चिकनगुनिया Chikungunya Ayurvedic in Hindi

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चिकनगुनिया, एक वायरल रोग है जो की संक्रमित मच्छरों के काटने से मनुष्यों में फैलता है। इस रोग को सबसे पहले, तंज़ानिया Tanzania, मारकोंड प्लेटू Markonde Plateau, मोजाम्बिक Mozambique और टनगानिका Tanganyika पर 1952 में फैलते देखा गया था। चिकनगुनिया वायरस जनित रोग है और इस रोग का वेक्टर एडीज एजिप्टी मच्छर है जो डेंगू बुखार और येलो फीवर का भी वेक्टर है। हाल ही में पेरिस के पाश्चर संस्थान ने दावा किया है कि इस वायरस में अब म्युटेशन हो गए हैं और यह वायरस अब टाइगर मच्छर के द्वारा भी फैलाया जा रहा है।

chikanguniya

“चिकनगुनिया” शब्द मारकोंड प्लेटू के भाषा के एक शब्द Kungunyala से लिया गया है जिसका मतलब होता है to become contorted मुड़ जाना / झुक जाना, ऐंठ जाना या बिगड़ जाना। यह शब्द इस रोग के शरीर पर देखे प्रभाव के कारण दिया गया क्योंकि इस रोग में शरीर में आर्थराइटिस जैसी स्थिति हो जाती है।

चिकनगुनिया होने पर आम तौर पर देखे जाने वाले लक्षणों में शामिल हैं, बुखार, ठंड लगना, सिर दर्द, मतली, उल्टी और जोड़ों में दर्द। जोड़ों में सूजन हो भी सकती है और नहीं भी। इसके साथ ही शरीर पर और दाने भी देखे जा सकते हैं। डेंगू के विपरीत इसमें रक्तस्राव या शॉक सिंड्रोम नहीं होता है।

पहले यह रोग भारत में नहीं देखा जाता था। यह मुख्यतः ईस्ट अफ़्रीकी देशों में ही फैलता था। लेकिन अब यह भारतीय उपमहाद्वीप पर बहुत ज्यादा फैलता देखा गया है। इसका एपीडेमिक की तरह विस्तार, भारत में 1963 (कोलकाता), 1965 (पांडिचेरी और चेन्नई तमिलनाडु, राजमुंदरी में,विशाखापत्तनम और आंध्र प्रदेश में काकीनाडा; मध्य प्रदेश में सागर; और नागपुर में महाराष्ट्र) और 1973 (महाराष्ट्र में बरसी) में देखा गया। इसके बाद इसके छिटपुट मामले जारी रहे 1983 और 2000 के दौरान महाराष्ट्र राज्य में विशेष रूप से इसके कई मामले दर्ज किये गए। वर्ष 2005 और 2006 से, भारत में चिकनगुनिया का एक बड़ा प्रकोप देखा जा रहा है। इससे प्रभावित राज्यों में शामिल हैं, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, गोवा, पांडिचेरी, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, अंडमान एवं निकोबार और दिल्ली। आजकर डेंगू की ही तरह, भारत भर में फ़ैल गया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अभी इसके बहुत से नए केस देखे जा रहे है।

Chikungunya is a mosquito-borne viral disease transmitted to humans by bite of infected mosquitoes. It causes fever and severe joint pain. Other symptoms include muscle pain, headache, nausea, fatigue and rash. This diseases is spread in Africa, Asia and the Indian subcontinent. In recent decades mosquito vectors of chikungunya have spread to Europe and the Americas. It was first described during an outbreak in southern Tanzania, other neighboring areas in 1952 (arthralgia).

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There is no cure for the disease. Its treatment is focused on relieving the symptoms. No specific antiviral drug is available for chikungunya. Treatment is done to relieve the symptoms, using anti-pyretic, analgesics and fluids. There is no commercial chikungunya vaccine.

चिकनगुनिया के लक्षण Chikungunya Symptoms

चिकनगुनिया का इन्क्यूबेशन पीरियड 2-12 दिनों का है, लेकिन आम तौर पर यह 3-7 दिनों में हो सकता है। इन्क्यूबेशन पीरियड के बाद अचानक तेज़ बुखार होता है (> 40 डिग्री सेल्सियस या 104 ° F)

ठंड लगना, जोड़ों का दर्द या गठिया, व्यग्रता, मतली, उल्टी, सिरदर्द, हल्का फोटोफोबिया भी होता है। हाथ पैरों के जोड़ों में सूजन और दर्द होता है। कुछ रोगियों को अशक्त कर देने वाला जोड़ों का दर्द या गठिया भी हो जाता है जो कुछ सप्ताह से लेकर कुछ महीनों तक परेशान कर सकता है। एक्यूट चिकनगुनिया का बुखार कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ़्ते तक रह सकता है। इससे होने वाली दिक्कतें जैसे की जोड़ों की सूजन, दर्द, गठिया आदि कुछ महीनो या वर्षों तक मरीज़ को परेशान कर सकती है। चिकनगुनिया की डाइगनोसिस प्रायः तब की जाती है जब यह महामारी की तरह फैला हो तथा शरीर में तेज़ बुखार, दाने और आमवाती लक्षण हों।

