ट्रेसिना कैप्सूल Trasina Capsule Detail and Uses in Hindi

ट्रेसिना कैप्सूल, हर्बल आयुर्वेदिक दवाई। यह दवा डे मेडिकल स्टोर द्वारा निर्मित है और मुख्य रूप से एंटीऑक्सीडेंट की तरह से ली जा सकती है। इसे अलजाइमर रोग, तनाव, चिंता, स्ट्रेस, इम्युनिटी की कमी, डायबिटीज, आर्थराइटिस, नींद नहीं आणि की समस्या, गंजापन, ट्यूमर आदि में ले सकते हैं। यह इम्युनिटी को बढ़ाती है और रोगों से शरीर की रक्षा करती है।

दवा के बारे में इस पेज पर जो जानकारी दी गई है वह इसमें प्रयुक्त जड़ी-बूटियों के आधार पर है। हम इस प्रोडक्ट को एंडोर्स नहीं कर रहे। यह दवा का प्रचार नहीं है। हमारा यह भी दावा नहीं है कि यह आपके रोग को एकदम ठीक कर देगी। यह आपके लिए फायदेमंद हो भी सकती हैं और नहीं भी। दवा के फोर्मुलेशन के आधार और यह मानते हुए की इसमें यह सभी द्रव्य उत्तम क्वालिटी के हैं, इसके लाभ बताये गए हैं। इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें। हमारा उद्देश्य दवा के लेबल के अनुसार आपको जानकारी देना है।

TRASINA CAPSULE (DEYS) is herbal Ayurvedic medicine containing Ashwagandha 80 mg, Tulsi 190 mg, Shilajit 20 mg, Guduchi 10 mg, Katuka 10 mg and Bhringraj 10 mg. It has significant antioxidant action. It improves body immunity and helps in various ailments.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

  1. निर्माता: Dey’s Medical Stores
  2. उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  3. दवाई का प्रकार: हर्बल आयुर्वेदिक
  4. मुख्य गुण: एंटीऑक्सीडेंट
  5. मूल्य MRP: 10 कैप्सूल की कीमत रुपए 25 है।

ट्रेसिना कैप्सूल के घटक Ingredients of Trasina

Each Capsule Contains

  • Ashwagandha 60 mg
  • Tulsi 190 mg
  • Shilajeet 20 mg
  • Giloy 10 mg
  • Katuka 10 mg
  • Bhringraj 10 mg
  • As preservative Sodium Benzoate

जाने दवा में प्रयुक्त जड़ी-बूटियों को

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तुलसी

इस दवा में मुख्य द्रव्य तुलसी है। तुलसी का सेवन कफ-खांसी, श्वशन अंगों के इन्फेक्शन, बुखार और इम्युनिटीबढ़ाने में आदि लाभप्रद है।

पवित्र तुलसी, हर हिन्दू के लिए पूजनीय है। यह एक औषधि भी है जो की रक्तविकार, पसली पीड़ा, पित्त की कमी, बुखार, कफ, अस्थमा आदि को दूर करती है। तुलसी के पत्तों का सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

तुलसी स्वाद में कटुकड़वी, गुण में रूखा करने वाली और हलकी है। स्वभाव से यह गर्म है और कटु विपाक है। यह उष्ण वीर्य है। वीर्य का अर्थ होता है, वह शक्ति जिससे द्रव्य काम करता है। आचार्यों ने इसे मुख्य रूप से दो ही प्रकार का माना है, उष्ण या शीत। उष्ण वीर्य औषधि वात, और कफ दोषों का शमन करती है। यह शरीर में प्यास, पसीना, जलन, आदि करती हैं। इनके सेवन से भोजन जल्दी पचता (आशुपाकिता) है।

यह एंटीसेप्टिक, एंटीफंगल, एंटीमिक्रोबिअल, एंटीवायरल और एंटी-पाईरेटिक (बुखार को कम) है।

अश्वगंधा

अश्वगंधा आयुर्वेद की अत्यंत जानी-मानी जड़ी बूटी है। यह उत्तम रसायन है जो की शरीर को बल, ताकत, ओज, और आयुष्य प्रादान करती है। अश्वगंधा का वानस्पतिक नाम विथानिया सोमिनेफेरा है तथा औषधि के रूप में पौधे की जड़ ही मुख्य रूप से प्रयोग की जाती है। पौधे की जड़ को सुखा कर, कूट कर, पीस जो कपड़छन चूर्ण बनता है वही औषधि की तरह अकेले या अन्य द्रव्यों के साथ प्रयोग किया जाता है।

