उंझा शक्ति सागर रस Shakti Sagar Rasa (Silver Coated) Detail and Uses in Hindi

शक्ति सागर रस, उंझा फार्मेसी से द्वारा निर्मित एक आयुर्वेदिक दवाई है जिसमें जड़ी-बूटियाँ, स्वर्ण माक्षिक भस्म, बंग भस्म, मोती भस्म और रस सिन्दूर है। यह पुरुषों के प्रयोग के लिए है। इसे 1 से 2 गोली की मात्रा में कुछ दिनों तक लेने से शरीर में शक्ति, ऊर्जा और कार्य क्षमता में वृद्धि होती है। यह एक रसायन है और दुर्बलता को दूर करने वाली औषध है। इसे दूध अथवा पानी के साथ निगल कर लेते हैं। शक्ति सागर रस को केवल डॉक्टर की देख रेख में ही लिया जाना चाहिए।

यह एक आयुर्वेदिक रस-औषधि है जिसमें रस, पारा है। पारे को ही आयुर्वेद में रस या पारद कहा जाता है और बहुत सी दवाओं के निर्माण में प्रयोग किया जाता है। रस औषधियां शरीर पर शीघ्र प्रभाव डालती हैं। इन्हें डॉक्टर की देख-रेख में ही लेना सही रहता है।

इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें।

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Shakti Sagar Rasa from Unjha Ayurvedic Pharmacy, is herbomineral medicine used improve stamina and energy. It has rejuvenator, aphrodisiac and energy booster properties. Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

  • निर्माता: उंझा औषध निर्माणशाला प्राइवेट लिमिटेड
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: रस औषधि, पारे वाली आयुर्वेदिक दवा
  • मुख्य उपयोग: पुरुषों में यौन दुर्बलता
  • मुख्य गुण: वाजीकारक, रसायन, शक्तिवर्धक
  • दवा का अनुपान: गर्म जल अथवा गर्म दूध
  • दवा को लेने का समय: दिन में दो बार, प्रातः और सायं
  • दवा को लेने की अवधि: डॉक्टर के निर्देशानुसार
  • मूल्य MRP: Unjha Shakti Sagar Rasa (Silver Coated) 30 tablets @ Rs.165; 100 tablets @ Rs.408
  • पैकिंग: 30, 100, 500 Pills.

शक्ति सागर रस के घटक Ingredients of Shakti Sagar Rasa

Each Silver Coated Pills Contains:

  1. असगंध Ashwagandha (Withania Somnifera) 10 %
  2. केवांच Kaucha Beej (Mucuna Prurita) 10 %
  3. गोखरू Gokhru (Tribulus Terrestris) 5.750 %
  4. विधारा Vardharo (Argyseia Speciosa) 5 %
  5. लवंग Laving (Syzygium Aromaticum) 5 %
  6. जटामांसी Jatamasi (Nardostachys Jatamansi) 5 %
  7. पिप्पली Piper (Piper Longum) 5 %
  8. शिलाजीत Purified Shilajit (Altingia Excelsa) 5 %
  9. तेज पत्ता Taj (Cinnamomum Zeylanicum) 5 %
  10. सोंठ Sunth (Zingiber Officinale) 5 %
  11. सफ़ेद मूसली Safed Musli (Asparagus Adscendens) 5 %
  12. आंवला Amla (Embelia Officinalis) 5 %
  13. शतावरी Shatavari (Asparagus Racemosus) 5 %
  14. अभ्रक भस्म Abhrak Bhasma 3 %
  15. लौह भस्म Loh Bhasma 3 %
  16. इलाइची Elaychi (Elettaria Cardamomum) 2 %
  17. अकरकरा Akkalgaro (Anacyclus Pyrethrum) 2 %
  18. जाईफल Jayfal (Myristica Fragrans) 2 %
  19. तालमखाना Talamkhana (Asteracantha Longifolia) 2 %
  20. जावित्री Javantri (Myristica Fragrans) 2 %
  21. सफ़ेद मिर्च Safed Mari (Piper Nigrum) 2 %
  22. बंग भस्म Bang Bhasma 2 %
  23. स्वर्ण माक्षिक Suvarna Makshik Bhasma 2 %
  24. रस सिन्दूर Ras Sindur 1 %
  25. मोती भस्म Mukta Bhasma 1 %
  26. केसर Kesar (Crocus Sativus) 0.250 %
  27. Excipients Q.S

रस सिंदूर, केमिकली मरक्यूरिक सल्फाइड है। यह रस अर्थात पारे से बना होता है और रंग में लाल होता है इसलिए रस सिन्दूर कहलाता है। रस सिंदूर को बनाने की कई विधियाँ आयुर्वेद में वर्णित हैं। इसमें गंधक करीब 14 और मर्करी 86 प्रतिशत पाया जाता है। यह एक कूपीपक्व रसायन है जो की कज्जली को कांच की शीशी में सैंड बाथ या बालुका यंत्र में पका कर बनाया जाता है। तैयार होने पर जब शीशी सैंडबाथ में स्वांग शीतल हो जाती है तो उसे तोड़ कर गलप्रदेश पर चिपके रक्तवर्ण के रस सिन्दूर को एकत्र कर लिया जाता है।

