भगंदर fistula-in-ano in Hindi

फिस्चुला fistula नालव्रण का मतलब है, दो अंगों या दो ऊतक सतहों के बीच एक असामान्य कनेक्शन abnormal connection between two epithelial covered surfaces।

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फिस्टुला-इन-एनो (fistula-in-ano) / गुदा (anus) नालव्रण या भगन्दर, में एनल कैनाल और त्वचा के बीच में असामान्य कनेक्शन हो जाते हैं abnormal communication between the epithelialised anal canal and the perianal skin।

लगभग सभी गुदा नालव्रण, गुदा के पास हुए फोड़े anorectal abscess से शुरू होते हैं। यह फोड़ा, गुदा ग्रंथि में हुए किसी संक्रमण से शुरू होता हैं। संक्रमण स्फिंगक्टर की बीच तक ही या गुदा के पास की चमड़ी तक फ़ैल सकता है। फोड़ा anorectal abscess होने पर उसमें दर्द, सूजन होती है और कुछ मामलों में बुखार भी हो सकता है। फोड़े में मवाद, पस भर जाता है और जब यह पस निकलता है तो एक चैनल (नली) बन जाता है। जब इसकी सही से हीलिंग नहीं हो पाती तो नालव्रण या फिश्चूला बन जाता है।

फिस्टुला-इन-एनो के अन्य कारणों में शामिल हैं, आई बी डी inflammatory bowel disease, प्रसूतिया अन्य चिकित्सकजनित चोट, बैक्टीरियल इन्फेक्शन और एनोरेक्टल कैंसर।

गुदा फिस्टुला के साथ अधिकांश रोगियों की उम्र 30 और 50 के बीच की होती है। 20 की उम्र के नीचे और 60 साल से अधिक में यह रोग बहुत ही कम संख्या में देखा जाता है। अगर आकड़ों में देखा जाया तो 12 पुरुष प्रति 100,000 और 6 महिलायें प्रति 100,000 में इससे प्रभावित हैं।

आयुर्वेदिक परिभाषा: भग, गुदा, तथा वस्ति के प्रदेशों का दारुण करने वाले व्रण का नाम भगंदर है। इसमें भग क्षेत्र में घाव हो जाता है। आयुर्वेद में पांच तरह के भगंदर माने गए हैं:

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  1. वातज भगन्दर (शतपोनक)
  2. पित्तज भगन्दर (उष्टाग्रीवा)
  3. कफज भगन्दर (परिस्रावी)
  4. सन्निपतज भगन्दर (शम्बूकवर्ता)
  5. आगन्तुज भगन्दर (उन्मार्गी)

त्रिदोषज और आगन्तुज, असाध्य भगंदर हैं।

मुख्य उपचार: सर्जरी

लाभ के लिए: दवाएं और बाह्य उपचार

इंग्लिश में नाम: Anal Fistula या fistula-in-ano

फिस्टुला-इन-एनो के कारण Causes of Anal Fistula

  1. गुदा के पास फोड़े anorectal abscess
  2. आई बी डी inflammatory bowel disease
  3. प्रसूतिया अन्य चिकित्सक जनित चोट obstetric or other injury
  4. बैक्टीरियल इन्फेक्शन actinomycosis
  5. एनोरेक्टल कैंसर anorectal cancer
  6. लम्बे समय तक कब्ज़
  7. अर्श / पाइल्स के मासंकुर काटने से

भगंदर के मुख्य लक्षणों में शामिल हैं Symptoms of Bhagandar

  1. गुदा के आसपास त्वचा की जलन
  2. दर्द जो की बैठने, खांसी, मोशन के समय ज्यादा हो जाए
  3. गुदा के पास से बदबूदार डिस्चार्ज
  4. स्टूल के साथ मवाद / पस, खून जाना
  5. गुदा के आसपास सूजन, जलन, गर्माहट
  6. बार-बार खुजलाने की इच्छा
  7. मोशन को रोकने में दिक्कत
  8. कुछ मामलों में चिकित्सीय परीक्षण में गुदा के पास की त्वचा में एक छेद के रूप फिश्चूला दिखना

परीक्षण Diagnosis

  1. फिस्चुला की जांच के लिए चिकित्सक लक्षणों के बारे में पूछते हैं और बहुत बार रेक्टल एग्जामिनेशन rectal examination (doctor gently puts a lubricated, gloved finger into the rectum) कर सकते हैं।
  2. डाइग्नोसिस को कन्फर्म करने के लिए निम्न टेस्ट किये जा सकते हैं:
  3. शारीरिक और रेक्टल एग्जामिनेशन
  4. प्रोटोस्कोपी telescope with a light on the end is used to look inside anus
  5. अल्ट्रासाउंड, मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग magnetic resonance imaging (MRI)
  6. टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन

एलोपैथिक ईलाज Allopathic Treatment

फिश्चूला को आमतौर पर सर्जरी की आवश्यकता होती है। इलाज़ क्या और कैसे किया जाएगा यह बहुत से फैक्टर्स पर निर्भर करता है जैसे की फिश्चूला की लोकेशन, सिंपल या काम्प्लेक्स।

