Know about Saraswatarishta सारस्वतारिष्ट in Hindi

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सारस्वतारिष्ट आयुर्वेदिक दवा है। इसमें ब्राह्मी, सतावरी, विदारीकन्द, हरीतकी, अदरक, निशोथ, सौंफ, लौंग, गिलोय, छोटे इलायची, दालचीनी, सोने की पत्ती, शहद, चीनी आदि जैसे तत्व होते हैं जो की शरीर में आयु, वीर्य, बल, मेधा, स्मरण शक्ति और कान्ति को बढ़ाते हैं। यह दवा यौन दुर्बलता और सामान्य दुर्बलता में उपयोगी है। यह मस्तिष्क के लिए टॉनिक है। यह आक्षेप, बेहोशी और नसों की कमजोरी में फायदेमंद है। This is beneficial in fainting, convulsions, nervous debility।

इसे स्वरभंग और हकलाने में भी दिया जाता है। यह अच्छी याददाश्त देता है। यह मासिक धर्म संबंधी विकार में भी उपयोगी है।

सारस्वतारिष्ट स्वर्ण युक्त दवा है। इसमें स्वर्ण पत्र या स्वर्ण भस्म डाली जाती है जो इसके रसायन गुण को और बढ़ा देती है। दवा के फोर्मुले में ही स्वर्ण का प्रयोग है इसलिए यह औषधि सारस्वतारिष्ट स्वर्ण युक्त अथवा सारस्वतारिष्टम गोल्ड के नाम से भी जानी जाती है। स्वर्ण डालने से दवा में रसायन और कायाकल्प के गुण बढ़ जाते हैं।

नीचे इस दवा के घटक, गुण, सेवनविधि, और मात्रा के बारे में जानकारी दी गयी है।

  • पर्याय: सरस्वतारिष्टम Saraswatarishta, Saraswatharishtam
  • संधर्भ: भैषज्यरत्नावली, रसायनरोगाधिकार
  • उपलब्धता: यह ऑनलाइन और दुकानों में उपलब्ध है।
  • दवाई का प्रकार: आयुर्वेदिक आसव-अरिष्ट
  • मुख्य उपयोग: रसायन
  • दवा का अनुपान: गुनगुना जल
  • उपचार की अविधि: इसे कुछ महीनों तक लिया जा सकता है
  • एक दिन में ली जा सकने वाली मात्रा: दिन में दो बार, 12 से 24 ml की मात्रा वयस्कों द्वारा ली जा सकती है

Saraswatarishta is a polyherbal Ayurvedic medicine used to treat several disorders like neuroses, psychoses, epilepsy, insomnia, stammering, memory loss, infertility, hormonal problems and depression. The main ingredient of this formulation is Bramhi (Bacopa monnieri L. Pennell), which is used for revitalization of brain and nervous system, nourishing intellectual clarity and sharpness.

Here information is given about complete list of ingredients, properties, uses and dosage of this medicine in Hindi language.

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सारस्वतारिष्ट के घटक Ingredients of Saraswatarishta

  1. Brahmi ब्राह्मी Plant 960 g
  2. Shatavari शतावर Root 240 g
  3. Vidarika (Vidari) विदारी Root trunk 240 g
  4. Abhaya (Haritaki) हरीतकी Pericarp 240 g
  5. Ushira उशीर Root 240 g
  6. Sonth सोंठ Rhizome 240 g
  7. Saunf (Mishriya) सौंफ Fruit 240 g
  8. Water for Decoction पानी 12.288 liter reduced to 3.072 liter
  9. Madhu शहद 480 g
  10. Sita चीनी 1.200 kg
  11. Dhataki धातकी Flowers 240 g
  12. Reuuka निर्गुन्डी Seed 12 g
  13. Trivrita (Trivrit) त्रिवृत Root 12 g
  14. Pippali पिप्पली Fruit 12 g
  15. Lavanga लौंग Flowerbud 12 g
  16. Vaca वच Rhizome 12 g
  17. Kushtha कुष्ठ Root 12 g
  18. Ashvagandha अश्वगंधा Root 12 g
  19. Vibhitaka बहेड़ा Pericarp 12 g
  20. Amrita (Guduchi) गिलोय Stem 12 g
  21. Ela छोटी इलाइची Seed 12 g
  22. Vidang विडंग Fruit 12 g
  23. Tvak दालचीनी Stem Bark 12 g
  24. Svarnapatra सोने की पत्ती 12 g

