दशमूल क्वाथ Dashmool Kwath Detail and Uses in Hindi

दशमूल क्वाथ, आयुर्वेद के सुप्रसिद्ध दशमूल से बने काढ़े को कहते है। दशमूल के सूखे, कुटे हुए मिश्रण को पानी में उबाल कर काढ़े को बनाया जाता है। दशमूल काढ़े के सेवन से शरीर में वात और कफ, दोनों ही के विकारों में लाभ होता है।

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दसमूल
dasmool herb

दशमूल का सेवन आयुर्वेद में शरीर में किसी भी कारण होने वाली सूजन को दूर करने के लिए किया जाता है। यह वात व्याधि की बहुत अच्छी दवाई है।

प्रसूति के बाद महिलायों के शरीर में कई बार बहुत तरह के रोग उत्पन्न हो जाते हैं जैसे की बुखार, चिडचिडापन, खून की कमी, शरीर में अधिक गर्मी, जलन, चक्कर आना, कमजोरी, भूख न लगना, शरीर में सूजन, दर्द, आदि। इन रोगों को दूर करने के लिए इस काढ़े का प्रयोग करना चाहिए।

लघुपंचमूल और बृहत् पंचमूल को मिलाकर दशमूल कहते है। यह त्रिदोषनाशक, कफ, खांसी, सिर के रोगों, अस्थमा, सूजन, बुखार, गैस, पसले के दर्द, और अरुचि को नष्ट करता है।

Dashamula is well known Ayurvedic formulation consisiting of ten roots, five small roots viz. Shalparni, Prishniparni, Kantakari, Brihati, Gokhru, And Five Large Roots viz. Bilva, Gambhari, Patala, Shyonak, and Agnimantha. It is extensively used to treat inflammatory conditions, post-delivery disorders and diseases that occur due to vitiation of Vata and Kapha.

Dasmula Kwath/Decoction is a tea like preparation that can be used by everyone. It has anti-inflammatory, analgesic, anti-platelet and diuretic properties.

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Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi

दशमूल क्वाथ के घटक Ingredients of Dashmool Kwath

  • शालिपर्णी का पंचाग Desmodium gangeticum
  • पृश्निपर्णी का पंचाग Uraria picta
  • बृहती/बड़ी कटेरी का पंचाग Solanum indicum
  • कंटकारी/छोटी कटेरी का पंचाग Solanum xanthocarpum
  • गोखरू का पंचाग Tribulus terrestris
  • बेल की छाल/जड़ Aegle marmelos
  • अग्निमंथ की छाल/जड़ Premna integrifolia
  • गंभारी की छाल/जड़ Gmelina arborea
  • श्योनाक की छाल/जड़ Oroxylum indicum
  • पाढल Stereospermum suaveolens

दशमूल क्वाथ के लाभ/फ़ायदे Benefits of Dashmool Kwath

  • यह शरीर में दर्द और सूजन को कम करने में मदद करता है।
  • दशमूल का काढ़ा २. ५ ग्राम सोंठ के साथ लेने से दस्त रुक जाते हैं।
  • पीठ दर्द, जोड़ों के दर्द, प्रसूत रोगों के लिए यह बहुत गुणकारी है।
  • दशमूल काढ़े का सेवन, माताओं में दूध साफ़ करता है।
  • यह काढ़ा खून से गन्दगी साफ़ करता है।
  • यह बुखार को कम करता है।
  • इसके सेवन से दिमाग शांत होता है।
  • यह वात के साथ कफ विकारों को भी दूर करता है।
  • इसमें आम-दोष को दूर करने की क्षमता है। आम दोष ही बहुत सारे रोगों का कारण हैं।
  • यह साइटिका, आर्थराइटिस, गठिया, सभी तरह के पीठ दर्द में लाभकारी है।
  • पार्किंसन में इसका सेवन ट्रेमर को कम करता है।
  • डिप्रेशन, स्ट्रेस,अस्थमा में भी इसका सेवन लाभकारी है।
  • यह वातहर और कफहर है।
  • यह त्रिदोषशामक है।
  • यह लघु, रूक्ष गुण, उष्ण वीर्य और कटु विपाक है।

दशमूल क्वाथ के चिकित्सीय उपयोग Uses of Dashmool Kwath

  • वात एवं कफ विकार
  • चक्कर आना, हाथ-पाँव ठंडे पड़ जाना
  • मुंह सूख जाना
  • कफ, खांसी Cough due to Kapha dosh
  • श्वास Dyspnoea/Asthma
  • सीने में दर्द, पसली में दर्द, पार्श्वशूल (Intercostal neuralgia and pleurodynia)
  • बुखार Fever
  • प्रसव के बाद होने वाले वाले दोषों को दूर करने के लिए
  • ज्यादा प्यास लगना
  • खून की कमी
  • वात रोगों की दवाई को लेने के लिए अनुपान

काढ़ा बनाने की विधि और मात्रा Preparation and Dosage of Dashmool Kwath

  • 10-12 ग्राम मिश्रण को ले कर करीब 200 ml पानी में उबाल लें।
  • जब 60-70 ml पानी रह जाए तो कपड़े से छान लें।
  • क्वाथ को रख लें और दिन भर में ज़रूरत के अनुसार कई बार दें।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

इस दवा को ऑनलाइन या आयुर्वेदिक स्टोर से ख़रीदा जा सकता है।

This medicine is manufactured by Patanjali Divya Pharmacy (Dashmool Kwath), Jiva (Dashmool Kwath) and many other Ayurvedic pharmacies.

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