फिटकरी Alum क्या है तथा इसके फायदे और नुकसान

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फिटकरी एक एक बहुत ही प्राचीन दवा है तथा यह एलम, एल्यूमिनियम युक्त डबल सल्फेट्स है. इसे इंग्लिश में एलम कहते है. साधारण फिटकरी का रासायनिक नाम पोटेशियम एल्युमिनियम सल्फेट KAl(SO4)2.12H2O होता है.

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इसे यूनानी और आयुर्वेदिक चिकित्सा दवा के रूप में उपयोगी माना गया है. यह एक खनिज है की एक दवा है, जो क्रिस्टल रूप में पाई जाती है. इसका कोई रंग या गंध नहीं है. इसे अरबी में ज़ज-ए-अब्याज Zaj-e-Abyaz और फारसी में शिब-ए-यामानी Shibb-e-Yamani और अंग्रेजी में एलम कहा जाता है.

भारत में फिटकरी का प्रयोग काफी पुराने समय से होता आ रहा है. इसका फिटकरी नाम, संस्कृत के स्फटिका से आया. कांक्षी, तुवरी, स्फटिका, सौराष्ट्री, शुभ्रा, स्फुटिका आदि इसके अन्य भारतीय नाम हैं. आयुर्वेद में फिटकरी को पित्त-कफ को कम करने वाली, ज्वरनाशक, आँखों के रोगों में लाभप्रद, खून के बहने को रोकने वाली, मुख के रोगों, कान रोगों और नाक से खून बहने से रोकने वाली माना गया है.

फिटकरी एंटीसेप्टिक के रूप में प्रयोग किया जाता है. इसे लगाने से खून का बहना रुकता है. इसमें एंटीप्रेट्रिक, एंटीस्पाज्मोडिक, हेमोस्टीप्टिक गुण हैं . यह विभिन्न खुराक रूपों में कई सूत्रों में भी प्रयोग किया जाता है.

यूनानी के अनुसार यह कैसैली है styptic है, और खून का बहना रोकती है. इसके स्वाद में खट्टापन है. यह पानी में पूरी तरह से घुलनशील है. फिटकरी सामान्य पानी में दस गुना और गर्म पानी में तीन गुना घुलनशील है. इसका वजन नमक से कम होता है.

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फिटकरी क्या है?

फिटकरी एक यौगिक है और यह कई प्रकार की होती है. कुछ फिटकरी खनिज के रूप में मिलती है जबकि कुछ संश्लेषित होते हैं.

फिटकरी के प्रकार

  • अमोनियम एलम Ammonium alum
  • एल्‍यूमिनियम सल्‍फेट Aluminum sulfate
  • क्रोम एलम chrome alum
  • पोटेशियम एलम Potassium alum
  • सेलेनेट एलम(selenate alum
  • सोडियम एलम sodium alum

सबसे सामान्य एल्युमीनियम और पोटेशियम सल्फेट से मिलकर बनी फिटकरी है. इसे एक प्रकार की खनिज मिट्टी जिसे रोल (हिंदी) या एलम शोल (इंग्लिश) से बनाया जाता है.  यह नेचुरल रूप में वहां मिलती है जहाँ एल्युमीनियम और सल्फर ज्यादा मात्रा में पाया जाता है. इसे अब रासयनिक तरीके से काफी मात्रा में बनाया जाता है.

घरेलू उपचार के लिए, फिटकरी के ब्लॉक यह पाउडर की तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं.

फिटकरी के मुख्य इस्तेमाल क्या हैं?

  • फिटकरी खून के बहने / रक्तस्राव को रोकने के लिए किया जाता है.
  • आयुर्वेद में शुद्ध फिटकरी या इसकी भस्म को सुजाक, रक्तप्रदर, खांसी, निमोनिया, खून की उलटी, विष विकार, मूत्रकृच्छ, त्रिदोष के रोगों, घाव, कोढ़ आदि में आंतरिक प्रयोग भी किया जाता है.
  • पानी को साफ करने के लिए फिटकरी का प्रयोग किया जाता है.
  • रंग पक्का करने के लिए भी फिटकरी इस्तेमाल की जाती है.

फिटकरी के मेडिसिनल गुण क्या हैं?

  • फिटकरी एंटीसेप्टिक, एंटीस्पाज्मोडिक और एसट्रिनजेंट / संकोचक है.
  • फिटकरी कसैली है.
  • फिटकरी की भस्म का सेवन छाती में जमे कफ को निकालती है.
  • फिटकरी तासीर में गर्म है.
  • फिटकरी त्वचा का रंग निखारती है.
  • फिटकरी पानी साफ़ करती है.
  • फिटकरी योनि संकोचक Vaginal contractive है.
  • फिटकरी रक्तस्राव को रोकती है.
  • फिटकरी वातपित्त, कफ, घाव, कोढ़, और विसर्प नाशक है.

