कुटकी Picrorhiza kurroa के बारे में जानकारी, उपयोग, फायदे और नुकसान

कटुका अथवा कुटकी (पिकोरहाइज़ा कुर्रा रॉयल अन बेंथ) एक बारहमासी जड़ी बूटी है जो समशीतोष्ण जलवायु परिस्थितियों वाले अल्पाइन क्षेत्रों में पायी जाती है।

आयुर्वेद में इस औषधीय पौधे का नाम कुटका इसके अत्यंत कड़वे स्वाद के कारण है। लैटिन भाषा में इसे Picrorhiza kurroa  कहते है। Picorrhiza शब्द ग्रीक भाषा से लिया गया है। ग्रीक में, पिक्क्रो शब्द का अर्थ कड़वा होता है और रज्जा का मतलब जड़ है, इसलिए इस पौधे का नाम है कड़वी जड़।

पौधों के कंद को कड़वे टॉनिक की तरह यकृत विकार में प्राचीन समय से उपयोग किया जाता है। आयुर्वेदिक ग्रन्थों जैसे चरक संहिता और सुश्रुत संहिता और अन्य पुस्तकों में इसके उपचार में उपयोग के बारे में उल्लेख किया गया है। इसका प्रयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा में मूल रूप सेपीलिया और जिगर विकारों में होता है। कटूकी को वैज्ञानिक अध्ययनॉन के द्वारा पीलिया और संबंधित रोगों के उपचारों के लाभप्रद माना गया है। यह लीवर की रक्षा करता है और बिलीरुबिन उत्सर्जन में सुधार करता है।

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कुटकी, स्वाद में बहत कड़वी है और इसे डायबिटीज, ज्वर, त्वचा विकार, लीवर रोग में अन्य द्रव्यों के साथ मिलाकर दवाओं को बनाने में प्रयोग किया जाता है।

कुटकी की सामान्य जानकारी

पिकारहाइज़ा कुर्रा रॉयल एक्स बेंथ की कंद और जड़ों को दवा की तरह इस्तेमाल करते हैं। यह पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाता है। यह पौधा 3000 से 5000 मीटर के बीच हिमालय में फैलता है। यह उत्तरी-पश्चिमी हिमालय, कश्मीर से सिक्किम के हिमालय में देखा जाता है। यह चट्टानी दरारों, और पहाड़ों पर और उसमें विभिन्न कार्बनिक तत्वों से समृद्ध मिट्टी में बढ़ता है। कटूकी हिमालय क्षेत्र में गढ़वाल से

कटुकी Scrophulariaceae परिवार के अंतर्गत आता है। यह बारहमासी जड़ी है। इसका पौधा एक लंबे झाड़ी है। यह 2.5 से 12 सेंटीमीटर लंबा है और 0.3 से 1 सेमी मोटे होता है। इसके फूल नीले रंग के साथ सफेद होते हैं। फूल आने की अवधि जून से अगस्त तक है।

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  • वानस्पतिक नाम: Picrorhiza kurroa Royle ex Benth।
  • कुल (Family): Scrophulariaceae
  • औषधीय उद्देश्य के लिए इस्तेमाल भाग: कन्द Rhizome with roots
  • पौधे का प्रकार: हर्ब
  • वितरण: अल्पाइन क्षेत्र, चीन, नेपाल, पाकिस्तान, भारत, भूटान और हिमालय के क्षेत्रों में
  • पर्यावास: ठंडी जगह

कुटकी के स्थानीय नाम / Synonyms

  • संस्कृत: तिक्त, तिक्त रोहिणी, कटुरोहिणी, कवी, सुतिक्तक, कटुका, रोहिणी
  • हिन्दी: कुटकी
  • अंग्रेजी: Katuka, Picrorhiza, Hellebore
  • असमिया: Katki, Kutki
  • गुजराती: Kadu, Katu
  • कन्नड़: Katuka rohini, katuka rohini
  • मलयालम: Kaduk rohini, Katuka rohini
  • मराठी: Kutki, Kalikutki
  • उड़िया: Katuki
  • पंजाबी: Karru, kaur
  • तमिल: Katuka rohini, Katuku rohini, Kadugurohini
  • तेलुगु: Karukarohini
  • उर्दू: Kutki

