मुसली सूत्र कैप्सूल Musli Sutra Detail and Uses in Hindi

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मुसली सूत्र कैप्सूल, आयुर्वेद के सिद्धांतों पर आधारित एक दवाई है जो की मुख्य रूप से पुरुषों के लिए है लेकिन महिलायें भी इसका सेवन कर सकती हैं। यह शक्तिवर्धक, जोश वर्धक, और वाजीकारक औषधि है। इसके सेवन से प्रजनन अंगों को ताकत मिलती है और यौन दुर्बलता दूर होती है।

इस दवा का मुख्य घटक मुस्ली है। मुस्ली का सेवन शरीर और मन को फिर से दुर्बलता को दूर करता है। इसके सेवन से कामेच्छा, शुक्राणुओं की संख्या बढ़ जाती है और सामान्य दुर्बलता का इलाज होता है। यह एक शक्तिशाली पुरुष और महिला यौन उत्तेजक के रूप में काम करता है। यह रक्त और वीर्य वर्धक है।

मुसली सूत्र कैप्सूल, थकावट, चिड़चिड़ापन, काम में में न लगना, शारीरिक कमजोरी आदि में लाभप्रद है। यह पुरुषों के लिए टॉनिक है। इसकी एक से दो गोली, सुबह और शाम दूध के साथ ली जानी चाहिए।

टेस्टोस्टेरोन पुरुषों के वृषण और एड्रेनल ग्लैंड से स्रावित होने वाला एंड्रोजन समूह का एक स्टीरॉएड हार्मोन है। यह प्रमुख पुरुष हॉर्मोन है जो की एनाबोलिक स्टीरॉएड है। टेस्टोस्टेरॉन पुरुषों में उनके प्रजनन अंगों के सही से काम करने और पुरुष लक्षणों जैसे की मूंछ-दाढ़ी, आवाज़ का भारीपन, ताकत आदि के लिए जिम्मेदार है। यदि टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है तो यौन प्रदर्शन पर सीधे असर पड़ता है, जैसे की इंद्री में शिथिलता, कामेच्छा की कमी, चिडचिडापन, आदि। मूसली, अश्वगंधा और गोखरू के सेवन से शरीर में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को सुधारने में मदद होती है।

इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें।

Musli Sutra is a Health Tonic for males. This medicine is useful in fatigue, general debility, and sexual disorders of male (night fall, erectile dysfunction, low libido, premature ejaculation and for improving performance).

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Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

  1. उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  2. दवाई का प्रकार: आयुर्वेदिक दवाई
  3. मुख्य उपयोग: पुरुषों के लिए टॉनिक
  4. मुख्य गुण: एंटीऑक्सीडेंट, रसायन, टॉनिक
  5. दवा का अनुपान: गर्म जल अथवा गर्म दूध
  6. दवा को लेने का समय: दिन में दो बार, प्रातः और सायं

मुसली सूत्र पॉवर कैप्सूल के घटक Ingredients of Musli Sutra

  1. सफ़ेद मूसली 150 mg
  2. अश्वगंधा 100 mg
  3. गोखरू 40 mg
  4. शतावर 50 mg
  5. त्रिफला 50 mg
  6. मकरध्वज 5 mg
  7. त्रिवंग भस्म 5 mg
  8. लोह भस्म 5 mg
  9. अभ्रक भस्म 3 mg
  10. शुद्ध शिलाजीत 50 mg
  11. Excipients भावना द्रव्य: पान, सफ़ेद मूसली, केवांच बीज, विदारीकन्द आदि।

मुसली को हर्बल वियाग्रा के रूप में जाना जाता है। यह पुरुष प्रजनन प्रणाली को दुरुस्त करती है। मुसली की जड़ों को पुरुषों की यौन कमजोरी दूर करने के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। यह पुरुषों में यौन कमजोरी के लिए एक पोषक टॉनिक के रूप में कार्य करती है।

