जहर मोहरा पिष्टी व भस्म Jaharmohra Pishti – Bhasma Uses, Benefits, Side Effects, Dosage, Warnings in Hindi

जहरमोहरा Jawahar Mohra Pishti |Jahar Mohara | Zahar Mohra Bhas ma in Hindi पिष्टी और भस्म यूनानी चिकित्सा की औषधि है जिसे आयुर्वेदिक दवाओं में भी प्रयोग किया जाता है। यह पिष्टी और भस्म, जहरमोहरा Serpentine stone नामक पत्थर से बनाई जाती है। यह पत्थर सफ़ेद और कुछ हरा-पीलापन लिए हुए होता है। जो पत्थर चिकना और हल्का होता है, अच्छा माना जाता है। आयुर्वेद से अधिक इसका प्रयोग यूनानी हकीम अधिक करते हैं।

जहरमोहरा के पत्थर को दवा की तरह इस्तेमाल करने से पहले शुद्ध किया जाता है। शुद्ध करने के लिए, पत्थर को आग में तपा कर इक्कीस बार गौ दुग्ध या आंवले के रस में ठंडा किया जाता है।

जहर मोहरा भस्म और पिष्टी के बनाने का तरीका और दोनों में अंतर

शुद्ध ज़हरमोहरा की भस्म बनाने के लिए जहरमोहरा का बारीक पाउडर, गाय के दूध में छः घंटे खरल कर टिकिया बना कर, सुखाया जाता है जिसे गजपुट में पका कर भस्म तैयार की जाती है।

जहरमोहरा की पिष्टी बनाते समय आग का प्रयोग नहीं किया जाता है। पिष्टी बनाने के लिए जहरमोहरा के टुकड़ों को पानी से साफ़ करके सुखा लिया जाता है। इसका कपड़छन चूर्ण बनाया जाता है। इस बारीक पाउडर को खरल में गुलाब या चन्दनादि अर्क में घुटाई करके सुखा लेते हैं और इस तरह जहर मोहरा की पिष्टी या पाउडर बनता है।

भस्म और पिष्टी के बनाने के तरीके के कारण गुणों में भी कुछ अंतर होता है और वैद्य अधिकतर पिष्टी का प्रयोग करते हैं। पिष्टी अग्निपुटी नहीं होने के कारण अधिक सौम्य होती है और अधिक मातदिल मानी जाती है।

इस पेज पर जो जानकारी दी गई है उसका उद्देश्य इस दवा के बारे में बताना है। कृपया इसका प्रयोग स्वयं उपचार करने के लिए न करें। हमारा उद्देश्य दवा के बारे में आपको जानकारी देना है।

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यह पेज जहर मोहरा पिष्टी के बारे में हिंदी में जानकारी देता है जैसे कि दवा का कम्पोज़िशन, उपयोग, लाभ/बेनेफिट्स/फायदे, कीमत, खुराक/ डोज/लेने का तरीका, दुष्प्रभाव/नुकसान/खतरे/साइड इफेक्ट्स/ और अन्य महत्वपूर्ण ज़रूरी जानकारी।

Jahar Mohra Pishti is mineral based Unani or Ayurvedic medicine. It is indicated in treatment of Heart, Liver and Brain problems, Acidity, and infectious diseases. It is found to be effective in management of epidemics like plague, cholera etc.  Chemical formula for Jahar Mohra is Hydrous Magnesium Silicate i.e. Mg3-xSi2O5(OH)4-2x, a basic formula for Serpentine group of minerals.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

