जानिये गुड़ के फायदे Jaggery (Gur or Gud) in Hindi

Loading...

गुड़ को तो हम सभी जानते हैं। भारतीय भोजन में कुछ दशक पहले तक इसका महत्वपूर्ण स्थान था। पहले तो सभी लोगों के घर में गुड़ मिल भी जाता था और बड़े चाव से खाया भी जाता था। आधुनिक समय में हम सभी पुरानी अच्छी वस्तुओं को छोड़, अहितकर वस्तुएं अपनाते जा रहें हैं। इसी श्रंखला में हमने अब गुड़ का सेवन भी लगभग छोड़ दिया है और इसके स्वास्थ्य लाभों को भी भूलते जा रहे हैं। यदि यह खाया भी जाता है तो सर्दियों में, पट्टी की तरह। अब हमारी रसोईं में चीनी ही एक मात्र मिठास से भरी वस्तु है। शायद इन्ही कारणों से हम डायबिटीज जैसे गंभीर और जटिल रोगों से भी घिरते जा रहें हैं। आज ज़रूरत है हम अपने प्राचीन ज्ञान की ओर देखे और उसे अपना कर फिर से अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाएं।

ईख जिसे गन्ना भी कहते हैं Saccharum Officinarum, का रस जब भली-भाँति पकाकर दृढ़ (गाढ़ा) कर दिया जाता है, गुड़ कहलाता है। संस्कृत यह गुड़, गुड़क, तथा रसाल कहलाता है।

gud ke aushadiy upyog
By Giridhar Appaji Nag Y (Flickr: 20071130_123242) [CC BY 2.0 (http://creativecommons.org/licenses/by/2.0)], via Wikimedia Commons
आयुर्वेद में गुड़ को गुणों का भण्डार कहा गया है। यह वीर्यवर्धक, स्निग्ध, वातनाशक, मूत्र को शुद्ध करने वाला, और बलवर्धक है। इसमें बहुत से पोषक पदार्थ होते हैं। इसमें लोहा, गंधक, कैल्शियम, पोटैशियम, मैंगनीज, मैगनिशियम, विटामिन्स समेत कई खनिज भी विद्यमान होते है। गुड और चीनी दोनों ही गन्ने से बनते हैं, लेकिन चीनी के बनने के दौरान जहां पोषकता नष्ट हो जाती है वही गुड़ में उसकी मिठास के सस्थ पौष्टिकता भी बनी रहती है।

आयुर्वेद के अनुसार पुराना गुड़ अधिक स्वास्थ्यवर्धक होता है। आयुर्वेदिक के आसव-अरिष्ट बनाते समय गुड के घोल में ही किण्वन किया जाता है। इसलिए पढ़े, जाने और अपनाएँ गुणवर्धक गुड़ को अपने भोजन में।

गुड़ किससे और कैसे बनता है?

गुड़ गन्ने के रस को पका कर बनाया जाता है। सबसे पहले गन्नों को साफ़ किया जाता है। फिर इनकी पेराई करके रस निकाला जाता है। यह रस एक बर्तन में डाल कर भट्टी पर पकाया जाता है। उबलते हुए इसमें ऊपर झाग आता है जिसे अलग कर लेते हैं, इस प्रकार कुछ घंटे उबलने के बाद गुड़ बना जाता है।

loading...

गुड़ की चाय बनाने की विधि क्या है?

गुड़ वाली चाय बनाने के लिए आपको को चीनी की जगह बस गुड़ का प्रयोग करना है।

पानी को उबालें इसमें गुड़ डाल दें। साथ ही में ताज़ा अदरक ग्रेट करके या सूखा अदरक पाउडर जिसे सोंठ कहते हैं डाल दें। इसमें तुलसी के दस पत्ते, तेज पत्ता, काली मिर्च के कुछ दाने, तेज पत्ता, दालचीनी, छोटी इलाइची, आदि सभी कूट कर डाल दें और दस मिनट पका लें। इसमें फिर चाय की पत्तियां डाल दें और उबालें। अब दूध डाल लें और छान कर पियें। इअमें यदि चाहें तो चाय की पत्ती बहुत ही कम डालें।