फिटकरी के फायदे क्या हैं?

फिटकरी को होम रेमेडी की तरह बहुत से रोगों में इस्तेमाल कर सकते हैं. यह मार्केट में आसानी से उपलब्ध है और सभी को इसे घर में रखना चाहिए.

फिटकरी स्पॉजी या रक्तस्राव वाले मसूड़ों, दांत दर्द, लूज दांत, मुंह और जीभ के अल्सर, जीभ के फिशर, आदि मुख रोगों में फायदा करती है. इसे घाव, जहर, गोनोरिया, मेनिंगजाइटिस, अल्सर, कुष्ठ रोग, कफ और पित्त, उल्टी, कोलेरा, एपिस्टैक्सिस, स्टेमाइटिस, अस्थमा, कान दर्द, अवशोषक,, मुंह अल्सर, डिप्थीरिया, पुरानी खांसी, पुरानी दस्त, हेमोरेज, डाइसेंटरी, गले में दर्द, कॉंजक्टिवेटाइटिस आदि में प[रयोग किया जाता है.

फिटकरी का आंतरिक और बाहरी दोनों ही तरह से इस्तेमाल होता है. फिटकरी की मुंह से लेने की मात्रा बहुत कम होती है और इसलिए इसे आंतरिक रूप से लेने में बहुत सावधानी की ज़रूरत है. अच्छा हो, इसे आप ऐसे ही आंतरिक इस्तेमाल के लिए नहीं लें. फिटकरी का टोपिकल इस्तेमाल बहुत ही सेफ है.

फिटकरी रोके खून का बहना

फिटकरी का टोपिकल इस्तेमाल खून के आसामान्य भाव को रोकने के लिए किया जाता है. पानी में डुबा कर खून बहने वाली जगह पर फिटकरी मल लेने से खून का बहना रुक जाता है. फिटकरी को लगाने से संक्रमण भी नहीं होता.

  1. नकसीर फूटने में, गाय के दूध में थोड़ी सी फिटकरी घोल कर नाक में कुछ बूंदे टपकाने से नाक से खून बहना रुकता है.
  2. चोट लगने से खून बहना, कटने से खून बहना आदि में फिटकरी का टुकड़ा या चूरा प्रभावित जगह पर लगायें.
  3. रक्तपित्त या ब्लीडिंग डिसऑर्डर में फिटकरी को 125 मिलीग्राम (1 रत्ती) की मात्रा में ३ ग्राम चीनी के साथ मिला कर खाने से लाभ होता है.
  4. दाढ़ी बनाते समय कट जाए तो फिटकरी को पानी में भिगोकर लगाने से कट से खून निकलना बंद होता है.

फिटकरी कसे योनि को

योनि की शिथिलता या योनी के फ़ैल जाने या ढीले होने पर २ ग्राम फिटकरी को पानी में 100 मिलीलीटर पानी में घुला कर, रोज़ योनि माग का प्रक्षालन करने से योनि मार्ग को सिकोड़ने में मदद होती है.

फिटकरी कसे दांत

  • फिटकरी के चूरे को मौलश्री छल के चूर्ण में मिलाकर दांतों पर मलने से दांत मजबूत होते हैं.
  • दांत दर्द, दांत में मवाद, मुंह में लिसलिसापन में सेंधा नमक और फिटकरी के चूर्ण को बराबर मात्रा में मिलाकर दांतों पर रगड़ने से दांत मजबूत होते है, दांत दर्द से राहत मिलती है.
  • दांतों के रोग में सरसों तेल में फिटकरी चूर्ण मिलाकर दांतों की मालिश करें.

फिटकरी आँखों को रखे स्वस्थ्य

फिटकरी में सिकोड़ने, एंटीसेप्टिक गुण हैं. करीब 50 ml गुलाब जल में 500-600 mg, फिटकरी घोलकर रख लें. इसे कुछ बूंदों में आँखों में डालें. ऐसा करने से आँखों से पानी आना, लाली, कीचड़, पकना, दुखना, सूजन आदि में फायदा होता है.

फिटकरी से बनाएं टूथपाउडर

टूथपाउडर बनाने के लिए फुलाई हुई फिटकरी + हल्दी + सेंधा नमक + त्रिफला + नीम की पत्तियां + बबूल की छाल (प्रत्येक 100 gram) तथा 20 ग्राम लौंग का पाउडर मिला लें. इसे दिन में दो बार प्रयोग करने से पायरिया, मुंह की दुर्गध, दांतों का दर्द, कमजोरी, सेंसिटिवटी आदि दूर होते हैं.

पित्ती उछले तो इस्तेमाल करें फिटकरी

शुद्ध फिटकरी का चूर्ण आधा चम्मच की मात्रा में दूध या पानी के साथ लें.

फिटकरी पाइल्स के मस्से को सिकोड़े

बवासीर में hemorrhoids मस्सों पर फिटकरी का लेप लगाने से लाभ होता है.

