पारिजात का उपयोग कैसे और किस बीमारी में होता है

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विभिन्न शोध दिखाते हैं की पारिजात के पत्तों में गठिया-विरोधी anti-arthritic गुण पाए जाते हैं। इसकी पत्तियों के काढ़े decoction of leaves में लीवर की रक्षा hepatoprotective, वायरल-विरोधी anti-viral और कवक-विरोधी anti-fungal, दर्द निवारक analgesic, ज्वरनाशक antipyretic गुण पाए जाते है।

कनेर का उपयोग कैसे और किस बीमारी में होता है

कनेर का किसी भी प्रकार से सेवन हानिकारक है। कनेर के पत्तों, जड़, टहनी, दूध आदि में जो अल्कालॉयड पाए जाते हैं वह सीधे दिल को प्रभावित करते है। यह दिल की गति को बहुत ही धीमा का देते है।

अग्नितुंडी वटी का उपयोग कैसे और किस बीमारी में होता है

अग्नितुंडी वटी पाचन के लिए प्रभावी और शक्तिशाली दवा है। यह पाचन की कमजोरी, अपच और पेट दर्द में उपयोगी है। अग्नितुंडी वटी का मुख्य घटक कुचला होने के कारण, इसे केवल प्रत्यक्ष चिकित्सक के पर्यवेक्षण में ही लें। यह एक शक्तिशाली जहर है।

अग्निकुमार रस का उपयोग कैसे और किस बीमारी में होता है

इसका सेवन गैस, पेट में भारीपन, आंत के अंदर संचय मल, कब्ज़, धीमे पाचन, भूख न लगना आदि में राहत देता है।

अडूसा का उपयोग कैसे और किस बीमारी में होता है

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अडूसा को मुंह के रोग, कुष्ठ रोग, तपेदिक, रक्त विकार, प्यास, बुखार, उल्टी, श्वेतदाग, पीलिया, ट्यूमर, और सूजाक आदि रोगों में भी इस्तेमाल किया जाता है।

डेंगू से बचाव के लिए होम्योपैथिक दवा Eupatorium Perfoliatum

यूपाटोरियम परफोलियेटम को डेंगू बुखार की रोकथाम और उपचार के लिए पूरे विश्व में सफलतापूर्वक प्रयोग किया जाता रहा है। दक्षिणी भारत में, सरकारी होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल मदुराई, में डेंगू बुखार से बचाव के उपाय के रूप में इस दवा को वितरित करने के लिए विशेष शिविरों का आयोजन किया गया था।

बादाम तेल का उपयोग कैसे और किस बीमारी में होता है

Badam ke tel ke fayade

बादाम का तेल बाह्य और आन्तारिक external and internal दोनों रूपों में प्रयोग किया जाता है। इस तेल से मालिश massage भी की जाती है और दवा के रूप में सेवन भी किया जाता है। सिर में बादाम का तेल लगाने से मस्तिष्क ठंडा रहता है और बाल भी बढ़ते है।