  • बुखार जिसमें जोड़ों का दर्द हो
  • मांसपेशियों में दर्द, सिर दर्द, उल्टी, थकान और शरीर पर दाने
  • जोड़ों का दर्द आम तौर पर कुछ दिनों से लकर हफ्तों तक रह सकता है। लेकिन कुछ मामलों में जोड़ों के दर्द कई महीनों, या वर्षों के लिए रह सकता है।

एलोपैथिक उपचार

  1. चिकनगुनिया का कोई विशेष उपचार एलोपैथी में नहीं है।
  2. इसकी कोई वैक्सीन भी उपलब्ध नहीं है।
  3. उपचार के तरीको में शामिल हैं, इंट्रावीनस फ्लुइड्स देना, ज्वरनाशक दवाई देना, सूजन कम करने की और एनाल्जेसिक दवाओं द्वारा दर्द कम करना।
  4. क्लोरोक्विन फास्फेट (250 मिलीग्राम) Chloroquine Phosphate (250 mg) दिन में एक बार दैनिक देने से से चिकनगुनिया से पीड़ित लोगों में लाभ देखा गया है।

आयुर्वेदिक या हर्बल उपचार Ayurvedic or Herbal Treatment of Chikungunya

आयुर्वेद में चिकनगुनिया का उपचार उस बुखार की तरह किया जाता है जिसमें शरीर में बुखार के साथ आर्थराइटिस की समस्या भी हो। इस प्रकार के ज्वरों में वात-पित्त ज्वर, वात-कफ ज्वर और संधिगत सन्निपात ज्वर आते है। चिकनगुनिया जानलेवा तो नहीं है किन्तु शरीर को बहुत ही कष्ट देने वाला रोग है।

चिकनगुनिया के लिए निम्लिखित उपयोगी है:

ज्वरहर वनस्पतियाँ:

गिलोय, सोंठ, कालमेघ, पाठा, तुलसी, नीम, त्रिफला, मंजीठ, रसना, गुग्गुलु, हल्दी और निर्गुन्डी

नीम की चाय, गिलोय का काढ़ा, त्रिफला का काढ़ा, तुलसी, सोंठ, अदरक का रस आदि का प्रयोग घरेलू उपचार की तरह किया जा सकता है।

तुलसी और नीम शरीर की इम्युनिटी को भी बढ़ाते है। यह शरीर में वात-कफ को कम करते हैं।

गिलोय लीवर की रक्षा करने वाली और वायरस जनित ज्वारों को नष्ट करने वाली उत्तम औषध है। गिलोय का काली मिर्च और तुलसी के पत्तों से बना काढ़ा डेंगू के साथ-साथ इसमें भी उपयोगी है। ताज़ी गिलोय न उपलब्ध होने पर, गिलोय घन वटी का प्रयोग किया जा सकता है। ताज़ी गिलोय का काढ़ा गिलोय घन वटी से अधिक प्रभावशाली है।

स्वास्थ्यवर्धक वनस्पतियाँ:

आंवले, अश्वगंधा, गिलोय और मुलेठी का सेवन करने से शरीर में बल आता है। ये सभी आयुर्वेद की रसायन या टॉनिक औषधियां हैं।

आयुर्वेदिक दवाएं:

चिकनगुनिया के उपचार के लिए उपयोगी दवाएं

नीचे दी गई दवाओं को २ सप्ताह तक, गर्म पानी के साथ लें। सटीक दवा शरीर में देखे जा रहे लक्षणों, दवा के प्रभाव पर तय की जाती है।

  1. संजीवनी वटी (100 mg) दिन में दो बार।
  2. सुदर्शन घन वटी 500mg 1 गोली दिन में तीन बार।
  3. अमृतारिष्ट 15-30 ml दिन में दो बार।

अथवा

  1. संजीवनी वटी (100 mg) दिन में दो बार।
  2. त्रयोदशांग गुग्गुलु 500mg दिन में तीन बार।
  3. महारस्नादी क्वाथ 45 ml दिन में दो बार।

लक्षणों के आधार पर इनका सेवन करें:

  • बुखार और दर्द: दशमूल काढ़ा का सेवन करें।
  • बुखार के लिए: पटोलादि क्वाथ अथवा पञ्च तिक्त क्वाथ अथवा सुदर्शन चूर्ण का सेवन करें।
  • बुखार जिसमें कफ की अधिकता हो: निम्बादी क्वाथ
  • आमवात, गठिया, आर्थराइटिस जैसी स्थिति: रस्नादी क्वाथ अथवा महारास्नादि क्वाथ अथवा महा योगराज गुग्गुलु अथवा योगराज गुग्गुलु अथवा रसना सप्तक क्वाथ का सेवन करें।
  • पुराने बुखार में: आरोग्यवर्धिनी गुटिका का सेवन करें।
  • त्वचा पर दाने/रैशेस: गुडूच्यादी क्वाथ अथवा बिल्वादी गुटिका अथवा हरिद्रा खण्ड का सेवन करें।

