पतंजलि दिव्य अभयारिष्ट के फायदे, नुकसान, उपयोगविधि और प्राइस

दिव्य अभयारिष्ट Divya Patanjali Abhyaristh पतंजलि आयुर्वेद के द्वारा निर्मित आयुर्वेद की एक क्लासिकल दवाई है। दिव्य अभयारिष्ट एक आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन है जो आपके पाचन तंत्र को सही करता है और आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को नष्ट करता है। यह प्राकृतिक द्रव्यों से तैयार किया जाता है जिनमें विरेचक गुण होते हैं और पेरिस्टाल्टिक (लहरदार) संकुचनों को प्रेरित करते हैं जिससे इस प्रकार आंतों को साफ़ करने में सहायता होती है। आंतों में खाना आगे बढ़ता रहता है और पड़ा पड़ा सडन नहीं करता। यह पाचन में सुधार करता है, भूख बढ़ता है, गैस गठन को कम करता है और पाइल्स की सूजन कम करता है। कब्ज और पाइल्स में आप इसे ले सकते हैं।

अभयारिष्ट का मुख्य घटक अभया या हरीतकी है। हरीतकी सौम्य विरेचक, कसैली, भूख को बढ़ाने वाली, पाचन में सहायता देने वाली, बढ़े पित्त को कम करने वाली, और एंटीऑक्सीडेंट है। हरीतकी पेट की गैस, कब्ज, दस्त, पेचिश, पाचन संबंधी विकार, उल्टी, बढ़े हुए जिगर और तिल्ली, खांसी और दमा, और चयापचय के लिए इलाज, के लिए प्रयोग की जाती है।

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अभयारिष्ट आठ प्रकार के उदर रोगों को नष्ट करती है। यह कब्ज़ और सूजन को दूर करती है। यदि किसी को बवासीर के शुरुवाती लक्षण हो तो इस दवा का प्रयोग बावासीर को बढ़ने से रोकता है। अभयारिष्ट पेट के विकार्रों में भी लाभदायक है। यह पाचंन को सही करती है। यह मल-मूत्र को साफ़ करती है। अभयारिष्ट को कई महीनों तक लिया जा सकता है।

अभयारिष्ट के सेवन से आँतों में गति ठीक होती है जिससे स्टूल आगे ठीक से बढ़ता है। जहां अन्य लेक्सेटिव का सेवन आँतो को नुक्सान पहुंचाता है वहीँ यह दवा आँतों के ठीक काम करने में मदद करती है। अभयारिष्ट के सेवन से बवासीर में लाभ होता हैं क्योंकि कब्ज़ की समस्या दूर होती है। कब्ज़ से गुदा पर जोर पड़ता है जिससे पाइल्स का द्रव्यमान बढ़ जाता है, पाइल्स के मस्सों से खून गिरने लगता है और शौच के समय तेज दर्द होता है। अभयारिष्ट का सेवन बवासीर के मूल कारण पर काम करता है और रोगी को आराम देता है। इन्ही वजहों से यह गुदा की दरारों, दरारों में इन्फेक्शन आदि से राहत देता है।

आयुर्वेद के आसव अरिष्ट वर्ग की दवा होने से यह पाचन और अवशोषण को निश्चित रूप से ठीक करता है।

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नीचे इस दवा के घटक, गुण, सेवनविधि, और मात्रा के बारे में जानकारी दी गयी है।

यह पेज अभयारिष्ट के बारे में हिंदी में जानकारी देता है जैसे कि दवा का कम्पोज़िशन, उपयोग, लाभ/बेनेफिट्स/फायदे, कीमत, खुराक/ डोज/लेने का तरीका, दुष्प्रभाव/नुकसान/खतरे/साइड इफेक्ट्स/ और अन्य महत्वपूर्ण ज़रूरी जानकारी।

  • अभयारिष्ट में मौजूद सामग्री क्या हैं?
  • अभयारिष्ट के उपयोग upyog क्या हैं?
  • अभयारिष्ट के फायदे faide क्या हैं?
  • अभयारिष्ट के दुष्प्रभाव या नुकसान nuksan क्या हैं?
  • अभयारिष्ट को कब नहीं लेते हैं?
  • अभयारिष्ट के संभावित दवा interaction क्या हैं?
  • अभयारिष्ट से जुड़ी चेतावनियां और सुझाव क्या हैं?