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रस सिंदूर को ज्वर, प्रमेह, प्रदर, अर्श, अपस्मार, उन्माद, श्वास, यकृत रोग, पाचन रोग, विस्फोट, स्वप्न दोष, समेत पुराने आमवात, शिरः कम्प, कम्पवात आदि अभी में दिया जाता है। यह उष्णवीर्य रसायन है जिसकी मात्रा बहुत से कारकों पर निर्भर है। यह उत्तेजक है, रक्त की गति को तेज करता है, कफ नष्ट करता है, स्नायु को बल देता है और फेफड़ों के रोगों को दूर करता है। यह मुख्य रूप से कफ को दूर करता है।

रस सिंदूर क्योंकि एक रस औषधि है इसलिए इसे लम्बे समय तक लेना सुरक्षित नहीं है। इसे एक महीने से ज्यादा की अवधि तक लेने से कई दुष्परिणाम होते है।

वंग भस्म टिन अर्थात स्टेनम Stannum-Tin से बनती है। वंग भस्म का मुख्य प्रभाव मूत्र अंगों और जननांगों पर होता है। इसे पुरुषों और स्त्रियों के प्रजनन अंगों सम्बंधित रोगों में प्रयोग किया जाता है। यह पुरुष की इन्द्रिय को ताकत देती है, शुक्र धारण में सहयोग करती है, वीर्य को गाढ़ा करती है तथा नामर्दी, शीघ्रपतन, पेशाब के साथ शुक्र जाना, स्वप्न में स्खलन, हस्तमैथुन आदि में रोगों को नष्ट करती है। इसे आयुर्वेद में शुक्रक्षय, स्वप्नमेह, शुक्र स्खलन, नपुंसकता की सर्वोत्तम औषधि माना गया है।

अश्वगंधा को असगंध, आसंध और विथानिया, विंटर चेरी आदि नामों से जाना जाता है। इसकी जड़ को सुखा, पाउडर बना आयुर्वेद में वात-कफ शामक, बलवर्धक रसायन की तरह प्रयोग किया जाता है।

यह एक टॉनिक दवा है। यह शरीर को बल देती है। असगंध तिक्त-कषाय, गुण में लघु, और मधुर विपाक है। यह एक उष्ण वीर्य औषधि है। यह वात-कफ शामक, अवसादक, मूत्रल, और रसायन है जो की स्पर्म काउंट को बढ़ाती है।

  1. यह जड़ी बूटी पुरुषों में यौन शक्ति बढ़ाने के लिए प्रयोग की जाती है।
  2. यह पुरुष प्रजनन अंगों पर विशेष प्रभाव डालती है।
  3. यह पुरुषों में जननांग के विकारों के लिए एक बहुत ही अच्छी दवा है।
  4. यह वीर्य की मात्रा और गुणवत्ता को बढ़ाने में भी मदद करती है।
  5. यह शुक्र धातु की कमी, उच्च रक्तचाप, मूर्छा भ्रम, अनिद्रा, श्वास रोगों, को दूर करने वाली उत्तम वाजीकारक औषधि है।

केवांच की गिरी बहुत ही प्रभावशाली हर्बल दवा है तथा इसे हजारों वर्षों से पुरुष प्रजनन क्षमता में सुधार करने के लिए प्रयोग किया जाता रहा है। यह हाइपोथेलेमस पर काम करता है। इसके सेवन से सीरम टेस्टोस्टेरोन, लुटीनाइज़िंग luteinizing हार्मोन, डोपामाइन, एड्रेनालाईन, आदि में सुधार होता है। यह शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता में भी उचित सुधार करने वाली नेचुरल दवा है। मानसिक तनाव, नसों की कमजोरी, टेस्टोस्टेरोन के कम लेवल आदि में इसके सेवन से बहुत लाभ होता है।

गोखरू आयुर्वेद की एक प्रमुख औषधि है। इस मुख्य रूप से पेशाब रोगों और पुरुषों में यौन कमजोरी के लिए प्रयोग किया जाता है। गोखरू शीतल, मूत्रशोधक, मूत्रवर्धक, वीर्यवर्धक, और शक्तिवर्धक है। यह पथरी, पुरुषों के प्रमेह, सांस की तकलीफों, शरीर में वायु दोष के कारण होने वाले रोगों, हृदयरोग और प्रजनन अंगों सम्बन्धी रोगों की उत्तम दवा है। यह वाजीकारक है और पुरुषों के यौन प्रदर्शन में सुधार करता है।

