अशोकारिष्ट के फायदे, नुकसान, उपयोग विधि और प्राइस

अशोकारिष्ट Ashokarishta in Hindi आयुर्वेद की एक बहुत ही जानी-मानी दवा है। अशोकारिष्ट स्त्रियों में होने वाली रोगों की दवा है। इसका उपयोग श्वेत प्रदर, मासिक में दर्द, मासिक की समस्या, खून की कमी, रक्तार्श (खूनी बवासीर) मन्दाग्नि, अरुचि, प्रमेह, शोथ और रक्त प्रदर को नष्ट करता है।

रक्त प्रदर में मेनोरेजीया और मीटरेजीया (menorrhagia and metrorrhagia) दोनों शामिल हैं। रक्त प्रदर का कारण होर्मोनेस का असंतुलन है जो पित्त की अधिकता के कारण होता है। रक्त प्रदर के कारण शरीर से खून का ह्रास होता है जिससे खून की कमी, सिर दर्द, कमजोरी, बेचनी, नींद न आना जैसी समस्याएं हो जाती हैं। अशोकारिष्ट एक टॉनिक है जो इन सभी समस्याओं में फायदेमंद है।

Loading...

अशोकारिष्ट, का मुख्य घटक अशोक पेड़ की छाल है। अशोक के पेड़ की छाल का प्रयोग मासिक धर्म से जुड़े सभी विकार का इलाज करने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह गर्भाशय को उत्तेजित करता है लेकिन संकुचन के बिना। यह गर्भ से अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने के लिए प्रयोग किया जाता है।

 ध्यान देने योग्य बात यह है कि आपको अशोकारिष्ट तभी लेनी चाहिए जब ब्लीडिंग अधिक है, एब्नार्मल है,लम्बे समय तक होती है या पीरियड बहुत जल्दी जल्दी आ रहे हैं। आपको अशोकारिष्ट नहीं लेनी चाहिए यदि पीरियड नहीं आते, पीरियड बहुत कम दिन के लिए होते हैं या पीरियड बहुत लम्बे समय बाद आते हैं। यदि ऐसे में अशोकारिष्ट का सेवन किया जाता है तो पीरियड और ज्यादा डिले हो जायेंगे और ब्लीडिंग भी कम होगी।

जो महिलायें इनफर्टिलिटी की समस्या से ग्रसित हैं, उन्हें कुछ महीने अशोकारिष्ट का सेवन अवश्य करना चाहिए। अशोकारिष्ट का सेवन त्रिदोष नाशक है और वात, पित्त और कफ तीनों को ही संतुलित करता है।

Loading...

यह आयुर्वेद की आसव – अरिष्ट प्रकार की दवा है। इसमें किण्वन के दौरान अल्कोहल उत्पन्न होता है। यह अल्कोहल दवा के शरीर में सही से और जल्दी अवशोषण में मदद करती है। दवा के बारे में इस पेज पर जो जानकारी दी गई है वह इसमें प्रयुक्त जड़ी-बूटियों के आधार पर है। हम इस प्रोडक्ट को एंडोर्स नहीं कर रहे। यह दवा का प्रचार नहीं है। हमारा यह भी दावा नहीं है कि यह आपके रोग को एकदम ठीक कर देगी। यह आपके लिए फायदेमंद हो भी सकती हैं और नहीं भी। दवा के फोर्मुलेशन के आधार और यह मानते हुए की इसमें यह सभी द्रव्य उत्तम क्वालिटी के हैं, इसके लाभ बताये गए हैं। इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें। हमारा उद्देश्य दवा के लेबल के अनुसार आपको जानकारी देना है।

यह पेज अशोकारिष्ट के बारे में हिंदी में जानकारी देता है जैसे कि दवा का कम्पोज़िशन, उपयोग, लाभ/बेनेफिट्स/फायदे, कीमत, खुराक/ डोज/लेने का तरीका, दुष्प्रभाव/नुकसान/खतरे/साइड इफेक्ट्स/ और अन्य महत्वपूर्ण ज़रूरी जानकारी।

Ashokarishta is classical completely herbal Ayurvedic medicine. This medicine is referenced from Bhaishajya Ratnavali and indicated for various gynecological disorders. Ashokarishta shows beneficial effect in hormonal imbalance, absence of periods, heavy bleeding during periods, other period related disorders, infertility etc. Here information is given about properties, uses, benefits and dosage of this medicine in Hindi language.