अश्वगंधा को असगंध, आसंध और विथानिया, विंटर चेरी आदि नामों से जाना जाता है। इसकी जड़ को सुखा, पाउडर बना आयुर्वेद में वात-कफ शामक, बलवर्धक रसायन की तरह प्रयोग किया जाता है। यह एक टॉनिक दवा है। यह शरीर को बल देती है। असगंध तिक्त-कषाय, गुण में लघु, और मधुर विपाक है। यह एक उष्ण वीर्य औषधि है। यह वात-कफ शामक, अवसादक, मूत्रल, और रसायन है जो की स्पर्म काउंट को बढ़ाती है।

  1. अश्वगंधा जड़ी बूटी पुरुषों में यौन शक्ति बढ़ाने के लिए प्रयोग की जाती है।
  2. यह पुरुष प्रजनन अंगों पर विशेष प्रभाव डालती है।
  3. यह पुरुषों में जननांग के विकारों के लिए एक बहुत ही अच्छी दवा है।
  4. यह वीर्य की मात्रा और गुणवत्ता को बढ़ाने में भी मदद करती है।
  5. यह शुक्र धातु की कमी, उच्च रक्तचाप, मूर्छा भ्रम, अनिद्रा, श्वास रोगों, को दूर करने वाली उत्तम वाजीकारक औषधि है।

गोखरू आयुर्वेद की एक प्रमुख औषधि है। इस मुख्य रूप से पेशाब रोगों और पुरुषों में यौन कमजोरी के लिए प्रयोग किया जाता है। गोखरू शीतल, मूत्रशोधक, मूत्रवर्धक, वीर्यवर्धक, और शक्तिवर्धक है। यह पथरी, पुरुषों के प्रमेह, सांस की तकलीफों, शरीर में वायु दोष के कारण होने वाले रोगों, हृदयरोग और प्रजनन अंगों सम्बन्धी रोगों की उत्तम दवा है। यह वाजीकारक है और पुरुषों के यौन प्रदर्शन में सुधार करता है।

गोखरू का प्रयोग यौन शक्ति को बढ़ाने में बहुत लाभकारी माना गया है। यह नपुंसकता, किडनी/गुर्दे के विकारों, प्रजनन अंगों की कमजोरी-संक्रमण, आदि को दूर करता है।

त्रिफला (फलत्रिक, वरा) आयुर्वेद का सुप्रसिद्ध रसायन है। यह आंवला, हर्र, बहेड़ा को बराबर मात्रा में मिलाकर बनता है। यह रसायन होने के साथ-साथ एक बहुत अच्छा विरेचक, दस्तावर भी है। इसके सेवन से पेट सही से साफ़ होता है, शरीर से गंदगी दूर होती है और पाचन सही होता है। यह पित्त और कफ दोनों ही रोगों में लाभप्रद है। त्रिफला प्रमेह, कब्ज़, और अधिक पित्त नाशक है। यह मेदोहर और कुछ दिन के नियमित सेवन से वज़न को कम करने में सहायक है। यह शरीर से अतिरिक्त चर्भी को दूर करती है और आँतों की सही से सफाई करती है।

मकरध्वज (Makardhwaj) नपुंसकता, शीघ्रपतन, स्तंभन दोष, इरेक्टाइल डिसफंक्शन और अन्य स्थितियों के उपचार के लिए प्रयोग किया जाता है। यह एक इनोर्गानिक पदार्थ है तथा सल्फाइड ऑफ़ मरकरी और गोल्ड का कॉम्बिनेशन है। मकरध्वज को सोने, पारद और गंधक को एक निश्चित अनुपात में, आयुर्वेद में बताये गए तरीकों से बनाया जाता है। मकरध्वज का सेवन शरीर, दिल, और दिमाग को ताकत देता है।

अभ्रक भस्म आयुर्वेद में प्रयोग की जानी वाली जानी-मानी दवाई है। इसे अकेले तथा अन्य घटकों के साथ मिलाकर देने से बहुत से रोगों का नाश होता है। यह कफ रोगों, उदर रोगों, नसों की कमजोरी, पुरुषों के विकारों में बहुत लाभप्रद है। इसके सेवन से शरीर को लोहा, मैग्नीशियम, कैल्शियम, आदि मिलते हैं । यह यौन दुर्बलता को दूर करने वाली औषधि है। यह त्रिदोष, घाव, प्रमेह, पेट रोग, कफ रोग, वीर्य विकार, गांठ, विष और कृमिमें लाभप्रद है।

