त्रिबंगशिला Zandu Tribangshila Detail and Uses in Hindi

त्रिबंगशिला, झंडु द्वारा निर्मित आयुर्वेदिक दवा है। यह दवा शरीर में रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करती है। इसमें आयुर्वेद के जाने माने मधुमेह नियंत्रित करने वाले द्रव्य, जैसे की नीम, गुडमार, ]जामुन आदि हैं जो की एंटीऑक्सीडेंट और एंटीडायबिटिक है।

इस दवा को Diabetes मधुमेह के उपचार में प्रयोग किया जाता है। मधुमेह वह रोग है जिसमें रक्त में ग्लूकोज या शुगर का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। बढ़ा हुआ रक्त-शर्करा का स्तर शरीर में हर अंग को प्रभावित करता है। इसलिए यह अवाश्यक है की इसे नियंत्रित रखा जाये।

इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है. कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें।

Zandu Tribangshila is an Ayurvedic medicine used in management of diabetes. It helps to control blood sugar level.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

  • निर्माता: झंडु
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: हर्बल आयुर्वेदिक
  • मुख्य उपयोग: मधुमेह को नियंत्रित करना
  • मुख्य गुण: एंटीडायबिटिक
  • मूल्य MRP: Tribangshila 30 Tab – Rupees 70

त्रिबंगशिला के घटक Ingredients of Tribangshila

  1. नीम Nimb patra (Melia azadirachta) 80 mg
  2. गुड़मार Gudmar(Gymnema sylvestre) 80 mg
  3. जामुन एक्सट्रेक्ट Jamubul Ext. (Eugenia jambolana) 40 mg
  4. ममेजवा Mamejawa Ext.(Enicosterna littorale) 40 mg
  5. शिलाजीत Shilajit 40 mg
  6. यशद भस्म Yashad Bhasma 20 mg
  7. बंग भस्म Bang Bhasma 10 mg

1- नीम, आयुर्वेद में सर्वरोगनिवारिण औषधि है। कड़वे स्वाद के कारण यह रक्त दोषों और मधुमेह में विशेष रूप से लाभप्रद है। नीम, रस में तिक्त है। गुण में लघु-रूक्ष है। तासीर में यह शीतल और कटु विपाक है। कर्म में यह ज्वरघ्न, पित्तहर, ग्राही और रक्तदोषहर है। यह सूजन को दूर करने वाली और बुखार की अत्यंत अच्छी दवाई है।

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2- गुड़मार Gymnema Sylvestre को मधुनाशनी के नाम से जाना जाता है गुड़मार का शाब्दिक अर्थ है वह जो चीनी को नष्ट करे। गुड़मार के पत्ते मुख्य रूप से औषधीय प्रयोजन के लिए उपयोग किये जाते है। इसका सेवन मधुमेह में बढ़ी हुई रक्तशर्करा को कम करता है। यह मधुमेह, जिसे डायबिटीज भी कहा जाता है, के उपचार में प्रभावी है। गुड़मार के पत्ते स्वाद में कुछ नमकीन-कड़वे होते हैं तथा इन्हें चबाने पर जीभ की स्वाद करने की क्षमता कुछ समय के लिए नष्ट हो जाती है। इसी कारण इसे मधुनाशनी भी कहा जाता है। यह जड़ी-बूटी बहुत सी एंटी-डायबिटिक दवाओं की एक महत्वपूर्ण घटक है। गुड़मार पाउडर Gudmar Leaf Powder के सेवन से शुगर नियंत्रण में रहती है.

3- गुड़मार प्लाज्मा, रक्त, वसा और प्रजनन अंगों पर काम करता है। यह मूत्रल और भूख बढ़ाने वाला है। इसके पत्तों, जड़ के चूर्ण और काढ़े को अकेले ही या अन्य जड़ी-बूटियों के साथ प्रयोग किया जाता है। चरक संहिता के अनुसार, यह स्तन के दूध से दुर्गन्ध को दूर करती है। यह विरेचक है। इसका पौधा, कड़वा कसैला, तीखा, उष्ण, सूजन दूर करने वाला, पीड़ानाशक, पाचक, यकृत टॉनिक, मूत्रवर्धक, उत्तेजक, कृमिनाशक, विरेचक, ज्वरनाशक और गर्भाशय टॉनिक है।

4- जामुन गुठली, मधुमेह में अत्यंत प्रभावशाली है। यह सूजन दूर करने वाली और हाइपोग्लाईसिमिक दवा है। इसमें टैनिन होने से यह संकोचक है। यह मूत्रल है और मूत्र के स्राव को बढ़ाता है। जामुन वातल, पित्तहर, कफहर, विषतम्भी और ग्राही है।

