झंडु अल्पीटोन Zandu Alpitone Detail and Uses in Hindi

झंडु अल्पीटोन, झंडु फार्मास्युटिकल वर्क्स लिमिटेड (झंडु सन २००८ से इमामी लिमिटेड का हिस्सा बन चुका है) द्वारा निर्मित आयुर्वेदिक दवा है।। इस दवाई में अश्वगंधा, बला, शतावरी आदि हैं जो आयुर्वेद के जाने-माने रसायन हैं। अल्पीटोन, में टॉनिक, सूजन दूर करने, बलवर्धक, धातुवर्धक के और पाचन को सही करने के गुण है तथा यह दवा पाचन की कमजोरी और पाचन की विकृति से होने वाले रोगों में लाभप्रद है। इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें।

Zandu Alpitone is a polyherbal Ayurvedic proprietary medicine from Zandu Pharmaceutical Works Lt. It is a digestive tonic that improves digestion and gives relief in various health problems that occur due to improper digestion of food.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

  • निर्माता: झंडु फार्मास्युटिकल वर्क्स लिमिटेड
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: हर्बल आयुर्वेदिक
  • मुख्य उपयोग: पाचन रोग
  • मुख्य गुण: पाचक

मूल्य MRP:

  • 200 ml Syr – Rupees 75.00
  • 500 ml Syr – Rupees 135.00

अल्पीटोन के घटक Ingredients of Alpitone

प्रत्येक 5 ml में:

  1. अश्वगंधा Ashwagandha (Withania somnifera) 200 mg
  2. बला Bala (Sida cordifolia) 200 mg
  3. शतावरी Shatavari (Asparagus racemosus) 100 mg
  4. चित्रक Chitrak (Plumbago zeylanica) 50 mg
  5. गोखरू Gokshur (Tribulus terrestris) 50 mg
  6. रसना Rasna (Pluchea lanceolata) 50 mg
  7. द्राक्षा Draksha (Vitis vinifera) 50 mg
  8. गिलोय Amruta (Tinospora cordifolia) 25 mg
  9. शुण्ठी Sunthi (Zingiber officinale) 25 mg

1- अश्वगंधा को असगंध, आसंध और विथानिया, विंटर चेरी आदि नामों से जाना जाता है। इसकी जड़ को सुखा, पाउडर बना आयुर्वेद में वात-कफ शामक, बलवर्धक रसायन की तरह प्रयोग किया जाता है। अश्वगंधा स्वाद में कसैला-कड़वा और मीठा होता है। तासीर में यह गर्म hot in potency है। इसका सेवन वात और कफ को कम करता है लेकिन बहुत अधिक मात्रा में सेवन शरीर में पित्त और आम को बढ़ा सकता है। यह मुख्य रूप से मांसपेशियों muscles, वसा, अस्थि, मज्जा/नसों, प्रजनन अंगों reproductive organ, लेकिन पूरे शरीर पर काम करता है। यह मेधावर्धक, धातुवर्धक, स्मृतिवर्धक, और कामोद्दीपक है। यह बुढ़ापे को दूर करने वाली औषधि है। अश्वगंधा आयुर्वेद की टॉनिक दवा है। यह शरीर को बल देती है।

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2- बला, बरियार, खरेटी या वत्य का वानस्पतिक नाम सिडा कोर्डिफोलिया है और अंग्रेजी में इसे कंट्री मैलो कहते हैं। बला, शरीर को बल देने वाली औषध है। यह तीनों दोषों को संतुलित करती है, टॉनिक है, सूजन को दूर करती है और वाजीकारक है। आयुर्वेद में इसे मुख्य रूप से शरीर को बल देने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह पुरुषों में लिबिडो को बढ़ाती है।

3- शतावरी में अल्सर ठीक करने के, इम्युनिटी बढ़ाने के और टॉनिक गुण हैं। यह आँतों को साफ़ करती है और पेचिश को अपने संकोचक गुण से रोकती है। शतावर के सेवन से शरीर में अम्लपित्त की शिकायत दूर होती है।

4- द्राक्षा सूखे हुए अंगूर को कहते है। यह बहुत पौष्टिक, मीठे, विरेचक, रक्तवर्धक , कूलिंग और कफ ढीला करने वाले होते हैं । आयुर्वेद में मुख्य रूप से इन्हें खांसी, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, गठिया, पीलिया, प्यास, शरीर, खांसी, स्वर बैठना और सामान्य दुर्बलता आदि को दूरकरने के लिए प्रयोग किया जाता है। द्राक्षा को आँखों और आवाज़ के लिए अच्छा माना गया है। यह शरीर में वायु और पित्त को कम करते हैं। यह तासीर में ठन्डे होते हैं और शरीर में पित्त की अधिकता से होने वाले रोगों जैसे की हाथ-पैर में जलन, नाक से खून गिरना, आदि में विशेष रूप से फायदेमंद हैं। द्राक्षा में कब्ज़, अग्निमांद्य, अधिक प्यास लगना, पेट में दर्द, खून की कमी, और वातरक्त को भी नष्ट करने के गुण हैं।