त्रिवंग भस्म में शुद्ध वंग, शुद्ध नाग और शुद्ध यशद है। यह प्रमेह, मूत्रपिण्ड या मूत्रवाहिनी नली श्वेत प्रदर, दर्द, मधुमेह, यकृत विकार, प्लीहा विकारों, त्वचा संबंधी विकार, सर्दी आदि से संबंधित रोगों में यह उत्तम लाभ करती है।

शिलाजीत पहाड़ों से प्राप्त, सफेद-भूरा मोटा, चिपचिपा राल जैसा पदार्थ है (संस्कृत शिलाजतु) जिसमे सूजन कम करने, दर्द दूर करने, अवसाद दूर करने, टॉनिक के, और एंटी-ऐजिंग गुण होते हैं। इसमें कम से कम 85 खनिजों पाए जाते है। शिलाजीत एक टॉनिक है जो पुरुषों में यौन विकारों के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है। शिलाजीत रस में अम्लीय और कसैला, कटु विपाक और समशीतोष्ण (न अधिक गर्म न अधिक ठंडा) है।

ऐसा माना जाता है, संसार में रस-धातु विकृति से उत्पन्न होने वाला कोई भी रोग इसके सेवन से दूर हो जाता है। शिलाजीत शरीर को निरोगी और मज़बूत करता है।

  1. यह पुरुषों के प्रमेह की अत्यंत उत्तम दवा है।
  2. यह वाजीकारक है और इसके सेवन से शरीर में बल-ताकत की वृद्धि होती है।
  3. यह पुराने रोगों, मेदवृद्धि, प्रमेह, मधुमेह, गठिया, कमर दर्द, कम्पवात, जोड़ो का दर्द, सूजन, सर्दी, खांसी, धातु रोग, रोगप्रतिरोधक क्षमता की कमी आदि सभी में लाभप्रद है।
  4. यह शरीर में ताकत को बढाता है तथा थकान और कमजोरी को दूर करता है।
  5. यह यौन शक्ति की कमी को दूर करता है।
  6. यह भूख को बढाता है।
  7. यह पुरुषों में नपुंसकता, शीघ्रपतन premature ejaculation, कम शुक्राणु low sperm count, स्तंभन erectile dysfunction में उपयोगी है।
  8. यह शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में मदद करता है।
  9. शिलाजीत के सेवन के दौरान, आहार में दूध की प्रधानता रहनी चाहिए।

लौह भस्म आयरन का ऑक्साइड है और आयुर्वेद बहुत अधिक प्रयोग होता है। यह क्रोनिक बिमारियों के इलाज़ के लिए प्रयोग किया जाता है। यह पांडू रोग या अनीमिया को नष्ट करता है। लौह भस्म को पाण्डु (anaemia), प्रमेह (diabetes), यक्ष्मा (tuberculosis), अर्श (piles), कुष्ठ (skin disorders), कृमि रोग (worm infestation), क्षीणतवा (cachexia), स्थूलया (obesity), ग्रहणी (bowel syndrome), प्लीहा रोग (spleenic disorders), मेदोरोगा (hyperlipidemia), अग्निमांद्य (dyspepsia), शूल (spasmodic pain), और विषविकार (poisoning) में प्रयोग किया जाता है।

कर्म Principle Action

  1. बाजीकरण: द्रव्य जो रति शक्ति में वृद्धि करे।
  2. शुक्रकर: द्रव्य जो शुक्र का पोषण करे।
  3. वृष्य: द्रव्य जो बलकारक, वाजीकारक, वीर्य वर्धक हो।
  4. शोथहर: द्रव्य जो शोथ / शरीर में सूजन, को दूर करे।
  5. रसायन: द्रव्य जो शरीर की बीमारियों से रक्षा करे और वृद्धवस्था को दूर रखे।