अश्वगंधा (Withania somnifera) की जड़ें आयुर्वेद में टॉनिक, कामोद्दीपक, और शरीर की प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए improves immunity प्रयोग की जाती है। अश्वगंधा तंत्रिका कमजोरी, बेहोशी, चक्कर और अनिद्रा nervous weakness, fainting, giddiness and insomnia तथा अन्य मानसिक विकारों की भी अच्छी दवा है। यह पुरुषों में यौन शक्ति बढ़ाने के लिए प्रयोग की जाती है।

यह पुरुष प्रजनन अंगों पर विशेष प्रभाव डालती है। यह पुरुषों में जननांग के विकारों के लिए एक बहुत ही अच्छी हर्ब है। यह वीर्य की मात्रा और गुणवत्ता को बढ़ाने में भी मदद करती है।

स्त्रियों में अश्वगंधा का सेवन स्तनपान breastfeeding कराते समय दूध की मात्रा में वृद्धि galactagogue करता है और हॉर्मोन के संतुलन में मदद करता है। इसका सेवन भ्रूण fetus को स्थिर करता है और हार्मोन पुन: बनाता है। प्रसव after delivery बाद इसका सेवन शरीर को बल देता है।

इसका सेवन वात और कफ को कम करता है लेकिन बहुत अधिक मात्रा में सेवन शरीर में पित्त और आम को बढ़ा सकता है। यह मुख्य रूप से मांसपेशियों muscles, वसा, अस्थि, मज्जा/नसों, प्रजनन अंगों reproductive organ, लेकिन पूरे शरीर पर काम करता है। यह मेधावर्धक, धातुवर्धक, स्मृतिवर्धक, और कामोद्दीपक है। यह बुढ़ापे को दूर करने वाली औषधि है।

भृंगराज

भृंगराज को हिंदी में भांगरा, भंगरिया, भंगरा, संस्कृत में केशराज, भृंगराज, भृंगरज, मार्कव, भृंग, अंगारक, केशरंजन आदि कहते है। इंग्लिश में ट्रेलिंग एक्लिप्टा और लैटिन में एक्लिप्टा अल्बा कहते हैं। यह वनस्पति नालियों के किनारे, खेतों के किनारे और पानी वाली जगहों पर पायी जाती है। यह एक खरपतवार है जो की बारिश के मौसम में स्वतः ही उग जाती है।

इसके पत्ते देखने में अनार के पत्ते जैसे पर उससे चौड़े और लम्बे होते हैं। इसके बीज बहुत छोटे और काले होते हैं।

औषधीय प्रयोग के लिए भृंगराज का पूरा पौधा ताज़ा या सूखा प्रयोग किया जाता है। यह केशों, त्वचा, नेत्रों और लीवर के लिए लाभप्रद है।

भृंगराज को लीवर सिरोसिस और हेपेटाइटिस में किया जाता है। यह रंजक पित्त को साफ़ करता है और लीवर की रक्षा करता है। यह बाइल का फ्लो बढ़ाता है और भूख को सही करता है। यह खून बढ़ाता है और लीवर फंक्शन को ठीक करता है। इसके सेवन से एनीमिया दूर होता है।

गिलोय (टिनोस्पोरा कोर्डिफोलिया)

गिलोय आयुर्वेद की बहुत ही मानी हुई औषध है। इसे गुडूची, गुर्च, मधु]पर्णी, टिनोस्पोरा, तंत्रिका, गुडिच आदि नामों से जाना जाता है। यह एक बेल है जो सहारे पर कुंडली मार कर आगे बढती जाती है। इसे इसके गुणों के कारण ही अमृता कहा गया है। यह जीवनीय है और शक्ति की वृद्धि करती है। इसे जीवन्तिका भी कहा जाता है।

दवा के रूप में गिलोय के अंगुली भर की मोटाई के तने का प्रयोग किया जाता है। जो गिलोय नीम के पेड़ पर चढ़ कर बढती है उसे और भी अधिक उत्तम माना जाता है। इसे सुखा कर या ताज़ा ही प्रयोग किया जा सकता है। ताज़ा गिलोय को चबा कर लिया जा सकता है, कूंच कर रात भर पानी में भिगो कर सुबह लिया जा सकता है अथवा इसका काढ़ा बना कर ले सकते है।