गोखरू का प्रयोग यौन शक्ति को बढ़ाने में बहुत लाभकारी माना गया है। यह नपुंसकता, किडनी/गुर्दे के विकारों, प्रजनन अंगों की कमजोरी-संक्रमण, आदि को दूर करता है।

शिलाजीत पहाड़ों से प्राप्त, सफेद-भूरा मोटा, चिपचिपा राल जैसा पदार्थ है (संस्कृत शिलाजतु) जिसमे सूजन कम करने, दर्द दूर करने, अवसाद दूर करने, टॉनिक के, और एंटी-ऐजिंग गुण होते हैं। इसमें कम से कम 85 खनिजों पाए जाते है। शिलाजीत एक टॉनिक है जो पुरुषों में यौन विकारों के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

शिलाजीत रस में अम्लीय और कसैला, कटु विपाक और समशीतोष्ण (न अधिक गर्म न अधिक ठंडा) है।

  1. ऐसा माना जाता है, संसार में रस-धातु विकृति से उत्पन्न होने वाला कोई भी रोग इसके सेवन से दूर हो जाता है। शिलाजीत शरीर को निरोगी और मज़बूत करता है।
  2. यह पुरुषों के प्रमेह की अत्यंत उत्तम दवा है।
  3. यह वाजीकारक है और इसके सेवन से शरीर में बल-ताकत की वृद्धि होती है।
  4. यह पुराने रोगों, मेदवृद्धि, प्रमेह, मधुमेह, गठिया, कमर दर्द, कम्पवात, जोड़ो का दर्द, सूजन, सर्दी, खांसी, धातु रोग, रोगप्रतिरोधक क्षमता की कमी आदि सभी में लाभप्रद है।
  5. यह शरीर में ताकत को बढाता है तथा थकान और कमजोरी को दूर करता है।
  6. यह यौन शक्ति की कमी को दूर करता है।
  7. यह भूख को बढाता है।
  8. यह पुरुषों में नपुंसकता, शीघ्रपतन premature ejaculation, कम शुक्राणु low sperm count, स्तंभन erectile dysfunction में उपयोगी है।
  9. यह शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में मदद करता है।
  10. शिलाजीत के सेवन के दौरान, आहार में दूध की प्रधानता रहनी चाहिए।
  11. आंवला

शतावर का वानस्पतिक नाम एस्पैरागस ऑफ़ीशिनैलिस Asparagus officinalis है। आयुर्वेद में इसकी जड़ों का प्रयोग दवा के रूप में किया जाता है।

शतावरी में अल्सर ठीक करने के, इम्युनिटी बढ़ाने के और टॉनिक गुण हैं। यह आँतों को साफ़ करती है और पेचिश को अपने संकोचक गुण से रोकती है। शतावर के सेवन से शरीर में अम्लपित्त की शिकायत दूर होती है। यह कामोत्तेजक भी है।

मुसली को हर्बल वियाग्रा के रूप में जाना जाता है। यह पुरुष प्रजनन प्रणाली को दुरुस्त करती है। मुसली की जड़ों को पुरुषों की यौन कमजोरी दूर करने के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। यह पुरुषों में यौन कमजोरी के लिए एक पोषक टॉनिक के रूप में कार्य करती है।

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लौह भस्म आयरन का ऑक्साइड है और आयुर्वेद बहुत अधिक प्रयोग होता है। यह क्रोनिक बिमारियों के इलाज़ के लिए प्रयोग किया जाता है। यह पांडू रोग या अनीमिया को नष्ट करता है।

अकरकरा को जड़ काम शक्ति को बढ़ाने और वाजीकारक की तरह प्रयोग किया जाता है। आंतरिक रूप से अकरकरा चूर्ण का सेवन उत्तेजना लाता है और इन्द्रिय को अधिक खून की सप्लाई करता है।

जायफल को बाजिकारक aphrodisiac दवाओं और तेल को तिलाओं में डाला जाता है। यह पुरुषों की इनफर्टिलिटी, नपुंसकता, शीघ्रपतन premature ejaculationकी दवाओं में भी डाला जाता है। यह इरेक्शन को बढ़ाता है लेकिन स्खलन को रोकता है। यह शुक्र धातु को बढ़ाता है। यह बार-बार मूत्र आने की शिकायत को दूर करता है तथा वात-कफ को कम करता है।

वंग या बंग भस्म, स्टेनम या टिन की भस्म है। इसे आयुर्वेद में हल्का, दस्तावर, रूखा, गर्म, पित्तकारक माना गया है। इसे मुख्य रूप से प्रमेह, कफ, कृमि, पांडू, श्वास रोगों में प्रयोग कियाजाता है। शुद्ध वांग को सम्पूर्ण प्राकर के प्रमेहों को नष्ट करने वाला कहा गया है। बंग भस्म का सेवन शरीर को बल देता है, इन्द्रियों को शक्ति देता है और पुरुषों के सभी अंगों को ताकत से भरता है तथा पुरुष होर्मोन का भी अधिक स्राव कराता है। यह मुख्य रूप से प्रजनन अंगों के लिए ही उपयोगी है। बंग भस्म वाजीकारक भी है।

