यूकेलिप्टस ऑयल – नीलगिरी तेल Eucalyptus Oil

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नीलगिरी तेल को यूकेलिप्टस ऑयल Nilgiri tel के नाम से भी जानते हैं। यह एक प्राकृतिक तेल है। इस एसेंशियल आयल को यूकेलिप्टस ट्री जिसका लैटिन नाम, यूकेलिप्टस ग्लोब्यूलस Eucalyptus globulus है, के पत्तों से आसवन प्रक्रिया | हाइड्रोडिस्टिलेशन, के द्वारा निकाला जाता है। यह तेल बाह्य रूप से प्रयोग किया जाता है।

नीलगिरी तेल में रोगाणुरोधी, जीवाणुरोधी और कवक विरोधी गुण पाए जाते हैं। नीलगिरी तेल को सर्दी-खांसी-नजला-जुखाम आदि में एक डेंगेंस्टेंट के रूप में इस्तेमाल करते है। इस तेल को हथेली पर लेकर दर्द-सूजन वाले हिस्से की मालिश करने से गर्माहट आती है, खून का दौरा ठीक होता है और दर्द से राहत मिलती है। इसे मोच और ऐंठन sprain and cramp पर भी लगाया जाता है। इसका उपयोग 1 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों वयस्कों और पर किया जा सकता है।

नीलगिरी का तेल जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों में दर्द और सूजन, खराब रक्त परिसंचरण आदि क्रोनिक मामलों में दीर्घकालिक राहत के लिए उपयोगी है। इसे लगाने से संवेदनाहारी प्रभाव होता है और यह अस्थायी रूप से दर्द और सूजन से राहत देता है।

Eucalyptus Oil is obtained from the leaves of tree Eucalyptus globulus Labill. (Myrtaceae). It has antiseptic and expectorant properties due to principal component eucalyptol. The undiluted oil is toxic if taken internally. Essential oils should not be applied to the skin unless they are diluted with a carrier vegetable oil.

यूकेलिप्टस / सफेदा Eucalyptus Tree

यूकेलिप्टस या नीलगिरी या सफेदा, ऑस्ट्रेलिया और तस्मानिया में पाया जाने वाला एक ऊँचा-पतला  पेड़ है। अब यह पेड़ भारत, उत्तरी और दक्षिणी अफ्रीका और दक्षिणी यूरोप में भी पाया जाता है। इसकी पत्तियां लंबी और नुकीली होती हैं जिनकी सतह पर गांठ पाई जाती है जिसमें तेल होता है। यही तेल आसवन के द्वारा निकाला जाता है।

यूकेलिप्टस वृक्ष की जड़ें जमीन में बहुत अधिक गहराई तब चली जाती हैं और जमीन से बहुत अधिक पानी सोखती हैं। एक पेड़ एक दिन में करीब 100 लीटर पानी सोख सकता है और इसलिए इसे दलदली जगहों पर लगाया जाता है। लेकिन जानकारी न होने से बहुत से लोग इसे कम भूजल वाले स्थानों पर भी लगा देते हैं। यूकेलिप्टस के बहुत से पेड़ एक जगह पर लगा दिए जाने पर यह जमीन से सारे पोषक पदार्थ और पानी को खींच लेता है। परिणामतः जमीन की उर्वरता नष्ट हो जाती है और यह बंजर होने लगती है। इस पेड़ की जड़ के समीप पांच वर्ग मीटर के दायरे में घास तक नहीं उगती है।

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यूकेलिप्टस के लिए दलदली इलाके और बहुत अधिक बारिश और जलभराव वाले क्षेत्र उपयुक्त हैं न कि कम बारिश और शुष्क इलाके। कम भूजल वाले इलाकों में इस पेड़ का रोपण जगह को बंजर कर सकता है।

  • स्पीशीज (परिवार) Species (Family): Eucalyptus globulus Labill. (Myrtaceae)
  • पर्याय Synonym(s): E. maidenii subsp. globulus (Labill.) Kirkp., Fevertree, Gum Tree, Tasmanian Bluegum
  • प्रयुक्त हिस्सा: पत्ते Leaf

वाष्पशील तेल Volatile oils : 0.5-3.5%

यूकेलिप्टोल (सिनीओल) 70-85% Eucalyptol (cineole) 70–85%।

मोनोटर्पेस (जैसे ए-पिनिन, बी-पिनन, डी-लिमोनेन, पसीमेने, ए-फेलैंडियान, कैफेन, जी-टेरपिनीन) और सेस्क्युटर्पेंस एल्डिहाइड और केटोन्स (जैसे कैवोन, पिनोकारवोन)

