अश्वकंचुकी रस के फायदे, नुकसान और प्रयोग
अश्वकंचुकी रस को अश्वचोली Ashvacholi और घोड़ाचोली Ghodacholi आदि नामों से भी जाना जाता है। अश्वकंचुकी रस का उचित अनुपान के साथ सेवन विभिन्न रोगों में लाभकारी है।
अश्वकंचुकी रस को अश्वचोली Ashvacholi और घोड़ाचोली Ghodacholi आदि नामों से भी जाना जाता है। अश्वकंचुकी रस का उचित अनुपान के साथ सेवन विभिन्न रोगों में लाभकारी है।
अमीर रस में रस-कपूर, सिंगरफ और दाल चिकना होने के कारण यह अत्यंत तीव्र रक्त-शोधक है। यह शरीर में रोगाणु और जीवाणु नष्ट कर रोग को दूर करती है।
श्वास और कफ रोगों में इसका सेवन कफ को नष्ट करता है और उससे सम्बंधित लक्षणों में आराम देता है। इसमें शुद्ध बच्छनाग है जो की कफ को सुखाने में मदद करता है।
अमरसुंदरी रस, 80 प्रकार के वात रोगों की जानी-मानी औषधि है। इसके अतिरिक्त इसे खांसी, सांस की बिमारियों, बवासीर, सन्निपात, पेट में अभूत वायु, मोतीझरा में भी प्रयोग किया जाता है।
रस का प्रयोग शरीर से कफदोष और पित्तदोष, मेदवृद्धि और मन्दाग्नि को नष्ट करता है।
च्यवनप्राश शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है। यह शरीर की प्रतिरक्षा में सुधार करता है। यह बच्चे, बड़ों सभी के लिए टॉनिक है।
क्लोट्रिमेज़ोल एक ऐंटिफंगल antifungal एजेंट है। यह यीस्ट yeast या कवक के साथ सीधे संपर्क पर काम करता है।