बबूल Babul Detail Information and Medicinal Uses in Hindi

बबूल (अकेशिया) एक औषधीय पेड़ है। बबूल को हिंदी में बबूर, कीकर, तथा संस्कृत में बब्बूल, किंकिरात, किंकिराट, सपीतक आदि नामों से जाना जाता है। लैटिन में इसका नाम अकेशिया अरेबिका या मिमोसा अरेबिका है। आयुर्वेद में बबूल को विविध चिकित्सीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग किया जाता है। इसे ग्राही (Anti-diarrhea, binds stool), कफ-हर (kapha=mucous; Kapha is the force behind the structure and stability of the body; the elements are water and earth; its qualities are heavy, cold, moist, static, smooth and soft ), त्वचा रोगों को दूर करने वाला, कृमिनाशक (anti-parasitic) और विषनाशक माना गया है। बबूल से बनी आयुर्वेदिक औषधि, बब्बुलारिष्ट अनेक रोगों में उपयोगी है। यह खांसी, अस्थमा आदि को ठीक करने की उत्तम दवा है।

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Babool Tree
By J.M.Garg – Own work, CC BY-SA 3.0

बबूल का गोंद शीतल, चिकना और पोषक होता है। यह खांसी, लिकोरिया, पेचिश, मूत्राघात, मूत्रकृच्छ आदि में उपयोगी है। गोंद में कैल्शियम, मैगनिशियम, पोटैशियम, मैलिक एसिड, चीनी और नमी पायी जाती है।

बबूल का वर्णन Tree description

लैटिन: अकेशिया अरेबिका या मिमोसा अरेबिका Acacia arabica

वानस्पतिक कुल: लेगुमिनोसे/माईमोसासे; शिम्बी-कुल Mimosaceae

Vernacular name

  • English: Babul, Black Babul, Indian Gum Arabic tree
  • Ayurvedic: Babbuula, Babbuuri, Bavari, abha, Shuulika, Shitaka, Kinkirata, Yugmakantaka, Sukshmapatra, Pitapushpaka
  • Unani: Aqaqia, Babuul, Kikar, Mughilan, Samur
  • Siddha/Tamil: Karu-velamaram, Karuvelei, Velampisin (gum)
  • Assamese: Babala
  • Bengali: Babla
  • Gujrati: Baval, Kaloabaval
  • Hindi: Babula, Babura, Kikar
  • Kannada: Sharmeeruka, Kari Jail, Kari gobli, Pulai Jali
  • Kashmiri: Sak
  • Malayalam: Velutha Karuvelan
  • Marathi: Babhul, Babhula
  • Oriya: Babula, Babala
  • Punjabi: Kikkar
  • Tamil: Karuvelan, Karuvel
  • Telugu: Nallatumma, Thumma

इसके वृक्ष सन्निकट जमीन तथा काली मिटटी में अधिक पाए जाते हैं। यह एक मध्यम आकार का वृक्ष होता है। इस कांटेदार वृक्ष के कांटे सफ़ेद से १-३ इंच तक लम्बे जोड़े होते हैं।

पत्ते: पेड़ के पत्ते आंवले के पत्ते की तरह देखने में होते हैं पर उससे छोटे होते हैं।

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छाल: बबूल के पेड़ की छाल खुरदरी होती है।

फूल: इसके फूल पीले, गोल, और हल्की गंध वाले होते हैं। फली: इसकी फली सफ़ेद और ७-८ इंच लम्बी होती है। इसमें ८-१० बीज होते है।

बीज: बीज धूसर, गोल और चपटे होते हैं।

गोंद: बबूल के पेड़ से गोंद भी प्राप्त होती है। बबूल का गोंद गर्मी के मौसम में एकत्रित किये जाते हैं। पेड़ पर जब चीरा लगता है तो उसमें से जो निर्यास निकालता है वही सूख कर पीला सा हो जाता है और बबूल का गोंद कहलाता है।

