जातिफलादि वटी (स्तंभक) Jatiphaladi Vati (Stambhak) Uses, Benefits, Side Effects, Dosage, Warnings in Hindi

जातिफलादि वटी (स्तंभक) Jatiphaladi Vati (Stambhak) in Hindi को शारंगसंहिता में आकारकरभादि चूर्ण नाम से बताया गया है। यही योग वटी (बटी) के नाम से उपलब्ध है।

जातिफलादि वटी स्तंभक, एक वीर्यस्तम्भन की दवा है जोकि वातवाहिनी और शुक्रवाहिनी नाड़ियों पर काम करती है और वीर्यपात जल्दी नहीं होने देती। यह शीघ्र पतन की समस्या में दी जाती है। स्नायु के ढीले हो जाने पर वीर्य जल्दी निकल जाता है। ऐसे में इस दवा के सेवन से स्नायु कड़ी रहती है और वीर्य रुका रहता है। लेकिन यह प्रभाव अस्थायी होता है और इसलिए इसे बिस्तर पर जाने से पहले केवल एक बार ही लेने की सलाह दी जाती है।

जातीफलादि वटी का सेवन बहुत सावधानी से किए जाने की आवश्यकता होती है क्योंकि इसमें अफीम है। इसे बताई गई मात्रा में कम दिनों तक लिया जाना चाहिए। साथ ही इस दवा के सेवन के दौरान दूध, मलाई, रबड़ी आदि का सेवन करना चाहिए। सलाह दी जाती है कि शीघ्रपतन की समस्या में इस दवा का सेवन न ही करें। अन्य बहुत सी सुरक्षित हर्बल दवाएं है जिनमें अश्वगंधा, मूसली जैसे द्रव्य होते हैं जो कही अधिक सेफ हैं।

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इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें। हमारा उद्देश्य दवा के बारे में, दवा की सेफ्टी, साइड इफेक्ट्स आदि के बारे में   आपको जानकारी देना है।

दवा के बारे में इस पेज पर जो जानकारी दी गई है वह इसमें प्रयुक्त जड़ी-बूटियों के आधार पर है। हम इस प्रोडक्ट को एंडोर्स नहीं कर रहे। यह दवा का प्रचार नहीं है। हमारा यह भी दावा नहीं है कि यह आपके रोग को एकदम ठीक कर देगी। यह आपके लिए फायदेमंद हो भी सकती हैं और नहीं भी। दवा के फोर्मुलेशन के आधार और यह मानते हुए की इसमें यह सभी द्रव्य उत्तम क्वालिटी के हैं, इसके लाभ बताये गए हैं।

Jatiphaladi Vati (Stambhak) is Herbal Ayurvedic medicine. This formulation is for premature ejaculation or Shighrapatan. Premature ejaculation (PE) is most common male sexual disorder. It is inability to control or delay ejaculation, and thus affecting both partners.

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PE is the occurrence of ejaculation before or very soon after the beginning of intercourse (occurs prior to or within about one minute of vaginal penetration). It is persistent or recurrent condition and occur after minimal sexual stimulation. The person ejaculates before, on, or shortly after penetration and before the person wishes it. The patient has little or no voluntary control.

  • दवा का नाम: जटिफलादि वटी Jatiphaladi Vati (Stambhak), Jatiphaladi Bati (Stambhak)
  • संदर्भ: शरंगधर संहिता, अध्याय 6, अकरकरभादी चूर्ण
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: शुद्ध अफीम युक्त हर्बल दवाई
  • मुख्य उपयोग: स्तम्भन
  • मुख्य गुण: नाड़ियों को बल देना

जातिफलादि वटी (स्तंभक) के घटक Ingredients of Jatiphaladi Vati (Stambhak)

जटीफलादि वटी, को निम्न द्रव्यों को मिलाकर बनाया गया है:

  • शुद्ध अहिफेन पैपेवर सोमनिफेरम 4 भाग
  • अकरकरा एन्साइक्लस पायरथ्रम 1 भाग
  • सोंठ सूखा अदरक ज़िंगबर ऑफीसिनेल 1 भाग
  • शीतल चीनी या पाइपर क्यूबबा 1 भाग
  • केसर क्रोकस सटिविज 1 भाग
  • पिप्पली पाइपर लोंगम 1 भाग
  • जैफल (जायफल) मिरिस्टिका फ्रग्ररेन्स 1 भाग
  • लौंग (क्लोव) साइज़ीगियम अरगोमटम 1 भाग
  • सफ़ेद चंदन सेंटलम एल्बम 1 भाग

