तरुणी कुसुमाकर चूर्ण Taruni Kusumakar Churna Detail and Uses in Hindi

तरुणी कुसुमाकर चूर्ण एक शास्त्रीय आयुर्वेदिक दवा है। यह कब्ज से आराम पाने के लिए एक ओटीसी हर्बल पाउडर है। इस दवा का मुख्य घटक सनाय की पत्ती है। सनाय दस्तावर, रेचक, कसैला, कड़वा, तीखा, गर्मी पैदा करने, जिगर टॉनिक और पित्त स्राव को बढ़ाने वाला है।

यह कभी कभी कब्ज के इलाज के लिए एक अच्छी दवा है। लेकिन कब्ज के इलाज के लिए अक्सर इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसमें लवण हैं इसलिए इसका सेवन वे लोग न करें जिन्हें उच्च रक्तचाप है या कम नमक सेवन की सलाह दी गई है। जिन पुरुषों में वीर्य की समस्या हो, वे यवक्षार का प्रयोग न करें।

इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें।

Taruni Kusumakar Churna is an herbal Ayurvedic medicine. This can be taken to get relief from occasional constipation. It contains Senna leaves, Yavakshaar and Salts and hence it should not be used continuously.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: हर्बल आयुर्वेदिक
  • मुख्य उपयोग: विरेचक
  • मुख्य गुण: कब्ज़नाशक

तरुणी कुसुमाकर चूर्ण के घटक Ingredients of Taruni Kusumakar Churna

  1. सनाए के पत्ते Sanai Cassia angustifolia Vahl 12gm
  2. गुलाबकी पंखुड़ियाँ Gulab Pankhudiyaan Rosa centifolia Linn 1gm
  3. सेंधा नमक Sendha Namak Sodii chloridum 1gm
  4. काला नमक Kala Namak Unaqua Sodium chloride 1gm
  5. सफ़ेद जीरा Safed Jira Cuminum cyminum Linn 1gm
  6. काला नमक Kala Jira Carum carvi Linn 1gm
  7. यवक्षार Yavakshar Potasii carbonas 1gm
  8. हरीतकी Haritaki Terminalia chebula Retz। 1gm
  9. सोंठ Shunthi Zingiber officinale Roscoe 1gm
  10. काली मिर्च Kali Mirch Piper nigrum Linn 1gm
  11. पिप्पली Pippali Piper longum Linn 1gm
  12. बोरेक्स Tankan Sodii biboras 1gm
  13. इलाइची Ilaichi Elettaria cardamomum each 1gm

सनाय का लैटिन नाम या वानस्पतिक नाम केसिया अंगस्टीफोलिया है और यह लेगुमिनेसी कुल का बहुवर्षीय पौधा है। इसे हिन्दी में सनाय, अंग्रेजी में इंडियन सेन्ना, राजस्थानी में सोनामुखी कहते हैं। सनाय का पौधा काँटे रहित व झाड़ीनुमा होता है जिसकी ऊँचाई 2।0 से 4।0 फुट तथा शाखायें टेढ़ी मेढ़ी होती हैं। शीतकाल में चमकीले पीले रंग के फूल खिलते हैं। इसकी फली हल्के रंग की होती है व पकने पर गहरे भूरे रंग की हो जाती है | बीज भी भूरे रंग के होते हैं।

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यह बंजर भूमि में उगता है है तथा इसके पौधे को कोई पशु नहीं खाता। एक बार लगा दिए जाने पर कई वर्षों तक इसका औषधीय प्रयोग किया जा सकता है।

सनाय मुख्य रूप से रेचक और दस्तावर है और इसलिए इसे प्रमुखता से विबंध / कब्ज़ को दूर करने के दवाओं के निर्माण में प्रयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त इसे अन्य बहुत से रोगों जिए की चर्म रोगों, पीलिया, अस्थमा, मलेरिया, बुखार, अपच आदि में भी प्रयोग किया जा रहा है ।

त्रिकटु चूर्ण में तीन (त्रि) कटु पिप्पली long pepper, काली मिर्च black pepper और सोंठ dry ginger बराबर मात्रा में मिला कर बनाये जाते हैं। त्रिकटु पाचन और श्वास सम्बन्धी समस्याओं में लाभकारी है। त्रिकटु आम दोष (चयापचय अपशिष्ट और विषाक्त पदार्थों), जो सभी रोग का मुख्य कारण है उसको दूर करता है। यह बेहतर पाचन में सहायता करता है और कब्ज करता है। यह यकृत को उत्तेजित करता है। यह तासीर में गर्म है और कफ दोष के संतुलन में मदद करता है।

यवक्षार स्वाद में कटु और नमकीन है, गुण में रूखा करने वाला, लघु और तेज है। स्वभाव से गर्म है और कटु विपाक है। आयुर्वेद में यवक्षार को मुख्य रूप से कफ रोगों, जलोदर ascites, पथरी, पेशाब में जलन, प्लीहा-यकृत रोगों, हृदय के लिए टॉनिक और रक्त पित्त में प्रयोग किया जाता है। यह बहुत ही कटु, गर्म है और इसलिए इसका बहुत अधिक प्रयोग न करें।