चिकनगुनिया में गुग्गुलु का सेवन

गुग्गुलु क्योंकि शरीर में सूजन को दूर करते हैं इसलिए चिकनगुनिया में विशेष रूप से उपयोगी है। जब बुखार ठीक भी हो जाता है तो श्री में जोड़ों की दिकात रह जाती है। ऐसे में निम्न से किसी एक गुग्गुलु का सेवन शरीर में दर्द सूजन में राहत देता है:

  1. अमृता गुग्गुलु Amrita Guggulu (2 tablets twice daily)
  2. योगराज गुग्गुलु Yogaraj guggulu (2 tablets thrice daily)
  3. महायोगराज गुग्गुलु Maha yogaraja Guggulu (2 tablets twice daily)
  4. सिंहनाद गुग्गुलु Simhanada Guggulu (2 tablets thrice daily)
  5. गोक्षुरादी गुग्गुलु Gokshuradi Guggulu (2 tablets twice daily)
  6. कैशोर गुग्गुलु Kaishore Guggulu (2 tablets twice daily)
  7. त्रयोदाशांग गुग्गुलु Trayodashanga Guggulu (2 tablets thrice daily)

सिद्ध की उत्तम दवा

सिद्ध की एक हर्बल दवा Nilavembu kudineer chooranam भी चिकनगुनिया में लाभकारी है। इसमें बुखार दूर करने के antipyretic, सूजन नष्ट करने के anti-inflammatory और दर्द निवारक analgesic गुण है।

अन्य सुझाव

  1. पर्याप्त आराम करें।
  2. पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों, ओआरएस, फलों का रस, संतरे का रस, अनार का रस और अन्य तरल पदार्थ का सेवन करें।
  3. शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स और पानी की कमी न होने दें।
  4. दूध, फलों का रस, इलेक्ट्रोलाइट समाधान (ओआरएस) और जौ/चावल का पानी का सेवन करें।
  5. गेंहू के जवारे का २०-२५ मल जूस सुबह पीने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट की आपूर्ति होती है और ताकत मिलती है।
  6. विटामिन सी का सेवन करें यह इम्युनिटी को बढ़ता है और आयरन के अवशोषण में भी मदद करता है।
  7. नारियल पानी पियें।

पथ्य What to eat

जब तक शरीर का तापक्रम सामान्य न हो जाये, रोगी को तरल आहार ही दें। दूध और फलों के रस के सेवन से शरीर में कमजोरी कम करने में साहयता होगी और ज़रूरी पोषक पदार्थों की आपूर्ति भी होती रहेगी।

रोकथाम और नियंत्रण

  1. चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए सबसे ज़रूरी है मच्छर के काटने से बचा जाए।
  2. त्वचा पर ओडोमोस, DEET युक्त मोसक्युटो रेपलेंट क्रीम लगायें।
  3. सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
  4. पूरी बांह के कपड़े, फुल पेंट पहनें।
  5. अगर आस-पास में किसी को यह संक्रमण है तो विशेष सावधानी बरते।
  6. इसका नियंत्रण करने के लिए मच्छरों के ब्रीडिंग स्थानों को नष्ट करना होगा। कूलर, A/C, चिड़ियों के लिए रखे पानी, गमले में रुके पानी को साफ़ कर दें। घर के आसपास पानी न इकठ्ठा होने दें।
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7 thoughts on “चिकनगुनिया Chikungunya Ayurvedic in Hindi

  1. meri mom jinki age 50 year hai or mere father jinki age 55 year hai dono hi is pain se bahut preshan hai jyada medition khane se or new problam face hone lagti hai ese me kya krna chahiye meri mom ko night me jyada pain hota ho sone me me bahut problam hoti hai or hatho me sweling bhi hai so plz help me

  2. namaskaar mera naam sachin h
    Baat drasel yee hai k
    karib 5 din phle mere sarrir m dard hona suru huaa uske baad mujhe thaand laagi suru huii uske baad mujhe bhut tez bukhaar aaya Maine bukhar Ki dwaii le
    bs mujhe kamzore mhsus hoti thii par Aaj subha se mere jodo m kaafi dard ho RHA h. jitne jood h cahee WO pareeooo k ho ya hatho k bhut dard h
    hadiya dukh rhi h
    kuch samhj nhi aa RHA kya kru
    krpiya madat kree
    aapki bdii kirpaa hogi
    mujhe aapke jbab ka intzar hai.

    • बहुत ज्यादा तकलीफ है तो डॉ को जरूर दिखाएँ.
      आप की बातों से लग रहा है अप्प को चिकनगुनिया हुआ होगा. जिसकी वजह से जोड़ों में दर्द हो रहा है. ये चिकनगुनिया के साइड इफ़ेक्ट हैं.
      अगर हो सके तो मेडिकल स्टोर से योगराज गुग्गुल या महायोगराज गुग्गुलु दवा लें. और इसे १-२ हफ्ते तक सुबह साम २ गोली गरम पानी या दूध के साथ पियें. यह जोड़ों के दर्द को ठीक करेगा.

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