कामचूड़ामणि रस Kamchudamani Ras Detail and Uses in Hindi

कामचूड़ामणि रस, पुरुषों के लिए वाज़िकारक और शीघ्रपतन की दवाई है। इसके सेवन से यौन दुर्बलता, शारीरिक कमजोरी, अनैच्छिक वीर्यपात का होना दूर होता है। यह सेक्सुअल टॉनिक है जो की पूरे स्वास्थ्य पर पॉजिटिव प्रभाव डालती है।

इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें।

Kamchudamani Ras is herbomineral Ayurvedic medicine used to improve sexual performance of males. It contains Ayurvedic preparations of Gold, Silver, Tin, Pyrites, and Pearl. It is used as a sexual tonic and aphrodisiac and to control PE.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: भस्म जड़ी-बूटी युक्त आयुर्वेदिक दवाई
  • मुख्य उपयोग: पुरुषों में अनैच्छिक वीर्यपात
  • मुख्य गुण: वृष्य, वाजिकारक, बलवर्धक, शीतवीर्य

कामचूड़ामणि रस के घटक Ingredients of Kamchudamani Ras

  1. मोती पिष्टी Mukta Pishti 1 Part
  2. स्वर्णमाक्षिक Swarnmakshik Bhasma 1 Part
  3. स्वर्ण भस्म Swarn Bhasma 1 Part
  4. बंग भस्म Vang Bhasma 1 Part
  5. रजत भस्म Rajat Bhasma 1 Part
  6. कपूर Bhimseni Kapoor (Cinnamomum camphora (Sub। Ext।) 1 Part
  7. जावित्री Javitri (Myristica fragrance (Ar।) 1 Part
  8. जायफल Jaiphal (Myristica fragrance (Sd।) 1 Part
  9. लौंग Lavang (Syzygium aromaticum (Fl।Bd।) 1 Part
  10. दालचीनी Dalchini (bark Cinamonum zeylanicum) 1 Part
  11. इलाइची Ela (seeds of Elletaria cardamomum) 1 Part
  12. तेजपत्ता Tejpatta (leaves of Cinnamomum tamal) 1 Part
  13. नागकेशर Nagkesar (flowers of Mesua ferrea) 1 Part

आयुर्वेद में स्वर्ण भस्म का विशेष स्थान है। यह शारीरिक और मानसिक शक्ति में सुधार करने वाली औषध है। यह हृदय और मस्तिष्क को विशेष रूप से बल देने वाली है। आयुर्वेद में हृदय रोगों और मस्तिष्क की निर्बलता में स्वर्ण भस्म को सर्वोत्तम माना गया है।

स्वर्ण भस्म आयुष्य है और बुढ़ापे को दूर करती है। यह भय, शोक, चिंता, मानसिक क्षोभ के कारण हुई वातिक दुर्बलता को दूर करती है। स्वर्ण भस्म को बल (शारीरिक, मानसिक, यौन) बढ़ाने के लिए एक टॉनिक की तरह दिया जाता रहा है। यह रसायन, बल्य, ओजवर्धक, और जीर्ण व्याधि को दूर करने में उपयोगी है। स्वर्ण भस्म का सेवन पुराने रोगों को दूर करता है। यह जीर्ण ज्वर, खांसी, दमा, मूत्र विकार, अनिद्रा, कमजोर पाचन, मांसपेशियों की कमजोरी, तपेदिक, प्रमेह, रक्ताल्पता, सूजन, अपस्मार, त्वचा रोग, सामान्य दुर्बलता, अस्थमा समेत अनेक रोगों में उपयोगी है।

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रजत भस्म आयुर्वेद की रसायन औषधि है। यह विभिन्न रोगों को नष्ट करने वाली दवाई है। यह मुख्य रूप से वात शामक है। इसका मुख्य कार्य गुर्दों, तंत्रिकाओं nerves और मस्तिष्क पर होता है। बीसों प्रकार के प्रमेह, वात रोगों, पित्त प्रकोप, नेत्र रोग, प्लीहा वृद्धि, यकृत वृद्धि, धातु कमजोरी, मूत्र के रोगों में इसका प्रयोग उत्तम परिणाम देता है।

यह उत्तम वृष्य और रसायन है। रजत भस्म को स्मृति हानि, चक्कर आना dizziness, बहुत अधिक प्यास लगना, प्रमेह आदि में प्रयोग करते हैं।