5- शतावरी में अल्सर ठीक करने के, इम्युनिटी बढ़ाने के और टॉनिक गुण हैं। यह आँतों को साफ़ करती है और पेचिश को अपने संकोचक गुण से रोकती है। शतावर के सेवन से शरीर में अम्लपित्त की शिकायत दूर होती है।

6- चित्रक का वानस्पतिक नाम प्लम्बेगो जेलेनिका ( Plumbago zeylanica) हैं। इसे अंग्रेजी में वाइट लीडवोर्ट कहते हैं। यह सूजन दूर करने वाली, पाचन को उत्तेजित करने वाली और एंटीसेप्टिक जड़ी बूटी है।

7- गोखरू आयुर्वेद की एक प्रमुख औषधि है। इस मुख्य रूप से पेशाब रोगों और पुरुषों में यौन कमजोरी के लिए प्रयोग किया जाता है। इसके सेवन से मांसपेशियां बनती हैं, मज़बूत होती हैं, शक्ति-बल की वृद्धि होती है, टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ता है जिससे कामेच्छा बढ़ती है, वीर्य -शुक्र विकार दूर होते हैं और व्यक्ति हृष्ट-पुष्ट होता है।

गोखरू शीतल, मूत्रशोधक, मूत्रवर्धक, वीर्यवर्धक, और शक्तिवर्धक है। यह पथरी, पुरुषों के प्रमेह, सांस की तकलीफों, शरीर में वायु दोष के कारण होने वाले रोगों, हृदयरोग और प्रजनन अंगों सम्बन्धी रोगों की उत्तम दवा है। यह वाजीकारक है और पुरुषों के यौन प्रदर्शन में सुधार करता है।

8- गिलोय आयुर्वेद की बहुत ही मानी हुई औषध है। इसे गुडूची, गुर्च, मधु]पर्णी, टिनोस्पोरा, तंत्रिका, गुडिच आदि नामों से जाना जाता है। यह एक बेल है जो सहारे पर कुंडली मार कर आगे बढती जाती है। इसे इसके गुणों के कारण ही अमृता कहा गया है। यह जीवनीय है और शक्ति की वृद्धि करती है। इसे जीवन्तिका भी कहा जाता है। गिलोय वात-पित्त और कफ का संतुलन करने वाली दवाई है। यह रक्त से दूषित पदार्थो को नष्ट करती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।

9- शुण्ठी पाचन और श्वास अंगों पर विशेष प्रभाव दिखाता है। इसमें दर्द निवारक गुण हैं। यह स्वाद में कटु और विपाक में मधुर है। यह स्वभाव से गर्म है।

अल्पीटोन के लाभ/फ़ायदे Benefits of Alpitone

  1. यह शरीर को ताकत और स्फूर्ति देती है।
  2. यह पाचन शक्ति को बढ़ा कर खाए हुए भोजन को हजम करने में लाभकारी है।
  3. यह लीवर को ताकत देती है।
  4. यह नए रक्त के बनने में मदद करती है।
  5. यह अजीर्ण, पेट के रोग, अग्निमांद्य, गुल्म, कोष्ठबद्धता, अपच आदि में लाभप्रद है।

अल्पीटोन के चिकित्सीय उपयोग Uses of Alpitone

  1. भूख न लगना Anorexia
  2. पोषक तत्वों की कमी nutritional deficiencies
  3. कमजोरी general debility
  4. थकावट fatigue
  5. स्ट्रेस-तनाव stress
  6. शरीर में पुराने रोग के कारण कमजोरी convalescence following chronic illness & as a general purpose tonic।

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Alpitone

  1. इस सिरप को दिन में दो बार लें।
  2. इसे व्यस्क एक-दो चम्मच की मात्रा में और बच्चे इसकी आधी मात्रा में ले सकते हैं।
  3. इसे भोजन करने के पहले लें।

सावधानी / साइड-इफेक्ट्स

  1. इसे निर्धारित मात्रा से अधिक मात्रा में न लें।
  2. इसमें पित्त वर्धक द्रव्य है। इसलिए कुछ सेंसिटिव लोगों में इसके सेवन से पेट में जलन और शरीर में अधिक गर्मी हो सकती है।
  3. इसे गर्भवस्था में न लें।
  4. इसमें द्राक्षा एक प्रमुख द्रव्य है, इसलिए बढ़े रक्त शर्करा स्तर में इसे सावधानी से लें।
  5. इसे लेने से लाभ होता है, लेकिन यह कितना होगा यह बहुत से कारकों पर निर्भर करता है।
  6. यदि आपको पाचन की किसी भी प्रकार की समस्या है तो कृपया सही कारणों को जानने का प्रयत्न करें। रोग के सही कारण को जान लेने से उसका निवारण आसान होता है।
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