  • दवा का नाम: जहरमोहरा खताई भस्म, ज़हरमोहरा खताई पिष्टी, जहर मोहरा पिष्टी, नागपाशान भस्म, नाग पाषण , Jahar Mohra Khatai, Jahar Mohra Pishti, Jahar Mohra Bhasma, Jahar Mohra, Zahar Mohra Bhasma, Zahar Mohra, Zehar Mohra, Nagapashana Bhasma, Naga Pashana, Nagashma
  • सन्दर्भ: सिद्ध योग संग्रह Siddha Yoga Sangraha by Vaidya Yadav Ji Trikam Ji Acharya in 20th century
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: भस्म और पिष्टी, मिनरल युक्त दवा
  • मुख्य उपयोग: विष के कारण उपद्रव, पेट के विकार, जलन, हैजा, दस्त, सूखा रोग आदि
  • मुख्य गुण: विष नाशक, दिल और दिमाग को ताकत देना
  • दोष इफ़ेक्ट: वात-पित्त और काफ को संतुलित करना
  • गर्भावस्था में प्रयोग: बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं प्रयोग करें

चिकित्सीय संकेत

  • अजीर्ण, कै, उल्टी
  • अतिसार
  • यकृत विकार
  • घबराहट
  • जीर्ण ज्वर
  • बालकों के हरे-पीले दस्त एवं सूखा रोग

जहर मोहरा पिष्टी के घटक Ingredients of Jahar Mohra Pishti

शुद्ध ज़हर मोहरा (Purified Serpentine)

जहर मोहरा पिष्टी के लाभ/फ़ायदे Benefits of Jahar Mohra Pishti

  • इसके सेवन से शरीर में जलन दूर होती है।
  • यह जहर या विष को शरीर से दूर करने के लिए प्रयोग की जाती है और इसलिए ही ज़हर मोहरा कहलाती है।
  • यह ताकत को बढ़ाती है।
  • यह दिल की घबराहट में आराम देती है।
  • यह पुराने बुखार में लाभप्रद है।
  • यह बच्चों के लिए अमृततुल्य मानी गई है।
  • यह बच्चों के शोष/सूखा रोग में अत्यंत लाभकारी है।
  • यह बदहज़मी, उलटी-कै-वमन, में लाभप्रद है।
  • यह मुख्य रूप से हृदय, मस्तिष्क और आँतों को बल देने वाली दवा है।
  • यह विसूचिका/हैजा, दस्त, हरे पीले स्टूल आना, आदि में फायदेमंद है।
  • यह वीर्य में वृद्धि करती  है।

प्रधान कर्म

  • कफहर: द्रव्य जो कफ को कम करे।
  • ग्राही: द्रव्य जो दीपन और पाचन हो तथा शरीर के जल को सुखा दे।
  • ज्वरहर: द्रव्य ज्वर को दूर करे।
  • त्रिदोषजित: वात-पित्त और कफ को संतुलित करने वाला।
  • दीपन: द्रव्य जो जठराग्नि तो बढ़ाये लेकिन आम को न पचाए।
  • पित्तहर: द्रव्य जो पित्तदोष पित्तदोषनिवारक हो। antibilious
  • विषहर : द्रव्य जो विष के प्रभाव को दूर करे।
  • व्रण रोपण: घाव ठीक करने के गुण।
  • शिथिलतानाशक: शिथिलता को संकुचित करने वाला।
  • शोथहर: द्रव्य जो शोथ / शरीर में सूजन, को दूर करे। antihydropic

जहर मोहरा पिष्टी के चिकित्सीय उपयोग Uses of Jahar Mohra Pishti

जहर मोहरा पिष्टी को गर्मियों में होने वाले कई रोगों में इस्तेमाल किया जाता है। यह कई रोगों में लाभप्रद है।

पित्तरोगों में लाभकारी

  • जहर मोहरा पिष्टी के सेवन से शरीर में पित्त दोष संतुलित होता है। यह मातदिल है। यह न तो बहुत गर्म है और न ही बहुत ठंडी है। चाहे प्रकृति वात या पित्त या कफ की हो, इसे कोई भी ले सकता है।
  • पित्त के कारण नाक से खून गिरना, उलटी होना और बदहज़मी आदि में इसे लेते हैं।

