हिस्पो कैप्सूल के फायदे, नुकसान, उपयोग विधि और प्राइस

Hispo Capsule improves libido and supports better erection and energy level. It has antioxidant, adaptogenic, anti-stress, energy boosting and tonic properties. It improves energy level, strength, vitality and vigor.

हिस्पो कैप्सूल मैक्सिमा प्रोआयुर्वदा द्वारा निर्मित एक हर्बल आयुर्वेदिक दवाई है। इसमें अश्वगंधा, केवांच, विदारी, शिलाजीत, गोखरू, बला और सफ़ेद मूसली है। ये सभी द्रव्य आयुर्वेद में मुख्य रूप से पुरुषों की यौन दुर्बलता को दूर करने और उनके यौन प्रदर्शन में सुधार के लिए दिए जाते हैं। यह दवाई पुरुषों में शीघ्रपतन, इरेक्टाइल डिसफंक्शन, नामर्दी, वीर्य विकार, कामेच्छा की कमी आदि में लाभप्रद है।

इस दवा का मुख्य घटक अश्वगंधा है। अश्वगंधा जड़ में कई एल्कलॉइड होते हैं जैसे की, विथानिन, विथानानाइन, सोमनाइन, सोम्निफ़ेरिन आदि। जड़ में फ्री अमीनो एसिड में जैसे की एस्पार्टिक अम्ल, ग्लाइसिन, टाइरोसीन शामिल एलनाइन, प्रोलाइन, ट्रीप्टोफन ,ग्लूटामिक एसिड और सीस्टीन aspartic acid, glycine, tyrosine, alanine, proline, tryptophan, glutamic acid and cysteine आदि भी पाए जाते हैं। विथानिन में शामक और नींद दिलाने वाला गुण है sedative and hypnotic। विथफेरिन एक अर्बुदरोधी antitumor, एंटीऑर्थरिटिक anti-arthritic और जीवाणुरोधी antibacterial है। अश्वगंधा स्वाद में कसैला-कड़वा और मीठा होता है। तासीर में यह गर्म hot in potency है। इसका सेवन वात और कफ को कम करता है लेकिन बहुत अधिक मात्रा में सेवन शरीर में पित्त और आम को बढ़ा सकता है। यह मुख्य रूप से मांसपेशियों muscles, वसा, अस्थि, मज्जा/नसों, प्रजनन अंगों reproductive organ, लेकिन पूरे शरीर पर काम करता है। यह मेधावर्धक, धातुवर्धक, स्मृतिवर्धक, और कामोद्दीपक है। यह बुढ़ापे को दूर करने वाली औषधि है।

अश्वगंधा (Withania somnifera) की जड़ें को इंडियन जिन्सेंग के नाम से भी जाना जाता है। यह पुरुष प्रजनन अंगों पर विशेष प्रभाव डालती है तथा यौन शक्ति बढ़ाने के लिए प्रयोग की जाती है। यह वीर्य की मात्रा और गुणवत्ता को बढ़ाने में भी मदद करती है। अश्वगंधा आयुर्वेद में टॉनिक, कामोद्दीपक, वजन बढ़ाने के लिए और शरीर की प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए increases weight and improves immunity प्रयोग की जाती है। अश्वगंधा तंत्रिका कमजोरी, बेहोशी, चक्कर और अनिद्रा nervous weakness, fainting, giddiness and insomnia तथा अन्य मानसिक विकारों की भी अच्छी दवा है।

इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें।

Hispo Capsule is an herbal Ayurvedic medicine indicated in sexual weakness of men. It contains many well-known and effective ingredients to improve libido and sexual performance. Hispo Capsule improves libido and supports better erection and energy level. It has antioxidant, adaptogenic, anti-stress, energy boosting and tonic properties. It improves energy level, strength, vitality and vigor.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

  • निर्माता / ब्रांड: मैक्सिमा प्रोआयुर्वदा
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: हर्बल आयुर्वेदिक
  • मुख्य उपयोग: स्तम्भन दोष, शीघ्र पतन, वीर्य का पतला होना
  • मुख्य गुण: वाजीकारक

हिस्पो कैप्सूल के घटक | Ingredients of Hispo Capsule in Hindi

  1. अश्वगंधा Ashwagandha Withania somnifera 600 mg
  2. केवांच Atmagupta Mucuna pruriens 400 mg
  3. सफ़ेद मूसली Safed musali Chlorophytum borivilianum 450 mg
  4. शतावरी Shatavari Aspar agus racemosus 375 mg
  5. विदारी Ikshugandha Vidarikand (Pueraria tuberosa) 300 mg
  6. बला Bala Sida cordifolia 300 mg
  7. गोखरू Gokshur Tribulus terrestris 428 mg
  8. शिलाजीत Shilajit Asphaltum 60 mg
  9. सतक्षीर पाउडर Satksheera Powder (Contains Probiotics) 40 mg