कर्म Principle Action

  1. बाजीकरण: द्रव्य जो रति शक्ति में वृद्धि करे।
  2. शुक्रकर: द्रव्य जो शुक्र का पोषण करे।
  3. वृष्य: द्रव्य जो बलकारक, वाजीकारक, वीर्य वर्धक हो।
  4. शोथहर: द्रव्य जो शोथ / शरीर में सूजन, को दूर करे।
  5. रसायन: द्रव्य जो शरीर की बीमारियों से रक्षा करे और वृद्धवस्था को दूर रखे।

शक्ति सागर रस के लाभ/फ़ायदे Benefits of Shakti Sagar Rasa

  1. इसमें केवांच, गोखरू, मुस्ली, अश्वगंधा, शिलाजीत जैसे द्रव्य हैं जो की पुरुषों के विशेष रूप से उपयोगी माने गए हैं।
  2. यह यौन दुर्बलती को दूर करने में सहायक है।
  3. यह नसों को तीकत देती है। इसके सेवन से नसों की कमजोरी दूर होती है।
  4. यह शीघ्रपतन, स्तंभन दोष, अनैच्छिक शुक्रपात, स्वप्नदोष में लाभप्रद है।
  5. यह शारीरिक दुर्बलती को करती है।
  6. यह वीर्य की मात्रा को बढ़ाती है।
  7. यह शुक्राणुओं की संख्या बढाती है।
  8. इसके सेवन से खून की कमी दूर होती है।
  9. यह टेस्टोस्टेरोन के लेवल को बढ़ाती है।
  10. यह अंडकोष testicular के कार्यों में सुधार और शुक्राणुजनन उत्तेजित करती है।
  11. यह इरेक्शन को बढ़ाती है और बुढ़ापे, पुरानी मधुमेह, और उच्च रक्तचाप में यौन इच्छा बढ़ाती है।
  12. यह यौन संतुष्टि को बढ़ावा देती है।
  13. यह शरीर को आंतरिक और बाह्य तनाव से बचाती है।
  14. इसके सेवन से उर्जा की वृद्धि होती है।
  15. यह स्मृति, बुद्धि को बढ़ाती है और अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखती है।

शक्ति सागर रस के चिकित्सीय उपयोग Uses of Shakti Sagar Rasa

  1. समयपूर्व स्खलन Premature ejaculation
  2. धात सिंड्रोम Dhat syndrome
  3. नपुंसकता, शीघ्रपतन, मर्दाना कमजोरी impotency
  4. स्वप्न दोष Night fall, erectile dysfunction
  5. कामेच्छा की कमी Loss of libido
  6. वीर्य और शुक्राणु असामान्यताएं Semen and sperm abnormalities
  7. सामान्य दुर्बलता General debility
  8. तनाव और मानसिक समस्याएं Stress & Psychosexual problems
  9. सभी प्रकार के अपक्षयी विकार All type of degenerative disorders
  10. एनर्जी, स्टैमिना की कमी General Physical Weakness, Prostration and fatigue, Neurasthenia
  11. शरीर की मांसपेशियों में दर्द Aches in the thighs and calf regions
  12. शरीर की कोशिकाओं की ताकत बढ़ाने के लिए
  13. शारीरिक कमजोरी, स्ट्रेस

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Shakti Sagar Rasa

  1. 1-2 गोली, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  2. इसे दूध के साथ लें।
  3. इसे भोजन करने के बाद लें।
  4. या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications

  1. दवा के लेबल पर यह साफ-साफ़ लिखा है: To be taken under medical supervision ONLY.
  2. इस दवा को डॉक्टर की देख-रेख में ही लें।
  3. इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  4. इसे ज्यादा मात्रा में न लें।
  5. यह हमेशा ध्यान रखें की जिन दवाओं में पारद, गंधक, खनिज आदि होते हैं, उन दवाओं का सेवन लम्बे समय तक नहीं किया जाता। इसके अतिरिक्त इन्हें डॉक्टर के देख-रेख में बताई गई मात्रा और उपचार की अवधि तक ही लेना चाहिए।
  6. इसे बताई मात्रा से अधिकता में न लें।
  7. दवा के सेवन के दौरान पित्तवर्धक और गरिष्ठ भोजन का सेवन न करें।
  8. कुलथी का सेवन शिलाजीत के सेवन के दौरान नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा इसलिए है की, कुलथी पथरी की भेदक है।
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