  • पर्याय: Ashokarishtam
  • संदर्भ: भैषज्यरत्नावली
  • दवा का नाम: अशोकारिष्ट Ashokarishta
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: हर्बल आयुर्वेदिक आसव-अरिष्ट
  • मुख्य उपयोग: योनि से अधिक ब्लड जाना
  • मुख्य गुण: वात तथा कफ दोष को संतुलित करना
  • दवा का अनुपान: गुनगुना जल
  • गर्भावस्था में प्रयोग: नहीं करें।
  • एक दिन में ली जा सकने वाली मात्रा: दिन में दो बार, 12 से 24 ml की मात्रा वयस्कों द्वारा ली जा सकती है

अशोकारिष्ट के घटक | Ingredients of Ashokarishta in Hindi

  • अशोक Ashoka Saraca asoca Stem bark 4.8 kg
  • पानी Jal for decoction Water 49.152 l reduced to 12.288 l
  • गुड Guda Jaggery 9.6 kg
  • धातकी Dhataki Woodfordia fruticosa Flower 768 g
  • सफ़ेद जीरा Ajaji (shveta Jiraka) Cuminum cyminum Fruit 48 g
  • मोथा Mustaka (Musta) Cyperus rotundus Rhizome 48 g
  • सूखा अदरक पाउडर shunthi Zingiber officinale Rhizome 48 g
  • दारू हल्दी Darvi (Daruharidra) Berberis aristata Stem 48 g
  • उत्पल Utpala Nymphaea stellata Fl. 48 g
  • हरड़ Haritaki Terminalia chebula Pericarp 48 g
  • बहेड़ा Bibhitaka Terminalia belerica Pericarp 48 g
  • आमला Amalaki Emblica officinalis Pericarp 48 g
  • आम की गुठली Amrasthi (Amra) Mangifera indica। Endosperm (Beeja Majja) 48 g
  • सफ़ेद जीरा Jiraka (shveta Jiraka) Cuminum cyminum Fruit 48 g
  • वासा Vasa Adhatoda vasica Root 48 g
  • सफ़ेद चन्दन  Chandana (shveta Candana) 48 g

जाने दवा में प्रयुक्त जड़ी-बूटियों को

अशोक

अशोक की छाल को आयुर्वेद में प्रमुखता से स्त्री रोगों के उपचार में प्रयोग किया जाता है। यह स्वभाव से शीत होती और प्रजनन तथा मूत्र अंगों पर विशेष रूप से काम करती है। यह गर्भाशय की कमजोरी और योनी की शिथिलता को दूर करती है। यह संकोचक, कडवा, ग्राही, रंग को सुधारने वाला, सूजन डोर करने वाला और रक्त विकारों को नष्ट करने वाला है।

  • रस (taste on tongue): मधुर, तिक्त, कषाय
  • गुण (Pharmacological Action): लघु, रुक्ष
  • वीर्य (Potency): शीत
  • विपाक (transformed state after digestion): कटु
  • कर्म: ग्राही, गर्भाशय रसायन, हृदय, प्रजास्थापना, स्त्री रोग्जित, वेदना स्थापना, विषघ्न, वर्ण्य

अशोक रक्त रोधक प्रयोगों में बहुत ही हितकर है। अशोक स्त्री रोगों में बहुत ही फायदा करता है। इसके सेवन से बाँझपन नष्ट होता है और राजोविकर दूर होते है। यह दर्द, सूजन, रक्त प्रदर, श्वेत प्रदर, दर्द, अतिसार, पथरी, पेशाब में दर्द, आदि में लाभप्रद है।

त्रिफला

त्रिफला (फलत्रिक, वरा) आयुर्वेद का सुप्रसिद्ध रसायन है। यह आंवला, हर्र, बहेड़ा को बराबर मात्रा में मिलाकर बनता है। यह रसायन होने के साथ-साथ एक बहुत अच्छा विरेचक, दस्तावर भी है। इसके सेवन से पेट सही से साफ़ होता है, शरीर से गंदगी दूर होती है और पाचन सही होता है। यह पित्त और कफ दोनों ही रोगों में लाभप्रद है। त्रिफला प्रमेह, कब्ज़, और अधिक पित्त नाशक है। यह मेदोहर और कुछ दिन के नियमित सेवन से वज़न को कम करने में सहायक है। यह शरीर से अतिरिक्त चर्भी को दूर करती है और आँतों की सही से सफाई करती है।

