गोमूत्र घन वटी के फायदे, नुकसान और प्राइस

गोमूत्र घन वटी को देसी गाय के मूत्र से तैयार किया जाता है। गोमूत्र का आयुर्वेद में विशेष स्थान है। गोमूत्र शरीर को शुद्ध करता है और चमड़ी के रोगों, सामान्य दुर्बलता, मोटापा, पेट रोग, त्वचा रोग, मधुमेह, खांसी, जिगर, अस्थमा, आंत्र परजीवी, गठिया का रोग, जोड़ों के दर्द, समेत असंख्य बिमारियों  में उपयोगी है। भारत में गाय के मूत्र का उपयोग वैदिक समय से होता आया है। गाय का मूत्र,पञ्चगव्य में आता है।

गाय के मूत्र का बाहरी रूप से लोशन, मलम और स्नान के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। आंतरिक रूप से गो मूत्र का उपयोग दवाओं को बनाने और रोगों के इलाज़ के लिए किया जाता है। गाय के मूत्र के उपचारात्मक गुणों का प्राचीन चिकित्सा ग्रंथ विस्तार से बताते हैं। प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणाली में  गाय के मूत्र को एक व्यापक स्पेक्ट्रम दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

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गोमूत्र रक्तचाप को ठीक करने में सक्षम है, धमनी में अवरोध हटाता है, गठिया, मधुमेह, दिल का दौरा, कैंसर, थायराइड, अस्थमा, छालरोग, एक्जिमा, प्रोस्टेट, फिट बैठता है, एड्स, ढेर, माइग्रेन, अल्सर, अम्लता, कब्ज, स्त्री रोग संबंधी समस्याएं, श्वसन की कार्यक्षमता कम होना, हेपेटो-गैस्ट्रो-आंत तंत्र का ठीक से काम नहीं करना, कान और नाक की समस्याएं और कई अन्य बीमारियां में इसके सेवन से बहुत लाभ होता है। इसे बीसवीं शताब्दी का एंटीबायोटिक माना जा सकता है जिसका कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है। गाय का मूत्र चिकित्सीय एजेंटों के रूप में रोगों की बीमारियों के खिलाफ प्रयोग किया जाता है।

गोमूत्र घन वटी, गो मूत्र का कंसंट्रेट है। जिन रोगों मर आपको गो मूत्र लेने की सलाह हो उसमें आप इसे ले सकते हैं।

  • दवा का नाम: गोमूत्र घन वटी Gomutra Ghanvati
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: हर्बल आयुर्वेदिक दवा
  • मुख्य उपयोग: क्रोनिक बीमारियाँ
  • मुख्य गुण: एंटीऑक्सीडेंट, खून साफ़ करना
  • गर्भावस्था में प्रयोग: बिना डॉक्टर की सलाह नहीं करें
  • डायबिटीज में प्रयोग: कर सकते हैं
  • उच्च रक्तचाप में प्रयोग: कर सकते हैं
  • गोमूत्र घन वटी का वात-पित्त या कफ प्रभाव: त्रिदोष संतुलित करना।

गोमूत्र घन वटी के घटक Ingredients of Gomutra Ghanvati

गोमूत्र का अर्क बनाते समय अर्कयंत्र में गाढ़ा गोमूत्र बचता है जो गोमूत्र क्षार कहलाता है।  इस गोमूत्र क्षार को लोहे की बर्तन में पकाते हैं। पकाने से एक्स्ट्रा पानी उड़ जाता है और यह अधिक गाढ़ा हो जाता है। इसे गो मूत्र का घन कहते हैं और इसी से गो मूत्र घन वटी बनाते हैं।

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गोमूत्र घन वटी के औषधीय उपयोग, फायदे Benefits of Gomutra Ghanvati

गोमूत्र घन वटी है एंटीऑक्सिडेंट

यह एंटीऑक्सिडेंट और एंटी- हाईपरग्लीसीमिक है। एंटीऑक्सीडेंट होने से ये कोशिकाओं की रक्षा करती है।

डायबिटीज में है उपयोगी

यह वटी, एंटी- हाईपरग्लीसीमिक एजेंट के रूप में रक्त में अतिरिक्त चीनी का संचय नहीं होने देती।

पेशाब रोगों में लाभप्रद

यह मूत्र विकार, पित्त, पथरी, आदि में लाभप्रद है।

दूर करे विषाक्त पदार्थ

यह शरीर से विषाक्त पदार्थों/ detoxifies body को दूर करती है और दिल, यकृत, मस्तिष्क, प्रतिरक्षा प्रणाली, श्वसन प्रणाली, और पाचन तंत्र के को बेहतर करती है।

