उन्मादगजकेशरी Unmad Gajkesari Ras Detail and Uses in Hindi

उन्मादगजकेशरी आयुर्वेद की एक रस औषधि है, जिसे शुद्ध पारद, शुद्ध गंधक, शुद्ध मैनशील, और शुद्ध धतूरे के बीजों से बनाया गया है। इसमें बच और ब्राह्मी की भावना दी गई है। यह दवा मुख्य रूप से उन्माद abnormal psychological and physico-psychological activities की है। क्योंकि यह आयुर्वेद की क्लासिकल दवा है इसलिए यह बहुत सी आयुर्वेदिक फार्मेसियों दवा निर्मित की जाती है।

यह एक आयुर्वेदिक रस-औषधि है जिसमें रस, पारा है। पारे को ही आयुर्वेद में रस या पारद कहा जाता है और बहुत सी दवाओं के निर्माण में प्रयोग किया जाता है। रस औषधियां शरीर पर शीघ्र प्रभाव डालती हैं। इन्हें डॉक्टर की देख-रेख में ही लेना सही रहता है। रस औषधियों के निर्माण में शुद्ध पारे और शुद्ध गंधक को मिलाकर पहले कज्जली बनायी जाती है जो की काले रंग की होती है। रासायनिक रूप से कज्जली, ब्लैक सल्फाइड ऑफ़ मरक्युरी है। कज्जली को रसायन माना गया है जो की त्रिदोष को संतुलित करती है। यदि इसे अन्य उपयुक्त घटकों के साथ मिलाकर दवा बनाई जाती है तो यह लगभग हर रोग को दूर कर सकती है। कज्जली वाजीकारक, रसायन, योगवाही है।

इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें।

Unmad Gajkesari Ras is Mercurial Ayurvedic Formulation. It is indicated in treatment of Unmaad. In Ayurvedic terms, Unmad can be related to Psychosis. It is a broad term which includes variety of mental ailments. This condition is characterized by abnormal psychological and physico-psychological activities.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: पारे वाली आयुर्वेदिक दवा
  • मुख्य उपयोग: मानसिक रोग
  • मुख्य गुण: वात-कफ कम करना, दिमागी रोगों को दूर करना, नींद लाना

उन्मादगजकेशरी के घटक Ingredients of Unmad Gajkesari Ras

  1. शुद्ध पारद Suta (Shuddha Parada) 1 Part
  2. शुद्ध गंधक Gandhaka (Shuddha Gandhaka) 1 Part
  3. शुद्ध मैनशील Shila (Shuddha Manahshila) 1 Part
  4. कनक बीज Svarna Bija (Shuddha Dhattura bija) (Sd.) 3 Parts
  5. बच Ugragandha kvatha (Vacha) Q.S. for Bhavana 7 times
  6. रसना Rasna kvatha (Lf.Rt.) Q.S. for Bhavana 7 times

पारे या मरकरी को आयुर्वेद में ‘रस’ और ‘रसोत्तम’ कहा गया है। इसे आयुर्वेद में भलिप्रकार से शुद्ध करके ही औषध रूप में प्रयोग किया जाता है। पारद की ओषधियाँ शरीर की व्याधियों पर जल्दी असर करती हैं।

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गंधक को इंग्लिश में Sulphur or Sulfur सल्फर कहते हैं। शुद्ध गंधक चरपरा, कड़वा, कसैला, और स्वभाव में गर्म होता है। यह रस में मधुर और पाक में कटु माना गया है।

मनःशिला या मनसिल, आर्सेनिक का सल्फाइड है। इसका रासायनिक सूत्र Arsenic disulphide AS2S2 है। यह नारंगी-लाल रंग और नरम क्रिस्टलीय संरचना है। शुद्ध मंसिल भारी, दस्तावर, वर्ण को उत्तम करने वाली, गर्म, लेखन, चरपरी, कड़वी, स्निग्ध, विषविकारक, होती है। यह खांसी, कफ, रक्तविकार, भूतबाधा, मस्तिष्क विकार को नष्ट करने वाली है।

