हिमालया प्योरिम Himalaya Purim Detail and Uses in Hindi

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हिमालया प्योरिम, हिमालय ड्रग कंपनी द्वारा निर्मित एक प्रोप्राइटरी हर्बल आयुर्वेदिक दवाई है तथा इसे त्वचा रोगों में लिया जा सकता है। प्यूरिम से खून साफ़ होता है। इसमें नीम, गुडूच, वरुण, त्रिफला, विडंग, भृंगराज और कालमेघ के एक्सट्रेक्ट और हल्दी, अमलतास, बाकुची, पुष्कर, और कटुकी के पाउडर हैं। इसे एलो वेरा, करेले के रस, और त्रपुष्पा के रस की भावना देकर बनाया गया है।

हिमालया प्यूरिम में एंटीसेप्टिक, एंटीबायोटिक, एंटिफंगल, एंटी-इन्फ्लेमेटरी, एंटीवायरल, घाव भरने और एंटी एलर्जी गुण है। यह सभी त्वचा के संक्रमण का इलाज करने के लिए एक साथ काम करते हैं। एक हेपेटोस्टिम्युलंट के रूप में, दवा लीवर की कार्यप्रणाली में सुधार करती है और शरीर से जहरीले चयापचय उत्पादों को हटा देने में मदद करती है। प्योरिम त्वचा एलर्जी और सूजन में राहत प्रदान करता है। यह पेट के कीड़े दूर करने में मदद कर सकता है।

दवा के बारे में इस पेज पर जो जानकारी दी गई है वह इसमें प्रयुक्त जड़ी-बूटियों के आधार पर है। हम इस प्रोडक्ट को एंडोर्स नहीं कर रहे। यह दवा का प्रचार नहीं है। हमारा यह भी दावा नहीं है कि यह आपके रोग को एकदम ठीक कर देगी। यह आपके लिए फायदेमंद हो भी सकती हैं और नहीं भी। दवा के फोर्मुलेशन के आधार और यह मानते हुए की इसमें यह सभी द्रव्य उत्तम क्वालिटी के हैं, इसके लाभ बताये गए हैं। इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें। हमारा उद्देश्य दवा के लेबल के अनुसार आपको जानकारी देना है।

Himalaya Purim from Himalaya, is an herbal remedy skin disease. Skin diseases are difficult to treat and require changes in diet, lifestyle and patience. Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: हर्बल आयुर्वेदिक दवाई
  • मुख्य उपयोग: चमड़ी के रोग
  • मुख्य गुण: पेट साफ़ करना, खून साफ़ करना
  • मूल्य MRP: Purim Tablets @ Rs 100.00

हिमालया प्यूरिम के घटक Ingredients of Himalaya Purim

Each tablet contains

एक्सट्रेक्ट Extr / Extracts

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  • नीम Nimba (Azadirachta indica) 32mg
  • गुडूची Guduchi (Tinospora cordifolia) 32mg
  • वरुण Varuna (Crataeva nurvala) 32mg
  • त्रिफला Triphala 31mg
  • विडंग Vidanga (Embelia ribes) 31mg
  • भृंगराज Bhringaraja (Eclipta alba) 31mg
  • कालमेघ Kalamegha (Andrographis paniculata) 31mg

पाउडर Pdrs / Powders

  • हरिद्रा Haridra (Curcuma longa) 36mg
  • अमलतास Aragvadha (Cassia fistula) 36mg
  • बाकुची Bakuchi (Psoralea corylifolia) 36mg
  • पुष्कर Pushkara (Inula racemosa) 36mg
  • कटुका Katuka (Picrorhiza kurroa) 36mg

भावना द्रव्य Processed in

  • Aloe Veram Giloy, Karela and Trapushpa Cucumis sativus
  • Other ingredients: Sodium methylparaben IP, sodium Propylparaben IP

जाने दवा में प्रयुक्त जड़ी-बूटियों को

भृंगराज

भृंगराज को हिंदी में भांगरा, भंगरिया, भंगरा, संस्कृत में केशराज, भृंगराज, भृंगरज, मार्कव, भृंग, अंगारक, केशरंजन आदि कहते है। इंग्लिश में ट्रेलिंग एक्लिप्टा और लैटिन में एक्लिप्टा अल्बा कहते हैं। यह वनस्पति नालियों के किनारे, खेतों के किनारे और पानी वाली जगहों पर पायी जाती है। यह एक खरपतवार है जो की बारिश के मौसम में स्वतः ही उग जाती है।