गोमूत्र घन वटी के लाभ health benefits

  • गोमूत्र घन वटी रक्त में कोलेस्ट्रॉल को कम करने  में उपयोगी है।
  • गोमूत्र घन वटी सीरम ट्राइग्लिसराइड्स कम करती  है।
  • गोमूत्र घन वटी को वजन कम करने के लिए मोटापे में प्रयोग किया जाता है।
  • गोमूत्र घन वटी खाँसी के उपचार में उपयोगी है।
  • गोमूत्र घन वटी Leucorrhoea (श्वेत प्रदर, सफ़ेद पानी) में लाभप्रद है।
  • गोमूत्र घन वटी रक्त में ग्लूकोज को कम करता और मधुमेह diabetes में उपयोगी है।
  • गोमूत्र घन वटी का सेवन तीन दोषों, वात, पित्त और कफ का संतुलन करता है ।

गोमूत्र घन वटी के चिकित्सीय उपयोग Uses of Gomutra Ghanvati

गोमूत्र घन वटी को आप उन सभी रोगों में ले सकते हैं, जिनमें आपको गो मूत्र, गो आसव या गो अर्क लेने की सलाह दी गई है।

गोमूत्र घन वटी को आप उन सभी रोगों में ले सकते हैं, जिनमें आपको गो मूत्र, गो आसव या गो अर्क लेने की सलाह दी गई है। गोमूत्र घन वटी को माइग्रेन या सिरदर्द, कब्ज, थायराइड और एक्जिमा, रिंगवार्म, और खुजली, मुँहासे, कैंसर,  रक्त विकार,मनोवैज्ञानिक विकार, यूरोलॉजिकल विकार, त्वचा रोग हृदय रोग, मस्कुलोस्केलेटल विकार, पुरुष यौन विकार, एड्स, मधुमेह मेलिटस, श्वसन संबंधी विकार,गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिसऑर्डर, एंडोक्राइन डिसऑर्डर, गायनकोलॉजिकल विकार, अस्थमा, गुर्दा रोग, हेपेटिक विकार आदि में लिया जा सकता है।

  • अगर 20 मिलीलीटर गो मूत्र लेना है तो इसकी दो गोली ले लें। यदि 10 ml गो अर्क लेना है तो इसकी एक गोली ले लें।
  • चिकित्सीय रूप से आप गोमूत्र घन वटी को निम्नलिखित स्वास्थ्य स्थितियों में प्रयोग कर सकते हैं:
  • अपेंडिक्स appendix
  • उच्च रक्तचाप high blood pressure
  • उदररोग abdominal diseases
  • पाईल्स piles
  • पाचक सहायक digestive aid
  • मधुमेह (डायबिटीस) diabetes
  • मानसिक बीमारी mental illnesses
  • यकृत क्लीनर liver cleanser
  • रक्त शोधक blood purifier
  • श्वास respiratory illness
  • सभी तरह के रोग all kind of diseases
  • हृदय रोग heart diseases

गोमूत्र घन वटी की औषधीय मात्रा Dosage of Gomutra Ghanvati

वयस्क इसको निम्न मात्रा में ले सकते हैं:

  • एक से दो गोली, दिन में दो बार।

गोमूत्र घन वटी को कब लें (सेवन विधि)?

इसे भोजन करने से पहले लें।

गोमूत्र घन वटी को कैसे लें?

  • इसे गर्म पानी के साथ लें।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

गोमूत्र घन वटी कितने दिनों तक लें?

दवा को कई महीने ले सकते हैं।

गोमूत्र घन वटी के इस्तेमाल में सावधनियाँ Cautions

इसे लेना सेफ है।

गोमूत्र घन वटी के साइड-इफेक्ट्स Side effects

कोई साइड इफेक्ट ज्ञात नहीं है।

गोमूत्र घन वटी को कब प्रयोग न करें Contraindications

कोई मत्भीद ज्ञात नहीं है।

गोमूत्र घन वटी का ड्रग इंटरेक्शन Drug Interaction

इस बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए डॉक्टर की राय प्राप्त करें।

भंडारण निर्देश

  • सूखी जगह में स्टोर करें।
  • इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।

Gomutra Ghanvati(Classical medicine)  is prepared from Cow’s Urine. It is indicated in treatment of innumerble diseases. Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

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