माँ के दूध (Breast Milk) को बढ़ाने के घरेलू उपचार और दवाएं

जनिये मां के दूध को कैसे बढ़ाएं how to increase breast milk production in hindi mother milk increase tips, ब्रैस्ट फीडिंग mothers का खाना breastfeeding mother diet chart, mother diet during breastfeeding and breastfeeding problems in hindi.

शिशु के लिए माँ का दूध ही सबसे उत्तम है। इसका कोई अन्य विकल्प नहीं हो सकता। यह ताज़ा, शुद्ध, जीवाणु-कीटाणु रहित, स्वास्थ्यवर्धक व पौष्टिक होता है। माँ के दूध में 1.5 % प्रोटीन, 7% कार्बोहायड्रेट, 3.5% वसा, 0.2% लवण और करीब 89% पानी होता है। यह शिशु को ताकत देता है और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। प्रसूति के बाद यह महिला को गर्भावस्था में बढ़े हुए वज़न को भी कम करने में मदद करता है।

नवजात शिशु में पाचन तन्त्र बहुत नाजुक होता है और उसमें अभी भी विकास चल ही रहा होता है। माँ का दूध, बच्चे के पाचन के अनुसार ही होता है और आसानी से पच जाता है। इस दूध में बहुत से पोषक तत्व होते हैं जो की पशुओं के दूध और फार्मूला मिल्क में नहीं होते। इसके अतिरिक्त यह शरीर के तापमान पर होता है और बच्चे के सीधे मुंह में जाता है। बच्चा अपनी भूख के अनुसार यह दूध पी लेता है और फिर सो जाता है। सोते समय बच्चे की शक्ति बचती है और उसमें अन्य विकास जारी रहते हैं।

कुछ मामलों में यह देखा जाता है कि डिलीवरी के बाद माता के स्तनों में दूध नहीं उतरता या अपर्याप्त मात्रा में उतरता है। दूध न मिलने से बच्चा भूखा रहता है और रोता रहता है। बाहरी दूध देने से बच्चे में इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

Loading...

प्रसुताओं में दूध की कमी के कारण

नई माता में दूध कम मात्रा में बनने के कई कारण हैं। उनमें से कुछ नीचे दिए गए हैं:

  1. कमजोरी
  2. खून की कमी
  3. हॉर्मोन की कमी
  4. होर्मोन कॉण्ट्रासेप्टिव का प्रयोग
  5. बार-बार दूध न पिलाना
  6. तनाव, दुखी रहना
  7. ब्रेस्ट सर्जरी
  8. कोल्ड-फ्लू, तथा अन्य दवाओं का सेवन
  9. थाइरोइड लेवल कम या ज्यादा होना
  10. बहुत क्रोध करना
  11. वात्सल्य की कमी
  12. उपवास करना

दुग्धवर्धन के लिए घरेलू उपचार Home Remedies

यदि माता को ऐसा लगे की दूध की मात्रा कम है तो उसे खाने-पीने और हर्बल औषधियों के माध्यम से दूध के उत्पादन को बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। जितनी बार हो सके बच्चे को दूध पिलाना चाहिए जिससे दूध बनना स्टीमुलेट हो सके। निपप्ल्स को साफ़ रखना चाहिए और बच्चे को ठीक से गोदी में लेकर बैठ कर दूध पिलाना चाहिए। यह भी ध्यान रखना चाहिए बच्चा दिन में कई बार पेशाब करे और ठीक मोशन करे। नीचे कुछ घरेलू उपचार दिए गए हैं जो की दूध की मात्रा बढ़ाने में उपयोगी हैं।

  1. शतावरी का चूर्ण, 1 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम गर्म दूध में चीनी मिलाकर सेवन करें।
  2. जीरे का चूर्ण ground cumin seeds in grinder to make a powder बनाकर रख लें और दिन में दो-तीन बार एक टी स्पून की मात्रा में खाएं और पानी पी लें।
  3. सौंफ चबा कर खाएं।
  4. सौंफ + जीरा + मिश्री, को अलग-अलग पीस का चूर्ण बना ले। इसे बराबर मात्रा में मिलें और दिन में दो बार, सुबह और शाम एक चम्मच की मात्रा में दूध के साथ दें।
  5. मेथी दाना को अंकुरित करके खाएं या पीस कर चूर्ण बना लें और दूध में एक चम्मच मिलाकर पिए। ऐसा दिन में तीन बार करें।
  6. तिल को अच्छी तरह चबाकर एक चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सेवन करें।
  7. चुकंदर, पका पपीता, गाजर, अंगूर, अनार, उरद आदि का सेवन करें।
  8. दूध पियें और मेवे खाएं।
  9. दूध में सोंठ डाल आकर उबाल लें और पियें।
  10. किशमिश को दूध में उबाल कर खाएं।
  11. बच्चा जब भी भूख से रोये उसे दूध पिलायें जिससे ब्रेस्ट खाली हो जाएँ जिससे और दूध बने।
  12. लहसुन, जीरा, सिंघाड़ा, सुंफ़सौंफ आदि को भोजन में शामिल करें।
  13. पानी सही मात्रा में पियें।
  14. पौष्टिक भोजन करें।
  15. दूध पिलाने से पहले ब्रेस्ट पर गर्म सेंक करें जिससे खून का दौरा ठीक हो।
  16. कैस्टर आयल से ब्रेस्ट मसाज करें।

माँ का दूध बढ़ाने में उपयोगी आयुर्वेदिक दवाएं

  1. Galakol Granules by Charak
  2. Lactin by SAS Pharma
  3. Lactoplus Granules by Abhinav Health care
  4. Satavarex by Zandu

सभी महिलायों को प्रसूति के बाद अपने बच्चे को दूध पिलाना चाहिए। बच्चे के लिए माँ के दूध से बढ़िया कोई भी आहार नहीं है। शुरुवाती छः महीने में तो माँ का दूध ही बच्चे के लिए पूरा आहार है। यह न केवल बच्चे का स्वास्थ्य ठीक रखता है, अच्छी ग्रोथ में मदद करता है अपितु माँ में शिशु के प्रति वात्सल्य भी बढ़ाता है। किसी भी माँ को अपने बच्चे को दूध पिलाने में संकोच नहीं करना चाहिए। यह बच्चे का अधिकार है और माँ का कर्तव्य। महिला को यह भाव कभी नहीं लाना चाहिए की इससे उसके स्तनों पर दुष्प्रभाव पड़ेगा अथवा उसका टाइम वेस्ट होगा। महिला को मन में कोई भी ऐसी धारणा नहीं रखनी चाहिए और यदि दूध कम भी उतरता हो तो भी चेष्टा जारी रखनी चाहिए क्योंकि बच्चे के चूसने से ही और दूध का स्राव होता है। चेष्टा छोड़ देने पर स्तन में दूध आना बंद हो जाता है। यह ध्यान रखें, बच्चे के लिए माँ का दूध अमृत है और सही शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

Loading...
Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.