नीलगिरी तेल के लाभ/फ़ायदे Benefits of Eucalyptus Oil

  1. यह दर्द निवारक है।
  2. यह मोच-खिंचाव, जोड़ों के दर्द, नजला आदि में राहत प्रदान करता है।
  3. जोड़ों के दर्द, जकड़न, सूजन, गठिया, आदि में भी यह दर्दनिवारक और सूजन दूर करने के गुण के कारण लाभकारी है। मालिश करने से जोड़ों में गर्माहट आती है और रक्तप्रवाह ठीक होता है।
  4. गर्दन के दर्द, पीठ के दर्द, मांसपेशियों के दर्द आदि में भी यह सूजन को दूर करने में और दर्द निवारक गुण के कारण लाभकारी है। यह जब हलकी मालिश के साथ लगते हैं तो दर्द वाले हिस्से में आराम मिलता है।
  5. मोच, मांसपेशियों के दर्द, खिचाव, समेत यह सभी इसी तरह की समस्याओं तथा वात रोगों में बाहर से प्रयोग की जा सकने वाला अच्छा तेल है।
  6. जुखाम-कफ आदि में इसे इनहेल करने से नाक खुलती है, कंजेशन में राहत होती है और मालिश करने से खून का दौरा ठीक होता है।
  7. यह एंटीफंगल है।
  8. यह एंटीसेप्टिक है।
  9. यह एंटीमाइक्रोबियल है।

नीलगिरी तेल के चिकित्सीय उपयोग Uses of Eucalyptus Oil

  1. जोड़ों का दर्द Joint Pain
  2. घुटनों का दर्द Knee Pain
  3. आर्थराइटिस, गठिया Arthritis
  4. पीठ दर्द Backache
  5. मांसपेशियों का दर्द Muscle Pain
  6. गर्दन और कंधे का दर्द Neck & Shoulder Pain
  7. मोच Sprain
  8. ऐठन cramp
  9. फंगल इन्फेक्शन पर लगाने के लिए
  10. नाक जाम होना
  11. सर्दी-फ्लू
  12. साइनस

इसे माउथवाश, दर्द निवारक बाम-मलहम, साबुन, अरोमाथेरेपी, दाद-मुहांसे की क्रीम में इसके एंटीमाइक्रोबियल। एंटीसेप्टिक, एंटीफंगल और दर्द-सूजन निवारक गुण के कारण डाला जाता है।

नीलगिरी तेल कैसे प्रयोग करे?

For catarrh by inhalation

बहुत नाक में बहुत म्यूकस बनने, जुखाम आदि में इसकी कुछ बूँदों को रुमाल अपर छिडकें और सूंघें। या पानी में डाले और भाप बनाएं। इसे भाप को इन्हेल करने से नाक खुल जायेगी और सांस आराम से आएगी।

For sprains and cramps

मोच, क्रंप पर इसे लगाने के लिए, हथेली पर कुछ बूंदे किसी और वनस्पतिक तेल में मिला लें और प्रभावित जगह पर मालिश करें।

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संभावित दुष्प्रभाव साइड-इफेक्ट्स Side effects

  1. सभी दवाइयों की तरह, यूकलिप्टुस तेल के भी कुछ साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं। हालांकि ये हर किसी को प्रभावित नहीं करते हैं।
  2. इसके संभावित दुष्प्रभाव हैं:
  3. त्वचा प्रतिक्रियाएं जैसे खुजली, चकत्ते या एक्जिमा
  4. इनहेल करने से हे फीवर जैसे लक्षण या अस्थमा आदि।
  5. एलर्जी के लक्षण आदि।

सावधनियाँ/ / कब प्रयोग न करें Cautions /Contraindications

  1. नील गिरी का तेल केवल लगाने के लिए है।
  2. इस तेल का कभी भी सेवन नहीं करें।
  3. एसेंशियल आयल को कभी सीधे त्वचा पर न लगाएं। इन्हें किसी अन्य प्राकृतिक तेल में मिल कर प्रयोग करें।
  4. एक साल से छोटे बच्चों पर इसका प्रयोग नहीं करें।
  5. अगर इससे एलर्जी है तो इसका इस्तेमाल नहीं करें।
  6. इसे गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान बिना डॉक्टर की सलाह के प्रयोग न करें।
  7. अगर लक्षणों में आराम न हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।
  8. इस तेल को बच्चों की नज़र और पहुँच से दूर रखें।
  9. बच्चे उत्सुकतावश इसे मुख में डाल सकते हैं।
  10. बहुत छोटे बच्चों पर इसका प्रयोग न करें।

गलती से थोड़ी सी मात्रा में इसका सेवन खतरनाक है। इससे गंभीर लक्षण पैदा हो सकते हैं जैसे की गले और मुँह में जलन, बीमार होना,  मांसपेशियों की कमजोरी, चक्कर आना, पुतली का सिकुड़ जाना, दिल की धड़कन बढ़ जाना, घुटन, भ्रम और दौरे पड़ना burning in the throat and mouth, sickness, muscle weakness, dizziness, pinpoint pupils, rapid heartbeat, suffocation, delirium and convulsions। यदि गलती से तेल निगल लिया गया है तो एक डॉक्टर को तुरंत दिखाएँ।

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