अग्निवर्धक वटी के फायदे और नुकसान

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अग्निवर्धक वटी Agni Vardhak Vati in Hindi के सेवन से पाचन ठीक से होता है। यह एक उष्ण वीर्य दवा है जो कफ दोष और वात दोष को संतुलित करती है और पित्त को बढ़ाती है। अग्निवर्द्धक वटी को भूख नहीं लगना, पाचन की कमजोरी, पेट में गड गड की आवाज़ आना, मुंह में अजीब स्वाद आना, कब्ज़ आदि में लिया जाता है।

अग्निवर्धक वटी पाचक अंगों पर काम करती है। पित्त वर्धक गुणों से यह पाचक रस का स्राव कराती है।

  • दवा का नाम: अग्निवर्द्धक वटी Agni Vardhak Vati
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: हर्बल
  • मुख्य उपयोग: कमज़ोर पाचन
  • मुख्य गुण: पित्तवर्धक
  • दोष इफ़ेक्ट: वात-कफ कम करना, पित्त बढ़ाना
  • गर्भावस्था में प्रयोग: बिना डॉक्टर की सलाह नहीं करें

प्रधान कर्म

  • अनुलोमन: द्रव्य जो मल व् दोषों को पाक करके, मल के बंधाव को ढीला कर दोष मल बाहर निकाल दे।
  • कफहर: द्रव्य जो कफ को कम करे।
  • वातहर: द्रव्य जो वातदोष निवारक हो।
  • दीपन: द्रव्य जो जठराग्नि तो बढ़ाये लेकिन आम को न पचाए।
  • पित्तकर: द्रव्य जो पित्त को बढ़ाये।

अग्निवर्धक वटी के घटक Ingredients of Agni Vardhak Vati

  • काला नमक Black Salt 1 Part
  • नौसादर Ammonium Chloride 1 Part
  • काली मिर्च Black Pepper 1 Part
  • आक के फूल की लौंग Aak Calotropis Procera flower’s laung 1 Part
  • नीबू सत्व Nimbu Satva (Citric acid) 64 Parts
  • नींबू का रस Lemon Juice Q। S।

अग्निवर्धक वटी के लाभ/फ़ायदे Benefits of Agni Vardhak Vati

अग्निवर्द्धक वटी, पाचन को बढ़ाने वाली दवाई है। इसका मुख्य लाभ पाचन की कमजोरी को ठीक करना और भूख को बढ़ाना है। इस दवा को खराब पाचन, कम भूख, सूजन, कब्ज, बेल्चिंग और इसी तरह की स्थितियों के लिए लिया जा सकता है।

भूख नहीं लगना

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अगर भूख नहीं लगने का कारण पाचक जूसों का कम बनना है तो निश्चित ही इस दवा के सेवन से फायदा हो सकता है।

कमजोर पाचन

अग्निवर्धन वटी प्राकृतिक उत्पादों का एक स्वादिष्ट संयोजन है जो पाचन को उत्तेजित करता है। अच्छा पाचन अच्छी भूख के लिए महत्वपूर्ण है। इस गोली का चबाने मुंह के स्वाद में सुधारता है।

अग्निवर्द्धक वटी स्वभाव से गर्म है और पाचक पित्त को बढ़ाने वाली दवा है। कमजोर पाचन में खाना ठीक से पचता नहीं और शरीर को नहीं लगता। क्योंकि खाना देर तक पेट में रहता है इसलिए भूख भी नहीं लगती।अगर पाचन की कमजोरी पैक जूस के स्रावित नहीं होने से हैं, इस दवा को खाने से लाभ मिलेगा।

गैस से राहत

क्योंकि यह दवा पाचन को सही करने में सहयोगी है, इसलिए गैस में भी लाभप्रद हो सकती है।

मेटाबोलिज्म तेज करना

अग्निवर्द्धक वटी लेने से मेटाबोलिज्म तेज होता है, अरुचि दूर होती है और पाचन सही होता है।