ईलाज के मुख्य विकल्पों में शामिल हैं:

  1. फिश्चुलोटोमी fistulotomy: इसमें फिश्चूला को पूरा काट कर खोल दिया जाता है जिससे यह स्कार बनाकर ठीक हो जाए।
  2. सीटन प्रोसीजर seton procedures: इसमें सर्जिकल थ्रेड जिसे सीटन कहा जाता है, उसे फिश्चूला में डाल कर कुछ सप्ताह तक चुद दिया जाता है और उसके बाद आगे प्रक्रिया की जाती है।
  3. एडवांसमेंट फ्लैप प्रक्रिया Advancement flap procedures: यह कॉम्लेक्स फिश्चूला के लिए किया जाने वाला सर्जिकल तरीका है।
  4. फिब्रिन ग्लू Fibrin glue: यह एकमात्र गैर सर्जिकल उपचार का विकल्प है। फिश्चूला के अन्दर ग्लू को इंजेक्ट किया जाता है। लेकिन यह तरीका बहुत सफल नहीं है।
  5. कुछ दवाएं जैसे की एंटीबायोटिक्स, बुखार की दवाएं औए दर्द निवारक दवाएं भी दी जाती हैं।

आयुर्वेदिक इलाज़ Ayurvedic Treatment

भगंदर के इलाज़ के लिए सबसे पहले उसमें से पस को बाहर निकाला जाता है। ऐसा करने से नाली साफ़ हो जाती है और दवा सही स्थान पर पहुँच कर काम कर सकती है।

आयुर्वेदिक् चिकित्सा केंद्र पर अपामार्ग क्षार सूत्र विधि के द्वारा, भगंदर का उपचार किया जाता है। इसका वर्णन सुश्रुत संहिता में मिलता है और इसका करने का तरीका काफी कुछ सीटन प्रोसीजर की ही तरह है। यह एक सर्जिकल तरीका है।

क्षार सूत्र, एक मेडिकेटड थ्रेड या धागा है जिसे लिनेन (सन) के धागे को स्नूही Euphorbia Nerifolia के लेटेक्स और अपामार्ग के क्षार से ११ या जरुरी बार ट्रीट करके बनाया जाता है। इस धागे को हल्दी की कोटिंग भी दी जाती है।

आयुर्वेदिक दवाएं

  1. कांचनार गुग्गुलु Kanchnar Guggulu – यह दवा गण्डमाला, गुल्म, कुष्ठ, और घाव की चिकित्सा में उपयोगी है। इसे गोरखमुंडी के काढ़े, खैर सार के काढ़े, हरीतकी के काढ़े या गर्म पानी के साथ प्रयोग करें।
  2. त्रिफला गुग्गुलु Triphala Guggulu – इसमें त्रिफला है जो की कब्ज़ को दूर करता है। गुग्गुलु सूजन को दूर करता है।
  3. सप्तविंशति गुग्गुलु Saptavinshati Guggulu – यह नाड़ीव्रण को दूर करने वाली दवा है।
  4. अभयारिष्ट Abhayarishta – यह मुख्य रूप से पाइल्स और भगंदर की दवा है।
  5. चोपचिन्यादी चूर्ण Chopchinyadi churna – यह हर प्राकर के त्वचा रोगों की दवा है।

लगाने के लिए

  1. चित्राकादि तेल Chitrakadi Taila
  2. जात्यादि तेल Jatyadi Taila
  3. कासीसादि घृत Kasisadi Ghrita
  4. रसोंत + हल्दी + दारुहल्दी + मालकांगनी + दंतिमूल + निसोत का पेस्ट बनाकर लेप करें।

घरेलू उपचार Home Remedies

  1. भगंदर के घाव को त्रिफला के काढ़े या नीम की पत्ते के काढ़े से धोना चाहिए।
  2. सुबह तुलसी के कुछ पत्तियां चबा कर खाएं।
  3. तुलसी की जड़ और निम्बोली को सुखा पीस कर पाउडर बनाकर रख लें। इसे २ ग्राम की मात्रा में सुबह खाएं।
  4. त्रिफला ३ तोला, शुद्ध गुग्गुलु, और पीपरी १ तोला को मिला कर गोली बनाकर खाएं।
  5. त्रिफला का सेवन करें। यह कब्ज़ को दूर करता है।
  6. फास्टिंग करें। कब्ज़ न होने दें।
  7. मिर्च मसाले न खाएं।
  8. भारी और ठंडा भोजन न करें।
  9. बहुत अधिक श्रम न करें।
  10. बथुआ और अन्य शाक का सेवन करें।
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2 thoughts on “भगंदर fistula-in-ano in Hindi

    • गुदा की सूजन को गर्म पानी में बैठकर दूर की जा सकती है। 8-10 मिनट ये क्रिया करके बहुत राहत मिलती है।

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