इसके पत्ते देखने में अनार के पत्ते जैसे पर उससे चौड़े और लम्बे होते हैं। इसके बीज बहुत छोटे और काले होते हैं।

औषधीय प्रयोग के लिए भृंगराज का पूरा पौधा ताज़ा या सूखा प्रयोग किया जाता है। यह केशों, त्वचा, नेत्रों और लीवर के लिए लाभप्रद है।

भृंगराज को लीवर सिरोसिस और हेपेटाइटिस में किया जाता है। यह रंजक पित्त को साफ़ करता है और लीवर की रक्षा करता है। यह बाइल का फ्लो बढ़ाता है और भूख को सही करता है। यह खून बढ़ाता है और लीवर फंक्शन को ठीक करता है। इसके सेवन से एनीमिया दूर होता है।

गिलोय (टिनोस्पोरा कोर्डिफोलिया)

गिलोय आयुर्वेद की बहुत ही मानी हुई औषध है। इसे गुडूची, गुर्च, मधु]पर्णी, टिनोस्पोरा, तंत्रिका, गुडिच आदि नामों से जाना जाता है। यह एक बेल है जो सहारे पर कुंडली मार कर आगे बढती जाती है। इसे इसके गुणों के कारण ही अमृता कहा गया है। यह जीवनीय है और शक्ति की वृद्धि करती है। इसे जीवन्तिका भी कहा जाता है।

दवा के रूप में गिलोय के अंगुली भर की मोटाई के तने का प्रयोग किया जाता है। जो गिलोय नीम के पेड़ पर चढ़ कर बढती है उसे और भी अधिक उत्तम माना जाता है। इसे सुखा कर या ताज़ा ही प्रयोग किया जा सकता है। ताज़ा गिलोय को चबा कर लिया जा सकता है, कूंच कर रात भर पानी में भिगो कर सुबह लिया जा सकता है अथवा इसका काढ़ा बना कर ले सकते है।

गिलोय वात-पित्त और कफ का संतुलन करने वाली दवाई है। यह रक्त से दूषित पदार्थो को नष्ट करती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। यह एक बहुत ही अच्छी ज्वरघ्न है और वायरस-बैक्टीरिया जनित बुखारों में अत्यंत लाभप्रद है। गिलोय के तने का काढ़ा दिन में तीन बार नियमित रूप से तीन से पांच दिन या आवश्कता हो तो उससे अधिक दिन पर लेने से ज्वर नष्ट होता है। किसी भी प्रकार के बुखार में लीवर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में गिलोय का सवेन लीवर की रक्षा करता है। यदि रक्त विकार हो, पुराना बुखार हो, यकृत की कमजोरी हो, प्रमेह हो, तो इसका प्रयोग अवश्य करना चाहिए।

कालमेघ

कालमेघ को भूनिम्ब भी कहते हैं। यह बहुत कड़वी औषधि है। यह इन्फेक्शन, बुखार, और खून रोकने तथा खून साफ़ करने केलिए प्रयोग की जाने वाली दवा है।

कालमेघ का सेवन बाइल को बढ़ाता है। यह लीवर के इन्फेक्शन और सूजन में उपयोगी है। यह रंजक पित्त को कम करता है। कालमेघ लीवर की रक्षा करता है। यह एंटीवायरल है और हेपेटाइटिस में उपयोगी है। लीवर के धीमे काम करने और फैट के कम पाचन को ठीक करने में इसे प्रयोग करते हैं।

त्रिफला

त्रिफला (फलत्रिक, वरा) आयुर्वेद का सुप्रसिद्ध रसायन है। यह आंवला, हर्र, बहेड़ा को बराबर मात्रा में मिलाकर बनता है। यह रसायन होने के साथ-साथ एक बहुत अच्छा विरेचक, दस्तावर भी है। इसके सेवन से पेट सही से साफ़ होता है, शरीर से गंदगी दूर होती है और पाचन सही होता है। यह पित्त और कफ दोनों ही रोगों में लाभप्रद है। त्रिफला प्रमेह, कब्ज़, और अधिक पित्त नाशक है। यह मेदोहर और कुछ दिन के नियमित सेवन से वज़न को कम करने में सहायक है। यह शरीर से अतिरिक्त चर्भी को दूर करती है और आँतों की सही से सफाई करती है।