स्थानीय नाम

  1. संस्कृत: गुड़, रसाल
  2. हिंदी, बंगाली: गुड़
  3. अंग्रेजी: Jaggery, Coarse Sugar, Guda, or Gura, Gur
  4. मराठी: गूल
  5. गुजराती: गोड
  6. कन्नड़: हेसुरु
  7. तमिल: Vellum
  8. तेलुगु: Bellam

आयुर्वेद में गुड़ का प्रयोग

आसव-अरिष्ट, लेह, मोदक आदि बनाने के लिए तथा वात-पित्त-कफ रोगों के उपचार में अनुपान की तरह

गुड़ के अन्य प्रकार

खजूर से बना गुड़, ताड़ के रस से बना गुड़

आयुर्वेद में बताये गुड़ के गुण

  • सामान्य गुण: मीठा, गरम, वीर्यवर्धक, भारी, स्निग्ध, वातनाशक, मूत्र शोधक, बलवर्धक तथा कफ, मेद और कृमिवर्धक।
  • पुराना गुड़: यह गुड़ एक वर्ष से अधिक पुराना होता है। औषधीय प्रयोजन के लिए पुराना गुड़ प्रयुक्त होता है। यह हल्का, पथ्य, अग्निवर्धक, पित्तनाशक, मधुर, वृष्य, वातशामक, और रक्त साफ़ करने वाला है।
  • नवीन गुड़: यह कफ, श्वास, खांसी, कृमि और अग्निवर्धक है।

अनुपान भेद से गुड़ के गुण

  • अदरक के साथ खाए जाने पर गुड़ कफनाशक है।
  • हरड़ के साथ खाया गुड़ पित्तनाशक है।
  • सोंठ के साथ खाया गुड़ सभी वातरोगों का नाशक है।
  • इसप्रकार यह वात-पित्त-कफ के कारण होने वाले रोगों में लाभप्रद है।

गुड़ खाने के स्वास्थ्य लाभ Health Benefits of Jaggary in Hindi

  1. गुड़ स्वास्थ्य के लिए हितकारी है।
  2. यह तासीर में गर्म है।
  3. इसके सेवन से शरीर में कफ दोष कम होता है।
  4. यह शरीर को काम करने की ऊर्जा देता है।
  5. यह अस्थमा, कफ रोगों, गले के रोगों, पेट के अफारे आदि में लाभ करता है।
  6. यह खून की कमी को दूर करता है।
  7. यह थकान को दूर करता है।
  8. यह वीर्यवर्धक और पौष्टिक है।
  9. इसे खाने से भूख लगती है।
  10. यह अजीर्ण को दूर करता है।
  11. यह पेट में गैस बनने को रोकता है।
  12. यह हृदय को ताकत देता है।
  13. गुड़ पेशाब की रुकावटों को दूर करता है।
  14. यह हिचकी में आराम पहुंचता है।
  15. यह आयरन का अच्छा स्रोत है। खून की कमी हो तो इसका सेवन नियमित करें।
  16. इसमें कैल्शियम होता है जो बच्चों और महिलायों के लिए विशेष उपयोगी है।
  17. भोजन करने के उपरान्त नियमित गुड़ खाने से निम्न और उच्च दोनों ही रक्तचाप में लाभ होता है।
  18. यह रक्त की अम्लता को दूर करता है।
  19. यह हर मौसम में खाया जा सकता है।

गुड़ के औषधीय प्रयोग Medicinal uses of Jaggery

गुड़ का सेवन आप बहुत से रोगों में कर सकते है। दवा की तरह पुराने गुड़ का प्रयोग ही किया जाना चाहिए।

पीलिया

गुड़ को सोंठ के साथ खाने से लाभ होता है।

तिल्ली के बढ़ जाने में

गुड़ को हरीतकी के साथ खाने से लाभ होता है।

खट्टी डकारें

गुड़ को सेंधा नमक के साथ चाटने पर खट्टी डकार आना बंद होता है।

मासिक की समस्या

  1. गुड़ का सेवन मासिक के दौरान होने वाले दर्द को कम करता है।
  2. गुड़ के साथ सौंफ खाने से महिलाओं का मासिक धर्म नियमित होता है।