जानिए मुख्य जड़ी-बूटियों को

अफीम

अफीम / अहिफेन, को पैपेवर सोमनिफेरम पौधे के फल से प्राप्त किया जाता है। पेवर सोमनिफेरम पौधे के फल के अपरिपक्व डोडे से लेटेक्स कट लगाकर बाहर से एकत्रित किया जाता है। सुखाने के बाद, संसाधित लेटेक को स्क्रैप किया जाता है और अलग-अलग आकार के टुकड़ों में बनाया जाता है। यह कच्चा अफीम है। कच्ची अफीम हेरोइन के निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला मूल पदार्थ है। भारत में, अफीम और अफीम आधारित उत्पादों की बिक्री के लिए, लाइसेंस आवश्यक हैं।

अफ़ीम कड़वा, कसैला, कब्ज करने वाला, कामोद्दीपक, शामक, श्वासनवश, मादक, सूक्ष्म, और एंटीस्पास्मोडिक है। ऑपियम का उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा में इसके शामक, शांत, कृत्रिम निद्रावस्था, शांत और एनाल्जेसिक गुणों के लिए किया जाता है।

इसका उपयोग खांसी, बुखार, और दस्त और पेचिश, माइग्रेन, मलेरिया के कारण पीठ के निचले हिस्से में सूजन, डिस्मेनोरेहिया, सिस्टिटिस, और अन्य दर्दनाक स्थितियां में किया जात है। अफीम का प्रमुख घटक मोर्फीन और पपावरिन है। अफीम की बड़ी खुराक केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के विषाक्त प्रभाव डालती है। इससे सांस धीमी होती है, पेट की निकासी को धीमा होती है, कब्ज और मूत्र प्रतिधारण होता है व नींद आती है। अफीम के साइड इफेक्ट में या तो ओवरस्टिम्यूलेशन या चक्कर आना, कमजोरी, सिरदर्द, हाइपरथर्मिया, खुजली वाली त्वचा, दंश और हाथों का कांपना, चक्कर आना, मूत्र रुकना, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर अवसाद आदि शामिल हैं।

अफीम की अधिक मात्रा में मानसिक क्षमता कम हो जाती है, प्रतिक्रियाशील उत्साह, ब्राडीकार्डिया, फुफ्फुसीय और मस्तिष्क में पानी जमा होना आदि हो सकता है।

जातिफल

जायफल या जातीफल एक प्रसिद्ध मसाला है। यह मिरिस्टिका फ्रेगरेंस वृक्ष के फल में पाए जाने वाले बीज की सुखाई हुई गिरी है। यह पित्तवर्धक, रुचिकारक, दीपन, अनुलोमन है। जायफल को बाजिकारक aphrodisiac दवाओं और तेल को तिलाओं में डाला जाता है। यह पुरुषों की इनफर्टिलिटी, नपुंसकता, शीघ्रपतन premature ejaculationकी दवाओं में भी डाला जाता है। यह इरेक्शन को बढ़ाता है लेकिन स्खलन को रोकता है। यह शुक्र धातु को बढ़ाता है। यह बार-बार मूत्र आने की शिकायत को दूर करता है तथा वात-कफ को कम करता है।

अकरकरा

आकारकरभ, अकरकरा, करकरा आदि एनासाइक्लस पायरेथम के संस्कृत नाम हैं। इसका अरेबिक नाम आकिरकिर्हा, ऊदुलकई और फ़ारसी में तर्खून कोही है। इंग्लिश में इसे पाइरेथ्रम रूट, पेलेटरी रूट, स्पेनिश पेलिटरी Pellitory Root आदि नामों से जानते हैं। अकरकरा की जड़ का मुख्य सक्रिय तत्व पेलिटोरिन है अथवा पारेथ्रिन है। यह अकरकरा को तीक्ष्ण और लार बहाने के गुण देता है। यह स्वाद व स्वभाव में कुछ-कुछ काली मिर्च के पिपरिन जैसा है। अकरकरा काम शक्ति को बढ़ाने और वाजीकारक की तरह, आंतरिक और बाहरी, दोनों ही तरह से प्रयोग किया जाता है। बाहरी रूप से इसका लेप (तिला के रूप में) और आंतरिक रूप से इसे चूर्ण की तरह प्रयोग किया जाता है। इसका सेवन उत्तेजना लाता है और इन्द्रिय को अधिक खून की सप्लाई करता है।

जातिफलादि वटी के कर्म Principle Action

बाजीकरण: द्रव्य जो रति शक्ति में वृद्धि करे।

स्तम्भन: इरेक्शन में सहायक।

जातिफलादि वटी (स्तंभक) के लाभ/फ़ायदे Benefits of Jatiphaladi Vati (Stambhak)

  • यह कामेच्छा और ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने का काम करता है।
  • यह शीघ्रपतन, स्तंभन दोष में लाभप्रद है।
  • यह दौर्बल्यतानाशक है।

जातिफलादि वटी (स्तंभक) के चिकित्सीय उपयोग Uses of Jatiphaladi Vati (Stambhak)