हरीतकी Terminalia chebula आयुर्वेद की रसायन औषधि है। यह पेट रोगों में प्रयोग की जाने वाली सबसे प्रभावी औषध है। संस्कृत में हरड़ को हरीतकी, हर्रे, हर्र, अभया, विजया, पथ्या, पूतना, अमृता, हैमवती, चेतकी, विजया, जीवंती और रोहिणी आदि नामों से जानते हैं। यूनानी में इसे हलीला कहते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, हरीतकी में पांचो रस मधुर, तीखा, कडुवा, कसैला, और खट्टा पाए जाते हैं। गुण में यह लघु, रुक्ष, वीर्य में उष्ण और मधुर विपाक है। हरीतकी, विषाक्त पदार्थों को शरीर से निकलती है व अधिक वात को काम करती है। यह विरेचक laxative, कषाय astringent, और रसायन tonic है। यह सूजन को दूर करती है। यह मूत्रल और दस्तावर है। यह अफारे को दूर करती है और पेट के कीड़ों को भी नष्ट करती है।

बहेड़ा या विभीतक, बिभीतकी (Terminalia bellirica) रस में मधुर, कसैला, गुण में हल्का, रूक्ष, प्रकृति में गर्म, और मधुर विपाक है। यह त्रिदोषनाशक, धातुवर्द्धक, वीर्यवर्धक, पोषक, रक्तस्तम्भक, दर्द को शांत करने वाला तथा कब्ज में लाभकारी है। बहेड़े में टैनिन में पाए जाते हैं तथा यह रक्त को बहने से रोकता है। यह रस, रक्त, मांस और मेद से उत्पन्न विकारों और दोषों को दूर करता है। यह पित्त और कफ को संतुलित करता है।

बहेड़े का सेवन मन्दाग्नि, प्यास, वमन, अर्श, कृमि, खांसी-जुखाम, सांस फूलना, आवाज़ बैठना, आदि में लाभकारी है। यह मेद धातु पर तेज़ी से प्रभाव डालता है।

आंवला, ठंडक देने वाला, कसैला, पाचक, विरेचक, भूख बढ़ाने वाले और कामोद्दीपक माना गया है। इसमें ज्वरनाशक, सूजन दूर करने के और मूत्रवर्धक गुण है। आंवला एक रसायन है जो की शरीर में बल बढाता है और आयु की वृद्धि करता है। यह शरीर में इम्युनिटी boosts immunity को बढाता है। यह विटामिन सी vitamin C का उत्कृष्ट स्रोत है। इसके सेवन से बाल काले रहते है, वात, पित्त और कफ नष्ट होते है और शरीर में अधिक गर्मी का नाश होता है।

मोथा

मोथा में फाइटोएस्ट्रोजन पाए जाते हैं जो मासिक के असंतुलन और रजोनिवृत्ति में उपयोगी है। आयुर्वेद में रजोनिवृत्ति के लक्षणों से राहत पाने के लिए उन दवाओं का प्रयोग किया जाता है जिनमे फाइटोएस्ट्रोजन यानिकी पादप में पाए जाने वाले एस्ट्रोजन होते हैं और इन दवाओं में अशोकारिष्ट भी शामिल है।

वासा

वासा रक्त पित्त की दवा है। इसके सेवन से शरीर से असामान्य खून गिरना रुकता है।

दवा के औषधीय कर्म

  • रक्तप्रदरहर: द्रव्य जो रक्त प्रदर की समस्या को दूर करे।
  • प्रमेहहर: द्रव्य जो प्रमेह अर्थात मूत्र रोग को दूर करे।
  • श्वेतप्रदरहर: द्रव्य जो सफ़ेद पानी की समस्या को दूर करे।
  • कफहर: द्रव्य जो कफ को कम करे।
  • ग्राही: द्रव्य जो दीपन और पाचन हो तथा शरीर के जल को सुखा दे।
  • रक्त स्तंभक: जो चोट के कारण या आसामान्य कारण से होने वाले रक्त स्राव को रोक दे।
  • शोधक: द्रव्य जो शरीर की गंदगी को मुख द्वारा या मलद्वार से बाहर निकाल दे।

