सोमराजी तेल Somraji Tail (Oil) Detail and Uses in Hindi

सोमराजी तैल, एक आयुर्वेदिक औषधीय तेल है। इसे भैषज्य रत्नावली के कुष्ठरोगाधिकार से लिया गया है। इस दवा में मुख्य घटक सोमराजी है। इसके अतिरिक्त इसमें हल्दी, दारुहल्दी, सफ़ेद सरसों, कूठ, करंज, चक्रमर्द, अमलतास के पत्ते और सरसों का तेल है। इस तेल की मालिश से समस्त प्रकार के कुष्ठ, नाड़ीव्रण, दुष्टव्रण, पीलिका, पीड़िका, व्यंग, गंबीर वात-रक्त, कंडू, दाद, पामा आदि नष्ट होते हैं।

इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें।

Somraji Oil is an herbal medicated oil. It is an Ayurvedic oil and used for massaging. It helps in skin diseases.

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Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: हर्बल आयुर्वेदिक दवाई
  • मुख्य उपयोग: त्वचा रोग
  • मुख्य गुण: एंटीसेप्टिक, शोथहर, त्वचारोगहर

सोमराजी तेल के घटक Ingredients of Somraji Tail

  1. बावची Somaraji (Bakuchi) (Sd.) 24 g
  2. हल्दी Haridra (Rz.) 24 g
  3. दारूहल्दी Daruharidra (St.) 24 g
  4. सरसों के बीज Sarshapa (Sd.) 24 g
  5. कूठ Kushtha (Rt.) 24 g
  6. करंज Karanja (Sd.) 24 g
  7. चक्रमर्द Edagajabija (Chakramarda) (Sd.) 24 g
  8. अमलतास के पत्ते Aragvadha (Lf.) 24 g
  9. सरसों का तेल Sarshapa taila (Ol.) 768 g
  10. पानी Water 3.072 l

सोमराजी, बावची, बाकुची (संस्कृत), बावची (हिन्दी), हावुच (बंगाली), बावची (मराठी), बावची (गुजराती), कर्पोकरिशी (तमिल अथवा भावंचि (तेलुगु,) सौंरेलिया कौरिलीफोलिया (लैटिन पौधे के बीज हैं। यह सभी प्रकार के त्वचा और कुष्ट रोगो में लाभप्रद है। इसे सफ़ेद दाग में भी प्रयोग किया जाता है।

सोमराजी बीज में उड़नशील तेल, स्थिर तेल विशेष प्रकार का राल, दो क्रिस्टलाइन -, सोरोलिडिन तथा अन्य तत्व पाए जाते हैं। यह कुष्ठघ्न एवं कृमि है। ‌‌‌

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हल्दी के बहुत से नाम हैं। इसे हरिद्रा, कांचनी, पीता, निशा, वरवर्णिनी, कृमिघ्ना, हलदी, योषितप्रिया, हट्टविलासिनी आदि नामों से पुकारते हैं। संस्कृत में जितने पर्यायवाची रात्रि के हैं, वे सभी हल्दी के भी नाम है।

हिंदी में यह हल्दी, बंगाली में ह्लुद, मराठी हलद, गुजराती में हालदार, कन्नड़ में अरसीन तथा तमिल में पासुपू कहलाती है। इसका फ़ारसी नाम जरदोप, अरेबिक में डरुफुस्सुकर, और अंग्रेजी में टर्मरिक है। इसका वैज्ञानिक नाम करक्यूमा लोंगा है। हल्दी स्वाद में चरपरी, कडवी, रूखी, गर्म, कफ, वात त्वचा के रोगों, प्रमेह, रक्त विकार, सूजन, पांडू रोग, और घाव को दूर करने वाली है।

दारुहरिद्रा या दारु हल्दी हिमालय क्षेत्र में छ: से दस हजार फीट की उंचाई पर पाई जाने वाली वनस्पति है। इसकी हल्दी जैसी पीली लकड़ी के कारण दारू हल्दी कहा जाता है। इसका बॉटनिकल नाम बर्बेरिस एरिस्टाटा है। उत्तराखंड में इसे किल्मोड़ा, किल्मोड़ी अथवा किन्गोड़ कहते हैं। इसे बुखार, पीलिया, शुगर, नेत्र और त्वचा रोगों में प्रयोग किया जाता है।

करंज गरम, कृमिनाशक, वात पीडा, कुष्ठ, कण्डू, व्रण तथा खुजली को नष्ट करता है। इसके लेप से त्वचा विकार नष्ट होते हैं।

सरसों का तेल अथवा कड़वा तेल एक दवा भी है। इसे लगाने से गर्माहट आती है। इस तेल की मालिश करने से शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और रक्त संचार अच्छा होता है। त्वचा संबंधी समस्याओं में इसे अन्य द्रव्यों के साथ लगा कर मिलाने से त्वचा रोग दूर होते हैं। यह शरीर के किसी भी भाग में फंगस को बढ़ने से रोकता है और त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाता है।

सोमराजी तेल के चिकित्सीय उपयोग Uses of Somraji Tail

  1. कंडू Kandu (Itching)
  2. कच्छु Kacchu (Itching)
  3. पामा Pama (Eczema)
  4. पीड़क Pidaka (Carbuncle)
  5. नीलिका Nilika (Mole)
  6. दुष्ट व्रण Dushta Vrana (Non-healing ulcer)
  7. नाड़ीव्रण Nadivrana (Fistula)
  8. गठिया Vatarakta (Gout)
  9. व्यंग Vyanga (Pigmentation disorder)
  10. कुष्ठ Kushtha (Diseases of skin)
  11. दाद, रिंगवर्म Dadru (Taeniasis)
  12. चर्म रोग Diseases of skin
  13. फफुंदीय संक्रमण Fungal infection

सोमराजी तेल की प्रयोग विधि How to use Somraji Tail

  1. यह तेल केवल बाह्य प्रयोग के लिए है।
  2. इसे प्रभावित स्थान पर लगायें।
  3. इसे लम्बे समय तक नियमित लगाएं।
  4. यदि लगाने पर रैश, खुजली, आदि हो तो इसे न लगाएं।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications

  1. यह तेल केवल बाह्य प्रयोग के लिए है।
  2. इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  3. प्रयोग से पहले पैच टेस्ट करें. त्वचा के छोटे पैच पर तेल को लगायें, और कुछ देर धूप में रखें। एक सप्ताह तक यदि किसी प्रकार का कोई रिएक्शन न दिखे तो प्रयोग और जगहों पर करें।

उपलब्धता

  1. इस दवा को ऑनलाइन या आयुर्वेदिक स्टोर से ख़रीदा जा सकता है।
  2. बैद्यनाथ Baidyanath Somraji Tel
  3. पतंजलि Patanjali Divya Pharmacy Somraaji Taila
  4. तथा अन्य बहुत सी फर्मसियाँ।
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