उत्पाद की जानकारी

  • दवा का नाम: अभयारिष्ट Abhayarishta
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: हर्बल
  • मुख्य उपयोग: कब्ज़, पाइल्स
  • मुख्य गुण: विरेचक
  • दोष इफ़ेक्ट: वातशामक, कफशामक
  • गर्भावस्था में प्रयोग: नहीं करें

मूल्य:

Patanjali Abhyaristh 450 ml @ Rs. 70.00

अभयारिष्ट के घटक | Ingredients of Abhayarishta in Hindi

  • Abhaya (Haritaki) Terminalia chebula Pericarp 4.8 kg
  • Mridvika (Draksha) Vitis vinifera Dry Fruit 2.4 kg
  • Vidanga Embelia ribes Fruit 480 g
  • Madhuka Kusuma (Madhuka) Madhuca indica Flower 480 g
  • Jala for decoction Water 49.152 liter reduced to 12.288 liter
  • Guda Jaggery 4.8 kg
  • Gokshur Tribulus terrestris Fruit 96 g
  • Trivrita (Trivrit) Operculina turpethum Root. 96 g
  • Dhanya (Dhanyaka) Coriandrum sativum Fruit 96 g
  • Dhataki Woodfordia fruticosa Flower 96 g
  • Indravaruni Citrullus colocynthis Root. 96 g
  • Cavya Piper retrofractum Stem 96 g
  • Madhurika Foeniculum vulgare Fruit 96 g
  • Sonth Zingiber officinale Rhizome 96 g
  • Danti Baliospermum montanum Root 96 g
  • Mocharasa Salmalia malabarica Exd. 96 g

अभयारिष्ट के फायदे | Benefits of Abhayarishta in Hindi

  • अभयारिष्ट एंटीऑक्सीडेंट है।
  • अभयारिष्ट कब्ज़ में राहत देती है। इसके सेवन से स्टूल कठोर नहीं होता।
  • अभयारिष्ट का उपयोग पाचन में सुधार करता है।
  • अभयारिष्ट जठराग्नि को प्रदीप्ति करता है।
  • अभयारिष्ट जिगर की रक्षा करता है और लिवर फंक्शन में सुधार करता है।
  • अभयारिष्ट दर्दनिवारक और एंटीमाइक्रोबियल है।
  • अभयारिष्ट पाइल्स के लक्षणों से आराम देती है।
  • अभयारिष्ट भूख बढ़ाता है।
  • अभयारिष्ट मलावरोध दूर करता है।
  • अभयारिष्ट मस्सों के साइज़ को कम कर सकती है और उन्हें ठीक करने में लाभ कर सकती है।
  • अभयारिष्ट विरेचक है जो की आंत के संकुचन को बढ़ा कर कब्ज़ दूर करता है।
  • इससे खुजली और खून गिरना रुकता है।
  • पाइल्स में होने वाली सूजन, दर्द और असुविधा में इसके सेवन और लगाने से लाभ होता है।

अभयारिष्ट के औषधीय गुण

  • अनुलोमन: द्रव्य जो मल व् दोषों को पाक करके, मल के बंधाव को ढीला कर दोष मल बाहर निकाल दे।
  • कफहर: द्रव्य जो कफ को कम करे।
  • दीपन: द्रव्य जो जठराग्नि तो बढ़ाये लेकिन आम को न पचाए।
  • पाचन: द्रव्य जो आम को पचाता हो लेकिन जठराग्नि को न बढ़ाये।
  • वातहर: द्रव्य जो वातदोष निवारक हो।
  • विरेचन: द्रव्य जो पक्व अथवा अपक्व मल को पतला बनाकर अधोमार्ग से बाहर निकाल दे।
  • शोथहर: द्रव्य जो शोथ / शरीर में सूजन, को दूर करे।

