पुराना घृत Purana Ghrita Detail and Uses in Hindi

घृत या घी, सभी चिकने और तैलीय पदार्थों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यह पचने में भारी, मधुरविपाक, और तासीर में ठंडा होता है। यह बुद्धि, याददाश्त, आयु, बल,वज़न, शुक्र, कान्ति, तथा स्वर की वृद्धि करने वाला टॉनिक है। इसका सेवन शरीर को बल देता है और त्वचा से रूखापन दूर करता है।

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घी दिमाग के रोगों, शरीर में जलन, ड्राईनेस, आदि में लाभप्रद है। घी, पेट की वायु को नीचे की ओर ले जाता है और पाचन को बढ़ाता है। इसके अतिरिक्त घी से आँतों में भी चिकनाई बढती है और कब्ज़ दूर होता है।

आयुर्वेद में एक वर्ष या उसे अधिक रखा घी \’पुराना घृत\’ कहलाता है। पुराना घृत, मिर्गी, नशे, बेहोशी, मलेरिया, विषम ज्वर, आँखों के रोग, मस्तिष्क के रोग, जननागों के रोगों को दूर करने वाला है।

घाव पर इसका लेप,घाव को जल्दी ठीक करने में मदद करता है।

Purana Ghrita is Ghee which is stored for more than one year before use. Ghrita gives strength and cures internal dryness. Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

Clarified butter
By Rainer Z … – Own work, CC BY-SA 3.0

पुराना घृत के घटक Ingredients of Purana Ghrita

गाय का घी जो की कम से कम एक वर्ष पुराना हो.

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पुराना घृत के लाभ/फ़ायदे Benefits of Purana Ghrita

  • यह अत्यंत पौष्टिक है। यह रसायन या टॉनिक है।
  • यह स्निग्ध है और आन्तरिक रूक्षता दूर करता है।
  • यह वज़न, कान्ति, और पाचन को बढ़ाता है।
  • यह कब्ज़ से राहत देता है।
  • यह दिमाग, नसों, मांस, आँखों, मलाशय आदि को शक्ति प्रदान करता है।
  • यह धातुओं को पुष्ट करता है।
  • यह पित्त विकार को दूर करता है।
  • यह कफ विकारों को दूर करता है।
  • यह निमोनिया में अत्यंत लाभप्रद है।
  • यह मस्तिष्क को ताकत देता है और मस्तिष्क के रोगों जैसे की माइग्रेन, सर दर्द, उन्माद, आदि को दूर करता है.
  • पुराना घी, विषाणुरोधी और जीवाणुरोधी होता है। यह घाव पर लगाने पर उसे जल्दी ठीक करता है.

पुराना घृत के चिकित्सीय उपयोग Uses of Purana Ghrita

  • निमोनिया Pulmonary disorders, pneumonia
  • कमजोरी general weakness
  • कफ विकार kapha vikaar
  • छाती में कफ
  • नींद न आना (insomnia)

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Purana Ghrita

  • 1-2 चम्मच दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  • इसे दूध के साथ लें।
  • या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

कृपया ध्यान दें, आयुर्वेदिक दवाओं की सटीक खुराक आयु, ताकत, पाचन शक्ति का रोगी, बीमारी और व्यक्तिगत दवाओं के गुणों की प्रकृति पर निर्भर करता है।

मोटापा, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल में घी का प्रयोग सावधानी से करना चाहिए।

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