कुटकी का वैज्ञानिक वर्गीकरण Scientific Classification

  • किंगडम Kingdom: प्लांटी Plantae – Plants
  • सबकिंगडम Subkingdom: ट्रेकियोबाईओन्टा Tracheobionta संवहनी पौधे
  • सुपरडिवीज़न Superdivision: स्परमेटोफाईटा Spermatophyta बीज वाले पौधे
  • डिवीज़न Division: मैग्नोलिओफाईटा Magnoliophyta – Flowering plants फूल वाले पौधे
  • क्लास Class: मैग्नोलिओप्सीडा Magnoliopsida – द्विबीजपत्री
  • सबक्लास Subclass: एस्टेरिडए Asteridae
  • आर्डर Order: Scrophulariales
  • परिवार Family: Scrophulariaceae – Figwort family
  • जीनस Genus: Picrorhiza
  • प्रजाति Species: kurroa

कुटकी के संघटक Phytochemicals

कुटकी में कई महत्वपूर्ण फाइटोकेमिकल्स होते हैं। इरिडोइड ग्लाइकोसाइड्स Glucosides: picrorhizin and kutkins (mixture of kutkoside and picroside)।

कुटकी के लाभ/फायदे

लीवर की दवा

  • कुटकी लीवर की रक्षा करने वाली औषधि है। इसे लीवर रोगों जैसे जौंडिस, लीवर सिरोसिस, स्प्लीन / तिल्ली के डिसफंक्शन, वायरल रोगों और सूजन में प्रयोग किया जाता है। जलोदर की समस्या में इसका काढ़ा पीने से लाभ होता है।
  • पीलिया में कुटकी के पाउडर को लिया जाता है। कड़वेपन को कम करने के लिए इसे गुड़ के साथ लिया जा सकता है।

पाचन तन्त्र की समस्या में फायदेमंद

कुटकी पेट सम्बन्धी रोगों में लाभप्रद है। इसे निम्न समस्याओं में प्रयोग कर सकते हैं:

  • भूख कम लगना
  • गैस की समस्या
  • कब्ज़
  • पाइल्स

कुटकी में विरचन के गुण होने से इसे पेट साफ़ करने के लिए और कब्ज़ की समस्या इस्तेमाल किया जाता है। इससे गैस भी कम होती है और पाचन में सहयोग होता है। कब्ज़ में कुटकी के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर लिया जाता है। यह पाचन में सुधार, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के चयापचय में मदद करता है।

इसे चयापचय की प्रक्रिया में सुधार किया जाता है। इससे विभिन्न समस्याओं जैसे कि मोटापा, धीमा चयापचय और यूरिया, क्रिएटिनिन, मधुमेह, गर्मी और अतिगलग्रंथिता के उच्च स्तर की तरह नियंत्रित किया जा सकता है।

बुखार में उपयोगी

कुटकी में बुखार कम करने के गुण है। इसे बार बार होने वाले बुखार की चिकित्सा में लिया जाता है। इसमें एंटी वायरल, एंटी बैक्टीरियल, लीवर प्रोटेक्टिव, एंटी पाईरेटिक और सूजन कम करने के गुण है जो बुखार होने के मूल कारणों पर असर करते हैं जिससे बुखार दूर होता है।

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चमड़ी रोग दूर करना

चमड़ी के रोगों में कुटकी का सेवा करने से शरीर से टोक्सिंस दूर होते हैं और त्वचा के रोग ठीक होते हैं।

डायबिटीज में ब्लड शुगर कम करना

इस कड़वी जड़ी बूटी को शुगर की समस्या में भी लिया जाता है। इसमें रक्त शर्करा का स्तर, सीरम लिपिड पेरोक्साइड और रक्त यूरिया नाइट्रोजन को कम करने के लिए गुण हैं।

कुटकी के औषधीय उपयोग Medicinal Uses of Kutkiin Hindi

कटुका कूलिंग, विरेचक, कार्मिनेटिव, पाचन कराने वाला, लीवर रक्षक, एंटी-वायरल, ज्वरनाशक,immunomodulating, एंटीऑक्सीडेंट scavenging, ऐंठन दूर करने वाला और सूजन कम करने वाला है। बड़ी खुराक में लेने से यह एक रेचक की तरह कार्य करता है।