खून की कमी

गुड़ लोहे का अच्छा स्रोत है और खून की कमी को दूर करता है।

कफ, जोड़ों का दर्द

  1. गुड़ को अदरक के साथ खाने पर कफ कम होता है, तथा जोड़ों के दर्द से भी राहत मिलती है।
  2. गला यदि सूख जाता हो, खराश हो, गुड़, अदरक और घी मिलाकर सेवन करें।
  3. जुखाम हो जाए तो आधा कप पानी में आठ-दस काली मिर्च के दाने, चौथाई चम्मच जीरा पाउडर और गुड़ डाल कर गर्म करें और पी लें।
  4. गुड़ की चाय बनाकर पियें।

गले की खराश

गुड़ को चावल के साथ खाने से गला खुलता है।

अस्थमा

गुड़ और काले तिल के लड्डू के सेवन से जाड़ें में हुई अस्थमा की परेशानी दूर होती है। इसका सेवन शरीर को गर्मी देगा। यह अस्थमा, जुखाम-खांसी-कफ रोगों, थकावट आदि को भी दूर करेगा।

पाचन समस्याएं

  • गुड़ को भोजन के बाद खाने से गैस नहीं बनती। यदि भोजन के बाद गैस बनती है, पेट के विकार हैं, अजीर्ण है तो भोजन के बाद दस-बीस ग्राम गुड का सेवन अवश्य करें।
  • शरीर में यदि पित्त की अधिकता हो तो गुड़, घी और हरड़ चूर्ण का सेवन करना चाहिए।
  • पेट में अत्यधिक गैस हो, वायु गोला हो, अथवा कब्ज़ हो तो गुड़ और हरड़ सेवन लाभप्रद है।
  • भोजन पचने में दिक्कत हो तो खाने के बाद गुड़ को अजवाइन के चूर्ण के साथ खा लें।
  • कब्ज़ हो तो गिलोय के रस का सेवन गुड के साथ करे।

आधासीसी

यदि प्रायः माइग्रेन के दर्द से परेशान रहते हों, तो जब दर्द होने की सम्भावना हो तो सुबह उठ कर दस ग्राम गुड़ को पांच ग्राम देसी घी के साथ खाएं। अथवा गुड़ को सोंठ मिलाकर लें।

loading...

पेट में कीड़े

पेट में कीड़े होने पर, किसी भी कृमिनाशक दवा के सेवन के कुछ घंटे पहले दस ग्राम गुड खा लें। यह कृमियों को नष्ट करने में सहायक होगा।

पेशाब की दिक्कत

  • पेशाब कम आता हो, रुक-रुक कर आता हो, दर्द हो तो गिलास भर दूध में गुड़ मिलाकर तीन-चार दिन लें।
  • पेशाब बार-बार आता हो, गन्दा हो तो गुड़ को हल्दी के चूर्ण के साथ सेवन करें।
  • बहुमूत्रता हो तो तिल और गुड़ का लड्डू खाएं।

वात-पित्त रोग

गुड़ को हरड़, सोंठ / सेंधा नमक के साथ लेने पर वात और पित्त रोग दूर होते हैं, भूख और पाचन की वृद्धि होती है।

हिचकी

हिचकी अधिक आ रही हो तो गुड़ में हींग मिलाकर सेवन करें।

बवासीर

बवासीर की समस्या में गुड़ और हरड़ का सेवन करें।

बिस्तर गीला करना

बच्चे यदि बिस्तर गीला करते हो तो उन्हें गुड़ का सेवा अवश्य कराएं।

चमड़ी में कुछ धंस जाने पर

चमड़ी में काँटा, पत्थर, कांच आदि धंस गया हो, गुड़ और अजवाइन गर्म करके पुल्टिस बांधे।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side-effects/Contraindications

  1. गुड़ का सेवन डायबिटीज में न करें। इसमें 60% सुक्रोज़ और 22% ग्लूकोस होता है।
  2. यदि डायबिटीज में शुगर लेवल कण्ट्रोल है, और आप कम चीनी वाली चाय पी सकते हों तो उसमें आप गुड डाल सकते हैं।
  3. यदि रक्तचाप की समस्या के साथ डायबिटीज है तो इसका सेवन न करे।
  4. गुड़ या मीठा खाने से पेट के कृमि बढ़ते हैं।
  5. यह मेदवर्धक है। ज्यादा समय तक लगातार इसका सेवन वज़न बढ़ाता है।
  6. अल्सरेटिव कोलाइटिस में गुड का सेवन न करें।
  7. शरीर में सूजन हो तो गुड का सेवन न करें।
loading...
Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*