5- शिलाजीत, हिमालय की चट्टानों से निकलने वाला पदार्थ है। आयुर्वेद में औषधीय प्रयोजन के लिए शिलाजीत को शुद्ध करके प्रयोग किया जाता है। यह एक adaptogen है और एक प्रमुख आयुर्वेदिक कायाकल्प टॉनिक है। यह पाचन और आत्मसात में सुधार करता है। आयुर्वेद में, इसे हर रोग के इलाज में सक्षम माना जाता है। इसमें अत्यधिक सघन खनिज और अमीनो एसिड है।

शिलाजीत प्रजनन अंगों पर काम करता है। यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है और प्रतिरक्षा में सुधार करता है। यह पुरानी बीमारियों, शरीर में दर्द और मधुमेह में राहत देता है। इसका सेवन शारीरिक, मानसिक और यौन शक्ति देता है। शिलाजीत को हजारों साल से लगभग हर बीमारी के उपचार में प्रयोग किया जाता रहा है। आयुर्वेद में यह कहा गया है की कोई भी ऐसा साध्य रोग नहीं है जो की शिलाजतु के प्रयोग से नियंत्रित या ठीक नहीं किया जा सकता। शिलाजीत प्रमेह रोगों की उत्तम दवा है।

शिलाजीत प्रजनन अंगों पर काम करता है। यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है और प्रतिरक्षा में सुधार करता है। यह पुरानी बीमारियों, शरीर में दर्द और मधुमेह में राहत देता है। इसके सेवन शारीरिक, मानसिक और यौन शक्ति देता है।

6- वंग या बंग भस्म, स्टेनम या टिन की भस्म है। इसे आयुर्वेद में हल्का, दस्तावर, रूखा, गर्म, पित्तकारक माना गया है। इसे मुख्य रूप से प्रमेह, कफ, कृमि, पांडू, श्वास रोगों में प्रयोग किया जाता है। शुद्ध वांग को सम्पूर्ण प्राकर के प्रमेहों को नष्ट करने वाला कहा गया है। बंग भस्म का सेवन शरीर को बल देता है, इन्द्रियों को शक्ति देता है और पुरुषों के सभी अंगों को ताकत से भरता है तथा पुरुष होर्मोन का भी अधिक स्राव कराता है। यह मुख्य रूप से प्रजनन अंगों के लिए ही उपयोगी है। बंग भस्म वाजीकारक भी है।

त्रिबंगशिला के लाभ/फ़ायदे Benefits of Tribangshila

  1. यह पेनक्रियास को उत्तेजित करती है।
  2. यह पेन्क्रियास से संतुलित मात्रा में इन्सुइन का स्राव कराती है।
  3. यह अतिरिक्त ग्लूकोस को ग्लाईकोजन में सहयोग करती है।
  4. यह हाथ-पैर की जलन, बहुत पेशाब आना, बहुत प्यास लगना, नसों की दुर्बलता आदि में अच्छे परिणाम देती है।
  5. यह शरीर को ताकत देती है।
  6. इसमें यशद भस्म, वंग भस्म, शिलाजीत हैं जो की शरीरिक शक्ति को बढ़ाते हैं।

त्रिबंगशिला के चिकित्सीय उपयोग Uses of Tribangshila

  1. मधुमेह
  2. कोलेस्ट्रॉल और लिपिड्स का बढ़ा स्तर
  3. मधुमेह से सम्बंधित परेशानियाँ

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Tribangshila

  • 2-4 गोली, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  • इसे गुनगुने पानी के साथ लें।
  • इसे सुबह खाली पेट लें, और शाम को भोजन करने के एक घंटे पहले लें।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications

  1. इस दवा के सेवन के दौरान ब्लड शुगर लेवल की बराबर जांच करते रहें।
  2. इसे आप एलोपैथी की दवा के सेवन के दौरान भी ले सकते हैं।
  3. जब शर्करा स्तर नियंत्रित हो जाए अलोपथिक दवा की मात्रा कम कर दें। दवा का काम ब्लड शुगर को कम करना है, इसलिए इसका सेवन केवल निर्धारित मात्रा में ही करें।
  4. गर्भावस्था में किसी भी दवा का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के न करें।
  5. इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  6. इसे ज्यादा मात्रा में न लें।
  7. निर्धारित मात्रा में लेने से इसका कोई साइड-इफेक्ट नहीं है।
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