रोहितक लौह Rohitaka Lauha Detail and Uses in Hindi

रोहितक लौह, आयुर्वेदिक दवा है जिसे भैषज्य रत्नावली के यकृत-प्लीहारोगाधिकार से लिया गाया है। इस दवा को रोहिड़ा की छाल, त्रिफला, त्रिकटू, मोथा, चित्रक, विडंग और लौह भस्म को मिलाकर बनाया गया है। इस दवा को प्लीहा के बढ़ने में प्रयोग किया जाता है। यह दवा आयुर्वेद का एक लौह कल्प है। इसके सेवन से शरीर में रक्त धातु की वृद्धि होती है। यह लीवर और प्लीहा के रोग को दूर कर शरीर को स्वस्थ्य बनती है।

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Rohitaka Loha is Lauha Kalp of Ayurveda. It is indicated in enlargement of spleen and liver-spleen disorder. It increases iron level in body and cures disorders of spleen. It supports better digestion and assimilation.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

रोहितक लौह के घटक Ingredients of Rohitaka lauha

  • रोहितक Rohitaka (St. Bk.) 1 Part
  • सोंठ Sunthhi (Rz.) 1 Part
  • काली मिर्च Marica (Fr.) 1 Part
  • पिप्पली Pippali (Fr.) 1 Part
  • हरीतकी Haritaki (P.) 1 Part
  • विभिताकी Bibhitaka (P.) 1 Part
  • आमलकी Amalaki (P.) 1 Part
  • मोथा Musta (Rz.) 1 Part
  • चित्रक Citraka (Rt.) 1 Part
  • विडंग Vidanga (Fr.) 1 Part
  • आयस Ayas (Lauha) bhasma 10 Parts

मुख्य घटक

लौह भस्म आयरन का ऑक्साइड है और आयुर्वेद बहुत अधिक प्रयोग होता है। आयुर्वेद में लौह कल्प, वह दवाएं हैं जिनमे लौह भस्म मुख्य घटक है। लौह के अतिरिक्त इन दवाओं में हर्बल घटक भी होते हैं। लौह कल्प के नाम में \’लौह\’ शब्द का प्रयोग होता है। लौह कल्प को क्रोनिक बिमारियों के इलाज़ के लिए प्रयोग किया जाता है। यह पांडू रोग या अनीमिया को नष्ट करता है।

लौह भस्म को पाण्डु (anaemia), प्रमेह (diabetes), यक्ष्मा (tuberculosis), अर्श (piles), कुष्ठ (skin disorders), कृमि रोग (worm infestation), क्षीणतवा (cachexia), स्थूलया (obesity), ग्रहणी (bowel syndrome), प्लीहा रोग (spleenic disorders), मेदोरोगा (hyperlipidemia), अग्निमांद्य (dyspepsia), शूल (spasmodic pain), और विषविकार (poisoning) में प्रयोग किया जाता है।

रोहितक लौह के लाभ/फ़ायदे Benefits of Rohitaka Lauha

  • यह दवा तिल्ली के बढ़ जाने में प्रभावी है।
  • यह लीवर की रक्षा करती है।
  • इसके सेवन से पाचन की कमजोरी, भूख न लगना, कमजोरी आदि दूर होती है।
  • यह विषम ज्वर को दूर करती है।
  • यह शरीर में आयरन की आपूर्ति करता है।
  • यह पांडू रोग को नष्ट करता है।
  • यह कान्तिजनना (complexion improving) है।
  • यह अग्निवर्धक है।
  • यह भूख बढ़ाता है।
  • यह लीवर, प्लीहा की वृद्धि और पीलिया में लाभप्रद है। यकृत रोग, पूरे शरीर में सूजन में भी यह लाभप्रद है।

रोहितक लौह के चिकित्सीय उपयोग Uses of Rohitaka Lauha

  • प्लीहा रोग (Splenic disease)
  • यकृत रोग (Liver diseases)
  • शोथ (Inflammation)

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Rohitaka Lauha

  • 1-2 गोली, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  • इसे शहद, दूध, पानी के साथ लें।
  • इसे भोजन करने के बाद लें।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।
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