हेमनाथ रस फायदे, नुकसान, उपयोग विधि और प्राइस

हेमनाथ रस प्रमेह और श्वेत प्रदर रोग की दवाई है। यह त्रिदोष के कारण उत्पन्न रोगों की अच्छी आयुर्वेदिक दवा है। इसका सेवन जनन अंगों पर विशेष प्रभाव डालता है।

हेमनाथ रस आयुर्वेद की एक रस-औषधि है जिसमें रस, पारा है। पारे को ही आयुर्वेद में रस या पारद कहा जाता है और बहुत सी दवाओं के निर्माण में प्रयोग किया जाता है। पारा एक विषाक्त धातु है और इसे आयुर्वेद में केवल सही प्रकार से शोधित कर के ही इस्तेमाल किया जाता है। रस औषधियां शरीर पर शीघ्र प्रभाव डालती हैं। इन्हें डॉक्टर की देख-रेख में ही लेना सही रहता है।

हेमनाथ रस प्रमेह और श्वेत प्रदर रोग की दवाई है। यह त्रिदोष के कारण उत्पन्न रोगों की अच्छी आयुर्वेदिक दवा है। इसका सेवन जनन अंगों पर विशेष प्रभाव डालता है।

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प्रमेह क्या है What is Prameha?

प्रमेह रोग मूत्रगत रोग (urinary disorders) होते हैं तथा इसमें वह सभी विकार शामिल हैं जिनके लक्षण है: मूत्र की अधिक मात्रा (पोलीयूरिया) और बार-बार पेशाब करने की इच्छा। आयुर्वेद में यह बीस प्रकार के माने गए है।

इनके तीन मुख्य प्रकार हैं: कफ (१० प्रकार के), पित्त (६ प्रकार के) और वात (४ प्रकार के)। यद्यपि प्रमेह त्रिदोष व्याधि है परन्तु कोई एक दोष का उसमें अधिक प्रभाव रहता है इसलिए इसे तीनों दोषों के आधार पर विभाजित किया गया है। बीस में से १६ प्रमेह पित्त और कफ दोष के कारण होते हैं। प्रमेहों को पेशाब के रंग, और उसके गुणों के कारण अलग अलग पहचाना गया है।

सभी प्रमेह रोगों में एक बात समान है। वह है सभी में अधिक पेशाब होता है जो की मटमैला होता है और सामान्य से अलग गुण रखता है। सभी प्रकार के प्रमेह पुराने हो कर मधुमेह में बदल जाते हैं।

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प्रमेह होने पर अधिक प्यास लगना और कब्ज़ होना आम है। इसके अतिरिक्त थकान, दुर्बलता, कमजोरी, शरीर का पतला होना, दस्त आना, कब्ज़ होना, इन्द्रियों का दुर्बल होना और अधिक पेशाब होना अन्य लक्षण हैं। प्रमेह पूरे शरीर को और नाड़ियों को प्रभावित करता है।

मधुमेह वातज प्रकार का प्रमेह है जिसमें मधु (शहद) के समान पेशाब आने लगता है। मधुमेह में अकारण ही वज़न कम हो जाता है और बहुत अधिक पेशाब आती है और गला हमेशा सूखा रहता है। हाथों, पैरों में जलन रहती है, बाल का गिरना, शरीर में भारीपन, पाचन की कमजोरी आदि भी मधुमेह के अन्य लक्षण हैं।

पुरुषों में प्रमेह रोग होने पर नपुंसकता आती है तथा मूत्र के साथ धातु का स्राव होने से यौन विकार पैदा होते हैं।

Hemnath Ras is mineral containing Ayurvedic medicine. It is used in treatment of urinary disorders and leucorrhoea. It is a tonic that gives strength to whole body. Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

हेमनाथ रस के घटक | Ingredients of Hemnath Ras in Hindi

  • शुद्ध पारद 12 gram
  • शुद्ध गंधक 12 gram
  • स्वर्ण भस्म 12 gram
  • स्वर्ण -माक्षिक भस्म 12 gram
  • लोह भस्म 6 gram
  • कपूर 6 gram
  • प्रवाल भस्म
  • वंग भस्म
  • भावना-द्रव्य: शुद्ध अहिफेन का पानी, कदली पुष्प, गूलर का रस।

शुद्ध पारद और शुद्ध गंधक को मिलाकर कज्जली बना ली जाती है। स्वर्ण भस्म , स्वर्ण -माक्षिक भस्म, लोह भस्म, कपूर , प्रवाल भस्म और वंग भस्म को कज्जली से मिला दिया जाता है। इसे शुद्ध अहिफेन के पानी , कदली पुष्प स्वरस और उदुम्बर फल स्वरस की सात भावना दी जाती और १ रत्ती की गोलियां बना ली जाती हैं यही हेमनाथ रस है।

हेमनाथ रस के लाभ | Benefits of Hemnath Ras in Hindi

  • इसका सेवन प्रमेह और स्त्रियों के सफेद प्रदर तथा सोम रोग को दूर करता है।
  • यह यूरिनरी ब्लैडर, किडनी और नर्व की दुर्बलता दूर करती है।
  • यह स्वप्न दोष, डायबिटीज, युरनरी डिसऑर्डर, समेत शीघ्रपतन, वीर्य का पतलापन, को नष्ट करती है।
  • यह रसायन है।

हेमनाथ रस के चिकित्सीय उपयोग | Uses of Hemnath Ras in Hindi

  • प्रमेह (urinary disorders), मधुमेह
  • बार-बार पेशाब आना
  • नपुंसकता, शीघ्रपतन, वीर्य विकार
  • सोम रोग (एक स्त्री रोग जिसमें पेशाब में चिपचिपा पदार्थ जाता है)
  • लिकोरिया (एक स्त्री रोग है जिसे आम भाषा में सफ़ेद-पानी या वाइट डिस्चार्ज white discharge कहा जाता है। आयुर्वेद में यह प्रदर का एक प्रकार है जिसे श्वेत प्रदर कहा जाता है)

हेमनाथ रस की सेवन विधि और मात्रा | Dosage of Hemnath Ras in Hindi

  • 1 गोली, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  • इसे गिलोय के रस, शहद,+ जामुन गुठली पाउडर, के साथ लें।
  • इसे भोजन करने के बाद लें।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

इस दवा को ऑनलाइन या आयुर्वेदिक स्टोर से ख़रीदा जा सकता है।

This medicine is manufactured by Baidyanath.

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