स्थान: पूरे भारतवर्ष में; राजस्थान, दक्कन में इसके जंगल भी पाए जाते हैं।

चिकित्सीय इस्तेमाल के लिए पेड़ के उपयोगी हिस्से: पत्तियां, छल, गोंद, और बीज।

चिकित्सीय मात्रा

  • गोंद: ५ ग्राम से १२ ग्राम।
  • छाल का चूर्ण: ३-६ ग्राम।
  • पत्तों का पेस्ट: २-४ ग्राम।
  • काढ़ा: ५-१० तोला।

Medicinal Properties

छाल bark: बबूल की छाल, एक उत्तम संकोचक astringent है। यह कृमिनाशक, विषनाशक, अतिसार, पाइल्स, धातुपतन, और पेट रोगों में लाभप्रद है। छाल में टैनिन काफी मात्रा में पाया जाता है।

Babbol chhal
By J.M.Garg – Own work, CC BY-SA 3.0,

छाल के आयुर्वेदिक गुण और कर्म

  • रस (taste on tongue): काषाय
  • गुण (Pharmacological Action): गुरु/भारी, रुक्ष, विशद (Non-Saline)
  • वीर्य (Potency): शीत
  • विपाक (transformed state after digestion): कटु
  • कर्म: ग्राही, कफ-हर, विषघ्न

पत्ते: इसके पत्ते मलरोधक होते हैं। यह चरपरे, रुचिकारक, खांसी, वात, कफ और पाइल्स को दूर करते हैं।

फली: बबूल की फली रूखी, मल रोकने वाली, भारी, कसैली, और कफ-पित्त को शांत करने वाली होती है।

बबूल का गोंद/ गम अरेबिक/ गोंद अरेबिक Babul Gond/ Gum

बबूल के पेड़ से निकला यह गोंद, खाने योग्य होता है तथा मिठाई बनाने के लिए भी प्रयोग होता है।

Babool Gond
By Tarig A. Eltom (Own work) [CC BY 3.0]
बबूल का गोंद गोल-गोल या लम्बा-गोल, तथा छोटे-बड़े दाने के रूप में होता है। बाजारों में मिलने वाला बबूल का गोंद, सफ़ेद से हल्के गुलाबी तथा कभी कालिमा लिए हुए होते हैं। गोंद के टुकड़ों में छोटी दरारें भी दिखती हैं। इसके सफ़ेद दाने अधिक उत्तम होते हैं। स्वाद में गोंद, मिठास लिये हुए, फीका, लुआबी तथा गंध रहित होता है। गोंद को यदि उससे दुगने पानी में घुलाया जाए तो यह पूरी तरह से घुल जाता है और चिपचिपा सा विलयन बन जाता है।

गोंद के गुण और प्रयोग Medicinal Properties and Uses of Babul Gum

  • बबूल से प्राप्त गोंद, पित्त और वातनाशक होता है। यह खूनी पेचिश, रक्त-पित्त bleeding disorders, प्रमेह और प्रदर को दूर करता है।
  • यह बहते हुए रक्तस्राव को रोकता है। यह टूटी हड्डियों को जोड़ता है।
  • बबूल के गोंद को घी में तलकर, पाक करके सेवन से वीर्य बढ़ता है।
  • स्त्रियों में प्रसूति के बाद इस गोंद का सेवन शरीर को ताकत देता है।
  • बबूल के गोंद का पानी पिलाने से पेचिश और दस्त दूर होते है। गोंद को दस ग्राम की मात्रा में लेकर, पचास ग्राम पानी में भिगोकर, मसलकर और फिर छान कर पीना चाहिए।
  • इसके गोंद के सेवन से पेट और आंतो में होने वाली पीड़ा दूर होती है।
  • भुना हुआ गोंद ५ ग्राम को गेरू ५ ग्राम के साथ पीस कर सुबह लेने से मासिक में अधिक रक्त जाना रुकता है।
  • बबूल का गोंद में डीमल्सेंट (soothing agent for inflammatory conditions of the respiratory, digestive and urinary tracts) गुण होते है।