वंग भस्म टिन अर्थात स्टेनम Stannum-Tin से बनती है। वंग भस्म का मुख्य प्रभाव मूत्र अंगों और जननांगों पर होता है। इसे पुरुषों और स्त्रियों के प्रजनन अंगों सम्बंधित रोगों में प्रयोग किया जाता है। यह पुरुष की इन्द्रिय को ताकत देती है, शुक्र धारण में सहयोग करती है, वीर्य को गाढ़ा करती है तथा नामर्दी, शीघ्रपतन, पेशाब के साथ शुक्र जाना, स्वप्न में स्खलन, हस्तमैथुन आदि में रोगों को नष्ट करती है। इसे आयुर्वेद में शुक्रक्षय, स्वप्नमेह, शुक्र स्खलन, नपुंसकता की सर्वोत्तम औषधि माना गया है।

जायफल को बाजिकारक aphrodisiac दवाओं और तेल को तिलाओं में डाला जाता है। यह पुरुषों की इनफर्टिलिटी, नपुंसकता, शीघ्रपतन premature ejaculationकी दवाओं में भी डाला जाता है। यह इरेक्शन को बढ़ाता है लेकिन स्खलन को रोकता है। यह शुक्र धातु को बढ़ाता है। यह बार-बार मूत्र आने की शिकायत को दूर करता है तथा वात-कफ को कम करता है।

आयुर्वेदिक गुण

  1. शुक्रवर्धक, बलवर्धक, वीर्यवर्धक
  2. बाजीकरण: द्रव्य जो रति शक्ति में वृद्धि करे।
  3. शुक्रल: द्रव्य जो शुक्र की वृद्धि करे।

कामचूड़ामणि रस के लाभ/फ़ायदे Benefits of Kamchudamani Ras

  1. यह शरीर को शीतलता देती है।
  2. यह दवा शक्तिवर्धक, ओज वर्धक और वाजीकारक है।
  3. यह पुरुषों के लिए सेक्सुअल टॉनिक है।
  4. यह उत्तम वाज़िकारक है।
  5. यह पौष्टिक है।
  6. इसके सेवन से शरीर बलवान होता है।
  7. यह शरीर में गर्मी / पित्त को कम करती है।
  8. यह मानसिक तनाव, थकावट, आदि को दूर कर शरीर को ताकत देती है और सेक्स प्रदर्शन में सुधार लाती है।
  9. यह शीघ्रपतन, स्तंभन दोष, अनैच्छिक शुक्रपात, स्वप्नदोष में लाभप्रद है।
  10. महिलायों द्वारा इसके सेवन से शरीर की दुर्बलता दूर होती है और गर्भाशय को ताकत मिलती है।

कामचूड़ामणि रस के चिकित्सीय उपयोग Uses of Kamchudamani Ras

  1. यौन दुर्बलता
  2. यौन विकार
  3. कामेच्छा की कमी

शीघ्रपतन वह मेडिकल कंडीशन है जिसमें सेक्स के दौरान वीर्य का स्खलन अचानक और बहुत जल्दी हो जाए और पुरुष रोकना चाहकर भी वीर्यपात रोक न सके। तो समय से पहले वीर्य का स्खलित हो जाना शीघ्रपतन है।

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Kamchudamani Ras

  1. कामचूड़ामणि को लेने की मात्रा 125 mg से 250 mg अथवा 1-2 गोली है।
  2. इसे मिश्री मिले दूध के साथ अथवा अश्वगंधा चूर्ण के साथ (PE) अथवा चंद्रप्रभा वटी (वीर्य समस्या) अथवा अन्य उचित अनुपान के साथ, सुबह और शाम लें।
  3. इसे भोजन करने के बाद लें।
  4. या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications

  1. इस दवा को डॉक्टर की देख-रेख में ही लें।
  2. इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  3. इसे ज्यादा मात्रा में न ले यह हमेशा ध्यान रखें की जिन दवाओं में धातुओ की भस्में / खनिज आदि होते हैं, उन दवाओं का सेवन लम्बे समय तक नहीं किया जाता। इसके अतिरिक्त इन्हें डॉक्टर के देख-रेख में बताई गई मात्रा और उपचार की अवधि तक ही लेना चाहिए।

उपलब्धता

  1. इस दवा को ऑनलाइन या आयुर्वेदिक स्टोर से ख़रीदा जा सकता है।
  2. व्यास Vyas Kamchudamani Ras RTS
  3. उंझा Unjha Kamchudamani Ras With Gold and Pearl
  4. जमना Jamna Kamchudamani Ras
  5. श्री धन्वन्तरी हेर्बल्स Shree Dhanwantri Herbals Kamchuramani Rasa 10 tablets @ INR 270.00
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