अभयारिष्ट के चिकित्सीय उपयोग | Uses of Abhayarishta in Hindi

अभयारिष्ट मूत्रल और दस्तावर है। इसके प्राकृतिक तत्व मल को नरम करते हैं और आंत्र गतिशीलता को बढ़ाते हैं, जो तीव्र और पुरानी कब्ज प्रभावी रूप से राहत देते हैं। यह दवा शरीर में द्रव-इलेक्ट्रोलाइटके संतुलन (खनिज और पानी संतुलन) को नहीं बिगाड़ती। यह दवा हैबिट फोर्मिंग लेक्सेटिव नहीं है।

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  • अग्निमान्द्य (digestive impairment), पेट की गैस, पेट फूलना, एसिडिटी
  • अर्श (piles)
  • उदर रोग (diseases of abdomen)
  • जलोदर
  • बवासीर में उपयोगी
  • मुत्रविबंध (retention of urine), पेशाब करने में कठिनाई, कम पेशाब होना
  • विबंध/कब्ज (constipation)

सेवन विधि और मात्रा | Dosage of Abhayarishta in Hindi

  • इस दवा को 12-24 ml की मात्रा में लिया जाना चाहिये।
  • इसे दिन में दो बार, सुबह और शाम पानी की बराबर मात्रा मिला कर लेना है।
  • इसे भोजन करने के बाद लिया जाना चाहिये।
  • अधिक मात्रा में लेने से पेट की गड़बड़ी, पेट में दर्द और लूज़ मोशन हो सकते हैं।
  • गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन गर्भपात का कारण बन सकता है।
  • इसलिए गर्भावस्था में इसका सेवन न करें।

अभयारिष्ट के इस्तेमाल में सावधनियाँ | Cautions

  • अच्छे प्रभाव के लिए दवा के साथ-साथ जीवन शैली में भी परिवर्तन करें।
  • यह एक दवा है, इससे तुरंत जादुई असर नहीं होगा। दवा के साथ साथ खाने-पीने पर नियंत्रण और व्यायाम आवश्यक है।
  • पानी ज्यादा मात्रा में पियें।
  • पीने के लिए हल्का गर्म पानी लें।
  • खाने में सलाद ज़रूर लें।
  • जंक फ़ूड, केक, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक, मैदे से बने भोज्य पदार्थ न खाएं।
  • कब्ज़ के कारण को जानने का प्रयत्न करें। कई बार शरीर में किसी प्रकार का रोग जैसे की डायबिटीज, के कारण भी कब्ज़ हो जाता है।
  • आँतों में ड्राईनेस है, स्टूल बहुत ड्राई है तो घी या बादाम के तेल का सेवन करें। इससे आंतरिक रूक्षता दूर होगी।
  • बादाम रोग़न को एक चम्मच की मात्रा में दूध में मिलाकर नियमित पियें। चाहे तो देसी घी भी ले सकते हैं।
  • उचित खुराक उपयोगकर्ता की उम्र, स्वास्थ्य और कई अन्य स्थितियों जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है। उचित खुराक निर्धारित करने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक जानकारी नहीं है।
  • ध्यान रखें कि प्राकृतिक उत्पाद हमेशा सुरक्षित हों ऐसा जरूरी नहीं हैं।
  • इसका इस्तेमाल चिकित्सक की सलाह के आधार पर कुछ महीने तक किया जा सकता है।
  • उम्र और ताकत पर विचार करते हुए और किसी वैद्य की विशेषज्ञ सलाह के साथ, दवा का उचित अनुपात में उचित अनुपान के साथ इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
  • इस औषधि को केवल विशिष्ट समय अवधि के लिए निर्धारित खुराक में लें।
  •  यह पित्त को बढ़ाता है। इसलिए पित्त प्रकृति के लोग इसका सेवन सावधानी से करें।

अभयारिष्ट के साइड-इफेक्ट्स | Side effects of Abhayarishta in Hindi

  • निर्धारित खुराक में लेने से दवा का कोई दुष्प्रभाव नहीं है।
  • इससे कुछ लोगों में पेट में जलन हो सकती है।