  • कटुका पीलिया, जिगर और प्लीहा रोगों में उपयोगी है।
  • इसे भूख नहीं लगना, पेट फूलना, कब्ज और बवासीर भी प्रयोग किया जाता है।
  • यह आंतरायिक बुखार की स्थिति और त्वचा रोग में लाभप्रद है।
  • यह कफ-पित्त का इलाज करने, मूत्र रोग (प्रहमा), कुष्ठ रोग में प्रयुक्त होता है।
  • इसे शीतलन एजेंट के रूप में, शरीर से अत्यधिक गर्मी को दूर करने में मदद करता है।

कुटकी की औषधीय मात्रा

वयस्कों के लिए कटुका पाउडर की खुराक एक से तीन ग्राम होती है और

  • बच्चों के लिए 500 मिलीग्राम से 1 ग्राम।
  • इसे पानी के साथ दो बार प्रतिदिन लेना चाहिए।
  • इसे भोजन के बाद लिया जाना चाहिए।
  • इसे खाली पेट उपभोग करना ठीक नहीं है। ऐसा करना मतली और उल्टी का कारण हो सकता है।
  • इसका स्वाद अत्यधिक कड़वा होता है।

कुटकी के इस्तेमाल में सावधनियाँ Cautions

  • उम्र और ताकत पर विचार करते हुए और किसी वैद्य की विशेषज्ञ सलाह के साथ, दवा का उचित अनुपात में उचित अनुपान के साथ इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
  • इस औषधि को केवल विशिष्ट समय अवधि के लिए निर्धारित खुराक में लें।
  • इसे ज्यादा मात्रा में न लें।
  • कटूका लेना बंद कर दें, यदि पीलिया की तीव्रता तीन से पांच दिनों के भीतर कमी नहीं होती है या लक्षण बिगड़ जाते हैं।
  • क्रोनिक और गंभीर रूप से पीलिया में रोगियों को यह दवा चिकित्सा पर्यवेक्षण के तहत उपभोग करना चाहिए।
  • पीलिया जिसमें शरीर में जलन जैसे शरीर की खुजली, रक्तस्राव,एनीमिया, एडिमा, वजन घटाना आदि हों उसमें से सही तरीके से लेना चाहिए और इसे केवल जांच और चिकित्सा पर्यवेक्षण के तहत इलाज किया जाना चाहिए।
  • इसे लेते समय गरम, मसालेदार, तीखे, खट्टा, फैटी और भारी भोजन नहीं लेना चाहिए।
  • इसे लेते समय नरम, अर्द्ध-ठोस या तरल लेने के लिए सलाह दी जाती है जब तक सामान्य पाचन शक्ति
  • बहाल नहीं हो जाती और रक्त बिलीरूबिन स्तर सामान्य नहीं हो जाता है।

कुटकी के साइड-इफेक्ट्स Side effects

  • आयुर्वेद में इसका कोई विशेष साइड या विषाक्त प्रभाव नहीं बताया गया है। कटुका की सिफारिश की गई खुराक में इसके लेक्सेटिव गुण के कारण दस्त में इसका सेवन नहीं करें।
  • नैदानिक अध्ययनों में से किसी ने भी कोई नेगेटिव प्रभाव नहीं दिखाया है।
  • कटुका में रेचक गुण है। बड़ी मात्रा में सावधानी इसे सावधानी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
  • दस्त होने पर, बच्चों में और गर्भवती महिलाओं में खुराक को घटाना चाहिए।
  • अगर दवा लेनें पर दस्त पेट दर्द के साथ हों तो, दवा के मात्रा कम करें।
  • इसका कड़वा स्वाद मतली और उल्टी को प्रेरित कर सकता है।
  • संवेदनशील व्यक्तियों को इसे शहद या मीठी सिरप के साथ मिश्रित रूप से लेना चाहिए।

कुटकी को कब प्रयोग न करें Contraindications

  • इसे गर्भावस्था के दौरान बिना सलाह के न लें।
  • यदि किसी भी तरह का एलर्जिक रिएक्शन हों तो इसका इस्तेमाल नहीं करें।
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