बबूल के औषधिया प्रयोग Medicinal Uses of Babool in Hindi

बबूल स्वाद में कड़वा और स्वभाव में गर्म होता है। यह आंव, रक्त-अतिसार, कफ, खांसी, पित्त, जलन, वात और प्रमेह को दूर करता है। ६-७ साल के पेड़ की छाल दवाई के रूप में प्रयोग की जाती है। बबूल की छाल के काढ़े से घाव धोने से घाव जल्दी ठीक होता है। घाव के कारण होने वाली जलन में भी इससे लाभ होता है। बबूल सोमरोग और मधुमेह में खाया जा सकता है क्योकि या पच कर शर्करा नहीं बनता। बबूल का फल, खांसी में लाभप्रद है। बबूल की पत्ती का उपयोग आखों की सूजन के लिये किया जाता है। इसका गोंद एक उत्तम शक्तिवर्धक है।

प्रमेह, अतिसार/दस्त diarrhea, dysentery : अतिसार, प्रमेह होने पर बबूल के पत्ते का सेवन लाभकारी है। इसकी ८-१० पत्तियों के रस का सेवन दिन में २-३ बार पीना चाहिए।

खूनी पेचिश में १ चम्मच पत्ते के रस को शहद में मिलाकर लेना चाहिए।

सुजाक, पेशाब में जलन Sujak : पत्तों का पेस्ट, चीनी और काली मिर्च के साथ लेना चाहिए। बबूल की १०-२० कोपलों को पानी में भिगोकर रात भर रखें और सुबह निथार कर पानी को पी जाएँ।

सफ़ेद पानी/श्वेत प्रदर leucorrhoea : १० ग्राम छाल को ४०० ग्राम पानी में उबाल कर काढ़ा बनाकर पीने से सफ़ेद पानी की समस्या दूर होती है।

वीर्य-विकार, वीर्य का पतला होना sperm disorders : बबूल की फलियों को छाया में सुखा लें। इन्हें पीस कर पाउडर बना लें। इसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिला कर, एक चूर्ण बना लें। इसे रोज़, १ चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम लें। बबूल का गोंद घी में तल कर पाक बनाकर खाएं।

स्वप्न दोष night fall : बबूल की छाल, पत्ते, फल, फूल, फली को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। इसमें आधी मात्रा में मिश्री मिलाएं। इसे रोज़, १ चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम लें।

मुंह के छाले : छाल को पानी में दाल कर कुल्ला करना चाहिए।

फोड़े, फोड़ों का फट जाना : बबूल के पत्तों का लेप उपयोगी है।

व्रण, घाव : पत्तों से घाव धोना लाभकारी है। पत्तों का पाउडर घाव पर छिड़क कर लगाएं।

मुखपाक, मसूड़ों से खून जाना, गले में दर्द : छाल का काढा बनाकर कुल्ले करने से लाभ होता है।

आँख में दर्द, सूजन : पत्तों का रस कुछ बूंदों की मात्रा में आँख में डालने से दर्द और सूजन से राहत मिलती है।

दांतों की सफाई में लाभप्रद :

  • बबूल की पतली कोमल, नवीन शाखाओं से दातुन की जाती है। बबूल की छाल, पत्ते, फूल, फलियों के सूखे पाउडर को मिला कर जो चूर्ण बनता है उससे दांतों के पाउडर की तरह प्रयोग कर, दांतों की विभिन्न समस्याओं से बचा जा सकता है।
  • इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने से दांतों की उत्तम सफाई होती है तथा मसूड़ों से खून आना रूकता है।
  • बबूल की छाल को चबाने से ढीले दांत मजबूत होते है। यह मसूड़ों से खून आना भी रोकता है।

Warning/Caution/Side-effects

  • बबूल को अधिक मात्रा में नहीं लेना चाहिए।
  • अधिक मात्रा में गोंद का सेवन गुदा को हानि पहुंचता है।
  • अधिकता में सेवन अपच और कब्ज़ का कारण बनता है।
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6 thoughts on “बबूल Babul Detail Information and Medicinal Uses in Hindi

  1. sheng means wherein babool seeds are generated. i can give examples of sheng like gwar,mattar,french beans etc. sheng is a marathi word often used in vegetable market. i am resident of dombivli, maharashtra. thanks for quick response.

  2. I HEARD THAT POWDER OF BABOOL SHENG IS USED TO CURE VIRTIGO. IS IT TRUE? IF YES, THEN HOW TO USE IT. PLEASE LET ME KNOW. THANKS A LOT

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