफ हर गुण हैं। यह प्रोस्टेट के साइज़ को बढ़ने से भी रोकता है।

गोखरू आयुर्वेद की एक प्रमुख औषधि है। इस मुख्य रूप से पेशाब रोगों और पुरुषों में यौन कमजोरी के लिए प्रयोग किया जाता है। यह शीतल, मूत्रशोधक, मूत्रवर्धक, वीर्यवर्धक, और शक्तिवर्धक है। इसके सेवन से किडनी/गुर्दे के विकार, प्रजनन अंगों की कमजोरी-संक्रमण, आदि दूर होते हैं।

सोयाबीन के एक्सट्रेक्ट का सेवन उच्च कोलेस्ट्रोल और लिपिड के लेवल को कम करता है। यह उन एंजाइम को भी रोकता है जो की प्रोस्ट्रेट के टिश्यू को बढ़ाते हैं।

गिलोय आयुर्वेद की बहुत ही मानी हुई औषध है। इसे गुडूची, गुर्च, मधु]पर्णी, टिनोस्पोरा, तंत्रिका, गुडिच आदि नामों से जाना जाता है। यह एक बेल है जो सहारे पर कुंडली मार कर आगे बढती जाती है। इसे इसके गुणों के कारण ही अमृता कहा गया है। यह जीवनीय है और शक्ति की वृद्धि करती है। इसे जीवन्तिका भी कहा जाता है। गिलोय वात-पित्त और कफ का संतुलन करने वाली दवाई है। यह रक्त से दूषित पदार्थो को नष्ट करती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।

त्रिफला (फलत्रिक, वरा) आयुर्वेद का सुप्रसिद्ध रसायन है। यह आंवला, हर्र, बहेड़ा को बराबर मात्रा में मिलाकर बनता है। यह रसायन होने के साथ-साथ एक बहुत अच्छा विरेचक, दस्तावर भी है। इसके सेवन से पेट सही से साफ़ होता है, शरीर से गंदगी दूर होती है और पाचन सही होता है। यह पित्त और कफ दोनों ही रोगों में लाभप्रद है। त्रिफला प्रमेह, कब्ज़, और अधिक पित्त नाशक है।

कांचनार त्रिदोषहर, ग्राही, दीपन और शीतल है। आयुर्वेद में इसे बढ़े हुए ग्लैंड के लिए दिया जाता है।

सा पलमेटो, सेरेनोएइ रेपेन्स के फल का एक्सट्रेक्ट है। सेरेनोएइ रेपेन्स का पौधा एक छोटा पाम है जो को 7-10 फीट की उंचाई तक बढ़ता है। यह दक्षिण-पूर्व अमेरिका के सवाना का मूल निवासी है।

सा पलमेटो के सूखे फलों में फैटी एसिड्स और फाईटेस्टेरोल होते हैं और इसे मुख्य रूप से पेशाब रोगों और बिनाइन प्रोसटेटिक हाइपरप्लेजिया अथवा बीपीएच के उपचार में प्रयोग किया जाता है। इसका प्रयोग प्रोस्ट्रेट की सर्जरी की आवश्यकता को भी दूर करता है। यह सूजन, शरीर में अधिक पानी, पेशाब रोगों के लिए अच्छी दवा है।

सा पलमेटो एंटीकोएगोलेंट दवाओं के साथ इंटरैक्ट कर सकता है और यह सर्जरी के दौरान ब्लीडिंग के रिस्क को बढ़ा सकता है। इसका Anti-Androgenic असर है जिससे यह टेस्टोस्टेरोन के असर को कम करता है।

शिलाजीत पहाड़ों से प्राप्त, सफेद-भूरा मोटा, चिपचिपा राल जैसा पदार्थ है (संस्कृत शिलाजतु) जिसमे सूजन कम करने, दर्द दूर करने, अवसाद दूर करने, टॉनिक के, और एंटी-ऐजिंग गुण होते हैं। इसमें कम से कम 85 खनिजों पाए जाते है। शिलाजीत एक टॉनिक है जो पुरुषों में यौन विकारों के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