मुसली सूत्र कैप्सूल के लाभ/फ़ायदे Benefits of Musli Sutra

  1. इसमें मुस्ली, गोखरू, अश्वगंधा, शिलाजीत जैसे द्रव्य हैं जो की पुरुषों के विशेष रूप से उपयोगी माने गए हैं।
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  3. यह यौन दुर्बलता को दूर करने में सहायक है।
  4. यह दवाई नसों को ताकत देती है। इसके सेवन से नसों की कमजोरी दूर होती है।
  5. यह शीघ्रपतन, स्तंभन दोष, अनैच्छिक शुक्रपात, स्वप्नदोष में लाभप्रद है।
  6. यह शारीरिक दुर्बलता को करती है।
  7. यह वीर्य की मात्रा को बढ़ाती है।
  8. यह शुक्राणुओं की संख्या बढाती है।
  9. इसके सेवन से खून की कमी दूर होती है।
  10. यह टेस्टोस्टेरोन के लेवल को बढ़ाती है।
  11. इसमें आम पाचन गुण है और शरीर से विषाक्त पदार्थों को दूर करने में मददगार है।
  12. यह प्राकृतिक कामोद्दीपक या वाजीकारक है।
  13. यह यौन संतुष्टि को बढ़ावा देती है।
  14. इसके सेवन से उर्जा की वृद्धि होती है।
  15. यह स्मृति, बुद्धि को बढ़ाती है और अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखती है।

मुसली सूत्र कैप्सूल के चिकित्सीय उपयोग Uses of Musli Sutra

आयुर्वेद की मुख्य ८ शाखाएं हैं, इनमें से वाज़ीकरण यौन-क्रियायों की विद्या तथा प्रजनन Sexology and reproductive medicine चिकित्सा से सम्बंधित है। वाज़ीकरण के लिए उत्तम वाजीकारक वनस्पतियाँ और खनिजों का प्रयोग किया जाता है जो की सम्पूर्ण स्वास्थ्य को सही करती हैं और जननांगों पर विशेष प्रभाव डालती है। आयुर्वेद में प्रयोग किये जाने वाले उत्तम वाजीकरण द्रव्यों में शामिल है, मूसली, अश्वगंधा, शतावरी, गोखरू, केवांच, शिलाजीत, मकरध्वज, विधारा, आदि।  यह द्रव्य कामोत्तेजक है, स्नायु, मांसपेशियों की दुर्बलता, को दूर करने वाले है तथा धातु वर्धक, वीर्यवर्धक, शक्तिवर्धक तथा बलवर्धक हैं।

पुरुषों के लिए

  1. यौन कमजोरी के लिए sexual disorders of male
  2. नपुंसकता, शीघ्रपतन, मर्दाना कमजोरी impotency
  3. स्वप्न दोष Night fall, erectile dysfunction
  4. प्रमेह urinary disorders
  5. पुरुषों में यौन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए
  6. शरीर की कोशिकाओं की ताकत बढ़ाने के लिए
  7. शारीरिक कमजोरी, स्ट्रेस

महिलाओं के लिए  

  1. कामोत्तेजक
  2. रीवायवेनर
  3. थकान और सामान्य दुर्बलता

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Musli Sutra

  1. 1-2 गोली, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  2. इसे दूध, पानी के साथ लें।
  3. इसे भोजन करने के बाद लें।
  4. या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications

  1. लम्बे समय तक प्रयोग बिना डॉक्टर के परामर्श के न करें ।
  2. इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  3. इसे ज्यादा मात्रा में न लें।
  4. कुलथी का सेवन शिलाजीत के सेवन के दौरान नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा इसलिए है की, कुलथी पथरी की भेदक है।
  5. यह हमेशा ध्यान रखें की जिन दवाओं में पारद, गंधक, खनिज आदि होते हैं, उन दवाओं का सेवन लम्बे समय तक नहीं किया जाता। इसके अतिरिक्त इन्हें डॉक्टर के देख-रेख में बताई गई मात्रा और उपचार की अवधि तक ही लेना चाहिए।
  6. इसे गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान न लें।
  7. इसे बताई मात्रा से अधिकता में न लें।
  8. दवा की सटीक मात्रा व्यक्ति के पाचन, उम्र, वज़न और स्वास्थ्य को देख कर ही तय की जा सकती है।
  9. दवा के साथ-साथ भोजन और व्यायाम पर भी ध्यान दें।
  10. पानी ज्यादा मात्रा में पियें।
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