अभयारिष्ट को कब प्रयोग न करें Contraindications

  • इसे गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान न लें।
  • आयुर्वेद में उष्ण चीजों का सेवन गर्भावस्था में निषेध है। इसका सेवन गर्भावस्था में न करें।
  • जिन्हें पेट में सूजन हो gastritis, वे इसका सेवन न करें।
  • इसे बताई मात्रा से अधिकता में न लें।
  • यदि दवा से किसी भी तरह का एलर्जिक रिएक्शन हों तो इसका इस्तेमाल नहीं करें।
  • अधिक मात्रा में सेवन पेट में जलन, एसिडिटी, आदि समस्या कर सकता है।
  • कोई अन्य रोग भी है, तो डॉक्टर से परामर्श के बिना कोई आयुर्वेदिक दवाइयां नहीं लें।
  • समस्या अधिक है, तो डॉक्टर की राय प्राप्तकर सही उपचार कराएं जिससे रोग बिगड़े नहीं।

भंडारण निर्देश

  • सूखी जगह में स्टोर करें।
  • इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।

Where to buy

  • आप इस दवा को सभी फार्मेसी दुकानों पर या ऑनलाइन खरीद सकते हैं।
  • अभयारिष्ट को बहुत सी आयुर्वेदिक फार्मास्यूटिकल कंपनियां बनाती है जैसे की बैद्यनाथ, डाबर, सांडू आदि।

दवा के बारे में पूछे जाने वाले कुछ सवाल

क्या इस दवा को एलोपैथिक दवाओं के साथ ले सकते हैं?

हाँ, ले सकते हैं। लेकिन दवाओं के सेवन में कुछ घंटों का गैप रखें।

क्या अभयारिष्ट को होम्योपैथिक दवा के साथ ले सकते हैं?

ले तो सकते हैं। लेकिन इस से हो सकता है कि दोनों ही दवाएं काम नहीं करें। इसलिए, दवा के असर को देखना ज़रूरी है।

अभयारिष्ट को कितनी बार लेना है?

  • इसे दिन में 2 बार लेना चाहिए।
  • इसे दिन के एक ही समय लेने की कोशिश करें।

क्या दवा की अधिकता नुकसान कर सकती है?

दवाओं को सही मात्रा में लिया जाना चाहिए। ज्यादा मात्रा में दवा का सेवन साइड इफेक्ट्स कर सकता है।

क्या अभयारिष्ट सुरक्षित है?

हां, सिफारिश की खुराक में लेने के लिए सुरक्षित है।

अभयारिष्ट का मुख्य संकेत क्या है?

पाइल्स, फिस्टुला, कब्ज़, पाचन में सुधार।

अभयारिष्ट का वात-पित्त या कफ पर क्या प्रभाव है?

  • वात कम करना।
  • पित्त वृद्धि करना।
  • कफ कम करना।

क्या इसमें गैर-हर्बल सामग्री शामिल है?

नहीं।

मैं यह दवा कब तक ले सकता हूँ?

आप इसे 1-2 महीने के लिए ले सकते हैं।

अभयारिष्ट लेने का सबसे अच्छा समय क्या है?

इसे भोजन के बाद लिया जाना चाहिए एक ही समय में दैनिक रूप में लेने की कोशिश करें।

क्या अभयारिष्ट एक आदत बनाने वाली दवा है?

नहीं।

क्या यह दिमाग की अलर्टनेस पर असर डालती है?

नहीं।

क्या अभयारिष्ट लेने के दौरान ड्राइव करने के लिए सुरक्षित है?

हाँ।

क्या मैं इसे पीरियड्स के दौरान ले सकती हूँ?

इसे लिया जा सकता है। पीरियड्स के दौरान नहीं लें, अगर आपको रक्तस्राव पैटर्न पर कोई प्रभाव महसूस होता है।

क्या इसे प्रेगनेंसी में ले सकते हैं?

नहीं। आयुर्वेदिक उष्ण पोटेंसी विरेचक दवाओं का प्रयोग प्रेगनेंसी में नहीं करें।

Abhayarishta (Classical medicine) is a polyherbal classical Ayurvedic medicine used in treatment of pile. Its use gives relief in constipation and cures diseases of abdomen. It removes obstruction in elimination of urine and stool. Here information is given about complete list of ingredients, properties, uses and dosage of this medicine in Hindi language.

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