टंकण, टंकन, टैंक, टंगन, द्रावक, टंकणक्षार, रंगक्षार, रंग, रंगद, सौभाग्य, धातुद्रावक, क्षारराज आदि सभी सुहागे या बोरेक्स के नाम हैं। आयुर्वेद में सुहागे को बहुत प्राचीन समय से दवा की तरह आंतरिक और बाह्य रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे स्वभाव से गर्म माना गया है। यह पित्तवर्धक और कफनाशक है। सुहागा अग्निवर्धक, विष, ज्वर, गुल्म, आम, शूल, और कासनाशक है। यह भेदक, कामोद्दीपक, पित्तजनक है। यह वमन, वातरक्त, और खांसी को दूर करने वाला है।

इला / इलायची, के बीज त्रिदोषहर, पाचक, वातहर, पोषक, विरेचक और कफ को ढीला करने वाला है। यह मूत्रवर्धक है और मूत्र विकारों में राहत देता है। इलाइची के बीज अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, गले के विकार, बवासीर, गैस, उल्टी, पाचन विकार और खाँसी में उपयोगी होते हैं।

तरुणी कुसुमाकर चूर्ण के लाभ/फ़ायदे Benefits of Taruni Kusumakar Churna

यह मलावरोध को दूर करता है। मलावरोध प्रायः लीवर के ठीक से काम न करने, पाचन की कमजोरी, या किसी अन्य कारण से हो सकता है। मलावरोध के कारण अन्य बहुत से लक्षण उत्पन्न हो जाते है जैसे की अफारा, भूख न लगना, सही से पदार्थों का अवशोषण न होना आदि। ऐसे में इस चूर्ण के सेवन से लाभ होता है।

  • यह आँतों की सफाई करता है।
  • मलावरोध के दूर होने से लीवर रोगों में लाभ होता है।
  • यह शरीर से दूषित पदार्थों को दूर करता है।

तरुणी कुसुमाकर चूर्ण के चिकित्सीय उपयोग Uses of Taruni Kusumakar Churna

इस चूर्ण के सेवन से कब्ज़ दूर होता है तथा पेट साफ़ होता है। यह यकृत जिसे अंग्रेजी में लीवर कहते हैं, के रोगों में भी लाभप्रद है। इसे क्रोनिक कब्ज, सिर दर्द, मुँह के छाले, एसिडिटी, जलन, और शरीर में ज्यादा पित्त होने पर इस्तेमाल किया जाता है।

  1. विबंध / कब्ज़ / मलावरोध / पुराना कब्ज
  2. एसिडिटी
  3. पेट की गैस
  4. सिरदर्द
  5. मुंह के छालें

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Taruni Kusumakar Churna

  1. 1/4-1/2 टीस्पून, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  2. इसे रात्रि में एक बार सोने से पहले ही लेना है।
  3. इस दवा के लिए अनुपान उष्ण / गर्म पानी है।
  4. इसे भोजन करने के बाद लें।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications

इस दवा का मुख्य घटक सनाय है। सनाय को आंत्र रुकावट, पेट में अज्ञात कारणों के दर्द, पथरी, कोलाइटिस, Crohn’s disease, IBS, बवासीर, नेफ्रोपैथी, प्रेगनेंसी और १२ वर्ष से छोटे बच्चों में न प्रयोग करे ।

  1. अधिक मात्रा में प्रयोग से पेट दर्द, दस्त और शरीर में पानी की कमी हो सकती है।
  2. दस्त होने पर इसे इस्तेमाल न करें।
  3. इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  4. इसे ज्यादा मात्रा में न लें।
  5. यह उष्ण वीर्य है इसलिए इसका सेवन गर्भवस्था में न करें।
  6. यह पित्त को बढ़ाता है। इसलिए पित्त प्रकृति के लोग इसका सेवन सावधानी से करें।
  7. अधिक मात्रा में सेवन पेट में जलन, एसिडिटी, आदि समस्या कर सकता है।
  8. चिकित्सक की सलाह के बिना लम्बे समय के प्रयोग से बचें।
  9. पेट में दर्द, में इस का प्रयोग न करें।
  10. इसमें काला और सेंधा नमक है, इसलिए जिसे उच्च रक्तचाप हो, कम नमक लेने की सलाह हो, वे लोग इसका सेवन न करें।
  11. यवक्षार का प्रयोग उन पुरुषों के लिए उपयुक्त नहीं है जो की फर्टिलिटी का ट्रीटमेंट करा रहें हो क्योंकि यह वीर्य को प्रभावित करता है. यवक्षार तासीर में बहुत गर्म है।

उपलब्धता

इस दवा को ऑनलाइन या आयुर्वेदिक स्टोर से ख़रीदा जा सकता है।

  1. Kamdhenu Laboratories
  2. Dabur Taruni Kusumakar Churna
  3. Sadhna Taruni Kusumakar Churna
  4. Navjivan Taruni Kusumakar Churna
  5. Hitkar Taruni Kusumakar Churna
  6. Gita Bhawan Ayurved Taruni Kusumakar Churna
  7. Dindyal Tarunikusumakar Churna
  8. तथा अन्य बहुत सी फर्मसियाँ।
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