अशोकारिष्ट के फायदे | Benefits of Ashokarishta in Hindi

  • इसका एसट्रिनजेंट astringent गुण ब्लीडिंग डिसऑर्डर में लाभकारी है।
  • इसके सेवन से रोजोविकर/मासिक धर्म menstrual disorders के विकारों में लाभ होता है।
  • पोलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) में यदि पीरियड 5 दिन से ज्यादा आते हैं या तय समय से पहले आते हैं तो इस दवा के सेवन से लाभ होता है।
  • यह प्रजनन क्षमता को बढ़ाती है।
  • महिला प्रजनन अंगों और रक्त को rejuvenates करती है।
  • यह इनफर्टिलिटी infertility में भी लाभप्रद है।
  • यह एक गर्भाशय का टॉनिक uterine tonic है और गर्भाशय को बल देती है।
  • यह दवा मासिक की समस्याओं में लाभकारी है।
  • यह दवा रक्त और प्रजनन प्रणाली को पोषण देती है।
  • यह दवा होर्मोस का संतुलन करती है।
  • रजोनिवृत्ति में भी यह लाभप्रद है।

अशोकारिष्ट के चिकित्सीय उपयोग | Uses of Ashokarishta in Hindi

अशोकारिष्ट में बहुत से उपयोगी द्रव्य हैं। अशोक, शुंठी, हरीतकी, वासा, और चंदन रसायन हैं जो हृदय के सुचारू रूप से काम करने में मदद करते हैं और शरीर को ताकत और बल देते हैं। यह शरीर की धातुओं को भी पुष्ट करते हैं। हरीतकी, आमलकी और उत्पल सीधे रसायन के रूप में काम करते हैं। मोथा, सफ़ेद जीरा, सोंठ और हरीतकी पाचन तन्त्र पर काम करते हुए पाचन को सही करते हैं एवं धातुओं को भी पुष्ट करते हैं। ये सभी दीपन और पाचन हैं। उत्पल, हरीतकी और विभितकी दिमाग से चिन्ता, शोक आदि दूर करते हैं।

त्रिफला शरीर को शुद्ध करता है और विरेचक होने के कारण कब्ज़ का नाश करता है। इस प्रकार यह दवा पूरे शरीर, पाचन, दिल, दिमाग, धातुओं पर काम करती है और शरीर को पुष्ट कर रोगों में आराम देती है।

  • अपच indigestion, बहुमूत्रता
  • जननांग में दर्द Pain in female genital tract
  • पीठ में दर्द backache
  • बाँझपन Infertility and all irregularities of menstrual flow
  • बुखार fever, रक्त पित्त bleeding disorders, अर्श piles, bleeding piles
  • मासिक धर्म के दौरान दर्द Dysmenorrhea
  • रक्त प्रदर (मासिक में बहुत अधिक रक्त का स्राव Metrorrhagia और मासिक धर्म अनियमितता Menorrhagia)
  • सफेद पानी/लिकोरिया Leucorrhoea
  • सूजन inflammation, खून की कमी
  • हाथ पैर में जलन burning sensation in the legs and feet,
  • हॉर्मोन असंतुलन Hormonal imbalance

अशोकारिष्ट की सेवन विधि और मात्रा | Dosage of Ashokarishta in Hindi

  • यह आयुर्वेद का अरिष्ट है और इसे लेने की मात्रा 12-24 मिलीलीटर है।
  • दवा को पानी की बराबर मात्रा के साथ-साथ मिलाकर लेना चाहिए अथवा रोगानुसार अनुपान के साथ दवा लें।
  • अतिरज (पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग) व रक्तप्रदर (योनि से असामान्य खून जाना) में साथ में चन्द्रप्रभा वटी के साथ दवा लें।
  • इसे सुबह नाश्ते के बाद और रात्रि के भोजन करने के बाद लें।
  • इसे भोजन के 30 मिनट में बाद, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  • परिणाम सेवन के कुछ सप्ताह बाद मिलते हैं।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

