अग्नितुंडी वटी का उपयोग कैसे और किस बीमारी में होता है

अग्नितुंडी वटी पाचन के लिए प्रभावी और शक्तिशाली दवा है। यह पाचन की कमजोरी, अपच और पेट दर्द में उपयोगी है। अग्नितुंडी वटी का मुख्य घटक कुचला होने के कारण, इसे केवल प्रत्यक्ष चिकित्सक के पर्यवेक्षण में ही लें। यह एक शक्तिशाली जहर है।

अग्नितुंडी वटी, एक आयुर्वेदिक रस औषधि है। इसमें शुद्ध पारद, गंधक, विषतुंडी, त्रिफला, लवण, जीरा आदि होते हैं। यह पाचन के लिए प्रभावी और शक्तिशाली दवा है। यह पाचन की कमजोरी, अपच और पेट दर्द में उपयोगी है। यह \’आम\’ को कम करने के गुण के कारण आमवात में भी उपयोगी है। यह उत्कृष्ट दीपन, पाचक, वात-नाशक और शूलघ्न (दर्द में राहत) है। यह तासीर में गर्म है।

Agnitundi vati (Ras) is an Ayurvedic herbo-mineral preparation. It is used for treating indigestion, poor appetite, tastelessness, gas, abdominal pain etc. It stimulates the flow of digestive juices and improves digestion. Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

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अग्नितुंडी वटी का मुख्य घटक कुचला या Nux vomica का बीज है। कुचला को विषतुंडीका, Nux-vornica, Poison nut कहा जाता है। इसे यह नाम इसके जहरीले गुणों के कारण दिया गया है। यह एक शक्तिशाली जहर है। आयुर्वेद में कुचला को उपविष वर्ग में रखा गया है। इसके बीज को आयुर्वेद में उचित शोधन के बाद ही इस्तेमाल किया जाता है। शुद्ध बीजों का उपयोग बहुत ही कम मात्रा में गठिया, स्नायु दर्द, तंत्रिका दर्द आदि के उपचार में होता है।

अग्नितुंडी वटी का मुख्य घटक कुचला होने के कारण, इसे केवल प्रत्यक्ष चिकित्सक के पर्यवेक्षण में ही लें।

अग्नितुंडी वटी के घटक | Ingredients of Agnitundi Vati in Hindi

शुद्ध पारद (Purified Mercury), शुद्ध वत्सनाभ ( Purified Aconitum ferox ), शुद्ध गंधक, अजमोदा, हरीतकी, विभीतकी, आमलकी, सज्जीखार, यवक्षार, चित्रक मूल , सैंधव लवण, श्वेत जीरक , सुवर्चला लवण (Sodium sulphate mixed with sodium chloride), विडंग, समुद्र-लवण (Sea salt), शुद्ध टंकण (Purified Sodium biborate ), शुद्ध कुचला (Purified Strychnos nux-vomica)।

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अग्नितुंडी वटी के लाभ Benefits of Agnitundi Vati in Hindi

  • यह उत्कृष्ट दीपन, पाचक, वात-नाशक और शूलघ्न है।
  • यह हृदय को शक्ति देता है।
  • यह पाचन, भूख और स्वाद में सुधार करता है।
  • यह कफ और वात कम कर देता है।
  • इसके प्रयोग से वात-कफ प्रमुख यकृत रोगों में लाभकारी प्रभाव दिखता है।
  • यह आंतो की गति को देता है जिससे कब्ज़ से राहत मिलती है।

अग्नितुंडी वटी के चिकित्सीय उपयोग | Uses of Agnitundi Vati in Hindi

  • अग्निमांद्य digestive weakness
  • अजीर्ण indigestion
  • उदरशूल pain in abdomen
  • ग्रहणी रोगों में (आंतों की बीमारियां)
  • यकृत विकार liver diseases
  • अमावात arthritis, rheumatism
  • कब्ज़ constipation due to intestinal laxity

अग्नितुंडी वटी सेवन विधि और मात्रा | Dosage of Agnitundi Vati in Hindi

  • ½ – 1 गोली (125 मिलीग्राम के लिए 62।5 मिलीग्राम) सुबह और शाम, शहद, या गुनगुने पानी के साथ।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

चेतावनी-सावधानी

  • बच्चों द्वारा और गर्भावस्था में यह दवा नहीं ली जानी चाहिए।
  • इसका प्रयोग लगातार कई दिनों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
  • उच्च रक्तचाप में उपयोग न करें।
  • इसे केवल प्रत्यक्ष चिकित्सक के पर्यवेक्षण में ही लें।

This medicine is manufactured by Baidyanath (Agnitundi Bati), Dabur Agnitundi Vati (Ras), Shri Dhootapapeshwar Limited, Planet Ayurveda (Agnitundi Vati) and many other Ayurvedic pharmacies.

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