गिलोय वात-पित्त और कफ का संतुलन करने वाली दवाई है। यह रक्त से दूषित पदार्थो को नष्ट करती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। यह एक बहुत ही अच्छी ज्वरघ्न है और वायरस-बैक्टीरिया जनित बुखारों में अत्यंत लाभप्रद है। गिलोय के तने का काढ़ा दिन में तीन बार नियमित रूप से तीन से पांच दिन या आवश्कता हो तो उससे अधिक दिन पर लेने से ज्वर नष्ट होता है। किसी भी प्रकार के बुखार में लीवर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में गिलोय का सवेन लीवर की रक्षा करता है। यदि रक्त विकार हो, पुराना बुखार हो, यकृत की कमजोरी हो, प्रमेह हो, तो इसका प्रयोग अवश्य करना चाहिए।

कटुकी Katuki (Picrorhiza kurroa)

कटुकी एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल, और एंटीडायबिटिक है। यह स्वाद में कड़वी किन्तु सूजन को दूर करने वाली औषध है। इसे मुख्य रूप से गैस्ट्रिक जूस के कम स्राव, अपच, पीलिया, हेपेटाईटिस, सूजन दूर करने में, सिरोसिस, कब्ज़, मलेरिया, पेट के कीड़ों और डायबिटीज में प्रयोग किया जाता है।

कटुकी रस में कटु-तिक्त है। गुण में लघु है। तासीर में यह शीतल और कटु विपाक है। कर्म में यह ज्वरघ्न, पित्तहर, भेदी, दीपन और रक्तदोषहर है।

कटुकी का सेवन गर्भावस्था में नहीं करना चाहिए। यह लम्बे समय तक ली जा सकने वाली हर्ब है।

शिलाजीत

शिलाजीत, हिमालय की चट्टानों से निकलने वाला पदार्थ है। आयुर्वेद में औषधीय प्रयोजन के लिए शिलाजीत को शुद्ध करके प्रयोग किया जाता है। यह एक adaptogen है और एक प्रमुख आयुर्वेदिक कायाकल्प टॉनिक है। यह पाचन और आत्मसात में सुधार करता है। आयुर्वेद में, इसे हर रोग के इलाज में सक्षम माना जाता है। इसमें अत्यधिक सघन खनिज और अमीनो एसिड है।

  • शिलाजीत प्रजनन अंगों पर काम करता है। यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है और प्रतिरक्षा में सुधार करता है। यह पुरानी बीमारियों, शरीर में दर्द और मधुमेह में राहत देता है। इसके सेवन शारीरिक, मानसिक और यौन शक्ति देता है।
  • शिलाजीत रस में अम्लीय और कसैला, कटु विपाक और समशीतोष्ण (न अधिक गर्म न अधिक ठंडा) है।

ऐसा माना जाता है, संसार में रस-धातु विकृति से उत्पन्न होने वाला कोई भी रोग इसके सेवन से दूर हो जाता है। शिलाजीत शरीर को निरोगी और मज़बूत करता है।

  • यह पुरुषों के प्रमेह की अत्यंत उत्तम दवा है।
  • यह वाजीकारक है और इसके सेवन से शरीर में बल-ताकत की वृद्धि होती है।
  • यह पुराने रोगों, मेदवृद्धि, प्रमेह, मधुमेह, गठिया, कमर दर्द, कम्पवात, जोड़ो का दर्द, सूजन, सर्दी, खांसी, धातु रोग, रोगप्रतिरोधक क्षमता की कमी आदि सभी में लाभप्रद है।
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  • यह शरीर में ताकत को बढाता है तथा थकान और कमजोरी को दूर करता है।
  • यह यौन शक्ति की कमी को दूर करता है।
  • यह भूख को बढाता है।
  • यह पुरुषों में नपुंसकता, शीघ्रपतन premature ejaculation, कम शुक्राणु low sperm count, स्तंभन erectile dysfunction में उपयोगी है।
  • यह शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में मदद करता है।
  • शिलाजीत के सेवन के दौरान, आहार में दूध की प्रधानता रहनी चाहिए।