अशोकारिष्ट के इस्तेमाल में सावधनियाँ | Cautions in Hindi

  • इसका इस्तेमाल चिकित्सक की सलाह के आधार पर 1 से 2 महीने तक किया जा सकता है। मेनूपॉज में इसे 4-5 महीने तक लिया जाता है।
  • उम्र और ताकत पर विचार करते हुए और किसी वैद्य की विशेषज्ञ सलाह के साथ, दवा का उचित अनुपात में उचित अनुपान के साथ इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
  • इसे ज्यादा मात्रा में न लें।
  • अगर पीरियड नहीं आते, तो इस दवा का सेवन नहीं करें। इससे पीरियड और डिले हो सकते हैं।
  • अगर पीरियड में बहुत दर्द होता है तो केवल इस दवा के इस्तेमाल से राहत नहीं होती।
  • अगर दवा लेने से पीरियड पर बुरा असर होता है, हॉर्मोन का असंतुलन लगता है, या एसिडिटी खट्टी डकार आदि होता है तो दवा की मात्रा कम करके देखें। फर्क नहीं हो तो दवा का सेवन बंद कर दें।
  • यह पित्त को बढ़ाती है। इसलिए पित्त प्रकृति के लोग इसका सेवन सावधानी से करें।
  • इसे खाली पेट न लें।
  • इसमें 5-10% self-generated अल्कोहल है।
  • दवा के सेवन के दौरान गरिष्ठ भोजन, घी, दूध, चीनी, चावल, आदि का सेवन न करें।
  • नियमित व्यायाम करें।

अशोकारिष्ट के साइड-इफेक्ट्स | Side effects of Ashokarishta in Hindi

  • क्योंकि यह दवा महिला हॉर्मोन पर असर डालती है इसलिए इसके सेवन से पीरियड पर असर हो सकता है।
  • Loading...
  • कुछ महिलाओं में इसके सेवन से पीरियड देर से आ सकते है।
  • पीरियड की ब्लीडिंग कम हो सकती है।
  • इससे कुछ लोगों में पेट में जलन हो सकती है।

अशोकारिष्ट को कब प्रयोग न करें | Contraindications in Hindi

  • इसे गर्भावस्थ के दौरान न लें।
  • इसमें गुड़ है इसलिए डायबिटीज में इसका सेवन न करें।
  • यदि पीरियड तय डेट पर नहीं आते, अनियमित हैं तो इस दवा का सेवन नहीं करें। इससे पीरियड और डिले हो सकते हैं।
  • यदि दवा से किसी भी तरह का एलर्जिक रिएक्शन हों तो इसका इस्तेमाल नहीं करें।
  • अधिक मात्रा में सेवन पेट में जलन, एसिडिटी, आदि समस्या कर सकता है।
  • समस्या अधिक है, तो डॉक्टर की राय प्राप्तकर सही उपचार कराएं जिससे रोग बिगड़े नहीं।

भंडारण निर्देश

  • सूखी जगह में स्टोर करें।
  • इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।

उपलब्धता

  • इस दवा को ऑनलाइन या आयुर्वेदिक स्टोर से ख़रीदा जा सकता है।
  • Ashokarishta is manufactured by Dabur, Shree Baidyanath Ayurved Bhawan, Patanjali Divya Pharmacy, Sandu Brothers; Oushadasala (Ashokarishtam), Keva Ayurveda Healthcare (Ashokarishtam), Kottakkal Aryavaidyasala, Nagarjuna (Asokarishtam)
  • तथा अन्य बहुत सी फर्मसियाँ।

Where to buy

आप इस दवा को सभी फार्मेसी दुकानों पर या ऑनलाइन खरीद सकते हैं।

दवा के बारे में पूछे जाने वाले कुछ सवाल

क्या अशोकारिष्ट को एलोपैथिक दवाओं के साथ ले सकते हैं?

हाँ, ले सकते हैं। लेकिन दवाओं के सेवन में कुछ घंटों का गैप रखें।

क्या अशोकारिष्ट को होम्योपैथिक दवा के साथ ले सकते हैं?

ले तो सकते हैं। लेकिन इस से हो सकता है कि दोनों ही दवाएं काम नहीं करें। इसलिए, दवा के असर को देखना ज़रूरी है।

अशोकारिष्ट को कितनी बार लेना है?

  • इसे दिन में 2 बार लेना चाहिए।
  • इसे दिन के एक ही समय लेने की कोशिश करें।

क्या अशोकारिष्ट की अधिकता नुकसान कर सकती है?

दवाओं को सही मात्रा में लिया जाना चाहिए। ज्यादा मात्रा में दवा का सेवन साइड इफेक्ट्स कर सकता है।

क्या अशोकारिष्ट सुरक्षित है?