हरीतकी Terminalia chebula आयुर्वेद की रसायन औषधि है। यह पेट रोगों में प्रयोग की जाने वाली सबसे प्रभावी औषध है। संस्कृत में हरड़ को हरीतकी, हर्रे, हर्र, अभया, विजया, पथ्या, पूतना, अमृता, हैमवती, चेतकी, विजया, जीवंती और रोहिणी आदि नामों से जानते हैं। यूनानी में इसे हलीला कहते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, हरीतकी में पांचो रस मधुर, तीखा, कडुवा, कसैला, और खट्टा पाए जाते हैं। गुण में यह लघु, रुक्ष, वीर्य में उष्ण और मधुर विपाक है। हरीतकी, विषाक्त पदार्थों को शरीर से निकलती है व अधिक वात को काम करती है। यह विरेचक laxative, कषाय astringent, और रसायन tonic है। यह सूजन को दूर करती है। यह मूत्रल और दस्तावर है। यह अफारे को दूर करती है और पेट के कीड़ों को भी नष्ट करती है।

बहेड़ा या विभीतक, बिभीतकी (Terminalia bellirica) रस में मधुर, कसैला, गुण में हल्का, रूक्ष, प्रकृति में गर्म, और मधुर विपाक है। यह त्रिदोषनाशक, धातुवर्द्धक, वीर्यवर्धक, पोषक, रक्तस्तम्भक, दर्द को शांत करने वाला तथा कब्ज में लाभकारी है। बहेड़े में टैनिन में पाए जाते हैं तथा यह रक्त को बहने से रोकता है। यह रस, रक्त, मांस और मेद से उत्पन्न विकारों और दोषों को दूर करता है। यह पित्त और कफ को संतुलित करता है।

बहेड़े का सेवन मन्दाग्नि, प्यास, वमन, अर्श, कृमि, खांसी-जुखाम, सांस फूलना, आवाज़ बैठना, आदि में लाभकारी है। यह मेद धातु पर तेज़ी से प्रभाव डालता है।

आंवला, ठंडक देने वाला, कसैला, पाचक, विरेचक, भूख बढ़ाने वाले और कामोद्दीपक माना गया है। इसमें ज्वरनाशक, सूजन दूर करने के और मूत्रवर्धक गुण है। आंवला एक रसायन है जो की शरीर में बल बढाता है और आयु की वृद्धि करता है। यह शरीर में इम्युनिटी boosts immunity को बढाता है। यह विटामिन सी vitamin C का उत्कृष्ट स्रोत है। इसके सेवन से बाल काले रहते है, वात, पित्त और कफ नष्ट होते है और शरीर में अधिक गर्मी का नाश होता है।

हल्दी

हल्दी के बहुत से नाम हैं। इसे हरिद्रा, कांचनी, पीता, निशा, वरवर्णिनी, कृमिघ्ना, हलदी, योषितप्रिया, हट्टविलासिनी आदि नामों से पुकारते हैं। संस्कृत में जितने पर्यायवाची रात्रि के हैं, वे सभी हल्दी के भी नाम है। हल्दी स्वाद में चरपरी, कडवी, रूखी, गर्म, कफ, वात त्वचा के रोगों, प्रमेह, रक्त विकार, सूजन, पांडू रोग, और घाव को दूर करने वाली है।

हल्दी (हरिद्रा) नई या पुरानी दोनों ही तरह की सूजन दूर करने वाली जड़ी बूटी के है। यह त्वचा एलर्जी में यह अत्यंत सहायक है। हल्दी प्राकृतिक रक्त शोधक है। इसमें एंटी माइक्रोबियल गुण है जो त्वचा रोगों को कम करने और रंग को निखारने का काम करते है।