1- इस दवा में सेन्टेला एशियाटिका Centella asiatica है जिसे संस्कृत में मन्डूकपर्णी, हिंदी में कुला कुड़ी, ब्राह्मी, और लैटिन में गोटूकोला या इंडियन पेनीवर्ट भी कहते हैं। इसे ब्राह्मी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह बुद्धिवर्धक है। इसके पत्ते मेंडक के जालीदार पैरों जैसे होते हैं इसलिए इसे मण्डूक पर्णी कहते हैं।

  1. यह मेद्य को बढ़ाने वाली वनस्पति है।
  2. रस: मधुर, तिक्त, काषाय
  3. वीर्य: शीतल
  4. विपाक: मधुर
  5. गुण: लघु, रूक्ष
  6. दोष पर प्रभाव: त्रिदोष संतुलित करना, मुख्य रूप से कफ-पित्त कम करना

2- गोटूकला, मेद्य रसायन, रक्तपित्तहर, रक्तशोधक, व्यास्थापना, और निद्राजनन है। यह बढ़े पित्त को कम करती है और सेंट्रल नर्वस सिस्टम को आराम देती है। इसके सेवन से एकाग्रता, स्मरणशक्ति, और बुद्धिमत्ता बढ़ती है।

गोटूकोला को गर्भावस्था में लेते समय बहुत सावधानी की आवश्यकता है। ज्यादा मात्रा में इसका सेवन नारकोटिक है और चक्कर लाता है। इसे चोलेस्त्र्ल और ब्लड शुगर कम करने वाली ददवाओं के साथ सावधानी से लेना चाहिए।

3- शतावर का वानस्पतिक नाम एस्पैरागस ऑफ़ीशिनैलिस Asparagus officinalis है। आयुर्वेद में इसकी जड़ों का प्रयोग दवा के रूप में किया जाता है।

शतावरी में अल्सर ठीक करने के, इम्युनिटी बढ़ाने के और टॉनिक गुण हैं। यह आँतों को साफ़ करती है और पेचिश को अपने संकोचक गुण से रोकती है। शतावर के सेवन से शरीर में अम्लपित्त की शिकायत दूर होती है।

यह स्त्री रोगों जैसे की प्रसव के उपरान्त दूध का न आना, बांझपन, गर्भपात आदि में लाभप्रद है। प्रसव उपरान्त शतावरी का सेवन स्तन से दुग्ध के स्राव को उत्तेजित करता है। इसके अतिरिक्त यह मिर्गी में भी अच्छे परिणाम देती है। यह कामोत्तेजक भी है।

4- विदारी एक पौधे Pueraria tuberosa का कंद है। यह वातहर, पित्तहर, हृदय, पौष्टिक, शुक्रल, बल्य, कंठ के लिए उत्तम, वर्ण्य, रसायन और वाजीकारक है। इसके सेवन से रक्तपित्त, शुक्र क्षय, रक्त दोष, जलन, कफ, शूल, मूत्रकृच्छ, विसर्प और विषमज्वर आदि दूर होते हैं।

विदारी रस में मधुर और मधुर विपाक है। यह गुण में गुरु और स्निग्ध है। वीर्य में यह शीत है और शरीर को बल देने वाली रसायनी औषध है।

5- हरीतकी Terminalia chebula आयुर्वेद की रसायन औषधि है। यह पेट रोगों में प्रयोग की जाने वाली सबसे प्रभावी औषध है। इसमें लवण रस, को छोड़ बाकि सभी रस / स्वाद है। यह गुण में लघु, रूक्ष, और स्वभाव से गर्म है। यह एक कटु विपाक औषध है और शरीर के सभी धातुओं पर काम करती है। यह सूजन को दूर करती है। यह मूत्रल और दस्तावर है। यह अफारे को दूर करती है और पेट के कीड़ों को भी नष्ट करती है।

6- सोंठ का प्रयोग आयुर्वेद में प्राचीन समय से पाचन और सांस के रोगों में किया जाता रहा है। इसमें एंटी-एलर्जी, वमनरोधी, सूजन दूर करने के, एंटीऑक्सिडेंट, एन्टीप्लेटलेट, ज्वरनाशक, एंटीसेप्टिक, कासरोधक, हृदय, पाचन, और ब्लड शुगर को कम करने गुण हैं। यह खुशबूदार, उत्तेजक, भूख बढ़ाने वाला और टॉनिक है।

7- सौंफ एक प्रसिद्ध मसाला है। इसे खाने से खून साफ होता है व रक्त से संबंधित बीमारियों में लाभ होता है। खून साफ होने से त्वचा में भी चमक आ जाती है। यह त्रिदोषनाशक है। इस की तासीर ठंडी है , पर यह जठराग्नि को मंद नहीं करती। यह गले की खराश, मासिक की अनियमितता, भूख की कमी, पाचन की कमजोरी, कफ, कब्ज़, खून की गंदगी, आदि को दूर करती है।