ट्रेसिना कैप्सूल के कर्म Principle Action

  • कफहर: द्रव्य जो कफ को कम करे।
  • दीपन: द्रव्य जो जठराग्नि तो बढ़ाये लेकिन आम को न पचाए।
  • पित्तकर: द्रव्य जो पित्त को बढ़ाये।
  • स्वेदल: द्रव्य जो स्वेद / पसीना लाये।
  • श्वास-कासहर: द्रव्य जो श्वशन में सहयोग करे और कफदोष दूर करे।
  • हृदय: द्रव्य जो हृदय के लिए लाभप्रद है।
  • कुष्ठघ्न: द्रव्य जो त्वचा रोगों में लाभप्रद हो।

ट्रेसिना कैप्सूल के लाभ/फ़ायदे Benefits of Trasina

  • इसका सेवन शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। यह बार-बार होने वाले इन्फेक्शन में लाभ करती है।
  • इसको लेना सरल है।
  • इसमें तुलसी के गुण हैं।
  • यह इम्युनिटी को बढ़ाती है।
  • यह एचआईवी वायरस के प्रतिरोध को कम करती है।
  • यह बालों के लिए फायदेमंद है।
  • यह बैक्टीरिया / वायरस / इन्फेक्शन के कारण तथा अन्य कारणों से होने वाले बुखार में बहुत प्रभावशाली है।
  • यह मस्तिष्क को बल देती है।
  • यह मस्तिष्क को शांत रखती है।
  • यह यकृत और गुर्दे के फंक्शन को सुधारती है।
  • यह यकृत की रक्षा करती है।
  • यह रक्तचाप को कम करने में सहायक है।
  • यह शरीर में फ्री रेडिकल को कम करती है।
  • यह शरीर में सूजन कम करती है।
  • यह हड्डियों के गठन के लिए कोशिकाओं के विकास को उत्तेजित करती है।

ट्रेसिना कैप्सूल के चिकित्सीय उपयोग Uses of Trasina

  • अनिद्रा
  • अल्जाइमर रोग
  • अल्सर Ulcers
  • अवसाद Depression
  • अस्थमा Asthma
  • इम्युनिटी कम हो जाना Immunosuppression
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल
  • एंग्जायटी Anxiety
  • एंटीऑक्सीडेंट Antioxidant
  • एलर्जिक राईनाइटिस
  • ऑक्सीडेटिव तनाव
  • कम इम्युनिटी Low immunity, Immunomodulator
  • कम कामेच्छा, सेक्स के लिए ठंडापन
  • गठिया, गाउट, आर्थराइटिस
  • चमड़ी के रोग
  • चिंता, तनाव, एंग्जायटी, मानसिक रोग
  • जोड़ों में सूजन Joint inflammation
  • ज्वर Fever
  • त्वचा रोग Skin disorders
  • थकावट Fatigue
  • परुषों में यौन दुर्बलता Male sexual dysfunction
  • प्रजनन और पेशाब अंगों के रोग Disorders of genito-urinary system
  • बार-बार होने वाला इन्फेक्शन Recurrent infections
  • बाल गिरना, गंजापन
  • ब्रोंकाइटिस Bronchitis
  • यकृत विकार, पीलिया, हेपेटाइटिस, लीवर बढ़ जाना
  • यक्ष्मा, hiv
  • रसायन As a tonic
  • समय से पहले एजिंग
  • सर्दी-खांसी-जुखाम Cold, Cough, Congestion
  • सामान्य जुखाम, बुखार, खांसी
  • हृदय रोग Cardiovascular diseases

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Trasina

  • 1 गोली, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  • इसे एक महीने तक लें।
  • इसे दूध, पानी के साथ लें।
  • इसे भोजन करने के बाद लें।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications

  • निर्धारित मात्रा में लेने पर इस दवा के कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं देखे गए हैं।
  • इसे कुछ महीनों तक लिया जा सकता है।
  • तुलसी स्वभाव से गर्म Hot Potency है। पित्त की अधिकता में इसे सावधानी से लें।
  • गर्भावस्था में किसी भी हर्बल दवा का सेवन बिना डॉक्टर के परामर्श के न करें।
  • तुलसी का सेवन करने के तुरंत बाद दूध न पियें।
  • अश्वगंधा का सेवन रक्त में शुगर के लेवल को कम करता है।
  • दवा के सेवन का असर कुछ सप्ताह के प्रयोग के बाद आता है।
  • शिलाजीत के सीन के समय कुल्थी डाल का इस्तेमाल नहीं करें।
  • यदि आपको इसके सेवन के दौरान किसी भी प्रकार का साइड-इफेक्ट लगे या यह आपको सूट न करे तो कृपया इसे न लें।
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