हां, सिफारिश की खुराक में लेने के लिए सुरक्षित है।

अशोकारिष्ट का मुख्य संकेत क्या है?

स्त्री रोग जैसेकि योनि से असामान्य ब्लड जाना, पीरियड जल्दी जल्दी आना, बहुत अधिक पीरियड होना आदि।

अशोकारिष्ट का पीरियड पर क्या असर होता है?

अशोकारिष्ट ब्लीडिंग को कम करती है।

क्या अनियमित पीरियड्स, जो बहुत लम्बे समय के बाद आते हैं। मुझे यह दवा लेनी चाहिए?

नहीं, इससे पीरियड और देर से आयेंगे।

पीरियड के दौरान ब्लीडिंग बहुत कम होती है। क्या यह दवा लेने से ब्लीडिंग ठीक होगी?

नहीं इससे ब्लीडिंग और कम हो जायेगी। इसलिए कम ब्लीडिंग में इस दवा को नहीं लेना चाहिए।

मीनोपॉज के दौरान क्या इसे ले सकती हूँ?

हां, इसे लेने से मीनोपॉज के लक्षणों में आराम होता है।

क्या स्त्री रोगों के आलवा भी अशोकारिष्ट ली जाती है?

हाँ। यह ब्लीडिंग पाइल्स और ब्लीडिंग दिसोर्देर्स जैसे नाक से खून गिरना में भी प्रयोग की जाती है। यह भूख कम लगना और पाचन की सम्स्य में भी फायदा करती है।

अशोकारिष्ट का वात-पित्त या कफ पर क्या प्रभाव है?

  • वात कम करना।
  • पित्त वृद्धि करना।
  • कफ कम करना।

क्या इसमें गैर-हर्बल सामग्री शामिल है?

नहीं।

यह दवा कब तक ले सकते हैं?

  • आप इसे 1-2 महीने के लिए ले सकते हैं।
  • अगर पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग होती है तो इसे पीरियड के दौरान ही लें या पीरियड शुरू होने के सप्ताह भर पहले लें।

अशोकारिष्ट लेने का सबसे अच्छा समय क्या है?

इसे भोजन के बाद लिया जाना चाहिए एक ही समय में दैनिक रूप में लेने की कोशिश करें।

क्या अशोकारिष्ट एक आदत बनाने वाली दवा है?

नहीं।

क्या यह दिमाग की अलर्टनेस पर असर डालती है?

नहीं।

क्या अशोकारिष्ट लेने के दौरान ड्राइव करने के लिए सुरक्षित है?

हाँ।

क्या मैं इसे दूध पिलाने के दौरान ले सकती हूँ?

इसे लिया जा सकता है यदि पीरियड में ब्लीडिं घोटी हैं अथवा सफ़ेद पानी की समस्या है।

क्या मैं इसे गर्भावस्था के दौरान ले सकती हूँ?

नहीं। यह एक अरिष्ट है जो महिला हॉर्मोन पर असर डालता है। प्रेगनेंसी में हॉर्मोन के लेवल पर किसी भी तरह का असर गर्भावस्था को नेगेटिव तरीके से प्रभावित कर सकता है। साथ ही इसमें कई द्रव्य हैं जो तासीर में गर्म है। इसलिए गर्भावस्था में इस दवा को नहीं लेना है।

क्या एक मधुमेह व्यक्ति इसे ले सकता है?

इसे बनाने में गुड़ का प्रयोग होता है इसलिए डायबिटीज में इसे सावधानी से प्रयोग करें। यदि अनियंत्रित शुगर है तो इसका सेवन न करें। यदि शुगर नियंत्रण में है और कुछ मात्रा में मीठे का प्रयोग कर सकते है तो इसे भी लिया जा सकता है।

पतंजलि की अशोकारिष्ट का मूल्य क्या है?

दिव्य अशोकारिष्ट की 450 ml बोतल की कीमत Rs. 70.00 है।

बैद्यनाथ Ashokarishta का क्या प्राइस है?

Baidyanath Ashokarishta Price:

  • 680 ML  125.00
  • 450 ML  105.00
  • 225 ML  62.00

दवा की बोतल खोलने के बाद इसे कितने दिन में प्रयोग कर लें?

  • इसे जल्दी से जल्दी इस्तेमाल करना सही रहता है।
  • दवा को गंदे हाथों से नहीं छुएं।
Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.