Information about Type-2 Diabetes in Hindi

मधुमेह या डायबिटीज diabetes एक लाइफलॉन्ग रहने वाली स्तिथि है जिसमें व्यक्ति का ब्लड-शुगर blood sugar/blood glucose लेवल बढ़ा रहता है। यह दो प्रकार का होता है: टाइप 1 और टाइप 2।

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टाइप 2 मधुमेह अक्सर किसी कारणवश इन्सुलिन insulin के कम बनने से, सेल्स का इन्सुलिन के प्रति क्रियाशील न होने पर, मोटापे के कारण और उम्र बढ़ने के साथ हो सकता है। टाइप 2 डायबिटीज, टाइप 1 की तुलना में कहीं अधिक आम है। भारत में मधुमेह का आंकड़ा आजकल कहीं तेजी से बढ़ रहा है।

टाइप 2 मधुमेह, तब होता है जब अग्न्याशय pancreas (पेट के पीछे एक बड़ी ग्रंथि) पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है, या शरीर की कोशिकायें किसी कारणवश इंसुलिन के प्रति सक्रिय नहीं होती। इंसुलिन कम होने से खून में मौजूद ग्लूकोज glucose conversion to energy ऊर्जा के लिए ईंधन के रूप में प्रयोग नहीं हो पाता। परिणामतः ग्लूकोज रक्त में ही रहता है और शरीर के लगभग सभी अंगों को प्रभावित करता है। मधुमेह का कोई उपचार नहीं है अपितु इसका केवल प्रबंधन management किया जा सकता है। आहार और जीवन शैली lifestyle में परिवर्तन द्वारा इस रोग से बचने और नियंत्रण दोनों में मदद मिलती है। टाइप 2 मधुमेह से बचने के लिये जीवन शैली में परिवर्तन और वज़न को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

टाइप 2 मधुमेह के कारण Causes of Type 2 diabetes

टाइप 2 मधुमेह तब होता है जब कई कारणों से अग्न्याशय pancreas पर्याप्त इंसुलिन insulin का उत्पादन नहीं करता है, या शरीर में उत्पादित है इंसुलिन को कोशिकायें उपयोग करने में असमर्थ हो जाती है।

टाइप 2 मधुमेह के लिए रिस्क-फैक्टर Risk factors for type 2 diabetes

  • टाइप 2 मधुमेह के विकास के लिए मुख्य कारक हैं:
  • आयु age: 40 वर्ष के बाद मधुमेह होने के रिस्क बढ़ जाते हैं (दक्षिण एशियाई लोगों के लिए यह आयु 25 साल है)
  • आनुवंशिकी genetics: परिवार में माता-पिता, भाई या बहन या करीबी रिश्तेदार को डायबिटीज होने पर।
  • वजन weight: अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त होने पर।
  • जातीयता ethnicity: दक्षिण एशियाई, चीनी, अफ्रीकी-कैरेबियन लोगों में यह रोग अधिक पाया जाता है।

टाइप 2 मधुमेह के लक्षण Symptoms of type 2 diabetes

  • मधुमेह के कुछ प्रमुख लक्षण हैं:
  • बहुत प्यास लगना excessive thirst
  • सामान्य से अधिक पेशाब frequent urination
  • थकावट fatigue
  • बिना कारण वजन घटाना weight loss without any reason
  • लिंग या योनि के आसपास खुजली itching around peis/vagina
  • घाव, चोट का जल्दी ठीक न होना delayed healing
  • धुंधला दिखना vision loss
  • बहुत अधिक कब्ज़ होना constipation
  • कब्ज़ के कारण बवासीर होना piles

टाइप 2 मधुमेह का खतरा

मधुमेह गंभीर दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। यह आँखों पर प्रभाव डाल कर दिखाई कम देना vision loss और अंधापन तक कर सकता है। जिन्हें भी मधुमेह हो उन्हें अपनी आँखों को एक वर्ष में एक बार के अवश्य जांच करानी चाहिए। मधुमेह होने पर गुर्दे kidney को बहुत काम करना पढ़ता है जिससे इन पर भी प्रतिकूल असर होता है।

मधुमेह से हृदय रोग होने की संभावना भी पांच गुना बढ़ जाती है।

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मधुमेह में कम कैलोरी और कम चीनी वाला भोजन लेना चाहिए। ज्यादा मात्रा में कार्बोहाइड्रेट का सेवन खून में शुगर की मात्रा बढ़ा देता है इसलिए इसका सेवन भी अधिक नहीं करना चाहिए। सिंपल कार्बोहाइड्रेट के बजाय काम्प्लेक्स-हाई-फाइबर कार्बोहाइड्रेट का सेवन करना चाहिए। खाने में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट जैसे की सफेद ब्रेड, पास्ता और चावल, मैदा आदि नहीं खाना चाहिए।

ज्यादा मात्रा में कार्बोहाइड्रेट का सेवन खून में शुगर की मात्रा बढ़ा देता है इसलिए इसका सेवन भी अधिक नहीं करना चाहिए। भोजन का पाचन धीमी गति से होता है। सिंपल कार्बोहाइड्रेट जल्दी ही पच कर खून में ग्लूकोज़ रिलीज़ कर देते हैं।

संतुलित आहार का सेवन, सही वजन, धूम्रपान न करना, अल्कोहल का सेवन न करना और नियमित रूप से व्यायाम करने से डायबिटीज होने के रिस्क को कम किया जा सकता है। टाइप 2 डायबिटीज होने पर भी यह उपाय लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए कारगर है। मधुमेह का लिए कोई इलाज नहीं है। जीवनशैली में परिवर्तन, सही आहार, सही वज़न तथा शारीरिक गतिविधि का स्तर सुधार इसे नियंत्रित ज़रूर किया जा सकता है।

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