जहर दूर करने में उपयोगी

यह शरीर से विष को दूर करने वाली औषधि है। किसी ज़हरीले जीव जैसे सांप-बिच्छु के काटने से अथवा अफीम जैसे पदार्थ के कारण शरीर में यदि विष गया हो तो इसका प्रयोग किया जा सकता है। पानी में घिस कर इसे पिलाने से उलटी होकर जहर शरीर से दूर होता है।

यदि ज़हर के कारण शरीर में रोग उत्पन्न हो गए हैं तो इसे 2-3 महीने लगातार दूध में मिलाकर लेना चाहिए।

संक्रामक रोगों में प्रयोग

  • गर्मी के दिनों में उलटी, दस्त, हैजा, मलेरिया, आदि संक्रामक रोग फैलते हैं। ऐसे में इसकी पिष्टी को गुलाब जल के साथ लिया जाता है।
  • हैजा में इसे मयूरपंख की भस्म 2 रत्ती की साथ समान मात्रा में पुदीने के साथ लेते हैं। इससे उलटी, दस्त, ज्यादा प्यास लगना और दूसरे उपद्रव शांत होते हैं।
  • चेचक होने पर जहर मोहरा पिष्टी को आधी रत्ती की मात्रा में मोती पिष्टी चौथाई रत्ती, संगेयशव आधी रत्ती, कहरवा पिष्टी आधी रत्ती, के साथ गुलाब अर्क या केवड़ा अर्क के साथ लेना चाहिए।

 गंदे पानी के कारण होने वाले रोगों में लाभ

गंदे पानी से होने वाले रोगों में इसका प्रयोग किया जाना चाहिए। इससे अतिसार, संग्रहणी, सूजन, कमजोरी, आदि दूर होते हैं।

बच्चों के सूखा रोग में अत्यंत लाभकारी

सूखा रोग में इसे एक रत्ती की मात्रा में वंशलोचन (1 रत्ती), छोटी इलाइची का पाउडर आधी रत्ती, प्रवाल पिष्टी एक रत्ती में मिलाकर शहद के साथ देते हैं। इससे सूखा रोग दूर हो जाता है।

हृदय रोग में प्रयोग

इसे दिल की घबराहट, उच्च रक्त चाप, रक्त चाप से आँखों में लाली, सर में दर्द आदि लक्षणों में इसे गुल कंद के साथ देते हैं।

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Jahar Mohra Pishti

  • इसे लेने की मात्रा 1-2 रत्ती / 125mg-250mg दिन में दो बार से चार बार है।
  • इसे शहद, मौसंबी के जूस, अनार के जूस, दाड़िमावलेह, गाय के दूध, चन्दन के अर्क, गुलाब जल अथवा अन्य रोग निर्धारित अनुपान के साथ लेना चाहिए।
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  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

जहर मोहरा पिष्टी के इस्तेमाल में सावधनियाँ Cautions

  • गर्मी के कारण होने वाले फोड़े-फुंसी, विस्फोट, आदि में इसे गुलाब जल, अर्क चन्दन अथवा नीम की छाल के काढ़े के साथ लेना चाहिए।
  • उम्र और ताकत पर विचार करते हुए और किसी वैद्य की विशेषज्ञ सलाह के साथ, दवा का उचित अनुपात में उचित अनुपान के साथ इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
  • इस दवा को डॉक्टर की देख-रेख में ही लें।
  • इसे ज्यादा मात्रा में न लें।

जहर मोहरा पिष्टी के साइड-इफेक्ट्स Side effects

निर्धारित खुराक में लेने से दवा का कोई दुष्प्रभाव नहीं है।

जहर मोहरा पिष्टी को कब प्रयोग न करें Contraindications

  • इसे गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान बना डॉक्टर की सलाह के नहीं लें।
  • यदि दवा से किसी भी तरह का एलर्जिक रिएक्शन हों तो इसका इस्तेमाल नहीं करें।
  • समस्या अधिक है, तो डॉक्टर की राय प्राप्तकर सही उपचार कराएं जिससे रोग बिगड़े नहीं।

भंडारण निर्देश

  • सूखी जगह में स्टोर करें।
  • इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
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