मण्डूर भस्म Mandur Bhasma Benefits and Uses in Hindi

मंडूर, लोहे का ऑक्साइड है। जब लोहा सैकड़ों वर्ष तक पृथ्वी के अन्दर ही पड़ा रहता है वह मंडूर बन जाता है। इसे लोहे की खदानों से से जहाँ प्राचीन समय में लोहा गलाया जाता था वहां से काफी मात्रा में प्राप्त किया जाता है। आयुर्वेद में साठ साल पुराना मंडूर दवा हेतु प्रयोग नहीं किया जाता। जो मंडूर अस्सी वर्ष पुराना हो वह मध्यम दर्जे का और १०० या उससे अधिक पुराना उत्तम दर्जे का माना जाता है।

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मंडूर से शोधन और मारण के द्वारा मंडूर भस्म बनायी जाती है। मंडूर भस्म, लौह भस्म से अधिक सौम्य होती है। जो गुण लौह की भस्म में है वही इसमें, कुछ कम मात्रा में पाए जाते है। मंडूर भस्म क्योकि लोहे के ऑक्साइड से ही बनी है इसलिए इसके सेवन शरीर में खून की कमी दूर होती है। यह एनीमिया, शरीर में पीलापन, हलीमक, लीवर-स्प्लीन के बढ़ जाने, आदि की अच्छी दवा है।

खून की कमी को दूर करने के साथ ही मंडूर भस्म यकृत और तिल्ली के रोगों में भी प्रयोग की जाती है। लिव 52 जो की एक बहुत ही जानी-मानी लीवर की दवा है, उसमे मंडूर भस्म एक महत्वपूर्ण घटक है।

Mandoor Bhasma / Mandura Bhasma is an Ayurvedic preparation of oxide of iron or iron rust. It has strong hematinic and tonic properties. It is good for liver, spleen and blood. It supports better functioning of liver and cures anemia.

It is useful in diseases that occur due to iron deficiency, anemia, and liver and spleen disorders.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

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संस्कृत में मंडूर के पर्याय: लोह, सिंहानिका, सिंहान, लोहकिट्ट, लोहज

मण्डूर भस्म के घटक Ingredients of Mandur Bhasma

  1. मंडूर को शोधन और मारण द्वारा मंडूर भस्म में बदला जाता है।
  2. शोधन में गोमूत्र का और मारण में त्रिफला के काढ़े का प्रयोग होता है।

आयुर्वेदिक गुण और कर्म

  1. रस (taste on tongue): काषाय
  2. गुण (Pharmacological Action): शीत
  3. वीर्य (Potency): शीत
  4. विपाक (transformed state after digestion): कटु

मण्डूर भस्म के लाभ/फ़ायदे Benefits of Mandur Bhasma

  • यह खून की कमी और इसके कारण हुए दोषों को दूर करती है।
  • यह सौम्य, काषाय और स्वभाव में ठंडक देने वाली औषधि है।
  • सौम्य होने के कारण इसे गर्भावस्था, बच्चों और कोमल प्रकृति के लोगों द्वारा प्रयोग किया जा सकता है।
  • शीतल होने से यह पित्त के विकारों में भी लाभप्रद है।
  • यह यकृत पर विशेष प्रभाव डालती है।
  • यह यकृत-प्लीहा वृद्धि को दूर करती है।
  • शरीर में किसी भी कारण होने वाली सूजन की यह बहुत अच्छी दवा है।
  • यह पेट रोगों को भी दूर करती है।
  • इसके सेवन से शरीर को बल मिलता है।
  • यह पाचन की कमजोरी, कामला, बवासीर, शरीर की सूजन, रक्त विकार, आदि रोगों में तुरंत ही लाभ करती है।
  • इसके सेवन से भूख लगती है, कमजोरी जाती और पूरे शरीर का पीलापन, सूजन दूर होते है।

मण्डूर भस्म के चिकित्सीय उपयोग Uses of Mandur Bhasma

  • प्लीहा वृद्धि (Splenomegaly)
  • यकृत वृद्धि Yakritvriddhi (Enlargement of liver (Hepatomegaly)),
  • उदर शूल, मन्दाग्नि, संग्रहणी, खून की कमी
  • कमाला Kamala (Jaundice)
  • पांडु Pandu (Anaemia)
  • शोथ Shotha (Inflammation)
  • रक्त क्षय Raktakshaya (Blood loss)

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Mandur Bhasma

250 mg से 500 mg दिन में दो बार, सुबह और शाम लें। इसे रोग के अनुसार, एक से डेढ़ ग्राम तक भी दिया जा सकता है।

  1. मंडूर भस्म को त्रिकटु चूर्ण + शहद के साथ लिया जाता है।
  2. यदि कब्ज़ हो जाती हो तो इसे गोमूत्र के साथ लेना चाहिए।
  3. बच्चों को इसे शहद के साथ दें।
  4. इसे भोजन करने के बाद लें।
  5. या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

इस दवा को ऑनलाइन या आयुर्वेदिक स्टोर से ख़रीदा जा सकता है।

You can buy this medicine online or from medical stores.

This medicine is manufactured by Baidyanath (Mandoor Bhasma), Dabur (Mandoor Bhasma), Patanjali Divya Pharmacy (Divya Mandura Bhasma), Manil (Mandur Bhasma), Rasashram (Mandoor Bhasma) and many other Ayurvedic pharmacies.

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