फिटकरी करे फायदा अंदर की चोट में

अंदरूनी चोट में एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच शुद्ध फिटकरी का चूर्ण मिलाकर पीने से लाभ होता है.

फिटकरी रोके पेशाब में रक्त

पेशाब में खून जाना, गुदा से खून जाना में आधा चम्मच शुद्ध फिटकरी का चूर्ण, आधा चम्मच मिश्री के साथ मिलाकर लें.

फिटकरी फायदा करे बुखार में

विषम ज्वर, मलेरिया का बुखार intermittent fever में चौथाई या आधा चम्मच फिटकरी भस्म, समभाग मिश्री के साथ, २-४ घंटे के अंतराल पर लेना चाहिए.

फिटकरी से ठीक करें मुंह में छाले

छाले हैं तो फिटकी की चुटकी भर मात्रा एक चौथाई कप में मिला लें और कुल्ला करें.

फिटकरी यह फायदेमंद मुख रोगों में

मुंह / जीभ पर छाले, टांसिल में फिटकरी के पानी से कुल्ला करें.

फिटकरी राहत से कीट के दंश से

जहरीले कीटों (बर्रे, मधुमक्खी), बिच्छु, आदि के काटने पर गर्म पानी के साथ फिटकरी पीस कर, प्रभावित जगह पर लगाएं.

फिटकरी फायदा करे लूज़ मोशन में

पेचिश, अतिसार, खूनी बवासीर, रक्त प्रदर में फिटकरी भस्म आधा चम्मच की मात्रा में मुनक्के / दही के साथ लें.

फिटकरी आराम दे पेशाब में जलन में

मूत्रकृच्छ में गर्म करके फुलाई और पीसी हुई फिटकरी 1 ग्राम की मात्रा में फंकी की तरह लेने से और फिर दूध पीने से पेशाब में दर्द आदि दूर होता है.

फिटकरी और सर्पदंश

फिटकरी विष नाशक है. सांप काटने पर तुरंत ही, फिटकरी की भस्म (1 gram) को घी (60 gram) में मिलाकर लेने से ज़हर का आगे बढ़ना रुक जाता है.

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फिटकरी को करें शेविंग में इस्तेमाल

फिटकरी को शेविंग में रेजर से कट लगने और जलन को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह रक्त वाहिकाओं को संकुचित करके और छोटे खुले छिद्रों से खून बहने में मदद करती है. फिटकरी न केवल त्वचा को निर्जलित करने के लिए एंटीसेप्टिक एजेंट के रूप में कार्य करता है बल्कि बाम के रूप में कार्य करता है.

फिटकरी लगाएं फटी एड़ियों पर

फिटकरी में सिकोड़ने और घाव भरने के गुण होते हैं. इसे फटी एड़ियों पर तेल के साथ मिला कर लगा सकते हैं. इसके लिए फिटकरी के छोटे टुकड़े को पानी में उबालें. जब पानी उड़ जाए तो गली हुई फिटकरी से बारीक पाउडर बनाएं. इस पाउडर को नारियल तेल में मिलाएं और लगाएं.

फिटकरी करे झुर्रियां कम

फिटकरी त्वचा को कसने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. झुर्रियां हों, तो एलम का एक टुकड़ा लें और इसे पानी में गीला कर चेहरे पर रगड़ें. अपने चेहरे को पानी से धोएं और मॉइस्चराइज़र लगा लें.

फिटकरी इस्तेमाल करें मुंह की बदबू में

मुंह की बदबू में गर्म पानी में एक ग्राम एलम और नमक एक चुटकी डालें. इसे हिलाएं जब तक फिटकरी घुल नहीं जाए. इससे कुल्ला करें.

फिटकरी के प्रयोग में सावधानी

फिटकरी के आंतरिक प्रयोग में सावधानी रखने की ज़रूरत है.

आंतरिक प्रयोग के लिए केवल उपयुक्त फिटकरी (शुद्ध या भस्म) ही प्रयोग की जानी चाहिए और वो भी बहुत ही कम मात्रा में.

फिटकरी के नुकसान

  • अधिक मात्रा में प्रयोग फेफड़े, आँतों और पेट के लिए नुकसानदायक है.
  • एलम उपयोग की उच्च खुराक पुरुषों में मानव वीर्य और फ्रक्टोज़ स्तर को प्रभावित करती है.
  • अगर इसे ज्यादा मात्रा में लेते हैं तो यह यूनानी दवा के अनुसार यह फेफड़ों के लिए विषाक्त हो सकती है. यह कभी-कभी फेफड़ों की कोशिकाओं को नष्ट कर देती है. आंत में यह जलन करती है. इससे त्वचा और श्लेष्म झिल्ली की जलन भी होती.
  • फिटकरी ज्यादा लगाने से त्वचा में ड्राईनेस होती है.
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