धतूरा बीज काले भूरे रंग के साथ मिर्च के बीज जैसे होते हैं। यह आयुर्वेद के उपविष वर्ग में हैं, और जहर समान हैं। इन्हें आयुर्वेद में केवल शुद्ध करके ही प्रयोग किया जाता है।

बिना शोधित किया अथवा पौधे से सीधे ही लिए, बीजों का सेवन जान ले सकता है। इसमें बहुत से अल्कालॉयड हैं जो की विष हैं।

धतूरा बीज में निद्राजनन गुण होते हैं। यह सेंट्रल नर्वस सिस्टम को दबाता है, जिससे मस्तिष्क का काम करना धीमा होता है। कम मात्रा में लेने से उपचार और अधिक मात्रा में लेने से यही गुण जहर समान काम करता है। धतूरे के शुद्ध बीजों के प्रयोग से पागलपन के लक्षणों को कम किया जा सकता है।

वच को कैलमस रूट, स्वीट फ्लैग, उग्रगंध आदि नामों से जानते हैं। इसका लैटिन नाम एकोरस कैलमस Acorus calamus है। वच का शाब्दिक अर्थ है बोलना, और यह हर्ब कंठ के लिए अच्छी है।  यह रस में कटु, तिक्त, काषाय; वीर्य में उष्ण; विपाक में कटु और गुण में लघु, रूक्ष है। यह दोष पर प्रभाव: कफ-वात कम करती ही लेकिन पित्त बढ़ाती है।

वच दीपन, पाचन, लेखन, प्रमाथि, कृमिनाशक, उन्मादनाशक, अपस्मारघ्न, और विरेचक है। यह मस्तिष्क के लिए रसायन है और शिरोविरेचन है। वच को गर्भावस्था में प्रयोग करने का निषेध है।

रसना तिक्त (रस), गुरु (गुण), उष्ण (वीर्य), और कटु विपाक है। यह कफ और वात को संतुलित करता है। इसके सेवन से मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं। अन्य जड़ी-बूटियों के साथ-साथ मिलकर यह सभी स्नायु रोग में बहुत उपयोगी है।

उन्मादगजकेशरी के चिकित्सीय उपयोग Uses of Unmad Gajkesari Ras

  1. मिर्गी Apasmara (Epilepsy)
  2. भूतोन्माद Bhutonmada (Exogenous psychosis)
  3. ज्वर Jvara (Fever) with psychiatric symptoms
  4. पागलपन Unmada (Mania/Psychosis)
  5. शिजोफ्रेनिया Schizophrenia
  6. वात दोष के कारण पागलपन
  7. पागलपन
  8. मूर्च्छा
  9. अनिद्रा

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Unmad Gajkesari Ras

  1. दवा को लेने की मात्रा 250-500 mg है।
  2. इसे दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  3. इसे घी / शहद /  पान के रस या बताये अनुपान के साथ लें।
  4. इसे भोजन करने के बाद लें।
  5. या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications

  1. इस दवा को डॉक्टर की देख-रेख में ही लें।
  2. इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  3. इसे ज्यादा मात्रा में न लें।
  4. ज्यादा से ज्यादा एक महीने तक लें।
  5. यह हमेशा ध्यान रखें की जिन दवाओं में पारद, गंधक, खनिज आदि होते हैं, उन दवाओं का सेवन लम्बे समय तक नहीं किया जाता। इसके अतिरिक्त इन्हें डॉक्टर के देख-रेख में बताई गई मात्रा और उपचार की अवधि तक ही लेना चाहिए।
  6. इसे गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान न लें।
  7. इसे बताई मात्रा से अधिकता में न लें।

उपलब्धता

इस दवा को ऑनलाइन या आयुर्वेदिक स्टोर से ख़रीदा जा सकता है।

  • Baidyanath Unmad Gaj Kesari Ras (5g) @ INR 69. 00
  • VHCA Unman Gajkesari Ras
  • RASASHRAM Unmad Gajkesari Ras
  • Sanjeevika Unmadgajkesari Ras
  • तथा अन्य बहुत सी फर्मसियाँ।
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