1- अश्वगंधा को असगंध, आसंध और विथानिया, विंटर चेरी आदि नामों से जाना जाता है। इसकी जड़ को सुखा, पाउडर बना आयुर्वेद में वात-कफ शामक, बलवर्धक रसायन की तरह प्रयोग किया जाता है।

यह एक टॉनिक दवा है। यह शरीर को बल देती है। असगंध तिक्त-कषाय, गुण में लघु, और मधुर विपाक है। यह एक उष्ण वीर्य औषधि है। यह वात-कफ शामक, अवसादक, मूत्रल, और रसायन है जो की स्पर्म काउंट को बढ़ाती है।

  • यह जड़ी बूटी पुरुषों में यौन शक्ति बढ़ाने के लिए प्रयोग की जाती है।
  • यह पुरुष प्रजनन अंगों पर विशेष प्रभाव डालती है।
  • यह पुरुषों में जननांग के विकारों के लिए एक बहुत ही अच्छी दवा है।
  • यह वीर्य की मात्रा और गुणवत्ता को बढ़ाने में भी मदद करती है।
  • यह शुक्र धातु की कमी, उच्च रक्तचाप, मूर्छा भ्रम, अनिद्रा, श्वास रोगों, को दूर करने वाली उत्तम वाजीकारक औषधि है।

2- कौंच या केवांच बीज Mucuna pruriens की गिरी है। केवांच की गिरी बहुत ही प्रभावशाली हर्बल दवा है तथा इसे हजारों वर्षों से पुरुष प्रजनन क्षमता में सुधार करने के लिए प्रयोग किया जाता रहा है। यह हाइपोथेलेमस पर काम करता है। इसके सेवन से सीरम टेस्टोस्टेरोन, लुटीनाइज़िंग luteinizing हार्मोन, डोपामाइन, एड्रेनालाईन, आदि में सुधार होता है। यह शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता में भी उचित सुधार करने वाली नेचुरल दवा है । मानसिक तनाव, नसों की कमजोरी, टेस्टोस्टेरोन के कम लेवल आदि में इसके सेवन से बहुत लाभ होता है।

3- सफ़ेद मुस्ली को नेचुरल वियाग्रा या इंडियन जेन्सेंग के नाम से भी जाना जाता है। यहुताम वाजीकारक, और सेक्स टॉनिक के रूप में अन्य घटकों के साथ बहुत से दवाओं में कामेच्छा की कमी, शीघ्रपतन, स्तम्भन दोष। आदि में प्रयोग की जाती है। यह फर्टिलिटी बूस्टर है और प्रजनन अंगों को ताकत देती है।

4- शिलाजीत, हिमालय की चट्टानों से निकलने वाला पदार्थ है। आयुर्वेद में औषधीय प्रयोजन के लिए शिलाजीत को शुद्ध करके प्रयोग किया जाता है। यह एक adaptogen है और एक प्रमुख आयुर्वेदिक कायाकल्प टॉनिक है। यह पाचन और आत्मसात में सुधार करता है। आयुर्वेद में, इसे हर रोग के इलाज में सक्षम माना जाता है। इसमें अत्यधिक सघन खनिज और अमीनो एसिड है।

5- शिलाजीत प्रजनन अंगों पर काम करता है। यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है और प्रतिरक्षा में सुधार करता है । यह पुरानी बीमारियों, शरीर में दर्द और मधुमेह में राहत देता है। इसके सेवन शारीरिक, मानसिक और यौन शक्ति देता है।

6- शतावरी में अल्सर ठीक करने के, इम्युनिटी बढ़ाने के और टॉनिक गुण हैं। यह आँतों को साफ़ करती है और पेचिश को अपने संकोचक गुण से रोकती है। शतावर के सेवन से शरीर में अम्लपित्त की शिकायत दूर होती है।

7- गोखरू आयुर्वेद की एक प्रमुख औषधि है। इस मुख्य रूप से पेशाब रोगों और पुरुषों में यौन कमजोरी के लिए प्रयोग किया जाता है।

8- गोखरू दो प्रकार का होता है, छोटा और बड़ा। छोटे गोखरू का वानस्पतिक नाम ट्राईब्यूलस टेरेस्ट्रिस है। इसके पत्ते देखने में एकदम चने के पत्ते जैसे लगते है तथा इस पर पीले पुष्प आते हैं। इसके फल कांटे दार होते है और इन्हें त्रिकंटक भी कहा जाता है। क्योंकि यह फल कांटेदार होने के कारण गौ के खुरों में फंस जाते हैं इसलिए यह गोखरू कहलाते हैं।

गोखरू आयुर्वेद में मुख्य रूप से पुरुषों के लिए प्रयोग की जाने वाली औषधि है। इसके सेवन से मांसपेशियां बनती हैं, मज़बूत होती हैं, शक्ति-बल की वृद्धि होती है, टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ता है जिससे कामेच्छा बढ़ती है, वीर्य -शुक्र विकार दूर होते हैं और व्यक्ति हृष्ट-पुष्ट होता है।