सारस्वतारिष्ट के फायदे Benefits of Saraswatarishta

  1. यह मस्तिष्क के लिए टॉनिक है।
  2. यह याददाश्त को बढ़ाती है।
  3. यह नेत्रों के लिए हितकर है।
  4. यह मानसिक थकावट को कम करती है।
  5. यह आवाज़ सम्बन्धी दोषों को दूर करती है।
  6. यह मासिक सम्बन्धी दिक्कतों में लाभ करती है।
  7. यह बेहोशी, दौरे पड़ना, मसों की कमजोरी को दूर करने वाली दवा है।
  8. यह वात, पित्त, और कफ को संतुलित करती है और त्रिदोषनाशक है।
  9. यह प्राकृतिक है और किसी के भी द्वारा इस्तेमाल करने के लिए सुरक्षित है।
  10. इसका प्रयोग शरीर में ठंडक देता है।
  11. यह यौन कमजोरी को दूर करती है।
  12. यह वीर्य दोष को दूर करती है।
  13. यह स्वरभंग, हकलेपन और बोलने की दिक्कतों को दूर करती है।

चिकित्सीय उपयोग Uses of Saraswatarishta

मानसिक विकार

  1. अपस्मार (Epilepsy)
  2. मानस रोग (Mental disorders)
  3. मानसिक थकान
  4. अनिद्रा
  5. स्मरण शक्ति की कमी
  6. अवसाद, तनाव
  7. सिर में दर्द
  8. अल्जाइमर
  9. भूलने की बिमारी

स्वर विकारों में

  1. स्वर विकार (Aphasia),
  2. अस्पष्ट भाषा (Incoherent speech)
  3. स्वर को उत्तम करने के लिए
  4. हकलाना, तुतलाना

स्त्रियों के रोग

  1. रजो रोध (Menstrual disorder)
  2. रजोनिवृत्ति के लक्षण (अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, कमजोरी आदि)
  3. मासिक धर्म संबंधी विकार

तथा

  1. रसायन की तरह
  2. शुक्र दोष (Vitiation of semen)
  3. ओज क्षय (Loss of body strength)

सेवनविधि और मात्रा How to take and dosage

  1. यह आयुर्वेद का अरिष्ट है और इसे लेने की मात्रा 12-24 मिलीलीटर है।
  2. बच्चों को यह 5-10ml दी जा सकती है।
  3. दवा को पानी की बराबर मात्रा के साथ-साथ मिलाकर लेना चाहिए।
  4. इसे सुबह नाश्ते के बाद और रात्रि के भोजन करने के बाद लें।
  5. इसे भोजन के 30 मिनट में बाद, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
  6. इस दवा को 3 महीने या उससे अधिक समय तक लें।
  7. या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

Where to buy

आप इस दवा को सभी फार्मेसी दुकानों पर या ऑनलाइन खरीद सकते हैं।

सारस्वतारिष्ट को बहुत सी आयुर्वेदिक फार्मास्यूटिकल कंपनियां बनाती है जैसे की

  1. बैद्यनाथ Sarasatarishtha
  2. श्री धूतपापेश्वर Saraswatarishta
  3. डाबर Saraswatarishta
  4. सांडू ब्रदर्स Saraswatarishta आदि।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side effects/Contraindications

  1. इसे बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
  2. इसे निर्धारित मात्रा में लें।
  3. ज्यादा मात्रा में यह पेट में जलन कर सकती है।
  4. इसे खाली पेट न लें।
  5. इसमें चीनी, सौंफ है इसलिए डायबिटीज में इसका सेवन न करें।
  6. इसमें 5-10% self-generated अल्कोहल है।
  7. दवा के सेवन के दौरान गरिष्ठ भोजन, घी, दूध, चीनी, चावल, आदि का सेवन न करें।
  8. नियमित व्यायाम करें।
  9. दवा को अँधेरे और सूखे स्थान पर रखें।
  10. यह दवा लम्बे समय तक के लेने के लिए है।
  11. गर्भावस्था में इसका सेवन न करें।
  12. स्तनपान के दौरान इसे डॉक्टर के निर्देश पर कम समय के लिए ले सकते हैं। यदि बहुत ज़रूरी न हो तो स्तनपान के दौरान न लें।
  13. यह दवा बच्चों को भी दी जा सकती है। दवा की मात्रा बच्चे की आयु, स्वास्थ्य और वज़न पर निर्भर करती है। पाच साल के बच्चे को आधा टीस्पून दवा पानी में मिला कर दे सकते हैं।
  14. परिणाम सेवन के कुछ सप्ताह बाद मिलते हैं।
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