यह दवा शीघ्रपतन Premature Ejaculation के लिए प्रयोग की जा सकती है।

शीघ्रपतन या प्रीमेच्योर एजाकुलेशन वह स्थिति है जिसमेंसेक्स के दौरान 1 मिनट के भीतर स्खलन हो जाता है। जब यह हमेशा या लगभग हमेशा होता है है तो शीघ्र पतन की समस्या हो जाती है। इस यौन समस्या में स्खलन पर नियंत्रण की कमी रहती है। जिस कारण यौन संतुष्टि का अभाव रहता है और पार्टनर्स में निराशा तथा यौन प्रदर्शन की कमी, और संतुष्टि नहीं हो पाती। इस दवा के सेवन से वीर्य रुका रहता है। लेकिन इस दवा का प्रीमेच्योर एजाकुलेशन पर असर स्थाई नहीं है।

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सेवन विधि और मात्रा Dosage of Jatiphaladi Vati (Stambhak)

  • 1 गोली, रात को सोने से पहले गाय के दूध अथवा शहद अथवा घी के साथ लेनी चाहिए ।
  • इसे भोजन करने के बाद लें।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

जातिफलादि वटी (स्तंभक) के इस्तेमाल में सावधनियाँ Cautions

  • इसका इस्तेमाल चिकित्सक की सलाह पर ही करें।
  • इस औषधि को केवल विशिष्ट समय अवधि के लिए निर्धारित खुराक में लें।
  • इसे ज्यादा मात्रा में न लें।
  • इसमें अफीम है जो कम मात्रा में दवा है लेकिन अधिक मात्रा में शरीर पर कई तरह के बुरे प्रभाव डालती है। अफीम का सेवन लगातार करने पर इसकी लत पड़ जाती है तथा ताकत कम हो जाती है । लम्बे समय तक अफीम लेने से इरेक्शन होना बंद हो सकता है। शरीर में सूखापन बढ़ने लगता है, किसी काम में मन नहीं लगता, और शरीर की कांटी नष्ट होने लगती है। इसलिए अफीम वाली दवा का सेवन न ही करें तो बेहतर है। आयुर्वेद में शीघ्रपतन के लिए बहुत से ऐसी हर्बल दवाएं है जो लम्बे समय तक ली जा सकती है, सेफ हैं और शरीर पर पॉजिटिव तरीके से काम करती हैं।
  • इस पेज पर जानकारी इसलिए ही दी गई कि आप इस दवा के बारे में सही सही जान लें और किसी भ्रान्ति में न रहें। याद रखें, अफीम युक्त दवाओं के सेवन से मिलने वाले रिजल्ट इंस्टेंट तो हो सकते हैं लेकिन इनके लॉन्ग टर्म इफ़ेक्ट शरीर को नेगेटिव तरीके से प्रभावित कर सकते हैं।

जातिफलादि वटी (स्तंभक) के साइड-इफेक्ट्स Side effects

  • अफीम होने से इसके कई साइड इफेक्ट्स हैं।
  • इससे शरीर में ड्राईनेस बढती है। इसलिए इसके सेवन के दौरान अच्छी मात्रा में दूध, मलाई आदि चिकने पदार्थों के सेवन की सलाह दी जाती है।
  • इससे शरीर की कान्ति नष्ट हो सकती है।
  • इससे एनर्जी लेवल कम हो सकता है।
  • इससे कब्ज़ या पेशाब का रुकना या पाचन की अन्य समस्या हो सकती है।
  • इससे कुछ लोगों में पेट में जलन हो सकती है।

जातिफलादि वटी (स्तंभक) को कब प्रयोग न करें Contraindications

  • बहुत ड्राईनेस हो तो इस दवा का सेवन नहीं करें।
  • कब्ज़, पाइल्स में इसे नहीं लें।
  • पेशाब रुकने की समस्या में इसे नहीं लें।
  • जिन्हें पेट में सूजन हो gastritis, वे इसका सेवन न करें।
  • शरीर में यदि पहले से पित्त बढ़ा है, रक्त बहने का विकार है bleeding disorder, हाथ-पैर में जलन है, अल्सर है, छाले हैं तो भी इसका सेवन न करें।
  • इसे बताई मात्रा से अधिकता में न लें।
  • यदि दवा से किसी भी तरह का एलर्जिक रिएक्शन हों तो इसका इस्तेमाल नहीं करें।
  • अधिक मात्रा में सेवन पेट में जलन, एसिडिटी, आदि समस्या कर सकता है।
  • शरीर में पहले से ही कोई अन्य विकार है तो डॉक्टर से परामर्श के बिना कोई आयुर्वेदिक दवाइयां नहीं लें।

भंडारण निर्देश

  • सूखी जगह में स्टोर करें।
  • इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।

उपलब्धता

  • इस दवा को ऑनलाइन या आयुर्वेदिक स्टोर से ख़रीदा जा सकता है।
  • बैद्यनाथ Baidyanath Jatiphaladi Bati (Stambhak) MRP Rs 619.80
  • तथा अन्य बहुत सी फर्मसियाँ।
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