पेट में दर्द

पेट दर्द के लिए, गर्म पानी के साथ इस दवा की 2 गोलियां तत्काल राहत देती हैं।

अग्निवर्धक वटी के चिकित्सीय उपयोग Uses of Agni Vardhak Vati

अग्निवर्धक वटी दवा पाचन कमजोरी, खराब भूख, अपचन आदि के इलाज में उपयोगी है। अग्निवर्धन का शाब्दिक अर्थ अग्नि को बढ़ाता है। यहां अग्नि का तात्पर्य है, शरीर में रहने वाली शक्ति जो पाचन बनाती है। यह एक पदार्थ के दूसरे या चयापचय में परिवर्तन के लिए ज़िम्मेदार है। अग्नि पित्त के भीतर निहित है और इसमें पाचन क्रिया शामिल है। यह नियमित भूख, स्वाद, पाचन, चयापचय, आकलन, और अवशोषण के लिए भी जिम्मेदार है। यह दवा बेहतर पाचन में सुधार करती है।

  • पेट फूलना Abdominal distention
  • अग्निमांद्य Agnimandya (Digestive impairment)
  • आम दोष Ama Dosha (metabolic waste and toxins)
  • कब्ज़ Constipation
  • गैस Flatulence
  • पेट में भारीपन लगना Heaviness
  • हिचकी Hiccups
  • अपच Indigestion
  • कोलिक Intestinal colic
  • अरुचि Loss of appetite

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Agni Vardhak Vati

  • अग्निवर्द्धक वटी की एक गोली दिन में दो से चार बार लेनी चाहिए।
  • इसे दही, छाछ अथवा गर्म पानी के साथ लें।
  • इसे भोजन करने के पहले या बाद में लें।
  • यदि भूख नहीं लगती तो इसे खाने से पहले लें।
  • अगर पाचन कमज़ोर है तो इसे खाने के साथ या बाद में लें।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

अग्निवर्धक वटी के इस्तेमाल में सावधनियाँ Cautions

  • यदि इसे खाने के बाद खट्टी डकार, पेट में जलन, हाथ पैर में जलन आदि हों तो इसका सेवन रोक दें। हो सकता है यह दवा आप के लिए ठीक नहीं है।
  • इस दवा को एक महीने से अधिक नहीं लेना चाहिए।
  • अगर दो तीन सप्ताह में भी रिजल्ट नहीं मिलते तो हो सकता है, दवा आप के लिए सही नहीं है और आप को सही इलाज़ नहीं मिल रहा।

अग्निवर्धक वटी के साइड-इफेक्ट्स Side effects

  • इस दवा का पित्त वर्धक प्रभाव है जिससे कुछ लोगों में इसके सेवन से एसिडिटी ज्यादा हो सकती है।
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  • पेट का अधिक एसिड खट्टी डकार, जलन, आदि का कारण बन सकता है।
  • लंबे समय तक इसका उपयोग वीर्य की गुणवत्ता और वीर्य की मात्रा को कम कर सकता है।
  • उच्च खुराक में यह गैस्ट्र्रिटिस को खराब कर सकता है।
  • अपने लक्षणों को पहचाने, यदि पाचक पित्त की कमी है तभी यह दवा कारगर है।

अग्निवर्धक वटी को कब प्रयोग न करें Contraindications

  • इसे गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान न लें। इसमें नौसादर, आक आदि हैं। वैसे भी पित्त वर्धक दवाओं को प्रेगनेंसी में नहीं लेना चाहिए।
  • इसमें नमक है। अगर उच्च रक्तचाप है और कम नमक खाने की सलाह है तो इसका सेवन नहीं करें।
  • यदि दवा से किसी भी तरह का एलर्जिक रिएक्शन हों तो इसका इस्तेमाल नहीं करें।
  • अधिक मात्रा में सेवन पेट में जलन, एसिडिटी, आदि समस्या कर सकता है।
  • समस्या अधिक है, तो डॉक्टर की राय प्राप्तकर सही उपचार कराएं जिससे रोग बिगड़े नहीं।

भंडारण निर्देश

  • सूखी जगह में स्टोर करें।
  • इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।

Agni Vardhak Vati (Classical medicine) is Herbal Ayurvedic medicine. It is indicated in treatment of anorexia and digestive weakness. Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

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