नीम अजादिरीक्टा इंडिका

नीम को आयुर्वेद में निम्ब, पिचुमर्द, पिचुमंद, तिक्तक, अरिष्ट, पारिभद्र, हिंगू, तथा हिंगुनिर्यास कहा जाता है। इंग्लिश में इसे मार्गोसा और इंडियन लीलैक, बंगाली में निमगाछ निम्ब, गुजराती में लिंबडो, और हिंदी में नीम कहा जाता है। नीम को फ़ारसी में आज़ाद दरख्त कहा जाता है। नीम का लैटिन नाम मेलिया अजाडीरीक्टा या अजाडीरीक्टा इंडिका है।

नीम (निंबा) आयुर्वेद में सर्वरोगनिवारिण औषधि है। कड़वे स्वाद के कारण यह रक्त दोषों और मधुमेह में विशेष रूप से लाभप्रद है। नीम, रस में तिक्त है। गुण में लघु-रूक्ष है। तासीर में यह शीतल और कटु विपाक है। कर्म में यह ज्वरघ्न, पित्तहर, ग्राही और रक्तदोषहर है। नीम के सेवन से रक्त विकार, सूजन, पित्त रोग, बुखार आदि दूर होते हैं।

हिमालया प्यूरिम के लाभ / फ़ायदे Benefits of Himalaya Purim

  • यह दवा खून को साफ़ करता है।
  • यह यकृत को स्वस्थ करता है।
  • यह रसायन, पाचन, शरीर से गन्दगी निकलने वाली, और मल को साफ़ करने वाली दवा है।
  • यह लीवर फंक्शन को सही करता है।
  • यह वात और पित्त दोष को संतुलित करता है।
  • यह शरीर में फ्री रेडिकल का बनना कम करता है।
  • यह शरीर से विषाक्तता बाहर करता है।

हिमालया प्यूरिम के चिकित्सीय उपयोग Uses of Himalaya Purim

  • मुंहासे, एक्ने वल्गारिस Acne vulgaris and acne rosacea associated with acneiform postulation
  • तीव्र और पुरानी डर्मेटाइटिस Acute and chronic dermatitis
  • एटॉपिक डर्मेटाइटिस Atopic dermatitis
  • त्वचा पर कीड़ों का असर Cutaneous manifestation of worm infections
  • हाइपरपिगमेंटेशन Hyperpigmentation in chronic dermatitis
  • लीवर फंक्शन में सुधार Improves liver function
  • शरीर से जहरीले चयापचय उत्पादों को निकालना Removes toxic metabolic products from the body

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Himalaya Purim

  • 1-2 गोली, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  • इसे  पानी के साथ लें।
  • इसे भोजन करने के बाद लें।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

सावधनियाँ / साइड-इफेक्ट्स / कब प्रयोग न करें Cautions / Side effects / Contraindications

  • अधिक मात्रा में उन भोजन का सेवन न करें जो शरीर में गर्मी बढ़ाते हों। जैसे की मिर्च, गुड़, तिल, चाय-कॉफ़ी आदि।
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  • इससे वात बढ़ सकता है।
  • इसे ज्यादा मात्रा में न लें।
  • इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  • कब्ज़ न रहने दें।
  • कुछ लोगों में इसके सेवन से पाचन में कुछ बदलाव आ सकते हैं।
  • खाना खाने के तुरंत बाद न सोयें।
  • गर्भावस्था में कोई दवा बिना डॉक्टर की सलाह के न लें।
  • तला हुआ, मिर्च-मसालेदार भोजन न करें।
  • धूप में बहुत अधिक देर न रहें।
  • पानी अधिक पियें।
  • बहुत अधिक मात्रा में खट्टे पदार्थों जैसे की दही, आचार, नींबू, इमली, टमाटर, संतरे आदि न खाएं।
  • मीट, नॉन वेज न खाएं।
  • यह दवा आपके लिए फायदेमंद हो भी सकती और नहीं भी। यह रोग के प्रकार, गंभीरता, कितने समय से रोग है, अन्य मेडिकल कंडीशन आदि पर निर्भर करता है।
  • यह हर्बल है और लम्बे समय तक लेने के लिए सुरक्षित है।
  • विरुद्ध आहार को जाने और उनका सेवन न करें। जैसे दूध के साथ नमक, दूध के साथ मछली, दूध के साथ दही, गर्म-ठंडी तासीर के भोज्य पदार्थ एक साथ न लें।
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