मधुमेहारी दाने के फायदे, नुकसान और प्रयोग

बैद्यनाथ मधुमेहारी दाने, एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसे मधुमेह या डायबिटीज में बढ़ी हुई रक्तशर्करा को कम करने के लिए के लिए प्रयोग किया जाता है।

I-pill Information in Hindi

I-pill सिप्ला द्वारा निर्मित आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली है emergency contraceptive pill from Cipla जो असुरक्षित सेक्स या गर्भनिरोधक विफलता के 72 घंटे के भीतर लेने पर गर्भावस्था को रोकने के लिए प्रयोग की जाती है।

बवासीर की आयुर्वेदिक दवाएं

पाइल्स में गुदा anus या मलाशय rectum के आसपास नसों nerves और मांसपेशियों muscles में सूजन हो जाती है। ऐसा संभवतः लम्बे समय तक, शौच के दौरान पड़ने वाले पर दबाव (कब्ज़ के कारण) से होता है। कब्ज़ में दबाव पड़ने से मलाशय में सूजन हो जाती जो की पाइल्स में विकसित हो सकती है।

पिलोरिड के फायदे, नुकसान और प्रयोग

पिलोरिड Pilorid नागार्जुन आयुर्वेदिक समूह द्वारा निर्मित आयुर्वेदिक दवा है। इसे पाइल्स/बवासीर/अर्श के उपचार में प्रयोग किया जाता है।

मनशिला Manahshila (Realgar) Information and Uses in Hindi

मनशिल को हिचकी, अस्थमा, खांसी, ब्रोंकाइटिस, चर्दी, मानसिक विकारों, श्वसन, ऑप्थाल्मिक, कुष्ठ और अन्य त्वचा की बीमारियों के उपचार में उल्लेख किया है। इसके अतिरिक्त इसे विष, दुर्बलता, बुखार, भूख न लगना, मिरगी, अनिद्रा और अन्य मानसिक रोगों के उपचार में प्रयोग किया जाता है।

पिलीफ टेबलेट (चरक) के फायदे, नुकसान और प्रयोग

Pilief टेबलेट चरक फार्मा प्राइवेट द्वारा निर्मित एक हर्बल आयुर्वेदिक दवा है। इस दवा को पाइल्स/अर्श के प्रबंधन में प्रयोग किया जाता है।

Baidyanath Pirrhoid in Hindi

बैद्यनाथ पायराइड एक आयुर्वेदिक हर्बल दवा है जो की श्री बैद्यनाथ आयुर्वेद भवन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित है। इस दवा को बवासीर या अर्श जिसे पाइल्स Piles भी कहा जाता है के उपचार में प्रयोग किया जाता है।

कासीसादि तेल के फायदे, नुकसान और प्रयोग

कासीसादि तैल एक आयुर्वेदिक मेडीकेटेड तेल है जिसे बाहरी रूप से त्वचा पर लगाया जाता है। यह पाइल्स के उपचार के लिए जानी मानी औषधि है।

कांकायन वटी (अर्श) के फायदे, नुकसान और प्रयोग

कांकायन वटी (अर्श) एक हर्बल आयुर्वेदिक औषधि है जिसे भैषज्य रत्नावली के अर्शरोगाधिकार से लिया गया है। यह दवा अर्श या पाइल्स के उपचार में प्रयोग की जाने वाली एक प्रसिद्ध औषधि है।

अमृतादि गुग्गुलु के फायदे, नुकसान और प्रयोग

अमृतादि गुग्गुलु को विशेष रूप से वात प्रधान वातरक्त में प्रयोग किया जाता है। वातरक्त में वात, जब रक्त को दूषित कर देता है तो जोड़ों में दर्द, सुजन, उँगलियों में दर्द, चमड़ी का सुन्न होना आदि लक्षण प्रकट होते हैं।