  • शिलाजीत रस में अम्लीय और कसैला, कटु विपाक और समशीतोष्ण (न अधिक गर्म न अधिक ठंडा) है।
  • ऐसा माना जाता है, संसार में रस-धातु विकृति से उत्पन्न होने वाला कोई भी रोग इसके सेवन से दूर हो जाता है। शिलाजीत शरीर को निरोगी और मज़बूत करता है।
  • यह पुरुषों के प्रमेह की अत्यंत उत्तम दवा है।

चरक प्रोस्टीज़ के लाभ/फ़ायदे Benefits of Charak Prosteez

  1. यह दवा प्रोस्ट्रेट के साइज़ को कम करती है।
  2. इसके सेवन से पेशाब की रूकावट में आराम होता है।
  3. यह पेशाब की जलन, इन्फेक्शन में भी लाभप्रद है।
  4. यह प्रोस्ट्रेट के सही काम करने को बढ़ावा देती है।
  5. यह आयुर्वेदिक दवा है।

चरक प्रोस्टीज़ के चिकित्सीय उपयोग Uses of Charak Prosteez

  1. BPH (Benign Prostate Hyperplasia) बिनाइन हायपरप्लेजिया ऑफ प्रोस्टेट या बीपीएच ग्रेड 1
  2. प्रोस्ट्रेट की सूजन Prostatitis (Non-infectious inflammation of prostate) Category 3

Benign Prostatic Hyperplasia, BPH क्या है?

  1. बिनाइन हायपरप्लेजिया ऑफ प्रोस्टेट या बीपीएच, प्रोस्टेट या पौरुष ग्रंथि की आयु के साथ होनेवाली असामान्य वृद्धि को कहते है।
  2. प्रोस्टेट ग्रंथि पुरुष प्रजनन प्रणाली हिस्सा है। यह मूत्राशय के नीचे स्थित होती है। मूत्र नलिका इसके बीच से होकर गुजरती है।

प्रोस्टेट ग्रंथि आयु के साथ बढ़ती रहती है। इसके अधिक बढ़ जाने से मूत्र नलिका पर दबाव पड़ता है और वह सिकुड़ जाती है। इस कारण ब्लैडर/मूत्राशय प्रोस्टेट पूरी तरह से खाली नहीं हो पाता और हमेशा उसमें कुछ यूरिन या मूत्र बच जाता है।

  1. शरीर में मूत्र इकठ्ठा हो जाता है और मूत्र सम्बन्धी दिक्कतें हो जाती हैं जैसे की
  2. बार-बार पेशाब करने की इच्छा होना, ख़ासकर रात में
  3. पेशाब का सही से न होना, धार का कमजोर होना, बंद होना फिर होना, बूँद-बूँद मूत्र का जाना
  4. पेशाब जाने के बाद भी पेशाब लगना

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Charak Prosteez

  1. 2 गोली, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  2. इसे पानी के साथ लें।
  3. इसे लगातार 3 से 6 महीने लें।
  4. या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

उपयोगी सुझाव/ सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications

  1. पर्याप्त मात्रा में पानी पियें।
  2. डीहाइड्रेशन न होने दें।
  3. संतुलित आहार लें।
  4. कब्ज़ न होने दें।
  5. इस दवा में कई मूत्रल जड़ी-बूटियाँ हैं, इसलिए जो लोग उच्चरक्तचाप की दवा लेते हैं, डाईयूरेटिक का सेवन करते हैं वे इसके सेवन में विशेष सावधानी रखें।
  6. दवा का परिणाम एक-डेढ़ महीने बाद दिखता है।
  7. दवा के सेवन से यदि जी मिचलाना, उलटी आना, चक्कर आना, कब्ज़, लूज़ मोशन, सिर दर्द आदि हो तो दवा का सेवन रोक दें और डॉक्टर से संपर्क करें।
  8. यदि दवा आपको सूट करे तो, सेवन जारी रखें।
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