गोखरू शीतल, मूत्रशोधक, मूत्रवर्धक, वीर्यवर्धक, और शक्तिवर्धक है। यह पथरी, पुरुषों के प्रमेह, सांस की तकलीफों, शरीर में वायु दोष के कारण होने वाले रोगों, हृदयरोग और प्रजनन अंगों सम्बन्धी रोगों की उत्तम दवा है। यह वाजीकारक है और पुरुषों के यौन प्रदर्शन में सुधार करता है।

गोखरू का प्रयोग यौन शक्ति को बढ़ाने में बहुत लाभकारी माना गया है। यह नपुंसकता, किडनी/गुर्दे के विकारों, प्रजनन अंगों की कमजोरी-संक्रमण, आदि को दूर करता है।

हिस्पो कैप्सूल के फायदे | Benefits of Hispo Capsule in Hindi

  1. यह एक सेक्सुअल टॉनिक है।
  2. इसमें केवांच, अश्वगंधा, विदारीकन्द, शिलाजीत जैसे द्रव्य हैं जो की पुरुषों के विशेष रूप से उपयोगी माने गए हैं।
  3. यह दवाई प्रजनन अंगों के सही प्रकार से काम करने में सहयोग करती है।
  4. यह इरेक्टाइल डिसफंक्शन आदि को दूर करती है।
  5. यह इम्पोटेंस में फायदेमंद है।
  6. इसका सेवन शरीर में ताकत, उर्जा देता है।
  7. यह यौन दुर्बलता को दूर करने में सहायक है।
  8. यह नसों को ताकत देती है।
  9. यह शीघ्रपतन, स्तंभन दोष, अनैच्छिक शुक्रपात, स्वप्नदोष, यौन दुर्बलता में लाभप्रद है।
  10. यह वीर्य / शुक्राणु की मात्रा को बढ़ाती spematogenic है।

हिस्पो कैप्सूल के चिकित्सीय उपयोग | Uses of Hispo Capsule in Hindi

  1. स्तम्भन दोष ED, Erectile dysfunction / performance problem
  2. शीघ्रपतन या प्रीमेच्योर एजाकुलेशन premature ejaculation
  3. कम एनर्जी, कम कामेच्छा Low energy, vigour, loss of libido
  4. वीर्य दोष Semen disorders (too few sperms / oligospermia or no sperms azoospermia or defects in sperm quality)
  5. शारीरिक कमजोरी general debility
  6. तनाव और मानसिक कारणों से नामर्दी stress induced infertility & psychogenic impotency

शीघ्रपतन या प्रीमेच्योर एजाकुलेशन वह स्थिति है जिसमें योनि पेनेट्रेशन के 1 मिनट के भीतर स्खलन हो जाता है। जब यह हमेशा या लगभग हमेशा होता है है तो शीघ्र पतन की समस्या हो जाती है। इस यौन समस्या में स्खलन पर नियंत्रण की कमी रहती है। जिस कारण यौन संतुष्टि का अभाव रहता है और पार्टनर्स में निराशा तथा यौन प्रदर्शन की कमी, और संतुष्टि नहीं हो पाती।

स्तंभनदोष या नपुंसकता या इरेक्टाइल डिसफंक्शन, वह स्थिति है जब संभोग के दौरान शिश्न में तनाव / उत्तेजना नहीं आती अथवा यह उत्तेजना बनी नहीं रहती जिससे यौन निष्क्रियता हो जाती है।

नपुंसकता या नामर्दी में पुरुष सेक्स करने में असफल रहता है। यह स्थिति मानसिक भी हो सकती और शारीरिक भी। शारीरिक नपुंसकता के कई कारण हो सकते हैं जैसे की ब्लड सप्लाई की कमी, नर्व्स की गड़बड़ी से या हॉर्मोनल असंतुलन आदि तथा इसमें व्यक्ति के अंग में किसी स्थिति में उत्तेजना नहीं आती। मानसिक नपुंसकता चिंता, भय, स्ट्रेस, एंग्जायटी, आदि के कारण हो सकती है। इसमें मास्टरबेशन के दौरान पेनिस में उत्तेजना आती है जबकि सेक्स के दौरान नहीं।

हिस्पो कैप्सूल की सेवन विधि और मात्रा | Dosage of Hispo Capsule in Hindi

  1. 2 गोली, दिन में दो बार लें।
  2. इसे सुबह और शाम लें।
  3. इसे दूध अथवा पानी के साथ लें।
  4. इसे भोजन करने के बाद लें।
  5. या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications in Hindi

  1. इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  2. इसे ज्यादा मात्रा में न लें।
  3. इसके सेवन से वज़न बढ़ सकता है।
  4. जिन लोगों में आम दोष हो, स्रोतों में रुकावट हो वे इसका प्रयोग सावधानी से करें।
  5. जंक फ़ूड न खाएं।
  6. तले, भुने, खट्टे, मसालेदार भोजन न खाएं।
  7. खूब पानी पियें।
  8. एक्सरसाइज करें।

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