जात्यादि घृत Jatyadi Ghrita Detail and Uses in Hindi

जात्यादि घृत, एक आयुर्वेदिक घृत या घी है। इस घी का प्रयोग केवल बाह्य रूप से लगाने के लिए किया जाता है। इसको लगाने से घावों, जलने, फोड़ों आदि लाभ होता है। इसमें व्रणशोधक Wound cleaning और व्रणरोपण Wound healing गुण हैं। यह सूजन दूर करने और घाव साफ़ करने वाला है। इसे लगाने से घाव, फोड़े जल्दी ठीक होते है। डायबिटिक लोग जीने घाव जल्दी नहीं ठीक हो पाते यह इसका प्रयोग कर सकते है।

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Jatyadi Ghrita is an herbal medicated Ghee. It used in treatment of non-healing, bleeding wound, wounds caused by heat or fire(burns), boils, insect bites wound, post grafting failure wound etc.

Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and how to use in Hindi language.

जात्यादि घृत के घटक Ingredients of Jatyadi Ghrita

  • जाती पत्र (Jati) Jasminum officinale var.grandiflorum Lf. 14.76 g
  • निम्बा पत्र Azadirachta indica Lf. 14.76 g
  • पटोला पत्र Trichosanthes dioica Lf. 14.76 g
  • कटुका Picrorhiza kurroa Rz. 14.76 g
  • दर्वी (Daruharidra) Berberis aristata St. 14.76 g
  • निशा (Haridra) Curcuma longa Rz. 14.76 g
  • सारिवा (Shveta sariva) Hemidesmus indicus Rt. 14.76 g
  • मंजिष्ठा Rubia cordifolia Rt. 14.76 g
  • अभय (UShira) Vetiveria zizanioides Rt. 14.76 g
  • सिक्था (Madhucchishta) Bee’s wax 14.76 g
  • तुत्था Copper sulphate 14.76 g
  • मधुका (Yashti) Glycyrrhiza glabra Rt. 14.76 g
  • नकटहवा (Karanja) Pongamia pinnata Sd. 14.76 g
  • सर्पि (GoGhrita) Clarified butter from cow’s milk 768 g
  • जल Water 3.07 l

जात्यादि घृत के लाभ/फ़ायदे Benefits of Jatyadi Ghrita

  • यह केवल बाहरी प्रयोग के लिए है।
  • यह घाव को ठीक करने में मदद करता है।
  • यह फोड़े, न ठीक होने वाले घाव, जलने, केमिकल, जहर के कारण होने वाले विकारो को नष्ट करता है।
  • यह जीवाणु नाशक है।
  • यह दर्द और सूजन में राहत देता है।
  • इसमें शोधन, रोपण, रक्तशोधक, कृमिघ्न, कण्डुघ्न, शोथहर गुण हैं।

जात्यादि घृत के चिकित्सीय उपयोग Uses of Jatyadi Ghrita

  • मर्माश्रिता व्रण wound present over vital points
  • सूक्ष्म नाड़ीव्रण ulcer with a narrow sinus
  • क्लेदिव्रण wound with excessive secretion
  • गम्भीरव्रण deep seated wound
  • सरजा व्रण means painful wound
  • कीटों के कारण होने वाले घाव

How to use Jatyadi Ghrita

  • यह घी केवल बाहरी प्रयोग के लिए है।
  • घाव को साफ़ कर लें।
  • घाव पर घी की पतली परत लगाएं और रुई और पट्टी से अच्छे से ढक लें।
  • इस दवा को ऑनलाइन या आयुर्वेदिक स्टोर से ख़रीदा जा सकता है।

You can buy this medicine online or from medical stores.

This medicine is manufactured by Kottakkal Arya Vaidya Sala (Jatyadi Ghritam), SKM Siddha & Ayurveda (Jatyadi Ghrutham), Jaggi (Jatyadi Ghrita) and many other Ayurvedic pharmacies.

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