Vyaghri Haritaki व्याघ्री हरीतकी Details and Uses in Hindi

Vyaghri Haritaki is a polyherbal Ayurvedic formulation. This medicine is useful in treatment of respiratory ailments.

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Here information is given about complete list of ingredients, properties, uses and dosage of this medicine in Hindi language.

व्याघ्री हरीतकी अवलेह एक हर्बल आयुर्वेदिक दवा है। यह स्वाद में कड़वी, कसैली, काले-भूरे रंग की दवा है। इसको बनाने में १० औषधीय वनस्पतियों का प्रयोग हुआ है। इसमें कंटकारी, हरीतकी, काली मिर्च, पिप्पली सोंठ, दालचीनी, इलायची, तेजपत्र, और नागकेशर है। व्याघ्री हरीतकी को बनाने के लिए कटेली का पंचांग और १०० नग हरीतकी का काढ़ा बना कर उसमें अन्य घटक मिलाये जाते हैं।

नीचे इस दवा के घटक, गुण, सेवनविधि, और मात्रा के बारे में जानकारी दी गयी है।

व्याघ्री हरीतकी के घटक

1. Kantakari

कंटकारी

Solanum surattense

Plant

4.8 kg

2. Jala

पानी

Water

for decoction

12.9 liter reduced to 3.07 liter

3. Haritaki

हरीतकी

Terminalia chebula

Pericarp

(100 in No.) 1.2 kg

4. Guda

गुड

Jaggery

 

4.8 kg

5. Sunthi

सोंठ

Zingiber officinale

Rhizome

96 g

6. Marica

काली मिर्च

Piper nigrum

Fruit

96 g

7. Pippali

पिप्पली

Piper longum

Fruit

96 g

8. Tvak

दालचीनी

Cinnamomum zeylanicum

Stem Bark

48 g

9. Patra (Tvakpatra)

तेज पत्ता

Cinnamomum tamala

Leaf

48 g

10. Ela

छोटी इलाइची

Elettaria cardamomum

Seed

48 g

11. Nagakeshara

नागकेशर

Mesua ferrea

Stamen

48 g

12. Madhu

शहद

Honey

 

288 g

Method of preparation

Take raw material of Pharmacopoeial quality. Wash, dry and grind ingredient number 1 (Kvatha Dravya) of the formulation composition and pass through sieve number 44 to obtain a coarse powder.

Clean, dry and powder the ingredients number 5 to 11(Prakshepa Dravya) of the formulation composition and pass through sieve number 85 to obtain a fine powder.

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Clean, dry the ingredient number 3 of the formulation composition and make in to small pieces by removing seeds. Tie the pieces of Haritaki in a muslin cloth to prepare a pottali. Add specified amount of water to the Kvatha Dravya and suspend the pottali containing pieces of Haritaki in to the vessel. Heat, reduce the volume to one fourth and filter through muslin cloth to obtain Kvatha.

Collect the soft pieces of Haritaki from the pottali (bundle) and prepare fine paste. Add jaggery to the Kvatha, boil to dissolve and later filter through muslin cloth. Add fine paste of Haritaki, subject to gentle boiling and stir continuously during the process. Continue heating till the preparation reaches the consistency of leha confirmed by the formation of soft ball that does not disperse in water. Stop heating.

Cool to room temp and add powdered Prakshepa Dravya and honey. Mix thoroughly to prepare a homogeneous mass.

Pack it in tightly closed containers to protect from light and moisture.

कंटकारी को पुराने समय से सांस की बीमारियों के उपचार में प्रयोग किया जाता रहा है। यह कफ को ढीला करती है और गले के रोगों के इलाज के लिए प्रयोग की जाती है।

हरीतकी सौम्य विरेचक, कसैली, भूख को बढ़ाने वाली, पाचन में सहायता देने वाली, बढ़े पित्त को कम करने वाली, और एंटीऑक्सीडेंट है। इसे पेट की गैस, कब्ज, दस्त, पेचिश, पाचन संबंधी विकार, उल्टी, बढ़े हुए जिगर और तिल्ली, खांसी और दमा, और चयापचय के लिए इलाज, के लिए उपयोग किया जाता है।

त्रिकटु (काली मिर्च, पिप्पली और सोंठ) जीवाणुरोधी है और बुखार, अस्थमा, सर्दी, खांसी और अन्य सामान्य स्वास्थ्य विकार के उपचार में लाभदायक है।

चतुरजात, के चार घटक होते हैं: दालचीनी, इलायची, तेजपत्र, और नागकेशर है। यह भूख में सुधार, पाचन को बढ़ावा देने, और खांसी के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है।

सूखी अदरक पाउडर को आयुर्वेद में शुण्ठी कहा जाता है तथा इसका प्रयोग एक औषध के रूप में अपच, भूख न लगने, पेट दर्द, बवासीर, रक्ताल्पता, गठिया, खांसी और दमा आदि में किया जाता है। यह भूख और

पाचन शक्ति में वृद्धि करता है। यह क्षुधावर्धक, विरेचक, कामोद्दीपक, कृमिनाशक और वातहर है।

पिप्पली एक प्रभावी वातहर है। यह सांस की बीमारियों, उच्च रक्तचाप, हिचकी और सूजन के इलाज में उपयोगी है।

दालचीनी या सिनामन, एक पेड़ की भीतरी छाल होती है। इसका प्रयोग फ्लू, अपच, भूख की कमी, पेट फूलना, दस्त, कष्टार्तव आदि में किया जाता है। इसके अतिरिक्त दालचीनी का उपयोग नपुंसकता, जुकाम, दमा, आंखों की सूजन, योनिशोथ, गठिया, नसों का दर्द, घाव, दांत दर्द और मधुमेह के उपचार में होता है।

इलाइची के सुगंधित बीज, शरीर को ठंडक देने वाले, उत्तेजक, वातहर, पाचन, भूख, मूत्रवर्धक, कफ को ढीला करने वाले, टॉनिक और गर्भान्तक होते है। इनका प्रयोग उल्टी, चक्कर, अपच, पेट संबंधी विकार, अस्थमा,

ब्रोंकाइटिस, अर्श, मूत्रकृच्छ, गुर्दे की पथरी, मुंह से दुर्गंध, हृदय रोग, जलन, दुर्बलता और दृष्टि दोष में होता है।

नागकेशर, फूल का पुंकेसर होता है। यह सूजन को कम करता है। `

Vyaghri Haritaki Avaleha का चिकित्सीय उपयोग

Benefits of Vyaghri Haritaki Avaleha

  1. यह कफ को ढीला और कम करती है।
  2. यह, स्वर भंग, गला बैठना आदि में आवाज़ को सही करती है।
  3. यह पाचन को सही करती है।
  4. यह कब्ज़ को दूर करती है।

Therapeutic Uses of Vyaghri Haritaki Avaleha

  1. वातज, पित्तज और कफज खांसी
  2. क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, अस्थमा Chronic Bronchitis, Asthma
  3. खांसी, जुकाम Cough, coryza
  4. स्वर बैठना hoarseness of voice
  5. पुरानी नाक में सुजन, sinusitis
  6. क्षय रोग Tuberculosis

सेवनविधि और मात्रा How to take and dosage

5 ग्राम से 15 ग्राम तक, सुबह और शाम दूध के साथ।

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