आनन्दभैरव रस Anand Bhairav Ras Detail and Uses in Hindi

यह एक रस-औषधि है जिसमें रस, पारा है। पारे को ही आयुर्वेद में रस या पारद कहा जाता है और बहुत सी दवाओं के निर्माण में प्रयोग किया जाता है। पारा एक विषाक्त धातु है और इसे आयुर्वेद में केवल सही प्रकार से शोधित कर के ही इस्तेमाल किया जाता है। रस औषधियां शरीर पर शीघ्र प्रभाव डालती हैं। इन्हें डॉक्टर की देख-रेख में ही लेना सही रहता है।

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आनन्दभैरव रस, दो फार्मूलेशन उपलब्ध हैं, आनन्दभैरव रस (कास) और आनन्दभैरव रस (ज्वर)। जैसा की नाम से ही विदित है, आनन्दभैरव रस (कास), कास को कफ, श्वास रोगों, और आनन्दभैरव रस (ज्वर) को ज्वर में प्रयोग किया जाता है।

Anand Bhairav Ras is a mercurial preparation of Ayurveda. There are two formulations of this medicine viz. Anand Bhairav Ras (Kasa) and Anand Bhairav Ras (Jvar). Kas means cough and Jvar means fever. Both medicines contain different ingredients.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

आनन्दभैरव रस के घटक Ingredients of Anand Bhairav Ras

आनन्दभैरव रस (कास) Anand Bhairav Ras (Kasa)

प्रत्येक 12 grams: शुद्ध (purified) पारद, शुद्ध गंधक, शुद्ध हिंगुल, शुद्ध वत्सनाभ, शुंठी, मारीच फल, पिप्पली फल, शुद्ध टंकण, पिप्पली।

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भावना द्रव्य: भृंगराज स्वरस, बिजौरा निम्बू स्वरस।

आनन्दभैरव रस (ज्वर) Anand Bhairav Ras (Jvar)

  • प्रत्येक 12 ग्राम: शुद्ध हिंगुल, शुद्ध वत्सनाभ, शुद्ध टंकणशुंठी, जायफल.
  • प्रत्येक 24 ग्राम: मारीच फल, पिप्पली फल।
  • भावना द्रव्य: जम्बीर निम्बू का रस।

आनन्दभैरव रस के चिकित्सीय उपयोग Uses of Anand Bhairav Ras

आनन्दभैरव रस (कास), को खांसी cough, श्वास, अतिसार diarrhea, ग्रहणी, सन्निपात, अपस्मार epilepsy, कफ रोग diseases that occur due to vitiation of kapha, वात रोग diseases that occur due to vitiation of vata, प्रमेह, अजीर्ण indigestion, अग्निमांद्य digestive weakness, आदि रोगों में प्रयोग किया जाता है.

श्वास और कफ रोगों में इसका सेवन कफ को नष्ट करता है और उससे सम्बंधित लक्षणों में आराम देता है। इसमें शुद्ध बच्छनाग है जो की कफ को सुखाने में मदद करता है। जब जुखाम शुरू हो तब इसका सेवन न करे नहीं तो यह जुखाम को सुखा देगा जिससे सुखी खांसी तथा और तकलीफें हो जाएँगी।

शरीर में अधिक कफ के कारण होने वाले अतिसार में भी इसका सेवन लाभप्रद है। कफ अधिक होने से शरीर में पाचक पित्त कम हो जाता है। पाचक पित्त की कमी से पाचन धीमा हो जाता है और इससे मन्दाग्नि, भूख न लगना, अतिसार, जैसी स्तिथि उत्त्पन्न हो जाती है। ऐसे में आनन्दभैरव रस (कास) का प्रयोग करने से अतिसार बंद होता है तथा पाचन सुधरता है।

इस दवा का सेवन पित्त को उत्तेजित करता है। यह शरीर में पित्त को बढाता है। इसलिए जिन लोगों में पित्त अधिक बनता है उन्हें इस दवा का सेवन नहीं करना चाहिए। अगर करें भी तो सही अनुपान के साथ करें।

आनन्दभैरव रस (ज्वर), किसी भी तरह के बुखार ने दिया जाता है।

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Anand Bhairav Ras

आनन्दभैरव रस (कास): 1-2 गोली, दिन में दो बार, अदरक के रस/ पान के पत्ते का रस और शहद/अनार का जूस या केवल पानी के साथ।

  • आनन्दभैरव रस (ज्वर): 1 टैब्लेट, दिन में दो बार, अदरक का रस और शहद के साथ।
  • या चिकित्सक द्वारा निर्देशित के रूप में।
  • इस दवा को ऑनलाइन या आयुर्वेदिक स्टोर से ख़रीदा जा सकता है।

This medicine is manufactured by Baidyanath (Anand Bhairav Ras (Kas) and Anand Bhairav Ras (Jwar)), Dabur (Anand Bhairav Ras (Jwar)), and some other Ayurvedic pharmacies.

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